(1) इस अध्याय के भाग ‘क’ के प्रावधान आवश्यक पठरवतचनों सजित बोडच द्वारा अनुरजक्षत सामान्द्य भजवष्य जनजध और अिंिायी भजवष्य जनजध, िोनों के जलए लाग ूिोते िैं।
(2) प्रत्येक सिस्ट्य के भजवष्य जनजध खाते को प्ररूप 34एम में भजवष्य जनजध लेिर में पृथक रखा िाएगा। उक्त राजि में प्रत्येक अजभिाता की राजि, बोडच द्वारा िमा अंििान की राजि और संबंजधत अिंिान पर प्रोद्भूत ब्याि को ििाचया िाएगा।
(3) भजवष्य जनजध में एक िी दिन में िमा या जवकलन राजि को अजभिाता के भजवष्य जनजध लिेर में दिखाया िाएगा और जिसकी िमा पक्ष वेतन जबल में की गई प्रजवजियों से जमलान करेगा। 30 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4]
(4) खंड (5) के मामल ेको छोड़कर, अर्िचत ब्याि की प्रजवजियां वषच में केवल एक बार की िाएं। िालांदक, ब्याि की माजसक अजभकलन को अनुरजक्षत दकया िाए और उसे प्ररूप 35एम में जनधाचठरत ब्रॉडिीट में उपलब्ध रखा िाए।
(5) माि के िौरान खाते में िमा न्द्यूनतम िषे राजि की माि की समाजप्त पर िीघ्र अजतिीघ्र प्ररूप 34एम में लेिर के स्ट्तम्पभ(14) में प्रजवजि की िाएगी और ब्रॉडिीट में ििच दकया िाएगा या उपरोक्त उप-जनयम (4) के अनुसार ब्याि की गणना के प्रयोिनाथच इस्ट्तेमाल दकया िाएगा।
(6) जवत्त वषच की समाजप्त पर ब्रॉडिीट के स्ट्तम्पभों का योग दकया िाएगा और छावनी बोडच के नामे वषच के िौरान िमा पूरी राजि पर अर्िचत ब्याि की राजि में से नीचे दिए गए उप-जनयम (7) के अनुसार वषच के िौरान प्रजवि की गई राजि को घटा कर ब्रॉडिीट के प्रत्येक स्ट्तम्पभ के योग के समानपुाजतक रूप से व्यजक्तगत खातों में (एक रूपए के भाग को अनिेखा करते हुए) जवतठरत दकया िाएगा।
(7) चालू अवजध के िौरान िब दकसी राजि का भुगतान दकया िाता िै, स्ट्थानांतरण दकया िाता ि ैया बंि दकया िाता ि,ै तो खंजडत अवजध के जलए ब्याि भुगतान की गणना या डाकघर बचत बैंक िमा या बैंकों की बचत बैंक िमा के जलए लाग ूिर, िो भी ऊंची िोगी,से की िाएगी।
(8) इस प्रकार अजभकजलत ब्याि की राजि को भुगतान करने से पिल े संबंजधत खाते में प्ररूप 34एम में लेिर के स्ट्तम्पभ (7) में और ब्रॉडिीट में उपयुक्त स्ट्थान पर प्रजवजि की िाएगी।