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The Cantonment Board Employees Service Rules, 2021

Central Rules · 200693,466 characters of text

The enactment

Long titleRules relating to the Cantonment Board Employees Service
TypeRules
Year2006
JurisdictionCentral
MinistryMinistry of Defence
StatusIn force as published by the source
TextPublished as one document, as the source published it
Subjectsdefence

Full text

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5878 GI/2021 (1) रजिस्ट्री स.ं डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 4

PART II—Section 4 प्राजधकार स ेप्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY रक्षा मतं्रालय अजधसचूना नई दिल्ली, 13 अक् तूबर, 2021 का.जन.आ. 16(अ).—छावनी अजधजनयम, 2006 (2006 का 41) की धारा 346 द्वारा प्रित्त िजियों का प्रयोग करते हुए,छावनी जनजध सेवक जनयम, 1937को अजधक्ांत करते हुए जनम्नजलजखत प्रारूप जनयम, जिन्हें केन्र सरकार द्वारा बनाना प्रस्ट्ताजवत दकया गया, को छावनी अजधजनयम, 2006 (2006 का 41) की धारा 346 की अपेक्षानुसार भारत के रािपत्र में प्रकाजित भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय की अजधसूचना संख्या का.जन.आ. 7(अ)तारीख 21 दिसंबर, 2020 द्वारा इनसे प्रभाजवत होने वाले सभी व्यजियों से उि अजधसूचना वाले रािपत्र की प्रजतयां िनता को उपलब्ध होन ेके तीस दिन की अवजध की समाजि के भीतर आपेक्ष एवं सुझाव प्राि करने हते ु भारत के रािपत्र, असाधारण, भाग II खंड IV में प्रकाजित दकया गया था;

और यतः, उि रािपत्र की अजधसूचना की प्रजतयां 21 दिसंबर, 2020 को िनता को उपलब्ध करवा िी गई थी;

और यतः,उि प्रारूप जनयम के संबंध में िनता से प्राि आपेक्षों और सुझावों पर केन्रीय सरकार द्वारा जवचार दकया गया ह;ै अतः अब कें रीय सरकार उि अजधजनयम की धारा 346 द्वारा प्रित्त िजियों का प्रयोग करते हुए जनम्नजलजखत जनयम बनाती ह,ैअथाात:- छावनी बोडा कमाचारी सवेा जनयम, 2021 अध्याय I प्रारंजभक

1. संजक्षि नाम और प्रारंभ - (1) इन जनयमों का संजक्षि नाम छावनी बोडा कमाचारी सेवा जनयम, 2021ह।ै स.ं 13] नई दिल्ली, बृहस्ट् पजतवार, अक् तबूर 14, 2021/ आज वन 22, 1943 No. 13] NEW DELHI, THURSDAY, OCTOBER 14, 2021/ASVINA 22, 1943 सी.जी.-डी.एल.-अ.-18102021-230492 CG-DL-E-18102021-230492 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4]

(2) ये जनयम रािपत्र में उनके प्रकािन की तारीख कोप्रवृत्त होंगे।

2. पररभाषाए-ँ (1) इन जनयमों में, िब तक संिभा में अन्यथा अपेजक्षत न हो, - (क) "अजधजनयम" से छावनी अजधजनयम, 2006अजभप्रेत ह;ै (ख) एक छावनी बोडाकमाचारी के संबंध में "जनयुजि प्राजधकारी” से अजभप्रेत ह ै-

(i) प्राजधकारी उन पिों पर जनयजुियां करन ेके जलए सिि ह,ै िो कमाचारी के पास थोड़े समय के जलए ह;ैया

(ii) जिस प्राजधकारी ने कमाचारी को इस तरह के पि पर जनयुि दकया है,यथाजस्ट्थजत,िो भी प्राजधकारी ह ैउच्च प्राजधकारी ह;ै (ग) "आजित" से वही तात्पया होगा िैसा भजवष्य जनजध अजधजनयम, 1925 में समनुिेजित दकया गया ह;ै (घ) "िमाकताा" से अजभप्रेत ह ैउस कमाचारीसे ह ैजिसकी ओर से इन जनयमों के तहत राजि िमा की िाती ह;ै (ङ) "अनुिासनात्मक प्राजधकारी" से अजभप्रेत ह ैिो जनयम 10 में जवजनर्िाष्ट िाजस्ट्तयों को कमाचारी पर अजधरोजपत करन ेके जलए इन जनयमों के अधीन सक्षम अजधकारी ह।ै (च) "जनम्न िणेी कमाचारी" से अजभप्रेत ह ैिो एक िफ्तरी, चपरासी, जभती, माली, िीपक-प्रकािक, चौकीिार, कुली या सफाईवाला या कें रीय सरकार अथवा उसके द्वारा इस संबंध में प्राजधकृत प्राजधकारी द्वारा इन जनयमों के प्रयोिन के जलए एक जनम्न िेणी कमाचारी के रूप में घोजषतदकसी अन्य िेणी का कमाचारी ह;ै (छ) "गैर-पयावेक्षी पि" से अजभप्रेत ह ैजिसमें दकसी बोडा के अधीन कोई जनयुजि िो पयावेक्षी पि नहीं ह;ै (ि) "वेतन" में छावनी जनजध से भुगतान दकए गए वेतन या व्यजिगत भते्त के माध्यम से सभी जनजित माजसक भते्त िाजमल हैं, लेदकन जवजिष्ट खचों को पूरा करने के जलए दिए िाने वाल ेभते्त िैसे यात्रा, वाहन या मकान दकराया भत्ता, चाह ेवह िैजनक, माजसक या वार्षाक भत्ता हो, इसमें िाजमल नहीं ह;ै (झ) "कमाचारी" से अजभप्रते ह,ै एक व्यजि िो बोडा के अधीन पूरे समय के जलए जनयिु होता है, चाह ेवह िन-रािस्ट्व से पेंिन प्राि कर रहा हो या नहीं;

(ञ) "पयावेक्षी पि" से अजभप्रेत ह ै दकसी बोडा के अधीन कोई जनयुजि जिसे कें रीय सरकार द्वारा पयावेक्षी पि के रूप में घोजषत दकया गया ह ैया इस तरह के प्राजधकारी को इस संबंध में इसके द्वारा प्राजधकृत दकया िा सकता है;

(ट) "सफाईवाला" से अजभप्रेत ह ैकोई भी व्यजि िो वास्ट्तव में गंिगी या कूड़ा-करकट एकजत्रत या हटाने या जनपटाने, या सड़कों, नालों या बूचड़खानों को साफ करने, या गन्िगी या उबटन को हटान ेके जलए उपयोग दकए िान ेवाल ेवाहन चलान े में, गंिगी या कूड़ा-करकट इकट्ठा करने या हटाने में जनयोजित ह;ै और (ठ) छावनी बोडा कमाचारी के संबंध में "अस्ट्थायी कमाचारी" जनयम 9 के तहत स्ट्वीकृत एक अस्ट्थायी पि के अवलंबी के अलावा, बोडा के अधीन एक स्ट्थायी या स्ट्थायी पि के अस्ट्थायी आधार पर िाजमल ह।ै

(2) इन जनयमों में प्रयुि उन िब्िों और अजभव्यजियों, जिन्हें यहांपररभाजषत नहीं दकया गया ह,ै का अथा वही होगा िो अजधजनयम में दिया गया ह।ै भाग I अध्याय 2 साधारण

3. (1) उि अध्यायों में जनजहत जनयमों के तहत मौजलक जनयमों और अनुपूरक जनयमों के अध्याय 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 और 11के अनुसार, िो प्रचलन में ह ैऔर कें रीय जसजवल सेवा (आचरण) जनयम, 1964 में िारी रहता ह,ै िहां तक उनके असंगत नहीं ह,ै सभी कमाचाररयों पर लागू होंगे। उि मौजलक जनयमों में उजल्लजखत स्ट्थानीय सरकार की िजियों का प्रयोग ससे कमाचाररयों के संबंध में कमान के िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ द्वारा दकया िाएगा।

(2) जनयम 3के उप-जनयम (1) में अतंर्वाष्ट दकसी बात के होत ेहुए भी, केन्रीय जसजवल सेवा (छुट्टी) जनयम, 1972, िहां तक हो सकता ह,ै सभी कमाचाररयोंपर लाग ूहोगा।

4. प्रत्येक बोडा अजधजनयम के उपबंधोंऔर उसके अधीन बनाए गए जनयमों के अधीन अपने कताव्यों के उजचत और कुिल जनष्पािन के जलए आवयक कमाचाररयों कोअवधाररत करेगा और ससे कमाचाररयों को छावनी जनजध से भुगतान दकए िाने वाला वेतन जनयत करेगा। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 3

5. (1) बोडा के कमाचाररयों की संख्या, पिनाम और ग्रडे और उन्हें िये वेतन, फीस और भत्तों में बिलाव संबंधी प्रस्ट्तावों पर बोडा की मंिूरी प्राि की िाएगी। इस तरह के प्रस्ट्तावों को बिट तैयार करन ेके समय ध्यान में रखा िाएगा, ककंतु मुख्य कायापालक अजधकारी के अनरुोध पर दकसी भी समय इन पर जवचार दकया िा सकता ह:ै परंत ुपांच साल से अजधक बोडा की स्ट्थायी सेवा में सेवारत दकसी कमाचारी को प्रजतकूल रूप से प्रभाजवत करन ेवाल े दकसी प्रस्ट्ताव पर इस प्रयोिन के जलए बलुाई गई जविेष बैठक के अलावा जवचार नहीं दकया िाएगा:

परंत ुयह भी दक छावनी बोडा लेखा जनयम, 2020 के जनयम87, जनयम 88 और जनयम 89 के अधीन कमान के िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ की पूवा स्ट्वीकृजत अजभप्राि की िाएगी।

(2) (क) यदि बोडा के अलावा दकसी स्ट्थानीय प्राजधकरण के क्षेत्राजधकार में सजममजलत दकसी क्षेत्र को छावनी में िाजमल दकए िाने के पररणामस्ट्वरूप, ससे अन्य स्ट्थानीय प्राजधकरण की सेवा में सेवारत व्यजियों को बोडा की सेवा में स्ट्थानांतररत दकया िाता ह,ै तो बोडा केन्रीय सरकार की पूवा स्ट्वीकृजत से,और इन जनयमों में जवजहत दकसी बात के होते हुए भी,इन जनयमों के सभी अथवा दकसी भी प्रयोिन के जलए ससे सभी या दकसी भीव्यजि को,उनके बोडा की सेवा में स्ट्थानांतरण से पूवा अन्य स्ट्थानीय प्राजधकरण में की गई सेवा अवजध के जलए बोडा का मानि कमाचारी मानते हुए उनके बोडा में सेवा स्ट्थानांतरण से ठीक पूवा अन्य स्ट्थानीय प्राजधकरण में उनकी सेवा अवजध को उनकी क्जमक सेवा अवजध में िोड़ दिया िाएगा। (ख) उप-जनयम (क) के अंतगात अपनी मंिूरी ितेे हुए कें रीय सरकार ससी ितों को, िैसा दक वह उजचत समझे, लाग ूकरना अपेजक्षत कर सकेगी।

(3) (क) बोडा के अधीन सेवा हते ुप्रथम बार सभी जनयुजियां रोिगार कायाालय के माध्यम से या ससे अन्य रीजत से की िाएंगी िैसा दक कें रीय सरकार जनिेजित करे। (ख) इक्कीस वषा से कम और तीस वषा से अजधक आय ुवाल ेदकसी भी व्यजि को जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी पि के अलावा दकसी भी अन्य पि पर जनयिु नहीं दकया िाएगा और तेईस वषा से कम आयु और पैंतीस वषा से अजधक आयु का कोई भी व्यजि बोडा के अधीन जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी के पि पर जनयुि नहीं दकया िाएगा:

परंत ुिनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ, कमान, यदि वह ससा करना आवयक समझता ह ैऔर जिसे कें रीय सरकार द्वारा िारी जनििे के अधीन साधारणतः अथवा जविेष रूप से जनर्िाष्ट प्रवगों या जवजिष्ट छावजनयों या व्यजि- जविेष मामलों के संिभा में, आमतौर पर या जविेष रूप से, पवूोि आय-ुसीमा को उस सीमा, िैसा दक वह आवयक समझे, तक जिजथल कर सकेगा। (ग) कोई भी व्यजि जिसे अजधकृत जचदकत्सा पररचारक द्वारा जचदकत्सकीय रूप से दफट घोजषत नहीं दकया गया ह ै और जिसके पास न्यूनतम अहाताए ंऔर अनुभव नहीं ह,ै िैसा दक िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ, कमान द्वारा प्रत्येक पि के जलए जवजनर्िाष्ट दकया गया ह,ै बोडा के तहत दकसी भी सेवा में जनयुि नहीं दकया िाएगा:

परंतु उपयुाि न्यूनतम अहाता मौिूि कमाचारी की उस पि पर उसकी लगातार सेवा अथवा जनयुजि अथवा प्रोन्नजत पर जनयुजि को हाजन न पहुचंाए। स्ट्पष्टीकरण- इस जनयम के प्रयोिन के जलए प्राजधकृत जचदकत्सा पररचारक से अजभप्रेत ह ैिो बोडा द्वारा जनयुि जचदकत्सा अजधकारी से ह ैिो बोडा के कमाचारी के जलए जनयुि ह।ै (घ) बोडा के अधीन वाले सभी पिों पर जनयुजियां या तो सीधी भती से या प्रोन्नजत या प्रजतजनयुजि/आमेलन से होंगी। (ङ) कें रीय सरकार बोडा के अधीन सभी पिों को सीधी भती के पि या प्रोन्नजत के पि या प्रजतजनयुजि के पि में वगीकृत करेगी और उस पि या पिों को जवजनर्िाष्ट करेगी जिसमें से प्रत्येक ससे प्रोन्नजत पि और प्रजतजनयुजि पि पर जनयुजि की िाएगी। (च) ससे जनिेिों के अधीन होंग,े यदि कोई हो, िैसा दक कें रीय सरकार द्वारा िारी दकया गया ह,ै िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ सभी प्रोन्नजत पिों को चयन और अचयन पिों में वगीकृत करेगा। (छ) मुख्य कायापालक अजधकारी जनम्न िेणी के कमाचाररयों को छोड़कर सभी कमाचाररयों की वार्षाक गोपनीय ररपोटा को कें रीय सरकार द्वारा जवजनर्िाष्ट ससे प्रारूप और रीजत से अनुरजक्षत करेगा। (ि) प्रोन्नजत पिों पर जनयुजि बोडा द्वारा इस प्रयोिन के जलए तैयार की गई ज्येष्ठता सूजचयों,अनदफट को छोड़कर, के आधार पर जनयुजि प्राजधकारी द्वारा की िाएगी। परंत ुचयन पिों पर प्रोन्नजत वररष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर होगी। 4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4]

6. छावनी बोडा के अधीन पहली सभी जनयुजियां िो वषा की पररवीक्षा अवजध आधार पर होंगी:

परंत ु दकसी भी व्यजि को उसकी प्रथम जनयुजि में तब तक स्ट्थायी नहीं दकया िाएगा िब तक दक जनयुजि प्राजधकारी का समाधान नहीं हो िाता दक वह इस जनयुजि के जलए उपयिु ह:ै परंतु यह और दक जनयुजि प्राजधकारी जलजखत में अजभलेखबद्ध कारणों से पररवीक्षा अवजध को एक वषा से अजधक नहीं बढा सकेगा।

7. (1) पयावेक्षी पि पर सभी जनयजुियां बोडा द्वारा और गैर-पयावेक्षी पिों पर मुख्य कायापालक अजधकारी द्वारा की िाएंगी।

(2) मखु्य कायापालक अजधकारी - (क) सभी कमाचाररयों की कताव्यों एवं तत्संबंधी पयावेक्षण और उनके कायों तथा कायावाजहयों पर जनयंत्रण करेगा;

(ख) सभी कमाचाररयों को वेतन संजवतरण करेगा;

(ग) इन जनयमों के उपबंधों के अधीन, सेवा की ितों से संबंजधत सभी मामलों जविेष रूप से सभी कमाचाररयों की सेवा से संबंजधत वेतन, जविेषाजधकार और भते्त वेतन, और भत्तों का जनपटान करेगा; और (घ) उप-जनयम (1) और इस जनजमत्त दकसी अन्य जनयम के उपबंधों के अधीनअनुपजस्ट्थजत की छुट्टी के जलए आवेिन को िेखेगा, छुट्टी पर गए कमाचाररयों के स्ट्थान पर स्ट्थानापन्न जनयुजियां करेगा:

परंत ुदकसी भी छावनी अस्ट्पताल या औषधालय में कायारत कमाचाररयों के संबंध में, जचदकत्सा अजधकारी प्रभारी खंड (क) और (ख) में जनर्िाष्ट काया करेगा।

(3) इस जनयम के अधीन ससा कोई भी व्यजि जनयुि नहीं दकया िाएगा, जिसे कें रीय सरकार या दकसी राज्य सरकार या दकसी बोडा या स्ट्थानीय प्राजधकरण, जनगम या अन्य लोक उपक्म के तहत रोिगार से बखाास्ट्त कर दिया गया हो, या दकसी िांजडक न्यायालय द्वारा कारावास की सिा सुनाई गई हो या िडं प्रदक्या संजहता, 1973 (1974 के 2) के अधीन िांजत भंग करने और िवु्यावहार हते ु सुरक्षाया भारतीय िडं संजहता, 1860 (1860 का 45) के अध्याय 9-क के अधीन दकसी भी अपराध के जलए एक िांजडक न्यायालय द्वारा सिा सुनाई गई हो या सक्षम अिालत द्वारा दिवाजलया घोजषत कर दिया गया हो।

8. (1) बोडा या कमाचारी को जनयिु करने वाला अजधकारी ससे कमाचारीको जनमुाि कर सकता ह-ै (क) पररवीक्षा के िौरान या उसकी समाजि पर;

(ख) बोडा द्वारा अनुमोदित जचदकत्सा अजधकारी द्वारा यह घोजषत करन ेपर दक वह आगे की सेवा के जलए जचदकत्सक िषृ्टया ठीक नहीं ह;ै (ग) पचपन वषा की आयु प्राि करने के पिात दकसी भी समय या तीस वषा की अहाकारी सेवा पूरी करन े के पिात; यह कें रीय सरकार द्वारा समय-समय िारी जनिेिों के अधीन दकया िाएगा;

(घ) ससे कमाचारी और बोडा के बीच जलजखत अनुबंध की ितों के अनुसार, यदि कोई हो; या (ड़) स्ट्थापना के कमी या संिोधन के अनुसरण में और अन्यथा नहीं।

(2) एक कमाचारी,जिसने साठ वषा आय ुप्राि नहीं की ह,ैजिसको उप-जनयम (1) के खंड (क) के अधीन जनमुाि दकया िाता ह ैऔर वह माजसक वेतन प्राि करता ह;ै को इसके जवपरीतएक जलजखत अनुबंध के अभाव में, उन्मोचन से पहल ेएक महीने के नोरटस या एक महीन ेके वेतन के बिल ेसेवा-मुि दकया िा सकता ह;ै और उि उप-जनयम के खंड (ग) या खंड (ड़) के अनसुरण में सेवा-मुि कमाचारी, जिसकी आय ुपचपन वषा नहीं हुई ह,ै जलजखत अनुबंध की अनुपजस्ट्थजत में उन्मोचनस ेपहले उसे तीन महीन ेका नोरटस या उसके एवि में तीन महीने का वेतन दिया िाएगा:

परंत ुदकसी कमाचारी को उि उप-जनयम के खंड (क) के अधीन उन्मोचन दकया िाए, तो उसे उस आधार से अवगत कराया िाएगा, जिस पर उसे उन्मोचन करने का प्रस्ट्ताव ह ैऔर इसके जवरूद्ध उसे कारण बताओ नोरटस का अवसर दिया िाएगा।

(3) (क) एक जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी से जभन्न कोई कमाचारी जिसने साठ वषा की आयु प्राि नहीं की ह ैअथवा जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी के रूप में कोई कमाचारी जिसन ेपैंसठ वषा की आय ुप्राि नहीं की ह ैऔर जिसे उप-जनयम (1)के खंड (ख) के अनुसरण में सेवा-मुि दकया गया ह,ै यदि वह जनयम [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 5 33 के तहत कोईउपिान प्राि करने हतेु पात्र नहीं ह,ै तो उसे अहाकारी सेवा के प्रत्येक पणूा वषा या वषा में छह माह से अजधक की अवजध के भाग केजलए परंह दिन के औसत वेतन की िर से गणना दकए गए प्रजतपूरक उपिान का भुगतान दकया िाएगा,बिते ससी िेयकीउपिानराजि उस वेतन की कुल राजि से अजधक नहीं होगी जिसे कमाचारीअपनेउन्मोचनकी तारीख से परवती अवजध केिौरान प्राि करता, यदि वह साठ वषा अथवा पैंसठ वषा , यथाजस्ट्थजत, की आय ुप्राि करने तक सेवा में बना रहता। (ख) एक जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी से जभन्न कोई कमाचारी जिसने साठ वषा की आयु प्राि नहीं की ह ैअथवा जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी के रूप में कोई कमाचारी जिसन ेपैंसठ वषा की आय ुप्राि नहीं की ह,ै और जिसे उप-जनयम (1)के खंड (ड.) के अनुसरण में सेवा-मुि दकया गया ह,ै यदि वह जनयम 33 के तहत कोईउपिान प्राि करने हतेु पात्र नहीं ह,ै तो उसे अहाकारी सेवा के प्रत्येक पणूा वषा या वषा में छह माह से अजधक की अवजध के भाग केजलए परंह दिन के औसत वेतन की िर से गणना दकए गए प्रजतपूरक उपिान का भुगतान दकया िाएगाः परंतु बोडा के अधीन कमाचारी को लगभग समान वेतन की एक वैकजल्पक जनयुजि की पेिकि की गई हो और उसने इनकार कर दिया हो, िो बोडा के अनसुार एक उपयुि प्रकृजत का अवसर था, तो उसे दकसी उपिान का भुगतान नहीं दकया िाएगा।

(4) मुख्य कायापालक अजधकारी, अपन ेजववेकानुसार बोडा के दकसी भी कमाचारी को, जिसने पचपन वषा की आय ु प्राि नहीं की ह,ै जिसे उप-जनयम (1) के खंड (ग) के अनुसरण में सेवा-मुि दकया िा रहा ह,ै मौजलक जनयमों के अधीन इस जवषय में दकसी भी समय उनके जलए स्ट्वीकाया अजधकतम छुट्टी की परूी राजि की छूट ि ेसकता ह ैऔर ससीछुट्टी उप-जनयम (2) में जवजनर्िाष्ट तीन महीन ेके नोरटस के प्रारंभ से िरुू होगी।

(5) पररवीक्षाधीन कमाचारी ससा करने के जलजखत अनुबंध की अनपुजस्ट्थजत और युजियुि कारण बताए बगरै अपने रोिगार से त्यागपत्र िेन ेके जलए अजधकृत नहीं ह,ै या बोडा को कम से कम एक महीन ेका नोरटस दिए बगैर अपनी ड्यूटी से अनुपजस्ट्थत नहीं हो सकता और कोई अन्य कमाचारी उजचत कारण बताए बगैर अपन ेरोिगार से त्याग-पत्र नहीं िेगा, या बोडा को तीन महीने का नोरटस दिए बगैर अपनी ड्यूटी से अनुपजस्ट्थत होगा; और यदि पूवोि रूप में नोरटस नहीं ितेा ह,ै तो कमाचारी का एक महीन ेया तीन महीने के वेतन,यथाजस्ट्थजत, से ज्यािा नहीं की राजि िब्त कर ली िाएगी, िैसा जनिेि बोडा द्वारा सामान्य या जविेष आििे के अंतगात दिया गया हो। बोडा द्वारा कमाचारी को िेय दकसी अन्य राजि अथवा कमाचारी की भजवष्य जनजध खाते की अंििायी राजि से बोडाससे वेतन की वसूली कर सकता ह:ै परंत ुकमाचारी पचपन वषा की आयु प्राि करन ेया तीस वषा की अहाक सेवा परूी करन ेके पिात दकसी भी समय, बोडा को तीन महीने के नोरटस िेने पर बोडा की सेवा छोड़ िे।

9. (1) कमान का आदफसरकमांडडंग-इन-चीफ, यदि उनकी राय में, बोडा द्वारा जनयोजित या प्रस्ट्ताजवत कमाचाररयों की संख्या या बोडा द्वारा दकसी भी ससे कमाचारी को दिया िाने वाला वेतन ज्यािा समझता है, जिसे बोडा द्वारा कम करन ेकी आवयकता ह ैतो ससे कमाचाररयों की संख्या, अथवा ससे वेतन की जितनी भी राजि, यथाजस्ट्थजतउतन ेसमय के भीतर जितना वह सही समझता ह ैजनधााररत कर सकता ह ैऔर बोडा जनयम 8 के उप- जनयम (1) के उपबंधों और कमाचारी और बोडा के बीच दकसी भी जवजधपूणा संजविा के अधीन उस आवयकता का अनुपालन करेगा:

परंत ुबोडा को जलजखत में कारण बताने के जलए उजचत अवसर दिया िाएगा दक ससी कमी क्यों न की िाए।

(2) (क) जनयुजि प्राजधकारी एक कमाचारी को जनलंबनाधीन रख सकता है-

(i) िहां उसके जखलाफ अनुिासनात्मक कायावाही पर जवचार दकया िा रहा ह ैया लंजबत है; या

(ii) िहां दकसी आपराजधक अपराध के संबंध में उसके जवरूद्ध मामला िांचाधीन ह ै उसकी पड़ताल या जवचारण चल रहा ह;ै (ख) एक कमाचारी को जनयुजि प्राजधकारी के आििे द्वारा जनलबंनाधीन रखा समझा िाएगा-

(i) उसकी रोक की तारीख से, यदि वह अड़तालीस घंटे से अजधक की अवजध के जलए रोक में ह,ै चाह ेिांजडक आरोप के जलए या अन्य दकसी मामल ेमें;

(ii) उसके िोषी होन ेकी तारीख से यदि अपराध के जलए िोषी ठहराए िान ेकी जस्ट्थजत में उसे अड़तालीस घंटे से अजधक कारावास की सिा सुनाई िाती ह ै और इस तरह के िोष के पररणामस्ट्वरूप उसे बखाास्ट्त या जनष्काजसत या अजनवाया सेवाजनवृत नहीं दकया िाता ह।ै 6 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] (ग) िहां जनलंबनाधीन कमाचारी की सेवा से बखाास्ट्तगी, जनष्कासनया अजनवाया सेवाजनवृजत्त िाजस्ट्त को अपील में या इस जनयमों के अतंगात स्ट्थजगत रखा गया हो तथा मामले को िांच या कारावाई के जलए दकसी जनिेि के साथ आस्ट्थजगत दकया गया हो, तो उनके जनलंबन के आिेि सेवा से बखाास्ट्तगी, जनष्कासन या अजनवाया सेवाजनवृजत्त के मूल आिेि की तारीख से आगामी आििेों तक िारी रहेंगे। (घ) िहां एक कमाचारी पर सेवा से बखाास्ट्तगी, जनष्कासन या अजनवाया सेवाजनवृजत्त का िाजस्ट्त अलग से जनधााररत दकया िाता ह ैया पररजस्ट्थजतयों के जवचार पर न्यायालय और अनुिासनात्मक प्राजधकारी के जनणाय के द्वारा या उसके पररणामस्ट्वरूप अमान्य घोजषत दकया िाता ह,ै उस मामल ेमें, उनके जखलाफ उन आरोपों पर एक और पूछताछ करन े का जनणाय जलया गया, जिन पर बखाास्ट्तगी, जनष्कासन या अजनवाया सेवाजनवृजत्त का िुमााना मूल रूप से लगाया गया था, कमाचारी को प्राजधकारी के मलू आिेि की तारीख से बखाास्ट्त, जनष्काजसत या अजनवाया सेवाजनवृत्त के अधीन जनलंजबत माना िाएगा और अगल े आिेि तक जनलंबनाधीन रहगेा:

परंतु इस तरह की कोई और िांच का आिेि तब तक नहीं दिया िाएगा िब तक दक ससी जस्ट्थजत न आ िाए, जिसमें न्यायालय मामल ेकी प्रकृजत िाने जबना तकनीकी आधार पर वास्ट्तजवक आिेि पाररत कर चुकी हो। (ङ) (i) इस जनयम के तहत तैयार या मान जलया गया जनलंबन आििे तब तक प्रवृत्त रहगेा िब तक दक सक्षम प्राजधकारी इसे उपांतररत या प्रजतसंहरण नहीं करता।

(ii) िहां एक कमाचारी को जनलंजबत कर दिया गया हो या उसे जनलंजबत मान जलयागया हो (चाह ेवह दकसी भी अनुिासनात्मक कायावाही के संबंध में हो या अन्यथा) और उस जनलंबन के िौरान उसके जखलाफ कोई अन्य अनुिासनात्मक कायावाही िुरू की गई हो, तो उसे जनलंबनाधीन करने में सक्षम प्राजधकारी जलजखत में ििा कारणों के हवाले से जनििे िे सकता ह ै दक कमाचारी सभी या दकसी भी कायावाही की समाजि तक जनलबंनाधीन रहगेा।

(iii) इस जनयम के तहत िारी दकए या िारी दकया हुआ मान जलए गए जनलंबन आिेि को दकसी भी समय प्राजधकारी द्वारा संिोजधत या रद्द दकया िा सकता ह ैजिसने इसको तैयार दकया ह ैया तैयार दकया मान जलया या आििे दिया ह ैया कोई भी प्राजधकारी जिसका वह अधीनस्ट्थ प्राजधकारी ह।ै

10. (1) मुख्य कायापालक अजधकारी द्वारा दकसी कमाचारी पर जनम्नजलजखत िाजस्ट्तयों को उजचत और पयााि कारणों से जलजखत रूप में अजभलेजखत करते हुए अजधरोजपत दकये िा सकेंगे: - (क) गौण िाजस्ट्तयां,-

(i) भत्साना;

(ii) िुमााना

(2) जनयुि प्राजधकारी द्वारा दकसी कमाचारी पर जनम्नजलजखत िाजस्ट्त उजचत और पयााि कारणों से, िैसा दक नीचे जलखा ह,ै लगाए िा सकत ेहैं: - (क) गौण िंड,-

(i) उसकी प्रोन्नजत रोककर;

(ii) उपेक्षा या आिेि के भंग के कारण बोडा की ओर उसके द्वारा दकएगए दकसी भी आर्थाक नुकसान की पूर्ता हते ुउसके वेतन से पूरा या कुछ जहस्ट्से की वसूली; और

(iii) वेतन वृजद्ध पर रोक। (ख) मखु्य िाजस्ट्तयां,-

(i) एक जवजनर्िाष्ट अवजध तक जनयत अवजध के िौरान जनम्न स्ट्तर के वेतनमान पर राभव, िैसे दक कमाचारी ससी कटौती की अवजध के िौरान वेतन वृजद्ध अर्िात करता ह ैया नहीं और ससी अवजध की समाजि पर, कमी या उसके वेतन में भजवष्य की वृजद्ध को स्ट्थजगत करने का प्रभाव होगा या नहीं होगा;

(ii) न्यून समयमान या वेतन, ग्रडे, पि या सेवा में कमी िो कमाचारी के जलए समय-सीमा में प्रोन्नजत हते ु एक बार होगी या वेतन, ग्रेड, पि या सेवा जिसमें से उसके साथ या उसके जबना कम दकया गया था ग्रेड या पि या सेवा में बहाली की ितों के बारे में दििाजनििे जिनसे कमाचारी को न्यून स्ट्तर पर लाया गया था और उसकी ज्येष्ठता तथा उस ग्रेड, पि या सेवा के जलए इस तरह की बहाली पर भुगतान;

[भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 7

(iii) अजनवाया सेवाजनवृजत्त;

(iv) सेवा से जनष्कासन िो बोडा के अधीन भजवष्य में रोिगार के जलए जनरहाता नहीं होगी, जिसकी सेवा में वह ससे जनष्कासन या दकसी अन्य बोडा के समय था; और

(v) सेवा से बखाास्ट्तगी िो बोडा के अधीन भजवष्य में रोिगार के जलए जनरहाता होगी, जिसके तहत उन्हें बखाास्ट्तगी या दकसी अन्य बोडा के समय जनयोजित दकया गया था।

(3) जनयुजि प्राजधकारी द्वारा कमाचारी के जवरूद्ध अनिुासनात्मक कायावाही िुरू की िा सकेगी।

11. (1) िहां तक संभव हो,जनयम 10 के उप-जनयम (2) के खंड (ख) के उपखंड (1),(2),(3),(4) और (5) में जवजनर्िाष्ट िाजस्ट्तयां लगान ेका कोई आििे, इस जनयम और जनयम 12 में उजल्लजखत रीजत के अनुसार िांच के पिात के जसवाय, नहीं दिया िाएगा ।

(2) िहां भी अनुिासनात्मक प्राजधकारी कीराय हो दक दकसी कमाचारी के जवरूद्ध िरुाचार या िवु्यावहार के दकसी भी आरोप की सत्यता की िांच के जलए आधार हैं, तो वह स्ट्वयं इस मामले में पछूताछ कर सकता है, या इस जनयम के तहत सत्य के संबंध में पूछताछ करने के जलए यथाजस्ट्थजत कोई प्राजधकारी जनयुि कर सकता ह।ै

(3) िहां इस जनयम और जनयम 12 के तहत दकसी कमाचारीके जखलाफ िांच का प्रस्ट्ताव ह,ै अनुिासनात्मक प्राजधकार आधार तैयार करेगा या उसे तैयार करन ेका कारण होगा- (क) िरुाचार या िवु्यावहार के आरोपों का सार जनजित और अलग-अलग लेख ह;ै (ख) आरोप के प्रत्येक लेख के समथान में िरुाचार या िवु्यावहार के आरोपण का एक कथन,

(i) कमाचारी द्वारा दकए गए दकसी भी स्ट्वीकृजत या स्ट्वीकारोजि सजहत सभी सुसंगत तथ्यों का कथन;

(ii) िस्ट्तावेिों की एक सूची, और साजक्षयों की एक सूची, जिनके द्वारा आरोप मिें अनुरजक्षत की िाएंगी।

(4) अनुिासनात्मक प्राजधकारी आरोप के लेखों की प्रजत कमाचारी को जवतररत करन ेया िेन ेका कारण बताएगा, िरुाचार या िवु्यावहार के आरोपों का बयान और िस्ट्तावेिों और गवाहों की एक सूची जिसके द्वारा प्रत्येक आरोप मि लगातार अनरुजक्षत रखी िाएगी और कमाचारीको ससे जनर्िाष्ट समय के अिंर प्रस्ट्तुत करन ेकी आवयकता होगी, िो उसके बचाव का एक जलजखत बयान होगा और यह बताने के जलए दक क्या वह व्यजिगत रूप से सुनवाई चाहता ह।ै

(5) (क) बचाव पक्ष के जलजखत कथन की प्राजि पर, अनुिासनात्मक प्राजधकारी स्ट्वयं ससे आरोपों के संबंध में िांच कर सकता ह ै जिन्हें मान्य नहीं दकया गया ह ै अथवा यदिवह ससा करना आवयक समझता ह,ै तो उप-जनयम (2) के तहत िांच प्राजधकारी जनयिु कर सकता ह ैऔर िहां कमाचारी द्वारा अपने बचाव के जलजखत कथन में आरोप की सभी मि स्ट्वीकार की गई हों, अनुिासनात्मक प्राजधकारी ससे साक्ष्यों को, िैसा उजचत समझे, मान्य करन े के बाि प्रत्येक आरोप पर अपन े जनष्कषों को अजभजलजखत करेगा और जनयम 12 में अजधकजथत रीजत से काया करेगा;

(ख) यदि कमाचारी द्वारा कोई जलजखत कथन प्रस्ट्ततु नहीं दकया िाता ह,ै तो अनिुासनात्मक प्राजधकारी स्ट्वयं आरोपों की िांच कर सकता ह ैअथवा यदि वह ससा करना आवयक समझता ह,ै तो उप-जनयम (2) के तहत एक िांच प्राजधकारी जनयुि कर सकेगा;

(ग) िहां अनिुासनात्मक प्राजधकारी स्ट्वयं दकसी भी आरोप की िांच करता ह ैया ससे आरोप की िांच करने के जलए एक िांच प्राजधकारी को जनयुि करता ह,ै वह एक आििे द्वारा,अपनी ओर से आरोपों के समथान में मामला प्रस्ट्तुत करने हतेु एक कमाचारी या जवजधक व्यवसाय को "प्रस्ट्तोता अजधकारी" के रूप में जनयुि कर सकेगा।

(6) अनुिासनात्मक प्राजधकारी, िहां वह िांच प्राजधकारी नहीं ह,ै िांच प्राजधकारी को जनम्नजलजखत भेिेगा,- (क) आरोप की मिों की प्रजत और किाचार या िवु्यावहार के आरोपों के कथन की एक प्रजत;

(ख) कमाचारी द्वारा प्रस्ट्तुतबचाव के जलजखत कथन की एक प्रजत, यदि कोई हो;

(ग) साजक्षयों के कथन की एक प्रजत, यदि कोई उप-जनयम (3) में जवजनर्िाष्ट ह;ै (घ) कमाचारी को उप-जनयम (3) में जनर्िाष्ट िस्ट्तावेिों के पररिान के सबूत के साक्ष्य; तथा 8 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] (ङ) प्रस्ट्तोता अजधकारी की जनयजुि आिेि की एक प्रजत।

(7) कमाचारी आरोप की मिों और किाचार या िवु्यावहार के आरोपों के जववरण की प्राजि की तारीख से िस दिन की अवजध या ससे जवस्ट्ताररत समय के भीतर कायादिन, िस दिन से अजधक नहीं,िैसा दक िांच प्राजधकारी अनजु्ञा िे सकता ह,ैके भीतर िांच प्राजधकारी द्वारा जलजखत नोरटस के माध्यम से इस संबंध में जनयत दिन और समय पर िांच प्राजधकारी के समक्ष व्यजिगत रूप मेंउपजस्ट्थत होगा ।

(8) (क) कमाचारी अपनी ओर से मामला पेि करने के जलए दकसी अन्य कमाचारी की सहायता ले सकता ह,ै लेदकन इस प्रयोिन के जलए जवजधक व्यवसाय को जलि नहीं कर सकता िब तक दक अनिुासनात्मक प्राजधकारी द्वारा जनयुि प्रस्ट्तोता अजधकारी जवजधक व्यवसाय या अनुिासनात्मक प्राजधकारी न हो औरससा करना मामले की पररजस्ट्थजतयों में अनजु्ञा हो;

(ख) कमाचारी अपनी ओर से मामले को प्रस्ट्तुत करन ेके जलए एक सेवाजनवृत्त कमाचारी की सहायता भी ल े सकता ह,ै िैसा दक इस संबंध में कें रीय सरकार के साधारण या जविेष आिेि द्वारा जवजनर्िाष्ट दकया गया हो या इस तरह के अन्य प्राजधकारी िो इस संबंध में समय-समय पर इसके जलए प्राजधकृत हो सकते हैं। ।

(9) यदि वह कमाचारी जिसने अपने बचाव के जलजखत कथन में आरोप की दकसी भी मि कोस्ट्वीकारनहीं दकया ह ैया बचाव का कोई जलजखत बयान प्रस्ट्ततु नहीं दकया है, िांच प्राजधकारीके समक्ष प्रकट होता ह,ै तो ससा प्राजधकारी उससे पूछेगा दक क्या वह िोषी ह ैया उसे बचाव में कुछ कहना है और यदि वह आरोप की दकसी भी मि पर िोष स्ट्वीकार करता ह,ै तो िांच प्राजधकारी ससे जनवेिन को अजभजलखत करेगा, अजभलेख पर हस्ट्ताक्षर करेगा और कमाचारी के हस्ट्ताक्षर अजभप्राि करेगा।

(10) िांच प्राजधकारी कमाचारी द्वारा आरोप की मिों पर िोष स्ट्वीकारोजि के संबंध में अपराध िांच का अजभवचन िेगा।

(11) िांच प्राजधकारी, यदि कमाचारी जनर्िाष्ट समय के भीतर उपजस्ट्थत होन ेमें जवफल रहता ह ैया मना कर िेता ह ै या जनवेिन करने से चूक िाता है, तो प्रस्ट्तोता अजधकारी को साक्ष्य प्रस्ट्तुत करन ेके जलए कह सकता ह,ैजिसके द्वारा वह आरोपों की मिों को जसद्ध करने का प्रस्ट्ताव करता ह,ै और एक आिेि ििा करन ेके बाि मामले को बाि की तारीख,िोदक तीस दिन से अजधक नहीं होगी, के जलए स्ट्थजगत कर सकता ह,ै जिससे कमाचारी अपन ेबचाव की तैयारी कर सके,- (क) ससे जवस्ट्ताररत समय के भीतर आिेि के पांच दिन की अवजध में िब तक दक िांच प्राजधकारी अनुज्ञा िे, तक उप-जनयम (3) में जवजनर्िाष्ट सूची में जनर्िाष्ट िस्ट्तावेिों का जनरीक्षण कर सकेगा;

(ख) उसकी ओर से िाँच की िाने वाली साजक्षयों की सूची प्रस्ट्ततु कर सकता ह;ैऔर (ग) आिेि के िस दिन के भीतर या ससे जवस्ट्ताररत समय के भीतर एक नोरटस िें सकता ह ैिो दकसी भी िस्ट्तावेि की खोि या प्रस्ट्तुजत के जलए अनुज्ञा िे सकता ह,ै िो बोडा के अजधकार में ह,ै ककंतु उपजनयम (3) में जनर्िाष्ट सूची में जिसका उल्लेख नहीं दकया गया ह।ै

(12) िांचकताा प्राजधकारी िस्ट्तावेिों की खोि या प्रस्ट्तुजत के जलए सूचना प्राि होन ेपर, उसे या उसकी प्रजतयों को ससे िस्ट्तावेिों की प्रस्ट्तुजत की मांग के साथ,ससी माँग में जवजनर्िाष्ट तारीख तक प्रस्ट्तुत करने हतेु उस प्राजधकारी को अग्रेजषत करेगा जिसकी अजभरक्षा अथवा कब्िे में िस्ट्तावेिों को रखा गया हो:

परंतु िांच प्राजधकारी जलजखत में ििा होने वाल ेकारणों से, इस तरह के िस्ट्तावेिों को मानने से यह कहकर इनकार कर सकेगा दक य ेिस्ट्तावेज़ मामले में सुसंगत नहीं हैं।

(13) उप-जनयम (12) में जवजनर्िाष्ट माँगपत्र प्राि होन ेपर, अपेजक्षत िस्ट्तावेिों की अजभरक्षा अथवा कब्ज़ा रखन े वाले िांच प्राजधकारी के समक्ष अपेजक्षत िस्ट्तावेज़ प्रस्ट्तुत करेगा:

परंतु आवयक िस्ट्तावेिों की कस्ट्टडी या कब्िे वाला प्राजधकारी जलजखत में ििा कारणों से समाधान होता ह ै दक इस तरह के सभी या दकसी भी िस्ट्तावेि का प्रस्ट्तुतीकरण िनता के जहतों के जखलाफ होगा, इसकी सूचना तिनुसार िांच प्राजधकारी िी िाएगी और िांच प्राजधकारी, ससी सूचना प्राि होने पर, कमाचारी को िानकारी संचाररत करेगा और िस्ट्तावेिों के प्रस्ट्तुतीकरण या खोि के जलए उसके द्वारा की गई मांग को वापस लेगा।

(14) िांच के जलए तय की गई तारीख पर, मौजखक और िस्ट्तावेिी साक्ष्य, जिनके द्वारा आरोप की मिों को साजबतदकया िाना प्रस्ट्ताजवत ह,ै अनुिासनात्मक प्राजधकारी की ओर से प्रस्ट्तुत दकया िाएगा। कमाचारी द्वारा स्ट्वय ं अथवा उसकी ओर सेगवाह की िांच की िाएगी। प्रस्ट्तोता अजधकारी दफर से िांच करने का हकिार होगा दकन्त ु [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 9 दकसी भी नए मामले परिांच अजधकारी की अनुमजत आवयक होगी। िांच करन ेवाले प्राजधकारी भी साजक्षयों से इस तरह के प्रश्नकर सकते हैं िैसादक उन्हें उजचत लगता ह।ै

(15) यदि यह अनुिासनात्मक प्राजधकारी की ओर से मामल ेके बंि होने से पहले आवयक प्रतीत होता ह,ै तो िांचकताा प्राजधकारी अपने जववेक से, प्रस्ट्तोता अजधकारी को कमाचारीको िी गई सूची में िाजमल नहीं दकए गए साक्ष्य प्रस्ट्तुत करने की अनुमजत िे सकता ह ैया स्ट्वयं नए साक्ष्य के जलए या दकसी भी गवाह को वापस बुलाने और दफर से िांचने के जलए मांग कर सकता ह ैऔर ससे मामले में कमाचारी के पास अजधकार होगा, अगर वह इसकी मांग करता ह,ै तो प्रस्ट्तुत दकए िाने वाले प्रस्ट्ताजवत साक्ष्य की सूची की एक प्रजत और तीन स्ट्पष्ट दिन के जलए इस तरह के नए साक्ष्य की प्रस्ट्तुजत से पहले स्ट्थगन का दिन और जिस दिन िांच स्ट्थजगत की िाती ह,ै से पहले िांच के स्ट्थगन की मांग कर सकता ह।ै िांच प्राजधकारी कमाचारी को अजभलेख पर ल ेिाने से पहले ससे िस्ट्तावेिों का जनरीक्षण करने का अवसर िेगा।िांच प्राजधकारी कमाचारी को नए साक्ष्य प्रस्ट्ततु करन ेकी अनमुजत भी िे सकता ह ै यदि उनकी यह राय ह ैदक न्याय के जहत में इस तरह के साक्ष्य का प्रस्ट्तुतीकरण आवयक ह।ै

(16) िब अनिुासनात्मक प्राजधकारी के जलए मामला बंि हो िाता ह,ै तो कमाचारी को मौजखक रूप से, या जलजखत रूप में, िैसा दक वह चाह,ेअपना बचाव पक्ष प्रस्ट्तुत करना होगा। यदि बचाव पक्ष मौजखक रूप से प्रस्ट्तुत दकया गया ह,ै तो इसे अजभलेखबद्ध दकया िाएगा और कमाचारी को अजभजलजखत पर हस्ट्ताक्षर करने की आवयकता होगी। दकसी भी मामले में, कथन की प्रजत प्रस्ट्तुत करने वाले अजधकारी,यदि कोई जनयुि दकया गया हो,को िी िाएगी।

(17) तब कमाचारीकी ओर से साक्ष्य पेि दकए िाएंगे। यदि वह पसंि करता ह ैतो कमाचारी स्ट्वय ंअपनी िांच कर सकता ह।ैकमाचारी द्वारा प्रस्ट्तुत गवाहों की िांच की िाएगी और वे अनुिासनात्मक प्राजधकारी के गवाहों के जलए लाग ूउपबंधों के अनुसार िांच प्राजधकारी द्वारा प्रजत-परीक्षा, पुन: परीक्षा और परीक्षा के जलए िायी होंगे। (18 ) कमाचारी द्वारा अपना मामला बंि करने के बाि िांच प्राजधकारी, और यदि कमाचारी ने खुि की िांच नहीं की ह,ै तो सामान्यतः साक्ष्य में उसके जवरुद्ध दिखाई पड़ने वाली पररजस्ट्थजत के बारे में उससे प्रश्न कर सकता ह ै जिससे कमाचारीअपने जवरुद्ध साक्ष्य में ििााई जस्ट्थजत के बारे में बता सके।

(19) िांचकताा प्राजधकारी साक्ष्य की प्रस्ट्तुजत पिात, प्रस्ट्तोता अजधकारी, यदि कोई जनयुि दकया गया हो, और कमाचारी को सुन सकते हैं, या उन्हें उनके संबंजधत मामले की जलजखत पक्षसार िाजखल करने की अनुमजत िे सकत े हैं, यदि वे ससा चाहते हैं।

(20) यदि कमाचारी जिसे आरोप की मिों की एक प्रजत पररिान की गई ह,ै वह इस प्रयोिन के जलए जनर्िाष्ट तारीख पर या उससे पहले बचाव पक्ष के जलजखत बयान को प्रस्ट्ततु नहीं करता ह ैया िांच प्राजधकारी के समक्ष व्यजिगत रूप में प्रकट नहीं होता ह ैया अन्यथा जवफल होता ह ैया इस जनयम के उपबंधों का पालन करन ेसे इंकार करने पर, िांच प्राजधकारी िांच का काया रोक सकता ह।ै िांच प्राजधकारी िांच एकपक्षीय रख सकता ह।ै

(21) (क) िहाँ एक अनुिासनात्मक प्राजधकारी जनयम 10 के उप-जनयम (1) औरउप-जनयम (2) के खंड (क ) के उप-खंड(1),(2)और(3) में जनर्िाष्ट िाजस्ट्तयों में से दकसी को भी लाग ूकरने के जलए सक्षम ह ै(ककंतु जनयम 10 के उप-जनयम (2) के खंड(ख) के उपखंड (1),(2)(3),(4)और (5)में जनर्िाष्ट कोई िाजस्ट्त लगाने के जलए सक्षम नहीं ह)ै, द्वारा दकसी भी आरोप की मि की स्ट्वयं िांच की गई ह ैअथवा कराई गई ह ैऔर उस प्राजधकारी की अपन ेस्ट्वयं के जनष्कषों के संिभा में अथवा उसके द्वारा जनयुि दकसी भी िांच प्राजधकारी के जनष्कषों पर दकसी भी जनणाय के संबंध में यह राय ह ै दक जनयम 10 के उप-जनयम (2) के खंड(ख) के उप-खंड (1),(2)(3),(4)और (5)में जवजनर्िाष्ट िाजस्ट्त कमाचारी पर लगाया िाना चाजहए, वह प्राजधकारी उस अनुिासनात्मक प्राजधकारी को िांच के अजभलेख को अग्रेजषत करेगा िो अंजतम उजल्लजखत िाजस्ट्तयों के जलए सक्षम ह।ै (ख) जिन अनुिासनात्मक प्राजधकाररयोंको अजभलेख अग्रेजषत दकए िाने हैं, वे अजभलेख के साक्ष्य पर कारावाई कर सकते हैं या यदि उनकी यह राय ह ैदक दकसी भी गवाह की आग ेकी िांच न्याय के जहत में आवयक ह,ै तो गवाहों को पुनः आमंजत्रत कर सकते हैं और गवाहों की िांच, जिरह और दफर से िांच कर सकते हैं और कमाचारी पर इन जनयमों के अनुसार उपयिु िुमााना लगाया िा सकता ह।ै

(22) िब भी कोई िांच प्राजधकारी, दकसी िाँच के साक्ष्य के पूरे या दकसी भी भाग को सुनने और ििा करन ेके बाि उसमें अपने अजधकार क्षेत्र का प्रयोग करना बंि कर िेता हऔैर आगे की िांच को दकसी अन्य िांच प्राजधकारी द्वारा अजधक्जमत दकया िाता ह,ै और िो इस तरह के अजधकार क्षेत्र का उपयोग करता ह,ै तो अजधक्ामी िांच प्राजधकारी अपने पूवावती प्राजधकारी द्वारा अजभलेख या आंजिक रूप से अपन ेपूवावती द्वारा ििा और आंजिक रूप से खुि ििा दकए गए साक्ष्य पर कारावाई कर सकत ेहैं:

10 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] परंतु िांच करने वाले प्राजधकारी की राय यह ह ैदक दकसी भी ससे गवाह की आग ेकी िांच, जिसके साक्ष्य पहले ही ििा दकए िा चुके हैं, न्याय के जहतों में आवयक ह,ै तो वह पूवा में प्रस्ट्ततु दकए गए ससे दकसी भी गवाह को पनुः बुला सकता ह,ै उसकी िांच कर सकता ह,ै पुनः िांच कर सकता ह।ै

(23) (क) िाँच के जनष्कषा के बाि एक ररपोटा तैयार की िाएगी और उसमें यह िाजमल होगा -

(i) आरोपों की मि और किाचार या िवु्यावहार के आरोपों का कथन;

(ii) आरोप की प्रत्येक मि के संबंध में साक्ष्य का आंकलन; और

(iii) आरोप की मिों और उसके कारणों के प्रत्येक लेख पर जनष्कषा।

12. (1) अनुिासनात्मक प्राजधकारी, यदि वह स्ट्वयं िांचकताा प्राजधकारी नहीं ह,ै मामल े को जलजखत में दिए गए कारणों सजहत आगे की िांच और ररपोटा के जलए िांच प्राजधकारी को भेि सकता ह ैऔर िांच प्राजधकारी आग ेकी िांच करने के जलए जनयम 11 के उपबंध के अनुसार कायावाही करेगा ।

(2) यदि अनुिासनात्मक प्राजधकारीआरोप के दकसी भी लेख पर िांच प्राजधकारी के जनष्कषों से असहमत ह,ैससी असहमजत के कारणों को ििा करता ह ैऔर यदि अजभलेख पर साक्ष्य पयााि हैं तो ससे आरोप पर अपन ेस्ट्वयं के जनष्कषों को ििा करेगा।

(3) यदि आरोप के सभी या दकसी भी लेख पर उसके जनष्कषों के संबंध में अनुिासनात्मक प्राजधकारी का जवचार ह ै दक यह जनयम 11 में अंतर्वाष्ट दकसी भी बात के होत ेहुए भी,जनयम 10 के उप-जनयम (2) के खंड (क) के उप-खंड

(1)और(2)में जवजनर्िाष्ट िाजस्ट्त में से कोई भी कमाचारी पर लगाया िाना चाजहए, ससा िुमााना लगाने का आििे िेगा।

(4) आरोपों के सभी या दकसी भी लेख के जनष्कषों पर और िांच के िौरान िोड़े गए साक्ष्यों के आधार पर यदि अनुिासनात्मक प्राजधकारी की राय ह ैदक जनयम 10 के उप-जनयम (2) के खंड (ख) के उपखंड (1),(2)(3),(4)और

(5)में जवजनर्िाष्ट िाजस्ट्त में से कोई भी िाजस्ट्त कमाचारी पर लगाया िाना चाजहए, वह इस तरह का िुमााना लगान े का आिेि िेगा और कमाचारी पर लगाए िाने वाल ेिंड पर कमाचारी को अभ्यावेिन करन ेका कोई भी अवसर िनेा आवयक नहीं होगा।

13. (1) जनयम 12 के उप-जनयम (3) के उपबंधों के अधीन दकसी कमाचारी पर जनयम 10 केउप-जनयम (2) के खंड (क) के उप-खंड(1),(2)और(3)में जवजनर्िाष्ट दकसी भी िाजस्ट्त का कोई आििे नहीं दिया िाएगा, जसवाय जनम्नजलजखत के पिात - (क) कमाचारी को उसके जखलाफ कारावाई करने और किाचार अथवा िवु्यावहार के आरोपों, जिसके आरोप उस पर लगाए िाने का प्रस्ट्ताव ह,ै के बारे में जलजखत रूप में सूजचत करना और उसे इस तरह के अभ्यावेिन करने का उजचत अवसर प्रिान करना िैसा वह प्रस्ट्ताव के जखलाफ करना चाहता ह;ै (ख) जनयम 11 के उप-जनयम (3),(4),(5), (6), (7), (8), (9), (10), (11), (12),

(13),(14),(15),(16), (17), (18), (19), (20), (21), (22),और (23) में अजधकजथत रीजत से,प्रत्येक मामले में, जिसमें अनुिासनात्मक प्राजधकारी का जवचार ह ैदक ससी िांच आवयक ह;ै (ग) खंड (क) के तहत कमाचारी द्वारा प्रस्ट्तुत प्रजतजनजधत्व, यदि कोई हो, और िांच का अजभलेख, यदि कोई हो, तो खंड (ख) के तहत जवचार में रखा गया ह:ै और (घ) किाचार या िवु्यावहार के प्रत्येक आरोप पर एक जनष्कषा ििा करना।

(2) उप-जनयम (1)के खंड (ख) में अतंर्वाष्ट दकसी बात के होत ेहुए भी, अगर दकसी मामल ेमें कमाचारी द्वारा उि उप-जनयम के खंड (क) के अधीन कमाचारी द्वारा दकए गए दकसी भी अभ्यावेिन, यदि कोई हो, पर जवचार दकए िाने के पिात वेतन वृजद्ध रोकने का प्रस्ट्ताव दकया िाता ह ैऔर ससी रोक से कमाचारी को िेय पेंिन की राजि प्रजतकूल रूप से प्रभाजवत होने की संभावना ह ैया तीन वषा से अजधक की अवजध के जलए वेतन वृजद्ध रोकन ेया दकसी भी अवजध के जलए संचयी प्रभाव से वेतन वृजद्ध, यदि कोई हो, रोकने का प्रस्ट्ताव दकया िाता ह,ै कमाचारी पर ससा िाजस्ट्त लगान े के आिेि दिए िान े से पूवा जनयम 11 के उप-जनयम (3),(4),(5), (6), (7), (8), (9),

(10), (11), (12), (13), (14),(15),(16), (17), (18), (19), (20), (21), (22),और (23) में जवजनर्िाष्ट रीजत से िांच आयोजित की िानी चाजहए।

(3) ससे मामलों में कायावाही के अजभलेख में जनम्नजलजखत िाजमल होगा- (क) कमाचारी को उसके जखलाफ कारावाई करन ेके प्रस्ट्ताव की सूचना की एक प्रजत;

[भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 11 (ख) उसके द्वारा कृत िरुाचार या िवु्यावहार के आरोपों के कथन की एक प्रजत;

(ग) कमाचारी का प्रजतजनजधत्व; यदि कोई हो ;

(घ) िांच के िौरान प्रस्ट्तुत साक्ष्य;

(ङ) किाचार या गलत व्यवहार के प्रत्येक आरोपण पर जनष्कषा; और (च) मामले पर आििे तथा उसके कारण। 14 अनुिासनात्मक प्राजधकारी द्वारा िारी दकए गए आिेि कमाचारी को सूजचत दकए िाएंगे, उसे अनिुासनात्मक प्राजधकरण द्वारा की गई िांच, यदि कोई हो, की ररपोटा की एक प्रजत भी भेिी िाएगी और आरोप के प्रत्येक साक्ष्य पर या उसके जनष्कषों की प्रजतजलजप, िहां अनुिासनात्मक प्राजधकारी िांच प्राजधकारी नहीं ह,ै दकसी भी िांच प्राजधकारी की ररपोटा की एक प्रजत उसकी असहमजत के संजक्षि कारणों के साथ, यदि कोई हो, िांच प्राजधकारी के जनष्कषों के साथ भेिी िाएगी िब तक दक वे पहले से ही उसे भेिे नहीं गए हैं। 15 िहां िो या िो से अजधक कमाचारी दकसी भी मामल ेसे संबंजधत हैं, ससे सभी कमाचाररयों पर सेवा से बखाास्ट्तगी का िंड लगाने के जलए अनुिासनात्मक प्राजधकारी आिेि िे सकता ह ै दक सभी के जखलाफ अनुिासनात्मक कारावाई एक सावािजनक कायावाही में की िा सकती ह।ै 16 जनयम 11, 12, 13, 14 और 15में सजम मजलत दकसी भी तथ्य के होते हुए भी-

(1) िहां दकसी कमाचारी पर आचरण के आधार पर कोई िाजस्ट्तअजधरोजपत की िाती है जिसके कारण उसे आपराजधक आरोप में िोषी ठहराया गया ह;ै या

(2) िहाँ अनुिासजनक प्राजधकारी जलजखत रूप में उसके द्वारा ििा दकए िाने वाले कारणों से समाधान हो िाता ह ै दक इन जनयमों में प्रिान दकए गए रीजत से िाँच करना उजचत नहीं ह,ै अनुिासजनक प्राजधकारी मामल े की पररजस्ट्थजतयों पर जवचार कर सकते हैं और िो ठीक समझे आििे ि ेसकते हैं।

17. इन जनयमों में अतंर्वाष्ट दकसी बात होते हुए भी जनम्नजलजखत के जवरुद्ध कोई अपील नहीं होगी –

(1) संवािात्मक प्रकृजत का आिेि अथवा रोक आििे अथवा जनलंबन आिेि के अलावा अनुिासनात्मक कायावाही के अंजतम जनपटान की प्रकृजत का कोई भी आििे,:

(2) जनयम 11 के तहत िांच-प्रदक्या िौरान दकसी िांच प्राजधकारी द्वारा पाररत कोई आिेि।

18. (1) कोई भी कमाचारी जिस पर मुख्य कायापालक अजधकारी द्वारा जनयम 10 में जवजनर्िाष्ट िाजस्ट्तयों में से कोई भी िाजस्ट्त लगाई गई ह,ैउस आधार को दिखाने वाल ेिस्ट्तावेि के पररिान के तीस दिन के भीतर बोडा को अपील करन े का हकिार होगा, जिस पर िुमााना लगाए गया था और उसके बाि बोडा के जनणाय की एक प्रजत उसे व्यजिगत रूप से या रजिस्ट्रीकृत डाक से पहुचंाई िाएगी।

(2) ससा कोई भी कमाचारी जिसे पिावनत कर दिया गया, हटा दिया गया, बखाास्ट्त कर दिया गया हो, बोडा द्वारा उसकी अपील को जनरस्ट्त करन े संबंधी जनणाय की प्रजत की सुपुिागी की तारीख से तीस दिन के भीतर कमान के िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ के समक्ष आगामी अपील करन े का हकिार होगा, जिसका जनणाय अंजतम होगा।

19. (1) कोई भी कमाचारी जिस पर बोडा द्वारा जनयम 10 में जवजनर्िाष्ट कोई भी िाजस्ट्त अजधरोजपतकी गई ह,ै जिन आधारों पर िुमााना लगाया गया ह,ै उन आधारों का ििााने वाल ेिस्ट्तावेिों की प्रजतजलजप की जडलीवरी की तारीख के तीस दिन के भीतर, कमान के िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ के समक्ष अपील करने का हकिार होगा।िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ का जनणाय जनयम 20 के उपाबंध के अधीन अंजतम होगा।

(2) कमान के िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ द्वारा पाररत आििे की एक प्रजत उन्हें व्यजिगत रूप से या रजिस्ट्रीकृत डाक से पहुचंाई िाएगी।

20. (1) कोई भी व्यजि जिस पर बोडा द्वारा िाजस्ट्त अजधरोजपत की गई ह ैऔर िो जनयम 19 के तहत िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ के आिेि से व्यजथत ह,ै ससे आििे की सुपुिागी के तीस दिन के भीतर, कें रीय सरकार को एक आवेिन प्रस्ट्तुत करेगािो, समुजचत िांच के पिात, ससे आििे को संिोजधत कर सकती है, यदि उसका समाधान हो िाता ह ैदक बोडा या उि िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ द्वारा तथ्यात्मक अजनयजमतता सजहत अवैध कायावाही की गई ह।ै 12 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4]

(2) ससा प्रत्येक आवेिन िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ के आिेि की प्रजत के साथ होगा जिसके जवरुद्ध आवेिन दकया गया ह ैऔर बोडा तथा िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफ के माध्यम से प्रस्ट्ततु दकया िाएगा। आवेिन को अग्रेजषत करते समय, बोडा पूरी कायावाही को कमाचारी की सेवा पुजस्ट्तका, यदि कोई हो, के साथ संलग्न करेगा। भाग II सेवा पसु्ट्तकें

21. इन जनयमों के प्रत्येक कमाचारी के जलए अनसुचूी-Iमें जनधााररत प्ररूप में एक सेवा पुजस्ट्तका अनुरजक्षत की िाएगी।

22. पहली जनयुजि पर सेवा पसु्ट्तक को प्रत्येक कमाचारी को उसकी लागत पर आपूर्ता की िाएगी। यह मुख्य कायापालक अजधकारी की अजभरक्षा में रखा िाएगा और यदि वह त्यागपत्र िेता ह ैअथवा उसके िोष रजहत सेवा-मुि दकए िान ेकी जस्ट्थजत में,इस संबंध में पूवा-प्रजवजष्ट के पिात इसे कमाचारी को दिया िा सकता ह।ै

23. (1) मुख्य कायापालक अजधकारी द्वारा सेवा पुजस्ट्तका में सेवा, वेतन, छुट्टी, रोिगार से जनलंबन की अवजध या सेवा में अन्य रुकावटों का परूा ब्यौरा ििा दकया िाना चाजहए।

(2) मुख्य कायापालक अजधकारी यह िेखेगा दक सेवा पुजस्ट्तका में सभी प्रजवजष्टयां समयक रूप से की गई हैं और सत्याजपत हैं। दकसी भी प्रकार का क्षरण या उपररलेखन नहीं होगा, सभी सुधार बड़े करीन ेसे और सही तरीके से दकए गए होंगे।

24. यह िेखना प्रत्येक कमाचारी का कताव्य होगा दक उसकी सेवा पुजस्ट्तका को ठीक से रखा िाए, और यह दक पहले पन्न े पर प्रजवजष्टयां हर पांचवषा के बाि सत्याजपत की िाएं।

25. बोडा के जनम्न वगा के कमाचाररयों से जभन्न कमाचाररयों के संबंध में कमान के िनरल आदफसर कमांडडंग इन चीफ़ की मंिूरी अथवा जनम्न वगा के कमाचाररयों के संबंध में बोडा की मिूंरी के जसवाय जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी के अलावा कोई भी कमाचारी साठ वषा की आयु प्राि करन ेके पिातऔर जचदकत्सक या जचदकत्सा अजधकारी के रूप में कायारत कोई भी कमाचारी पैंसठ वषा की आयु प्राि करने के पिात बोडा की सेवा में नहीं रखा िाएगा। दकन्तु जनम्न वगा के कमाचाररयों से जभन्न कमाचारी अथवा जनम्न वगा के कमाचारी को साठ वषा की आयु प्राि करने के पिात और जचदकत्सा अजधकारी के रूप में कायारत दकसी भी कमाचारी के पैंसठ वषा की आय ुप्राि करन े के पिात िनरल आदफसर कमांडडंग-इन-चीफअथवा बोडा द्वारा,यथाजस्ट्थजत, की मंिूरी से एक बार में अजधकतम एक वषा की अवजध के जलए समय-समय पर िारी केन्रीय सरकार के जनिेिों के अधीन प्रजतधाररत दकया िा सकता ह ैदकन्त ु दकसी भी जस्ट्थजत में दकसी कमाचारी को बासठ वषा की आयु प्राि करने के पिात सेवा में नहीं रखा िाएगा :

परंतु सेवा से उनकी सेवाजनवृजत्त महीने के अंजतम दिन के अपराह्न से प्रभावी होगी, जिसमें उनकी सेवाजनवृजत्त की तारीख ह ैऔर ससे कमाचारी के मामल ेमें जिनकी िन्मजतजथ महीन े के पहले दिन में आती है, उनकी सेवाजनवृजत्त जपछल े महीने के अंजतम दिन प्रभावी होगी।

26. (1) मुख्य कायापालक अजधकारी को, प्रत्येक कमाचारी जिसे संपजत्त या धन अथवा धन की प्रजतभूजतयों की प्राजि, अजभरक्षा अथवा जनयंत्रण सौंपा गया हो, से अपने कायाालय के उजचत जनवाहन के जलए सुरक्षा प्रिान करन े हतेु,धन की अजधकतम राजि या प्रजतभूजतयों का मूल्य िो संबंजधत कमाचारी के दकसी भी समय उसके हाथों में होने की संभावना है, के कुल मलू्य के बराबर की िमानत लेनी होगी ।

(2) जनम्नजलजखत िमा के अलावा कोई भी प्रजतभूजत स्ट्वीकार नहीं की िाएगी – (क) नकि;

(ख) सरकारी प्रजतभूजत;

(ग) धन के जलए स्ट्थानीय प्राजधकारी की ओर से िारी दकए गए जडबेंचर या अन्यप्रजतभूजतयां;और (घ) बोडा द्वारा अनुमोदित और कें रीय सरकार द्वारा अनुमोदित एक बीमा कंपनीद्वारा िारी की गई एक जनष्ठा बीमा पॉजलसी।

(3) प्रजतभूजतयों और जडबेंचर को उप-जनयम (2) के खंड (ख)और (ग) में िमा के समय में उनके बािार मूल्य पर स्ट्वीकार दकया िाएगा।

(4) उप-जनयम (2) के खंड (घ) में जनर्िाष्ट नीजत के जलए प्रीजमयम का भुगतान बोडा द्वारा दकया िाएगा और उसके बाि की राजि कमाचारी के वेतन से काट ली िाएगी। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 13

27. प्रत्येक कमाचारी, जिस पर जनयम 26 लाग ूहोता ह,ै अनसुचूी-IIमें िाजमल उपयुि प्ररूप में एक बंधपत्र जनष्पादित करेगा। इस तरह के सुरक्षा बंधपत्र को बोडा से संबंजधत अन्य कीमती सामान के रूप में उसी अजभरक्षा में रखा िाएगा।

28. मुख्य कायापालक अजधकारी प्रत्येक वषा िनवरी के पहल ेदिन या उसके आसपास बोडा को अपन ेकमाचाररयों की ओर से िी गई सुरक्षा की पयाािता के बारे में एक ररपोटा प्रस्ट्ततु करेगा।

29. मुख्य कायापालक अजधकारी बोडा के कमाचाररयों की ओर से या उनकी ओर से सुरक्षा के रूप में िमा सभी धन और प्रजतभूजतयों के साथ सरकारी प्रजतभूजतयों के मैनुअल में जनधााररत तरीके से व्यवहार करेगा।

30. दकसी भी कमाचारी के इन जनयमों द्वारा आवयक सुरक्षा प्रिान करन ेमेंउसे ससा करन ेके जलए कह ेिान ेके बाि एक महीने से अजधक समय के जलए जवफल रहने के पिात वह अपनी जनयुजि से समपहरण हो सकता ह।ै

31. िमाकताा बोडा की सेवा छोड़न ेकी जतजथ से 6 महीन ेकी अवजध के बाि सुरक्षा के रूप में दिए गए िमा का िावा नहीं करेगा।

32. आकजस्ट्मक छुट्टी- कोई भी कमाचारीअजधकारतः आकजस्ट्मक छुट्टी का हकिार नहीं होगा।जिस राज्य में छावनी जस्ट्थत ह ै उस राज्य के समकक्ष सरकारी कमाचारी के संबंध में राज्य सरकार द्वारा अजधकजथत ितों के अधीन मुख्य कायापालक अजधकारी के जववेक पर दकसी कमाचारी को पयााि कारणों से ससी छुट्टी िी सकती ह।ै भाग III पेंिन-सह-उपिान

33. वे सभी कमाचारी जिन्हें 01 िनवरी, 2004 से पहल ेजनयुि दकया गया था और वे इन जनयमों के लाग ूहोन ेकी जतजथ पर बोडा की स्ट्थायी सेवा में हैं और जिन्होंन ेसमय-समय पर संिोजधत छावनी जनजध सेवक जनयम, 1937 के अनुसार पेंिन-सह-उपिानस्ट्कीम का जवकल्प चुना अथवा चुना मान जलया गया, पेंिन-सह-उपिान के जलए पात्र होंगे।

34. पात्र कमाचाररयों के जलए पेंिन, कुटुमब पेंिन और मृत्य-ुसह-सेवाजनवृजत्त उपिान का अनुिान, यथावयक पररवतान सजहत, समय-समय पर संिोजधत, जनम्नजलजखत संिोधनों के अधीन कें रीय जसजवल सेवा (पेंिन) जनयम, 1972 के उपबंधोंद्वारा िाजसत होगा, अथाात्:-

(1) ‘सरकारी कमाचारी’ के दकसी भी संिभा को ‘छावनी बोडा के स्ट्थायी कमाचाररयों’ के संिभा के रूप में माना िाएगा।

(2) संबंजधत खंड (5) के उपबंधों के अधीन 'लेखापरीक्षा अजधकारी' के कायों और िजियों,यथाजस्ट्थजत, का जनवाहन मुख्य कायापालक अजधकारी द्वारा, जवभाग प्रमुख के मामले में ‘प्रधान जनिेिक द्वारा और राष्ट्रपजत के मामले में केन्रीय सरकार द्वारा स्ट्थानीय लेखापरीक्षा अजधकारी के परामिा से दकया िाएगा।

(3) केन्रीय जसजवल सेवा (पेंिन) जनयम, 1972 में िहां भी संघ लोक सेवा आयोग के साथ जवचार-जवमिा का उपबंध ह,ै उसे छोड़ दिया गया माना िाएगा।

(4) पेंिन पत्र तैयार करने की जिममेिारी छावनी बोडा के मुख्य कायापालक अजधकारी पर होगी।

(5) ’कुटुमब पेंिन’ और मृत्यु-सह-सेवाजनवृजत्त उपिान सजहत अनंजतम पेंिन की स्ट्वीकृजत का प्राजधकार, छावनी बोडा के अध्यक्ष में जनजहत होगा।

(6) ’कुटुमब पेंिन’ और मृत्य-ुसह-सेवाजनवृजत्त उपिान सजहत अनंजतम पेंिन की स्ट्वीकृजत का प्राजधकार, प्रधान जनिेिक में जनजहत होगा।

(7) िहां जनयमों काजनवाचन अथवा या जविेष मामलों में िहां उनको लाग ूकरन ेमें कोई संदिग्धता जस्ट्थजत अथवा िहां कहीं कोई संिेह हो,इसे जनणाय के जलए केन्रीय सरकार को भेिा िाएगा।

35. (1) प्रत्येक बोडा जनयम 33 में उजल्लजखत कमाचाररयों के जलए पेंिन कोष स्ट्थाजपत करेगा, जिसमें जनम्नजलजखत िाजमल होंग-े (क) इन जनयमों के प्रवृत्त होने की तारीख को भजवष्य जनजध में बोडा का अंििान और कमाचाररयों के भजवष्य जनजध खाते में िमा बोनस की राजि;

(ख) इसीप्रकार,संबंजधतकमाचाररयों केछावनीजनजधसेवक जनयम,कमाचारी के भाग-IVमें जनजहत अिंिायी भजवष्य जनजध-सह-बोनस से संबंजधत जनयमों द्वारा िाजसत न होन ेका जवकल्प चुन ेिान ेकी जस्ट्थजत में संबजन्धत कमाचाररयों को समय-समय पर अनुक्मी िये राजि;

14 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] (ग) ससी राजि, िो अंििानकताा भजवष्य जनजध के अधीन कमाचाररयों को िेय होती, यदि कोई हो; और (घ) इस भाग में उपबंजधत पेंिन अथवा उपिान की िेनिाररयों के जनवाहन में बोडा को सक्षम बनान ेहते ुकें रीय सरकार द्वारा स्ट्वीकृत ससी अन्य राजि।

(2) पेंिन जनजध मुख्य कायापालक अजधकारी द्वारा संचाजलत की िाएगी और उसे एक राष्ट्रीयकृत बैंक के बचत बैंक खाते में िमा दकया िाएगा:

परंतु आमिनी को अजधकतम करने की िजृष्ट से, इस तरह के रकम के रूप में खाता पेंिन अथवा उपिान पर वतामान िनेिाररयों को परूा करन ेकी आवयकता नहीं हो सकती ह,ै प्रधान जनिेिक की पवूा स्ट्वीकृजत के साथ राष्ट्रीयकृत बैंक या डाकघर या सरकारी प्रजतभूजतयों में उपयुि ितों के साथ िमा करके जनवेि दकया िा सकता ह।ै

(3) पेंिन/उपिान पर सभी व्यय अध्यक्ष, छावनी बोडा के पूवा अनुमोिन के साथ पेंिन जनजध से दकए िाएंगे और अन्य खातों पर कोई व्यय नहीं होगा, िो कें रीय सरकार या ससे अन्य प्राजधकारी के पूवा-अनुमोिन के अजतररि इस काया के जलए प्राजधकृत हों। भाग IV

36. सामान्य भजवष्य जनजध - (1) प्रत्येक बोडा 01 िनवरी,2004 से पूवा बोडा की सेवा में जनयिु और पेंिन- सह-उपिान के अंििायक सभी कमाचाररयों के जहतलाभ हते ुएक सामान्यभजवष्य जनजध की स्ट्थापना और रखरखाव करेगा।

(2) सामान्य भजवष्य जनजध (कें रीय सेवा) जनयम 1960 के उपबंध यथावयक पररवतान सजहत जनम्नजलजखत संिोधनों के अधीन सामान्य भजवष्य जनजध के संचालन को जनयजंत्रत करेंग-े (क) ’लेखाजधकारी’ और अजग्रम अथवा भुगतान अनुमोिन प्राजधकारी की िजियां मुख्य कायापालक अजधकारी द्वारा और ‘सरकार’ की िजियाँ प्रधान जनिेिक द्वारा प्रयोग की िाएंगी। भाग V

37. जचदकत्सीय पररचचाा जनयम - केन्रीय जसजवल सेवा (जचदकत्सीय पररचचाा) जनयम, 1944 यथावयक पररवतान सजहत सभी छावनी जनजध सेवकों पर जनम्नजलजखत उपबंधोंके अध्यधीन लाग ूहोंग,ेअथाात् : -

(1) छावनी बोडा के कमाचाररयों के संबंध में जचदकत्सीय पररचचाा जनयमों के संचालन के साथ जचदकत्सा जबल और अन्य सुसंगत मामलों को पाररत करने के जलए मखु्य कायापालक अजधकारी जनयंत्रक अजधकारी होंग;े

(2) प्रधान जनििेक इन जनयमों के प्रयोिन के जलए जवभाग के प्रमुख होंगे।

38. इन जनयमों में कुछ भी अनुसूजचत िाजत, अनुसूजचत िनिाजत, अन्य जपछड़ा वगा, भूतपूवा सैजनक और अन्य जविेष िेजणयों के व्यजियों के जलए आवयक आरक्षण और अन्य ररयायतों को प्रभाजवत नहीं करेगा, िो कें रीय सरकार द्वारा इस संबंध में समय-समय पर िारी दकए गए आिेिों के अनुसार दिए िाते हैं।

39. नई पेंिन योिना - कें रीय जसजवल सेवा पेंिन जनयम, 1972 छावनी बोडों के ससे कमाचाररयों पर लाग ूनहीं होंग े जिनकी जनयुजि तारीख 01 िनवरी,2004 या उसके पिात में हुई ह।ै

40. छावनी बोडा के वे कमाचारी, िो तारीख 01 िनवरी,2004 या उसके पिात जनयिु दकए गए हैं,कें रीय सरकार द्वारा जवत्त मंत्रालय की अजधसूचना सं. 5/7/2003-ईसीबी और पीआर तारीख 22.12.2003 द्वारा िरुू की गई नई पेंिन योिना, िो भारत के रािपत्र, असाधारण, भाग-I, खंड 1 में तारीख 22 दिसंबर,2003 को प्रकाजित की गई थी और तत्पिात इस योिना के संचालन के जलए िारी दकए गए आिेिों के अधीन आच्छादित दकए िाएंगे। छावनी बोडा के कमाचाररयों के जलए लाग ूनई पेंिन योिना में कें रीयसरकार द्वारा संिोधन दकए िाने पर संिोजधत माना िाएगा।

41. जनरसन और व्यावजृत- (1) छावनी जनजध सेवक जनयम, 1937 जनरजसत दकए िाते हैं।

(2) छावनी जनजध सेवक जनयम, 1937 के जनरसन के होत े हुए भी, िारी दकया गया या की गई कोई भी जनयुजि, अजधसूचना, आिेि, योिना, प्ररूप, सूचना, अनुिेि या जनिेि और पूवोि जनयमों के अधीन प्रिान की गई कोई भी अनुमजत, िहां तक दक ये इन जनयमों से असंगत नहीं हैं, प्रवृत्त रहेंग ेऔर इन्हें इन जनयमों के उपबंधों के अधीन दकया गया, िारी दकया गया, प्रिान दकया गया माना िाएगा, िब तक दक इन्हें उि उपबंधों के अधीन की गई या िारी की गई दकसी जनयुजि, अजधसूचना, आििे, योिना, प्ररूप या सूचना या प्रिान की गई अनुमजत द्वारा अजधक्ांत न दकया गया हो। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 15 फोटोग्राफ अनसुचूी-I (जनयम 15 िेंख)े फाइल सं. ……………………………………….………………….

नाम िी / िीमती _____________________________________________ / कुमारी पिनाम ………………………………………………………… जनयुजि की तारीख ………………………………………………………… अजधवर्षाता की तारीख ………………………………………………………… सेवा पजुस्ट्तका पषृ्ठ:

क्. सं. जवजिजष्टयां पृष्ठ सं.

I. िीवन-वृत्त ……………………………………………………………………………..

II. वेतन अवकाि और पेंिन जनयम और स्ट्वस्ट्थता का जचदकत्सीय प्रमाणपत्र के संबंध में प्रजवजष्टयां III. जवस्ट्तृत सेवा जवजिजष्टयां .............…………………………………………………….....................

IV. तैनाती का ररकॉडा ……………………………………………………………………………..

V. वेतन जबल से सत्यापन ज्ञापन ......................................................…………………………………… VI. छुट्टी खाते का प्ररूप ...................................…………………………………………………...

VII. वाररस और अन्य ब्यौरे ………………………………………………………………………………

1. पूरा नाम (बड़े अक्षरों में) .................................................................................................................

2. स्ट्थायी पता ......................................................................................................................

....................

3. जपता/पजत का नाम (बड़े अक्षरों में) .................................................................................................

4. राष्ट्रीयता .....…………………………………..…… (यदि भारतीय नागररक नहीं ह ैतो पात्रता प्रमाण पत्र संख्या और तारीख)

5. (क) क्या अनुसूजचत िाजत/िनिाजत के सिस्ट्य हैं?

अनुक्रमणिका 16 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] (ब्यौरे)……………………………………..……..

(ख) क्या अन्य जपछड़ा वगा के सिस्ट्य हैं?

(ब्यौरे)……………………………………..……..

6. िन्मजतजथ, िहां तक संभव हो ईस्ट्वी वषा या िक वषा में (अंकों और िब्िों, िोनों में) ……………………………………………………………………………………………………… …………………

7. िैजक्षक अहाताएं .....................................……………………………………………………………

8. सही ऊंचाई (िूते इत्यादि के जबना) ....................................................……………………………………….

9. व्यजिगत पहचान जचह्न ............................………………………………………………………..

10. यदि सरकारी कमाचारी अनपढ ह ैतो उसके बाएं हाथ के अंगठेू का जनिान (तारीख सजहत) (कजनष्ठा अंगलुी) (अनाजमका अगंुली) (मध्यमा अंगलुी) (तिानी अगंुली)

11. सरकारी कमाचारी के हस्ट्ताक्षर या बाए ंहाथ के अगंूठे का जनिान (तारीख सजहत)

12. कायाालयाध्यक्ष या अन्य साक्ष्यांकन अजधकारी के हस्ट्ताक्षर और पिनाम (तारीख सजहत) ……………………………………………………………………………………………………… ………………… रटप्पण1:- इस पषृ्ठ की प्रजवजष्टयों को प्रत्येक 5 वषा में नवीकृत या पुनःसत्याजपत दकया िाना चाजहए और पंजि 11 और 12 में तारीख सजहत हस्ट्ताक्षर होने चाजहए। इस जनयम के अधीन अंगुजलजचन्ह प्रत्येक पांच वषा में िोबारा लने ेकी आवयकता नहीं ह।ै वतेन अवकाि और पेंिन जनयम और स्ट्वस्ट्थता का जचदकत्सीय प्रमाणपत्रके सबंधं में प्रजवजष्टया ं [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 17

1.

पिनाम और वेतनमान

2.

क्या पि मूल या स्ट्थानापन्न और स्ट्थायी या अस्ट्थाई ह ै

3.

यदि स्ट्थानापन्न ह,ै तो [1] मूल जनयुजि या [2] क्या अजधजनयम 371 सी.एस. आर. के अधीन पेंिन के जलए सेवा मान्य ह ै

4.

मूल पर वेतन

5.

स्ट्थानापन्न के जलए अजतररि वेतन

6.

‘वेतन’ मि के अधीन अन्य पररलजब्धयां

7.

जनयुजि की तारीख 18 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] अस्ट्थायी सेवा के जलए, अनुच्छेि 370 सी.एस.आर. के संिभा में आवयक प्रमाणपत्र ििा दकया िाना चाजहए [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 19

8.

सरकारी कमाचारी के हस्ट्ताक्षर

9.

स्ट्तंभ 1 से 8 को सत्यापन करने वाले कायाालय अध्यक्ष या अन्य अजधकारी के हस्ट्ताक्षर और पिनाम

10.

जनयुजि समाजि की तारीख

11.

समाजि का कारण यथा प्रोन्नजत, पिच्युजत या स्ट्थानांतरण इत्यादि

12.

कायाालय अध्यक्ष या अन्य साक्ष्यांकन अजधकारी इत्यादि के हस्ट्ताक्षर जनलमबन इत्यादि

13. छुरट्टयाँ 14.

कायाालय अध्यक्ष या अन्य साक्ष्यांकन अजधकारी के हस्ट्ताक्षर

15.

सरकारी कमाचारी के संबंध में ििा दकसी िंड या पुरस्ट्कार का संिभा ली गई छुरट्टयों की प्रकृजत और अवजध औसतन 4 मास तक की छुट्टी अवजध का आबंटन, जिसके जलए छुट्टी वेतन अन्य सरकार के नामे डाला िाएगा अवजध सरकार, जिसके नामे डाला िाएगा 20 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] (तनैाती का ररकॉडा) जिला और पि तारीख जिला आिेि की संख्या और तारीख रटप्पजणयाँ से तक [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 21 िी …………………………………………………………..................................... का जवत्त जवभाग, भारत सरकार के पत्र सं. 289-ए तारीख 18 जसतंबर, 1929 के अधीन अपेजक्षत वेतन जबल इत्यादि से सत्यापन का ज्ञापन। सत्यापन की तारीख सेवा सत्यापन की अवजध स्रोत जिसस ेसत्याजपत की गई ह ै अद्याक्षर रटप्पजणया ँ से तक अधीक्षक रािपजत्रत अजधकारी 22 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] एम.एस.ओ.(टी)-11ए प्ररूप 2 (जनयम 15 िेखें) प्ररूप 2 (जनयम 15 िेखें) व्यय जवभाग,जवत्त मंत्रालय,भारत सरकार, नई दिल्ली के कायाालय ज्ञापन सं. 16 (6)-ई IV(क)/74, तारीख 26 नवंबर,1975 की प्रजत। सरकारी कमाचारी का नाम ..............…………………………………………………......................................................

िन्मजतजथ ......………………………………….................................................................................

जनरंतर सेवा की तारीख ............................................…………………………………………………………………..

स्ट्थायीवत्त/स्ट्थायी नौकरी की तारीख ............................................……………………………………………………………….

सेवाजनवृजत्त/त्याग-पत्र/अजधवर्षाता की तारीख .........................………………………………………………………………….

रटप्पजणया:ं

1. िेष अर्िात अवकाि को दिनों में जलखा िाए।

2. िब एक सरकारी कमाचारी को एक जविेष अधा- कैलेंडर वषा के िौरान जनयुि दकया िाता है, तो अर्िात छुट्टी प्रत्येक पूणा दकए गए माह के जलए @ 2½ दिन िमा दकया िाना चाजहए और एक दिन के अपणूाांक को जनकटतम दिन में परूा दकया िाएगा।

3. सरकारी कमाचारी के संबंध में छुट्टी के परुान ेखाते को बंि करना होगा और 31-12-75 को िेष छुट्टी को स्ट्तंभ 11 में वर्णात नए खाते में भेिना होगा। ससा करते समय 31-12-75 को िमा िेष छुट्टी को जनकटतम दिन में पूरा दकया िाएगा।

4. स्ट्तंभ 6 में प्रजवजष्टयों को पूणा दिनों में पणूा दकया िाए। एक दिन के अपणूाांक को जनकटतम दिन में परूा दकया िाएगा।

5. असाधारण छुरट्टयों की अवजध को लाल पेन से जलखा िाए।

6. स्ट्तंभ 12 और 13 में प्रजवजष्टयां केवल अधा-वेतन छुट्टी के समय सेवा की पूणा वषा की िुरुआत और समाजि का संकेत िेती हैं। िहाँ एक सरकारी कमाचारी अधा-वेतन छुट्टी पर रहते हुए सेवा का एक और वषा को परूा करता ह,ै अजतररि िमा को स्ट्तंभ 12 से स्ट्तंभ 16 में उजचत अजतररि प्रजवजष्टयों द्वारा ििााया िाना चाजहए और इसे स्ट्तंभ 32 को भरते समय ध्यान में रखा िाना चाजहए। छुट्टी खाते का प्ररूप [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 23 प्ररूप 2 (जनयम 15 िखेें) अर्िात छुट्टी अधा वेतन छुट्टी अधा कलैंडर वषा में सेवा की जवजिजष्टयाँ अधा कलैंडर वषा में पूरे दकए गए सेवा के मास अद्धा वषा के िुरू में िमा की गई अर्िात छुट्टी जपछले अधा- कलैंडर वषा के िौरान ली गई अन्य प्रकार की छुट्टी के दिनों की संख्या (अ.वे.छु.)

कमयूरटड छुट्टी, अिान- िोध्य छुट्टी और असा.

छुट्टी (कॉ.

16+22+22C+30+33) काट ली िाने वाली अर्िात छुट्टी (कॉ.5 में अवजध का 1/11वां कुल िमा अर्िात छुट्टी (दिनों में) कॉ.

4+11-6 ली गई छुट्टी छुट्टी से वापसी पर िेष अर्िात छुट्टी (कॉ.

7-10) सेवा की अवजध िमा छुट्टी छुट्टी से तक पूरे दकए गए वषों की संख्या अर्िात छुरट्टयों के दिन अर्िात छुरट्टयाँ (कॉ.15+32) अधा वेतन की कमाई की छुट्टी से तक दिनों की सं.

से तक दिनों की संख्या से तक 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 24 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] छुट्टी खात ेका प्ररूप (जनिी मामलों और जचदकत्सीय प्रमाणपत्र सजहत पररवर्तात अिान-िोध्य छुट्टी) छुट्टी से वापसी पर िेष अधा वेतन छुट्टी (स्ट्तंभ 16+31) ली गई अन्य प्रकार की छुट्टी पूरे वेतन पर जचदकत्सीय प्रमाणपत्र प्रस्ट्तुत करन ेपर प्रजतबद्ध छुट्टी जचदकत्सीय प्रमाणपत्रके जबनाया िनजहत में अध्ययन के जलए प्रमाजणत पररवर्तात छुट्टी (पूरे सेवाकाल में 180 दिनों के जलए अधा- वेतन छुट्टी 90 दिन की पररवर्तात छुट्टी में बिली गई) अधा वेतन छुट्टी में संपररवर्तात पररवर्तात छुट्टी (स्ट्तंभ 22 और 22सी का िोबारा) अिान-िोध्य छुट्टी पूरे सेवाकाल 360 दिनों तक सीजमत कुल ली गई अधा वेतन छुट्टी (स्ट्तंभ19+23+30) जचदकत्सीय प्रमाणपत्र पर जचदकत्सीय प्रमाणपत्र िनेे के अन्यथा 180 दिन तक सीजमत कुल अिान- िोध्य छुट्टी (स्ट्तंभ 26+29) से तक दिनों की संख्या से तक दिनों की संख्या से तक दिनों की संख्या से तक दिनों की संख्या 20 21 22 22 क 22 ख 22 ग 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 25 वाररस :- 1…………………………………………………………………………………………………………………… 2…………………………………………………………………………………………………………………… सत्यापन क्मांक सं. तारीख वापस प्राि हस्ट्ताक्षर या बाएं अगूंठे का जनिान हुआ तारीख अहाताएं तारीख अहाताएं ……………… को ................... अगें्रिी ……………… को सभी जनिेि ……………… को .................... बंगाली ……………… को कोटा ड्यूटी ……………… को .................... कैथली ……………… को आरजक्षत ड्यूटी ……………… को ..................... उिूा ……………… को प्रथम कला ……………… को .................... उजड़या ……………… को बी.ए. या बी.एल.

……………… को प्लान आहररत …………… को ................... अंगुजलजचन्ह ……………… ……………… ……………… ……………… को अजभविा परीक्षा ……………… को प्रजिक्षण स्ट्कूल अंजतम परीक्षा ……………… ……………… ……………… कृपया नोट करें: धाररत योग्यताओं के नीचे एक रेखा खींच।े अनसुचूी-II (जनयम 27िेखें) क प्रजतभजूत बधंपत्र का प्ररूप, िहा ंप्रजतभजूत रूप में नकि राजि ली िाती हपै्रजतभजूत इस जवलेख द्वारा यह सभी को ज्ञात हो दक मैं ............................... िो ................. का पुत्र ह ँ ........................................ छावनी बोडा को ................................ रूपए की राजि का उि बोडा को संिाय करने के जलए वचनबद्ध और आबद्ध ह,ँ इसका संिाय पणूातः और सही रूप से दकए िाने के जलए मैं स्ट्वयं को अपने वाररसों, कायापालकों, प्रिासकों और जवजध प्रजतजनजधयों को भी इस जवलखे द्वारा आबद्ध करता हः 26 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] और उपयुाि बाध्यताधारी, जिसको तारीख ......................... को जनयुि दकया गया था और िो अब ................................. जिल ेके .............................. छावनी में .......................... पिधारण दकए हुए है ;

तथा उि ....................... ससे पि को धारण करने के कारण ससी सभी संपजत्त और धन के संव्यवहार का लेखा, िो उसके हाथ या कब्ि ेया उसके जनयंत्रणाधीन आता ह,ै सही और यथाथा रखन ेके जलए बाध्य ह,ै ससा लेखा ससे प्ररूप और रीजत में रखेगा, िो समय-समय पर समयक् रूप से गरठत प्राजधकारी द्वारा जवजहत दकए िाए तथा वह ससी जववरजणयां तथा लेखा और अन्य िस्ट्तावेज़ भी तयैार करेगा और प्रस्ट्ततु करेगा, िो समय-समय पर उससे अपेजक्षत हों ;

और यह दक उि .................................... ने उि पि के कताव्यों तथा दकसी अन्य पि के कताव्यों को, जिस पर उसे दकसी भी समय जनयुि दकया िाए तथा अन्य कताव्य, िो अपेजक्षत हो, का समयक् और सद्भावपूवाक पालन करन ेके जलए तथा उि छावनी के उि बोडा और छावनी जनजध को ससी सभी हाजनयों, क्षजत या नुकसान से सुरजक्षत रखन ेऔर क्षजतपूर्ता करने के प्रयोिन के जलए, िो उि बोडा या जनजध को उि ..................... या दकसी व्यजि या ससे व्यजियों के द्वारा, िो उसके अधीन काया कर रह ेहैं या जिनके जलए वह उत्तरिायी हो, अवचार, उपेक्षा अन्वेक्षा के कारण या अन्यथा हुई हो, उि बोडा के जनिेि द्वारा उि छावनी के मुख्य कायापालक अजधकारी को, प्रजतभूजत के रूप में ............ रूपए की राजि नकि में भेिी ह ैया उसके पास िमा करा िी ह;ै और यह दक उि ........................ न ेउसके पि के कत्ताव्यों और दकसी अन्य पि के कत्ताव्यों के, जिस पर उसकी दकसी समय जनयुजि की िाती ह ै तथा ससे अन्य कत्ताव्य के, िो उससे अपेजक्षत हो, समयक् अनपुालन के जलए तथा यथापूवोि सभी ससी हाजन या नुकसानी के संबंध में, उि बोडा और जनजध की क्षजतपूर्ता करने के जलए और प्रजतभूजत के रूप में .............................. रू. की िाजस्ट्त की राजि का उपयुाि बंधपत्र जनष्पादित दकया ह ै;

अब, उपयुाि जलजखत बंधपत्र की िता ससी ह ैदक यदि उि .............................................. न ेयथा उपयुाि ................................. रूप में उि पि धारण करन ेके िौरान, उि पि के अपन ेसभी कत्ताव्यों का समयक् रूप से पालन दकया और उन्हें परूा दकया ह ैतथा यदि वह उि पि को या दकसी अन्य पि को, जिस पर उसे जनयुि दकया िाता ह ैया उस पि पर, जिस पर वह काया करता ह,ै पिधारण करन ेके िौरान, क्मिः सभी पिों के प्रत्येक कत्ताव्य का और अन्य कत्ताव्यों का, िो समय-समय पर, उससे अपेजक्षत हो, समयक् अनपुालन करेगा तथा उन्हें पूरा करेगा, तथा सभी समय पर उि बोडा और जनजध की क्षजतपूर्ता और उसको हाजन रजहत रखने के जलए समयक् रूप से कत्ताव्य करता रहगेा तथा ससी सभी और प्रत्येक हाजन या नुकसानी की, िो उि बोडा या जनजध को हो सकती ह ै या होगी या हो सकेगी, उि ................................... के जनयोिन के िौरान उि पि पर रहत े हुए या दकसी अन्य पि पर रहत े हुए, उपगत या काररत होंगे, क्षजतपूर्ता करता रहगेा और यह दक ससी हाजन या नुकसानी उि ............................... के अवचार, व्यजिक्म, अवज्ञा, लोप या दिवाजलएपन के कारण होत ेहों या दकसी ससे व्यजि या िजियों के कारण होते हों, िो उसके अधीन कायारत हो अथवा जिनके जलए उसे उत्तरिायी ठहराया िा सकता हो, तो यह बाध्यता िून्य और जनष्प्रभावी होगी अन्यथा पूणातः प्रवृत्त होगी और बनी रहगेी। परन्त ुसिैव यह घोषणा की िाती ह ैऔर करार दकया िाता ह ैदक उि ............... रूपए की राजि, िो उपयुाि रूप में जनजक्षि की िाती ह,ै यथा उपयुाि ससी प्रजतभूजत के रूप में, ससे मुख्य कायापालक अजधकारी की समपूणा िजियों सजहत िमा रहेंगी और ........................ रूपए की राजि या उसका कोई भाग उि बोडा और जनजध या अन्यथा यथाउपयुाि रूप में क्षजतपूर्ता करने के जलए उपयोग दकया िाना अपेजक्षत होगा । और अंत में यह करार दकया िाता ह ै दक उि ..................... की अंजतम रूप से सेवा समाजि पर, चाह ेवह यथाउपयुाि रूप में या अन्यथा हो, ...................... रूपए की राजि या उतनी राजि, िो िमा कराई िाती ह,ै तथा यह बंधपत्र ......................... कलेंडर मास के जलए दकसी हाजन या नुकसानी के जलए, िो उि बोडा या जनजध को उि .......................... या दकसी ससे अन्य व्यजि या व्यजियों की िानबूझकर उपेक्षा या व्यजिक्म के कारण काररत या उद्भूत होती ह,ै के जलए प्रजतभजूत के रूप में ससे मुख्य कायापालक अजधकारी के पास िमा रहगेी तथा उसे उसकी उि सेवा के पयावसान के पिात तक जनकाला नहीं िा सकेगा तथा एतद्धीन उसका िाजयत्व ............................. कलेंडर मास की उि अवजध के पयावसान तक बना रहगेा। इसके साक्ष्यस्ट्वरूप उि ................................ न े.......................... 20 ............ तारीख को इस पर अपने हस्ट्ताक्षर दकए और अपनी मुरा लगाई। उपयुाि नाजमत द्वारा ..................... जनम्नजलजखत की उपजस्ट्थजत में हस्ट्ताक्षररत, मुहरबंि और पररित्त दकया गया। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 27 ख प्रजतभजूत बधंपत्र का प्ररूप, िहा ंप्रजतभजूत दकस्ट्तों में नकि ली िाती ह ै इस जवलेख द्वारा सभी को ज्ञात हो दक मैं .................................... िो ..................... का पुत्र ह,ँ ...................... रूपए की राजि ............... जिल ेके छावनी बोडा को संित करने के जलए बचनबद्ध और आबद्ध ह ँजिसके संिाय पूणातः और सही रूप में दकए िाने के जलए मैं अपने आपको, अपने वाररसों, जनष्पािकों, प्रिासकों तथा जवजधक प्रजतजनजधयों को भी इस जवलेख द्वारा आबद्ध करता ह।ँ और यह दक उपयुाि बाध्यताधारी .............. 20 .... जनयत तारीख को ................ जनयिु हुआ था और अब ........................ जिले की ....................... छावनी में .......................... पि धारण करता ह ै और उि ....................... ससे पि को धारण करन ेके कारण उन सभी संपजत्त और धन के संव्यवहार का लेखा, िो उसके हाथ या कब्ि ेया उसके जनयंत्रणाधीन आता ह,ै सही और यथाथा रखन ेके जलए बाध्य ह,ै ससा लेखा ससे प्ररूप और रीजत में रखेगा, िो समय-समय पर समयक् रूप से गरठत प्राजधकारी द्वारा जवजहत दकए िाए तथा वह ससी जववरजणयां तथा लेखा और अन्य िस्ट्तावेि भी तयैार करेगा और प्रस्ट्ततु करेगा, िो समय-समय पर उससे अपेजक्षत हों ;

और यह दक उि .................... न,े उि बोडा के जनििे द्वारा उि छावनी के मुख्य कायापालक अजधकारी के पास ............. रूपए की राजि नकि रूप में, िो उि ............. के वेतन से उसके कायाालय अध्यक्ष द्वारा ................... रूपए की नकि रूप में कटौती द्वारा पररित्त और जनजक्षि करने का करार दकया ह,ै िो .......................... रूपए की पणूा राजि इस प्रकार पररित्त या जनजक्षि होने तक उि ........................... के द्वारा उसके पि तथा दकसी अन्य पि के कत्ताव्यों के समयक् और सद्भाजवक कायापालन के जलए जिस पर उसकी जनयुजि की िाए तथा अन्य कताव्यों के जलए, िो उससे अपेजक्षत हो तथा उि बोडा और उि छावनी को ससी सभी हाजनयों या नुकसाजनयों से सुरजक्षत और क्षजतपूर्ता रखने के जलए िो उि ...................... के कारण या ससे दकसी अन्य व्यजि के कारण, िो उसके अधीन कायारत हो या जिसके जलए उसे उत्तरिायी ठहराया िाए, उि बोडा या इसके उत्तरवर्तायों को हो, प्रजतभूजत के रूप में होगी;

और यह दक उि .................. न ेिो उसके द्वारा उि पि के तथा दकसी अन्य पि के, जिस पर उसे दकसी भी समय जनयुि दकया िाए कत्ताव्यों के समयक् अनुपालन के जलए तथा अन्य कताव्यों के जलए, िो उससे अपेजक्षत हो तथा बोडा और जनजध की क्षजतपूर्ता के जलए, िो उपयुाि रूप में उनको सभी ससी हाजन या नुकसानी के जलए हो, उि बंधपत्र में और प्रजतभूजत के रूप में ......................... रूपए की िाजस्ट्त राजि का करार दकया है;

अब, उपयुाि जलजखत बंधपत्र की िता ह ैदक यदि उि ............................... न ेयथा उपयुाि ............. रूप में समयक रूप से अनुपालन दकया ह ैऔर उि पि धारण करने के िौरान, उि पि के सभी कताव्य पूरे दकए हैं तथा यदि वह उि पि को या दकसी अन्य पि को जिस पर उसे जनयुि दकया िाता ह ैया उस पि पर जिस पर उसे सिैव समयकअनुपालन के जलए, पि धारण करने के िौरान क्मिः सभी पिों के प्रत्येक कताव्य का और अन्य कताव्यों का, िो समय-समय पर, उससे अपेजक्षत हों, तथा सभी समय पर उि बोडा और जनजध की क्षजतपूर्ता और उसको हाजन-रजहत रखन ेके जलए समयक् रूप में कताव्य करता रहगेा तथा ससी सभी और प्रत्येक हाजन या नुकसानी की, िो उि बोडा या जनजध को हो सकती ह ैया होगी या हो सकेगी, उि ............................. के जनयोिन के िौरान उि पि पर रहत ेहुए या दकसी अन्य पि पर रहते हुए उपगत या काररत होंग,े क्षजतपूर्ता करता रहगेा और यह दक ससी हाजन या नुकसानी उि .................... के अवचार, व्यजिक्म, अवज्ञा, लोप या दिवाजलएपन के कारण होत े हों या दकसी ससे व्यजि या व्यजियों के कारण होत े हों िो उसके अधीन कायारत हो या जिनके जलए उसे उत्तरिायी ठहराया िा सकता हो, वो यह बाध्यता िून्य और जनष्प्रभावी हो िाएगी अन्यथा पूणातः प्रवृत्त होगी और बनी रहगेी;

परन्त ुसिैव यह घोषणा की िाती ह ैऔर करार दकया िाता ह ैदक उि ................ रूपए की राजि िो उपयुाि रूप में जनजक्षि की िाती ह,ै उि छावनी के तत्समय प्रवृत्त मुख्य कायापालक अजधकारी के पास यथा उपयुाि ससी प्रजतभूजत के रूप में ससे मुख्य कायापालक अजधकारी की समपूणा िजियों सजहत िमा रहगेी और ..................... रूपए की राजि या उसका कोई भाग उि बोडा और जनजध या अन्यथा यथाउपयुाि रूप में क्षजतपूर्ता करने के जलए उपयोग दकया िाना अपेजक्षत होगा;

और अतं में, यह करार दकया िाता ह ैदक उि .................... को अंजतम रूप से सेवा समाजि पर चाह ेवह यथा उपयुाि प्ररूप में या अन्यथा ससे ...................... रूप में हो, ..................... रूपए की राजि या उतनी राजि, िो िमा कराई िाती ह,ै उसके पास जनजक्षि रहगेी तथा यह बंधपत्र ................ कलेंडर मास के जलए दकसी हाजन या नुकसानी के जलए, िो उि बोडा या जनजध की उि .................... या दकसी ससे अन्य व्यजि या व्यजियों की िानबूझकर उपेक्षा या व्यजिक्म के कारण काररत या उद्भूत होती ह,ै प्रजतभूजत के रूप में ससे मुख्य कायापालक अजधकारी के पास रहगेी तथा उसे उसकी उि सेवा के पयावसान के पिात तक जनकाला नहीं िा सकेगा तथा एतद्धीन उसका िाजयत्व .................................... कलेंडर मास की उि अवजध के पयावसान तक बना रहगेा। 28 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] इसके साक्ष्यस्ट्वरूप उि ................................ न,े .................20................. तारीख को इस पर अपन े हस्ट्ताक्षर दकए और अपनी मुरा लगाई। उपयुाि नाजमत द्वारा................................... जनम्नजलजखत की उपजस्ट्थजत में हस्ट्ताक्षररत, मुहरबंि और पररित्त दकया गया। ग प्रजतभजूत बधंपत्र का प्ररूप यहा ंसरकारी प्रजतभजूतया ंप्रजतभजूत के रूप में ली िाती है यह सभी को ज्ञात हो दक मैं इन जवलेखों द्वारा िो ...................... का पुत्र ह,ै ....................... छावनी बोडा को ......................... रूपए की राजि का संिाय करने के जलए वचनबद्ध और आबद्ध ह,ँ जिसके जलए मैं स्ट्वयं को, अपन े वाररसों, जनष्पािकों, प्रिासकों और जवजधक प्रजतजनजधयों को इन जवलेखों के द्वारा आबद्ध करता ह।ँ और उपयुाि ....................... बाध्यताधारी को ............ 20 ........ तारीख ................. को जनयुि दकया गया था और अब वह .................... जिले के ........................ छावनी में .................... में ................. पि धारण करता ह।ै और उि ....................... ससे पि को धारण करन ेके कारण, उन सभी संपजत्त और धन के संव्यवहार का लेखा िो उसके हाथ में या कब्ि ेया जनयंत्रणाधीन आता ह ैसही तथा यथाथा रूप से रखने के जलए बाध्य ह ैऔर ससा लेखा ससे प्ररूप और ससी रीजत में रखेगा, िो समय-समय पर, समयक रूप से गरठत प्राजधकरण द्वारा जवजहत की िाए तथा वह ससी जववरजणयां तथा ससे लेखा तथा अन्य िस्ट्तावेि भी तैयार करेगा और प्रस्ट्तुत करेगा, िो समय-समय पर, उससे अपेजक्षत हो;

और उि ............................ न,े उि बोडा के जनिेि के द्वारा, उि छावनी के मुख्य कायापालक अजधकारी को सरकारी प्रजतभूजतयों को ........................ रूपए की सीमा तक, उि ............... के उसके पि के कताव्यों के समयक और सद्भाजवक कायापालन के जलए तथा अन्य कताव्यों के कायापालन के जलए, िो उससे अपेजक्षत हो, और उि छावनी के बोडा तथा छावनी जनजध को उन सभी हाजन और नुकसानी से सुरजक्षत रखन ेऔर उनकी क्षजतपूर्ता करने के प्रयोिन के जलए िो उि बोडा या जनजध को उि ............................... के द्वारा या दकसी अन्य ससे व्यजि या व्यजियों के द्वारा, िो उसके अधीन कायारत ह ैया जिसके जलए वह उत्तरिायी ह,ै अवचार, उपेक्षा, अन्वेक्षा या अन्यथा के कारण हों, के जलए भी पररित्त और जनजक्षि तथा पृष्ठांदकत कर दिया है;

और उि ........................ न ेउि पि के तथा दकसी अन्य पि के कताव्यों के उसके द्वारा समयक् रूप सेअनपुालन के जलए, जिस पर उसे दकसी भी समय जनयुि दकया िाए तथा अन्य दकन्हीं कताव्यों के जलए, िो उससे अपेजक्षत हो तथा उि बोडा और जनजध को उन सभी हाजन या नुकसानी के जलए िो उनको होती ह,ै क्षजतपूर्ता के जलए ..........................

रूपए की िाजस्ट्त के रूप में राजि की और प्रजतभूजत के रूप में उपयुाि बंधपत्र जनष्पादित दकया है;

अब, उपयुाि जलजखत बंधपत्र की िता ससी ह ैदक यदि उि ...................... उि पि को धारण करने के िौरान यथाउपयुाि ............................ का उि पि ..................... उि पि के सिैव समयक रूप से अनुपालन तथा कताव्यों की पूर्ता के जलए तथा यदि िब वह उि पि धारण करेगा या कोई अन्य पि धारण करेगा जिस पर उसे जनयुि दकया िाता ह ैया जिस पर वह काया करेगा उन सभी के कताव्यों के समयक् कायापालन और पूर्ता के जलए तथा क्मिः उनके सभी कताव्यों और अन्य कताव्यों के, िो उससे अपेजक्षत हो, समयक् अनुपालन और पूर्ता के जलए सभी समयों पर उि बोडा और जनजध की क्षजतपूर्ता, िो उनके दकसी भी समय उि .................... के उि पि पर सेवा करने या जनयोिन के िौरान या दकसी अन्य पि पर सेवा या जनयोिन के िौरान इसके पिात उनको होती ह ैऔर िो दकसी उपेक्षा, असफलता, अवचार, व्यजिक्म, अवज्ञा, लोप या उि ....................................... के दिवाजलएपन या दकसी व्यजि या व्यजियों के दिवाजलएपन के जलए, िो उसके अधीन कायारत हो या उस व्यजि के जलए जिसके जलए यह िब उतरिायी था, क्षजतपूर्ता करता रहगेा तो यह बाध्यता िून्य और जनष्प्रभावी होगी अन्यथा उस समय तक पणूातः प्रवृत्त रहगेी और बनी रहगेी; परन्त ुसिैव यह घोषणा की िाती ह ैऔर करार दकया िाता ह ैदक उि इस प्रकार प्रित्त और पषृ्ठांदकत ........................ रूपए का सरकारी वचनपत्र या ससी अन्य सरकारी प्रजतभूजत या प्रजतभूजतयां, िो उतनी ही राजि की हो तथा जिन्हें उि मुख्य कायापालक अजधकारी स्ट्वीकार करन ेके जलए सहमजत िें और उस राजि के जलए उस पर ब्याि सजहत उनके बिल ेमें उन्हें स्ट्वीकार करने की भी सहमजत िें और िो उि छावनी के जलए मुख्य कायापालक अजधकारी के पास यथा-उपयुाि प्रजतभूजत के रूप में मुख्य कायापालक अजधकारी की संपणूा िजियों सजहत जनजक्षि रहगेी और मुख्य कायापालक अजधकारी से, उि सरकारी प्रजतभूजत या उसका पयााि भाग, उि सरकारी प्रजतभूजतयों पर ब्याि सजहत जवक्य या व्ययन करने की तथा उसके आगमों की प्रजतपूर्ता के जलए और उि बोडा और जनजध या अन्यथा को उपयुाि रूप में क्षजतपूर्ता के जलए उसका जवक्य या व्ययन कर सकेगा दकन्तु इस बात के होते हुए भी, उि ...................... को संित कर दिया िाएगा यदि मुख्य कायापालक अजधकारी ससा करना उजचत समझता ह;ै [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 29 और, अंत में यह करार दकया िाता ह ै दक उि ....................... की सेवा की अंजतम समाजि पर चाह े वह ..................... रूप में उपयुाि या अन्यथा हो, .............................. रूपए का उि सरकारी वचनपत्र या कोई ससा पत्र िो उसके स्ट्थान पर हो, और यह बंधपत्र ...................... कलेंडर मास की प्रजतभूजत के रूप में और ससी दकसी हाजन या नुकसानी के जलए िो उि बोडा या जनजध को, उि ............................ की दकसी उपेक्षा या व्यजिक्म या दकसी अन्य व्यजि या व्यजियों की उपके्षा या व्यजिक्म के काया के कारण काररत या उिभूत होते हों, मखु्य कायापालक अजधकारी के पास रहेंग े और जिनका उसकी उि सेवा की समाजि के पिात पता चलता ह ै और यह दक उसका िाजयत्व ........................ कलेंडर मास की उि अवजध के पयावसान तक बना रहगेा। इसके साक्ष्यस्ट्वरूप उि ................... न,े तारीख ....................... को ....................... इस पर अपन े हस्ट्ताक्षर दकए और मोहर लगाई। उपयुाि नाजमत द्वारा................................... जनम्नजलजखत की उपजस्ट्थजत में हस्ट्ताक्षररत, मुहरबंि और पररित्त दकया गया। घ प्रजतभजूत बधंपत्र का प्ररूप िहा ंकोई जवश्वसनीयता बीमा पॉजलसी प्रजतभजूत के रूप में लीिाती है इस जवलेख द्वारा सभी को यह ज्ञात हो दक मैं ......................... िो ..................... का पुत्र ह,ँ ............................. रूपए की राजि ......................... छावनी बोडा को संित्त दकए िाने के जलए वचनबद्ध और आबद्ध ह ँजिसके संिाय के जलए मैं स्ट्वयं को और अपन ेवाररसों, जनष्पािकों, प्रिासकों और जवजधक प्रजतजनजधयों को भी इस जवलेख के द्वारा आबद्ध करता ह;ँ और उपयुाि ...................... आबद्ध बाध्यताधारी तारीख .............. 20 ......... को जनयुि दकया गया था और अब .................... जिल ेकी ................... छावनी में ..................... पि धारण करता है;

और उि .................... ससे पि को धारण करने के कारण अपने सभी संव्यवहारों के लेखाओं को िो सभी संपजत्त या धन उससे संबंजधत हो या कब्िे या जनयंत्रणाधीन आते हैं, सही और यथाथा रूप से रखन ेके जलए आबद्ध ह ै(ससे लेखा, ससे प्ररूप और रीजत में रखे िाएंगे िो समय-समय पर समयक् रूप से गरठत प्राजधकारी द्वारा जवजहत दकए िाएं) और ससी जववरजणयां और लेखा तथा अन्य िस्ट्तावेि भी तैयार करेगा और प्रस्ट्तुत करेगा िो समय-समय पर उससे अपेजक्षत हो; और उि .......................... द्वारा उसके पि तथा दकसी अन्य पि के कताव्यों से िो उपयुाि बोडा के अधीन यह धारण करें, समयक् और सद्भाजवक कायापालन को सुजनजित करन ेके जलए तथा ससी दकसी हाजन, क्षजत या नुकसानी की उनको क्षजतपूर्ता करने के जलए उनको, उसके अवचार, उपेक्षा, अन्वेक्षा या अन्यथा उसके द्वारा या उसके अधीन कायारत दकसी व्यजि द्वारा उपयुाि बोडा को होती ह,ै और िो ...................... रूपए की राजि के जलए ...................... कमपनी के साथ .................. अवजध के जलए दकसी जवश्वसनीयता बीमा पाजलसी में ह ैऔर उि ............................. ने, उि बोडा को उसके वेतन से माजसक कटौती द्वारा वसूल करन ेके जलए, िो वह समय-समय पर पाता रहगेा, प्राजधकृत दकया था, ससी राजि, िो आवयक हो, उपयुाि पाजलसी या दकसी अन्य बीमा पाजलसी के कारण प्रीजमयम की लागत संित्त करन ेके जलए, िो उि बोडा उि ....................... के साथ उसकी सेवा अवजध के िौरान यथा उपयुाि स्ट्वयं की क्षजतपूर्ता के प्रयोिन के जलए जनकाल सकेगा;

अब, उपयुाि जलजखत बंधपत्र की िता यह ह ैदक यदि उि .............. ने ....................... पि को धारण करने के िौरान उि पि के कताव्यों का समयक् रूप से अनुपालन और परू्ता की ह ैऔर यदि वह उि पि या की अन्य पि जिस पर उसे जनयुि दकया िाए या जिस पर वह काया करें, क्मिः उसके सभी या प्रत्येक कताव्य व सिैव समयक् रूप से अनुपालन और पूर्ता करेगा और अन्य कताव्य का भी जिनकी उससे समय-समय पर अपेक्षा की िाए, अनपुालन और पूर्ता करता रहगेा और हर समय उि बोडा और जनजध की सभी और प्रत्येक क्षजत, हाजन और नुकसान की, िो उि ....................... की सेवा या जनयोिन के िौरान का दकसी अन्य उपयुाि पि पर की गई सेवा या जनयोिन के िौरान उि बोडा या जनजध को, उि ..................... या दकसी अन्य व्यजि या उसके अधीन कायारत व्यजियों या उन व्यजियों के द्वारा जिनके जलए वह उत्तरिायी हो, दकसी कारावाई, उपेक्षा, असफलता, अवचार, व्यजिक्म, अवज्ञा, लोप या दिवाजलएपन के कारण होता ह,ै क्षजतपूर्ता करेगा या यदि उि बोडा ने, उपयुाि बीमा कमपनी या दकसी अन्य बीमा कमपनी से पाजलसी की राजि वसूल कर ली ह ैतो उि बोडा की क्षजतपूर्ता की बाध्यता िनू्य और जनष्प्रभावी हो िाएगी अन्यथा वह पूणातः प्रवृत्त रहगेी और बनी रहगेी; और यह करार दकया िाता ह ै दक उि ............... के अंजतम पयावसान पर यह बंधपत्र उि बोडा के पास ........................... कलेंडर मास के जलए, दकसी हाजन या क्षजत या नुकसानी के जलए प्रजतभूजत के रूप में रहगेा िो उि बोडा या जनजध को, उि ..................... या दकसी अन्य व्यजि या व्यजियों की उपेक्षा या व्यजिक्म के कारण होती ह ैऔर जिसका पता उसके उि सेवा के पयावसान के पिात ्लगता ह ैऔर जिसे यथाउपयुाि दकसी बीमा पाजलसी के द्वारा वसूल नहीं दकया गया ह,ै और यह दक एतद्धीन उसका िाजयत्व .......................... कलेंडर मास की उि अवजध के पयावसान तक बना रहगेा। 30 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] इसके साक्ष्यस्ट्वरूप उि ............................. ने तारीख ................... 20 ........... को इस पर अपने हस्ट्ताक्षर दकए और अपनी मुरा लगाई। उपयुाि नाजमत द्वारा................................... जनम्नजलजखत की उपजस्ट्थजत में हस्ट्ताक्षररत, मुहरबंि और पररित्त दकया गया। [फा.सं. 14(4)/2014-डी (क्यू और सी)] राकेि जमत्तल, संयुि सजचव MINISTRY OF DEFENCE NOTIFICATION New Delhi, the 13th October, 2021 S.R.O. 16(E).—Whereas the following draft rules, which the Central Government proposed to make in exercise of the powers conferred by section 346 of the Cantonments Act, 2006 (41 of 2006) and in supersession of the Cantonment Fund Servants Rules, 1937, were published as required by section 346 of the Cantonments Act, 2006(41 of 2006) vide notification of the Government of India in the Ministry of Defence number S.R.O. 7(E), dated the 21 st December, 2020, in the Gazette of India, Extraordinary, Part II, Section 4, inviting objections and suggestions from all the persons likely to be affected thereby, before the expiry of the period of thirty days from the date on which the copies of the Official Gazette containing the said notification were made available to the public;

And whereas, the copies of the said Gazette notification were made available to the public on day of the 21st December, 2020;

And whereas, the objections and suggestions received from the public in respect of the said draft rules have been considered by the Central Government;

Now, therefore, in exercise of the powers conferred by section 346 of the said Act, the Central Government hereby makes the following rules, namely: - The Cantonment Board Employees Service Rules, 2021

CHAPTER I Preliminary

1. Short title and commencement. —(1) These rules may be called the Cantonment Board Employees Service Rules, 2021.

(2) They shall come into force on the date of their publication in the Official Gazette.

2. Definitions.—(1) In these rules, unless the context otherwise requires,—

(a) “Act” means the Cantonments Act, 2006;

(b) “appointing authority” in relation to a Cantonment Board employee means -(i) the authority empowered to make appointments to the posts which the employee for the time being holds; or

(ii) the authority which appointed the employee to such post as the case may be, whichever authority is the higher authority;

(c) “dependant” shall have the same meaning as that assigned to it in the Provident Funds Act, 1925;

(d) “depositor” means an employee on whose behalf a deposit is made under these rules;

(e) “disciplinary authority” means the authority competent under these rules to impose on an employee any of the penalties specified in rule 10.

(f) “lower grade employee” means daftari, peon, bhisti, mali, lamp- lighter, chowkidar, coolies or safaiwala or any other class of servant declared by the Central Government or such other authority as may be authorised by it in this behalf to be a lower grade employee for the purpose of these rules;

[भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 31

(g) “non-supervisory post” means any appointment under a Board which is not a supervisory post;

(h) “salary” includes all-fixed monthly allowances by way of pay or personal allowances, paid from Cantonment Funds but does not include allowance granted to meet specific expenditure such as travelling, conveyance or house rent allowance, whether daily, monthly or yearly;

(i) “employee” means a person holding a substantive whole time appointment under a Board whether in receipt of a pension from public revenues or not;

(j) “supervisory post” means any appointment under a Board which has been declared as a supervisory post by the Central Government or such authority as may be authorized by it in this behalf;

(k) “safaiwala” means any person who is actually employed in collecting or removing or disposing of filth or rubbish, in cleansing roads, drains or slaughter-houses or in driving vehicles used for the removal of filth or rubbish; and

(l) “temporary employee” in relating to a Cantonment Board employee includes, besides the incumbent of a temporary post sanctioned under rule 9, the incumbent on a temporary basis of a substantive or permanent post under the Board.

(2) Words and expressions used in these rules which have not been defined hereinabove but defined in the Act, shall have the same meaning as assigned to these in the Act.

PART I

CHAPTER II GENERAL

3. (1) Chapters I, II, III, IV, V, VI, VII, VIII, IX, X and XI of the Fundamental Rules and the Supplementary Rules made under the rules contained in the said chapters, as continued in force and the Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964 shall, in so far as they are not inconsistent with these Rules, be deemed to apply to all employees. The powers of Local Government referred to in the said fundamental Rules shall be exercised in respect of such employees by the General Officer Commanding-in-Chief, the Command.

(2) Notwithstanding anything contained in sub-rule (1) of rule 3, the Central Civil Services (Leave) Rules, 1972, shall, in so far as may be, apply to all employees.

4. Subject to the provisions of the Act and of the rules made thereunder every Board shall determine what employees are required for the proper and efficient execution of its duties and shall fix the salaries to be paid to such employees out of the Cantonment Fund.

5. (1) The sanction of the Board shall be obtained to all proposals for altering the number, designations and grades of its employees and the salaries, fees and allowances payable to them. Such proposals shall ordinarily be taken into consideration at the time of framing the Budget butmayat the instance of the Chief Executive Officer, be taken into consideration at any time:

Provided that no proposal adversely affecting any employee who has been in the permanent service of the Board for more than five years shall be considered except at a special meeting convened for the purpose:

Provided also that the previous sanction of the Officer Commanding-in-Chief the Command shall be obtained as required by rules 87, 88 and 89 of the Cantonment Board Account Rules, 2020.

(2) (a) if, consequently upon the inclusion in a cantonment of an area therefore included within the jurisdiction of a local authority other than a Board, persons therefore in the service of such other local authority are transferred to the service of the Board, the Board may with the previous sanction of the Central Government, and notwithstanding anything contained in these rules, direct that all or any of such persons shall, for all or any of the purposes of these rules, be deemed to have been employees of the Board for such continuous period immediately preceding their transfer to the service of the Board as was spent by them in the service of such other local authority.

(b) in giving its sanction under sub-rule (a), the Central Government may require the imposition of such conditions, if any, as it may think proper.

32 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4]

(3) (a) allfirst appointments to service under a Board shall be made through an employment exchange or in such other manner as the Central Governmentmay direct.

(b) noperson aged below twenty-one years and more than thirty years shall be appointed to any post other than the post of a doctor or medical officer and no person aged below twenty-three years and more than thirty-five years shall be appointed to the post of a doctor or medical officer under a Board:

Provided that the General Officer Commanding-in-Chief, the Command, may, if he considers it necessary so to do and subject to any directions issued by the Central Government, relax the aforesaid agelimit generally or specially, with reference to specified categories or specific cantonments or with reference to individual cases to such extent as he considers appropriate.

(c) no person who has not been declared medically fit by the authorized medical attendant and who does not possess the minimum qualifications and experience, as may be specified for each post by the General Officer Commanding-in-Chief, the Command, shall be appointed to any service under a Board:

Provided that the minimum qualification specified as aforesaid shall not operate to the disadvantage of an existing employee for continuance in the post to which he has been appointed or for appointment on promotion.

Explanation.—AuthorizedMedical Attendant for the purpose of this rule means the medical officer appointed by the Board to attend on the employee of the Board.

(d) appointmentsto all posts under a Board shall be either by direct recruitment or by promotion or by deputation/absorption.

(e) theCentral Government shall classify all posts under a Board into direct recruitment posts or promotion posts or deputation post and specify the post or posts from which appointment shall be made to each such promotion post and deputation post.

(f) theGeneral Officer Commanding-in-Chief, the Command, shall subject to such directions, if any, as may be issued by the Central Government, classify all promotion posts into selection and non-selection posts.

(g) theChief Executive Officer shall maintain annual confidential reports of all employees except lower grade employees in such form and in such manner as may be specified by the Central Government.

(h) appointmentsto promotion posts shall be made by the appointing authority on the basis of seniority lists maintained for this purpose by the Board, subject to rejection of those considered unfit:

Provided that promotion to selection posts shall be made on the basis of seniority-cum-merit.

6. All first appointments under the Cantonment Board shall be made on probation for a period of two years:

Provided that no person shall be confirmed in his first appointment till the Appointing Authority is satisfied that he is fit to hold such appointment:

Provided further that the appointing authority may extend the period of probation by a further period not exceeding one year for reasons to be recorded in writing.

7. (1) All appointments to supervisory post shall be made by the Board and to non-supervisory posts by the Chief Executive Officer.

(2) The Chief Executive Officer shall—

(a) prescribe the duties of and exercise supervision and control over the acts and proceedings of all employees;

(b) disburse the salaries of all employees;

(c) subject to the provisions of these rules, dispose of all questions including those relating to conditions of service particularly the pay, privileges and allowances relating to the service of all employees; and

(d) deal with applications for leave of absence from and subject to the provisions of sub-rule

(1) and any other rule in this behalf, make officiating appointments in vacancies caused by the grant of leave to all employees:

[भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 33

Provided that in respect of employees employed in any cantonment hospital or dispensary, the medical officer incharge thereof shall perform the functions referred to in clauses (a) and (b).

(3) No person shall be appointed under this rule who has been dismissed from employment under the Central Government or any State Government or any Board or local authority, corporation or other public undertaking, or has been sentenced by a criminal court to imprisonmentor has been ordered to find security for keeping the peace and for good behavior under the Code of Criminal Procedure, 1973(2 of 1974), or has been sentenced by a criminal court for any offence under Chapter IX-A of the Indian Penal Code, 1860 (45 of 1860) or has been adjudged insolvent by a competent court.

8. (1) The Board or the officer appointing an employee may discharge such employee-

(a) during or at the end of his period of probation;

(b) on his being declared by a medical officer approved by the Board to be medically unfit for further service;

(c) at any time after he has attained the age of fifty-five years or has completed thirty years qualified service; subject to such directions as the Central Government may issue from time to time in this regard;

(d) in accordance with the terms of a written contract, if any, between such employee and the Board; or

(e) in pursuance of a reduction or revision of establishment and not otherwise.

(2) An employee in receipt of a monthly wage, who is discharged under clause (a) of sub-rule (1); shall, in the absence of a written contract to the contrary be entitled to one month’s notice before discharge or to one month’s salary in lieu thereof; and an employee not having attained the age offifty-five years who is discharged in pursuance of clause (c) or clause (e) of the said sub-rule shall, in the absence of a written contract to the contrary, be entitled to three month notice before discharge or three month’s salary in lieu thereof:

Provided that before an employee is discharged under clause (a) of the said sub-rule he shall be apprised of the grounds on which it is proposed to discharge him and give an opportunity of showing cause against it.

(3) (a) An employee other than a doctor or medical officer who has not attained the age of sixty years, or an employee being a doctor or medical officer who has not attained the age of sixty-five years, and who is discharged in pursuance of clause (b) of sub-rule (1), if he is not eligible to receive any gratuity under rule 33,shall be paid a compensatory gratuity calculated at the rate of fifteen days average pay for each completed year of qualifying service or a part thereof in excess of six months, subject to the condition that the amount of such gratuity payable shall not exceed the total amount of pay which the employee would have drawn during the period subsequent to the date of his discharge, had he remained in service until he attained the age of sixty years or sixty-five years as the case may be.

(b) An employee other than a doctor or medical officer who has not attained the age of sixty years, or an employee being a doctor or medical officer who has not attained the age of sixty-five years, andwho is discharged in pursuance of clause (e) of sub-rule (1) shall if he is not eligible to receive any gratuity under rule 33 be paid a compensatory gratuity calculated at the rate of fifteen days’ average pay for each completed year of qualifying service or a part thereof in excess of six months:

Provided that no gratuity shall be paid if the employee has been offered and has refused an alternative appointment of approximately equal pay under the Board, which in the opinion of the Board was of a suitable nature.

(4) The Chief Executive Officer may, in its discretion, grant leave to any of its employee not having attained the age of fifty-five years who is discharged in pursuance of clause (c) of sub-rule (1) upto the full amount due, subject to the maximum of the leave admissible to him under the fundamental rules at any one time and such leave shall commence from commencement of the three months’ notice referred to the sub-rule

(2).

(5) An employee on probation shall not, in the absence of a written contract authorizing him so to do and without reasonable cause resign his employment, or absent himself from his duties without giving at 34 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] least one month’s notice to the Board and no other employee shall, without reasonable cause resign his employment, or absent himself from his duties without giving three months’ notice to the Board; and if notice as aforesaid is not given, the employee shall be liable to forfeit such sum not exceeding one month’s salary or three month’s salary, as the case may be, as the Board may, be general or special order, direct. The Board, may recover such salary from any sum due from the Board to the employee or from the amount of subscription made by the employee to his Provident Fund Account:

Provided that an employee may, at any time, after attaining the age of fifty-five years or completing thirty years of qualifying service, leave the service of the Board on giving three months’ notice to the Board.

9. (1) The Officer Commanding-in-Chief, the Command may, if in his opinion the number of employees employed or proposed to be employed by the Board or the salary assigned by the Board to any such employee is excessive, require the Board to reduce any number of such employees or the amount of such salary as the case may be, within such time as he may fix and the Board shall, subject to the provisions of sub-rule (1) of rule 8 and of any lawful contract between the employee and the Board, comply with such requisition:

Provided that reasonable opportunity shall be given to the Board to show cause in writing why such reduction should not be made.

(2) (a) the appointing authority may place an employee under suspension-

(i) where a disciplinary proceeding against him is contemplated or is pending; or

(ii) where a case against him in respect of any criminal offence is under investigation, inquiry or trial;

(b) an employee shall be deemed to have been placed under suspension by an order of appointing authority-

(i) with effect from the date of his detention, if he is detained in custody, whether on a criminal charge or otherwise for a period exceeding forty-eight hours;

(ii) with effect from the date of his conviction, if in the event of a conviction for an offence he is sentenced to a term of imprisonment exceeding forty-eight hours and is not forthwith dismissed or removed or compulsory retired consequent to such conviction.

(c) where a penalty of dismissal, removal, or compulsory retirement from service imposed upon an employee under suspension is set aside in appeal or on review under these rules and the case is remitted for further enquiry or action or with any direction, the order of his suspension shall be deemed to have continued in force on and from the date of the original order of dismissal, removal or compulsory retirement and shall remain in force until further orders.

(d) where a penalty of dismissal, removal or compulsory retirement from service imposed upon an employee is set aside or declared or rendered void in consequence of or by a decision of a court of law and the disciplinary authority, on consideration of the circumstances of the case, decided to hold a further inquiry against him on the allegations on which the penalty of dismissal, removal or compulsory retirement was originally imposed, the employee shall be deemed to have been placed under suspension by the Appointing Authority from the date of the original order of dismissal, removal or compulsory retirement and shall continue to remain under suspension until further orders:

Provided that no such further inquiry shall be ordered unless it is intended to meet a situation where the court has passed an order purely on technical grounds without going into the merits of case.

(e) (i) an order of suspension made or deemed to have been made under this rule shall continue to remain in force until it is modified or revoked by the authority competent to do so.

(ii) where an employee is suspended or is deemed to have been suspended (whether in connection with any disciplinary proceedings or otherwise) and any other disciplinary proceedings are commenced against him during the continuance of that suspension the authority competent to place him under suspension may, for reasons to be recorded by him

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