1 मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 (क्रम ांक 1 सन ्1994) अध्याय 1 प्रारम्भिक
1. सांक्षिप्त न म, विस्त र और प्र रम्भ
2. पररभ ष एां अध्याय 2 ग्राम सिा
3. ग्र म के सम् बन् ध म अधधसचून
4. ग्र म की मतद त सचूी
5. ग्र म के मतद त ओां क रजिस्रीकरण 5-क. ग्र म सभ क गठन और ननगमन
6. ग्र म सभ क सजम्मलन 6-क. ग्र म सभ क विशषे सजम्मलन 6-ख. ग्र म सभ क सधचि 6-ग. ग्र म सभ क विननश्चय
7. ग्र म सभ की शजततय ां और कृत्य तथ उसक ि वषिक सजम्मलन 7-क. ग्र म सभ की स्थ यी सममनत तथ तदथि सममनत 7-ख. स्थ यी सममनतयों क गठन और उनके कृत्य 7-ग. [***] 7-घ. सममनत की शजततय ां, कृत् य तथ कत्ति् य 7-ड. सदस्य क हट य ि न 7-च. ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत की शजततय ां तथ कत्ति् य 7-छ. स्थ यी सममनत क सधचि 7-छक. ग्र म सभ की दीघिक मलक विक स योिन क तयै र ककय ि न 7-छख. ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत के अध्यि और सदस्यों के बबरुद्ध अनशु सननक क रिि ई 7-ि. ग्र म सभ के विननश् चय के विश्ि सममनत को अपील 7-झ. बिट 7-ञ. ग्र म कोष 7-ट. लेख तथ सांपरीि 2 7-ठ. सरक री कमिच ररयों पर ननयांत्रण 7-ड. ग्र म सभ के कृत् यो के सांबांध म र य य सरक र की शजतत अध्याय 3 पंचायतों की स्थापिा
8. पांच यतों क गठन
9. पांच यत की अिधध
10. ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल पांच यत की स्थ पन
11. पांच यतों क ननगमन
12. ग्र म पांच यतों क ब डी म विभ िन
13. ग्र म पांच यत क गठन
14. मत देने तथ अभ्यथी होने के मलये अहित
15. एक स थ सदस्यत क प्रनतषधे
16. [***]
17. सरपांच और उप-सरपांच क ननि िचन
18. बहहग िमी सरपांच य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि द्ि र क यिभ र क सौंप ि न
19. ननि िचन की अधधसचून
20. प्रथम सम्मेलन और पद िधध
21. सरपांच और उप-सरपांच के विरुद्ध अविश्ि स क प्रस्त ि 21-क. ग्र म पांच यत के पद धधक ररयों क ि पस बलु य ि न
22. िनपद पांच यत की सांरचन
23. खण्ड क ननि िचन िेत्रों म विभ िन
24. [***]
25. िनपद पांच यत के अध्यि और उप ध्यि क ननि िचन
26. सदस्यों अध्यि और उप ध्यि के न मों क प्रक शन
27. प्रथम सजम्मलन और पद िधध
28. अध्यि य उप ध्यि के विरुद्ध अविश्ि स क प्रस्त ि
29. जिल पांच यत क गठन
30. जिले क ननि िचन िेत्रों म विभ िन
31. [***]
32. अध्यि और उप ध्यि क ननि िचन
33. सदस्यों, अध्यि और उप ध्यि के न मों क प्रक शन 33-क. मलवपकीय गलनतयों य लोप क ठीक ककय ि न
34. प्रथम सजम्मलन और पद िधध
35. अध्यि और उप ध्यि के विरूद्ध अविश्ि स प्रस्त ि
36. पांच यत क पदध री होने के मलये ननरहित एां
37. पांच यत के पद धधक ररयों द्ि र त्य गपत्र 3
38. ररजततयों क भर ि न
39. पांच यत के पदध री क ननलम् बन
40. पांच यत के पदध ररयों क हट य ि न
41. एक से अधधक पद ध रण करने क िििन अध्याय 4 निवााचि का संचालि
42. र य य ननि िचन आयोग की शजततय ां 42-क. अधधक ररयों और कमिच रीिनृ्द को ननयतुत करने और उनके कत्ति् य और कृत्यों को समनदेुमशत करने की शजतत
43. ननयम बन ने की शजतत अध्याय 5 पंचायतों के कामकाज का संचालि तथा पंचायत के सम्भमलि की प्रक्रिया
44. सजम्मलन की प्रकक्र य
45. पांच यत द्ि र अांनतम रूप से ननपट ये गये विषयों पर पनुवििच र अिीिस्थ अभिकरण
46. ग्र म पांच यत की स्थ यी सममनतय ां
47. िनपद पांच यत और जिल पांच यत की स्थ यी सममनतय ां 47-क. त्य गपत्र 47-ख. सदस्य य सभ पनत के ननि िचन की विधधम न्यत के सम्बन्ध म विि द
48. सरपांच, उपसरपांच, अध्यि और उप ध्यि की शजततय ां और कत्ति् य अध्याय 6 पंचायतों के कृत्य
49. ग्र म पांच यत के कृत् य 49-क. ग्र म पांच यत के अन्य कृत् य
50. िनपद पांच यत के कृत्य
51. र य य सरक र के कनतपय कृत्यों क िनपद पांच यत य जिल पांच यत को सौंप ब न
52. जिल पांच यत के कृत् य
53. पांच यतों के कृत्यों के सम्बन्ध म र य य सरक र की शजतत पंचायतों की शम्ततया ं
54. स िििननक स्ि स््य, सवुिध एां और सरुि की ब बत ्ग्र म पांच यत की शजततयों
55. भिनों के पररननम िण पर ननयांत्रण
56. स िििननक म गों तथ खुले स्थलों पर रुक िट , ब ध दबत अधधक्रमण 4 56-क. ध र 55 तथ 56 के अधीन ग्र म पांच यत की शजततयों क प्रत्य योिन
57. म गो क न मकरण करने तथ भिनों पर क्रम ांक ड लने की शीजत त
58. ब ि रों य मेलों क विननयमन
59. सड़कों को घमु ि देने, मोड़ने, च ल ून रखने य बांद करने की िनपद पांच यत की शजतत
60. िनपद पांच यत म ननहहत सड़कों और भमूमयों पर अधधक्रमण
61. समझौत करने की शजतत अध्याय 6 क कॉलोिी निमााण 61-क. पररभ ष 61-ख. कॉलोनी ननम िण करने ि ले क रजिस्रीकरण 61-ग. क लोनन यों क विक स 61-घ अिधै कॉलोनी ननम िण के मलये दण् ड 61-ड. अिधै सननम िण के अपर ध क दषु्प पे्ररण करने के मलये दण् ड 61-च. अिधै ् यपितिन के य अिधै क लोनी ननम िण के ककसी िेत्र म के भ-ूखण् डों के अन्तरण क शनू् य होन 61-छ. अिधै कॉलोनी म अन्तग्रिस्त भमूम क समपहरण अध्याय 7 पंचायत की निधि और उसकी सभपम्त्त
62. र य य सरक र कनतपय सम्पजत्त पांच यत म ननहहत कर सकेगी
63. पांच यत से विधधयों म समनदेुशन
64. पांच यत को सह यत अनदु न
65. स्थ िर सम्पजत्त क अांतरण
66. पांच यत ननधध
67. सांविद ननष्प प हदत करने क ढांग
68. सह यत अनदु न देने की शजतत अध्याय 8 पंचायतों की स्थापिा, बजट तथा लेखे
69. सधच ि तथ मखु् य क यिप लक अधधक री की ननयजुतत
70. पांच यत के अन्य अधधक री और सेिक
71. श सकीय सेिकों की प्रनतननयजुतत
72. मखु् य क यिप लक अधधक री तथ सधच ि के कृत् य
73. बिट तथ ि वषिक लेखे 5 अध्याय 9 करािाि और दावों की वसूली
74. भमूम पर उपकर उद्ग्रहण करने की शजतत
75. खण्ड के भीतर सम्पजत्त के अन्तरण पर शलु्क
76. जिल पांच यत र ि ननधध 76-क. रकम क पांच यतों के बीच सांवितरण
77. अन्य कर 77-क. कर अधधरोवपत करने की शजतत
78. करों क विननयमन करने की र य य सरक र की शजतत
79. कर ध न के विरूद्ध अपील
80. ब ि र फीस आहद क ठेके पर हदय ि न
81. बक य की िसलूी
82. अपिांचन के मलए श जस्त
83. करों म र हत देने के ब रे म र य य सरक र की शजतत अध्याय 10 नियंत्रण
84. पांच यतों के क यि क ननरीिण
85. आदेशों आहद क ननष्प प दन, ननलांबबत करने की शजतत
86. कनतपय म मलों म पांच यतों को सांकमों क ननष्प प दन क ने के मलए आदेश देने की र य य सरक र की शजतत
87. ्यनतक्रम, शजततयों के दरुुपयोग आहद के मलये पांच यतों को विघहटत करने की र य य सरक र की शजतत
88. पांच यत के क यिकल पों की ि ांच
89. ह नन, दरुुपयोिन के मलये पांचों आहद क द नयत्ि
90. पांच यतों और अन्य स्थ नीय प्र धधक ररयों के बीच विि द
91. अपील और पनुरीिण
92. अमभलेख और िस्तएुां ि पस कर ने तथ धन िसलू करने की शजतत
93. शजततयों क प्रत्य योिन
94. ननयांत्रण की स ध रण शजतत अध्याय 11 नियम और उपववधियां
95. ननयम बन ने की शजतत
96. उपविधधय ाँ
97. आदशि (मॉडल) उपविधधय ां 6 अध्याय 12 शाम्तत
98. ननरहहित हो ि ने पर पांच, सदस्य, सरपांच, उप-सरपांच, अध्यि, उप ध्यि की हैमसयत म क यि करने के मलये श जस्त
99. हहतबद्ध सदस्यों द्ि र मत हदये ि ने के मलये श जस्तयों
100. ककसी सदस्य, पदध री य सेिक द्ि र सांविद म हहत अजिित करने के मलये श जस्त
101. अधधक ररयों आहद क सदोष अिरोध
102. पांच यतों के सदस्य आहद को ब ध पहुांच ने क प्रनतषधे
103. सचून को हट ने य ममट ने क प्रनतषधे
104. ि नक री न देने य मम्य ि नक री देने के मलये श जस्त
105. बोली लग ने क प्रनतषधे
106. ककसी भी पांच यत को नकुस न की प्रनतपनूत ि ककये ि ने की प्रकक्रय अध्याय 13 प्रकीणा
107. सदभ िपिूिक ककये गये क यो क पररत्र ण
108. सचून के अभ ि म ि द क िििन
109. सदस्यों, अधधक ररयों आहद के विरुद्ध कनतपय ि दों म प्रनति द पांच यत य ग्र म सभ के खचि पर ककय ि एग
110. कर आहद के सम्बन्ध म अन्य क यिि ही क िििन
111. पांच यत के सदस्य य सेिक लोक सेिक होंगे
112. ररजतत य गठन की प्रकक्रय आहद म त्रहुट होने के क रण पांच यत के क यि अविधधम न्य नहीां होग े
113. भमूम क अििन
114. केन्रीय सरक र य र य य सरक र अनजु्ञजप्त य अनजु्ञ अमभप्र प्त नहीां करेगी करेगी।
115. पांच यत की धन उध र लेने की शजतत
116. िसलू न की ि सकने ि ली धनर मशयों तथ अनपुयोगी स मग्री क बट टे ख त ेम ड ल ि न
117. सदस्यों आहद को प ररश्रममक क प्रनतषधे
118. पांच यत य ग्र म सभ के अमभलेख आहद क ननरीिण ककय ि सकेग
119. दस्त िेि आहद त मील करने की पद्धनत
120. अधधननयम के प्रयोिनों के मलये प्रिेश आहद
121. ननि िचन म मलों म न्य य लयों द्ि र हस्तिेप क िििन
122. ननि िचन य धचक
123. ऐसे ्यजततयों को ननष्पक मसत करने की शजतत िो फीस क सांद य करने से इांक र कर
124. स्ि मी य अधधभोगी द्ि र ् यनतक्रम ककये ि ने पर पांच यत य ग्र म सभ सांकमो क ननष्पप दन कर सकेगी और ्यय िसलू कर सकेगी
125. ग्र म पांच यत के मखु्य लय क बदल ि न , ग्र म सभ क विभ िन, सम मेलन तथ पररितिन
126. ग्र म क विस्थ पन (डडसइस्टैजललशम ट) 7
127. खण्ड तथ जिल पांच यत की सीम ओां म पररितिन
128. सरक री भमूमयों क प्रबांध अध्याय 14 संपरीक्षा
129. पांच यतों की सांपरीि अध्याय 14 - क अिुसूधचत क्षेत्रों में पंचायतों के भलये ववभशष्ट उपबिं 129-क. पररभ ष एाँ 129-ख. ग्र म तथ ग्र म सभ क गठन 129-ग. ग्र म सभ की शजततय ां और कृत्य 129-घ. ग्र म पांच यत के कृत्य 129-ड. स्थ नों क आरिण 129-च. िनपद तथ जिल पांच यत की शजततय ाँ अध्याय 15 निरसि
130. ननरसन तथ ्य िजृत्त
131. विद्यम न स्थ यी कमिच ररयों के सम्बन्ध म ्य िजृत्तय ां
132. कहठन इय ां दरू करने की शजतत अनसुचूी - 1 अनसुचूी - 2 अनसुचूी – 3 अनसुचूी - 4 8 मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 (क्रम ांक 1 सन ्1994) अध्याय 1 प्रारम्भि क
1. सकं्षक्षप्त िाम, ववस्तार और प्रारभि -- (1) इस अधधननयम क सांक्षिप्त न म मध्यप्रदेश (पांच यत र ि एिां ग्र म स्िर ि) अधधननयम, 1993 (क्रम ांक 1 सन ्1994) है।
(2) इसक विस्त र सम्पणूि मध्यप्रदेश पर है:
परन्त ुइसक विस्त र उन अपि दों तथ उप न्तरणों के अध्यधीन रहत ेहुए िो कक अध्य य 14-क म उपबजन्धत ककये गये हैं, अनसुधूचत िते्रों पर होग ।
(3) यह तत्क ल प्रितृ्त3 होग ।
2. पररिाषाएं –– इस अधधननयम म , िब तक सांदभि से अन्यथ अपेक्षित न हो - (एक) “खांड” से अमभप्रेत है ककसी जिले क ऐस िेत्र जिसे र य य सरक र ध र 10 की उपध र (2) के अधीन खांड घोवषत करे;
(एक-क) ''ग्राम सिा का सभमनत'' से अमभ प्रेत है, ग्र म सभ के सदस्यों की स्थ यी स ममनत, तदथि सममनत य कोई अन्य सममनत (दो) ''सहकारी सोसायटी'' क िही अथि होग िो उस ेमध्यप्रदेश सहक री सोस यटी अधधननयम, 1960 (क्रम ांक 17 सन ्1961) म हदय गय है;
(दो-क) ''ववकास आयतुत'' क िही अथि होग िो स्पेशल इक न ममक िोन्स एतट, 2005 (2005 क सां. 28) की ध र 2 के खण्ड (छ) म उसके मलए समनदेुमशत है;)
(तीन) ''म्जला'' से अमभप्रेत है र य य सरक र द्ि र इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलए जिले के रूप म अधधसधूचत कोई जिल , और इसके अन्तगित इस प्रक र अधधसधूचत एक य अधधक र िस्ि जिले आत ेहैं;)
(च र) ''निवााचि'' से अमभप्रते है पांच यत के स्थ न य स्थ नो को भरने के मलए ननि िचन और उसके अन्तगित है ग्र म पांच यत के सरपांच क ननि िचन;
(प ांच) ''निवााचि कायावाहहया'ं' से अमभपे्रत है ननि िचन के मलए सचून ि री होने से प्र रभ होने ि ली और ऐस े ननि िचन क पररण म घोवषत ककये ि ने के स थ सम प्त होने ि ली क यिि हहय ां;)
(छ:) ''कारखािा'' क िही अथि होग िो उस ेक रख न अधधननयम, 1948 (1948 क सां. 63) म हदय गय है;
(स त) ''ग्राम पचंायत'' से अमभप्रेत है ध र 10 की उपध र (1) के अधीन स्थ वपत कोई ग्र म पांच यत;
9 (आठ) ''ग्राम सिा'' से अमभप्रते है ग्र म पांच यत िेत्र के भीतर सम विष्पट ककसी र िस्ि ग्र म य िन ग्र म स े सांबांधधत ननि िचक न म िमलयों म रजिस्रीतय ्यजततयों से ममलकर बनने ि ल कोई ननक य;)
(नौ) ''जिपद पचंायत'' से अमभप्रेत है ध र 10 की उपध र (2) के अधीन स्थ वपत िनपद पांच यत;
(दस) ''स्थािीय प्राधिकारी'' क िही अथि होग िो उस ेमध्यप्रदेश स ध रण खांड अधधननयम, 1957 (क्रम ांक 3 सन ्1958) मे हदय गय है;
(ग् य रह) ''सदस्य'' से अमभप्रते है यथ जस्थनत ककसी ग्र म पांच यत क कोई पांच, ककसी िनपद पांच यत क कोई सदस्य य ककसी जिल पांच यत क कोई सदस्य;
(ब रह) ''घणृोत् प’दक पदाथा'' के अन्तगित है पशओुां के शि, गोबर, कचर , मलमतू्र हद य सड़ ेहुए पद थि य ककसी भी प्रक र की गांदगी;
(तरेह) ''पदिारी'' से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी ग्र म पांच यत क कोई पांच, सरपांच य उपसरपांच, ककसी िनपद पांच यत क कोई सदस्य, अध्यि य उप ध्यि य ककसी जिल पांच यत क कोई सदस्य, अध्यि य उप ध्यि;
(चौदह) ''अन्य वपछड़ा वर्ा'' से अमभप्रेत है र य य सरक र द्ि र यथ अधधसधूचत वपछड़ िगि के ् यजततयों क प्रिगि;
(पन् रह) ''स्वामी'' िब उसक प्रयोग ककसी भमूम य भिन के प्रनत ननदेश से ककय गय है, के अन्तगित िह ्यजतत है िो उस भमूम, य भिन क य उस भमूम य भिन के ककसी भ ग क भ ड़ च हे अपने स्ियां के लेख ेय ककसी ्यजतत य सोस यटी के अधधक य न्य सी के रूप म अथि प्र पक के रूप म प्र प्त कल है;
(सोलह) ''पचं'' से अमभप्रेत है ग्र म पांच यत क कोई पांच;
(सत्रह) ''पचंायत'' से अमभप्रते है यथ जस्थनत कोई ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत;
(अट्ठ रह) ''पचंायत क्षते्र'' से अमभप्रेत है इस अधधननयम के अधीन स्थ वपत ककसी पांच यत क प्र देमशक िेत्र;
(उन् नीस) ''जिसखं् या’’' से अमभपे्रत है अांनतम पिूििती िनगणन मे अमभननजश्चत की गई िनसांख्य जिसके ससुांगत आतके प्रक मशत ककये ि चकेु हैं;
(बीस) ''अध्यक्ष'' और ''उपाध् यक्ष” से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी 3(ग्र म ननम िण सममनत य ग्र म विक स सममनत य िनपद पांच यत) य जिल पांच यत क क्रमांश: अध्यि और उप ध्यि;
(इत कीस) इस अधधननयम के ककसी उपबांध म “ववहहत प्राधिकरी’’ से अमभप्रेत है ऐस अधधक री य प्र धधकरी जिसे र य य सरक र, अधधसचून द्ि र , द्ि र , उस उपबांध के अधीन विहहत प्र धधक री के कृत् यों क ननििहन करने क ननदेश दे;
(ब ईस) ''सावाजनिक बाजार'' य ''सावाजनिक मेला'' से अमभप्रेत है ध र 58 के परन्तकु के अधीन अधधसधूचत यथ जस्थनत कोई ब ि र य मेल ;
10 (तईेस) ''सावाजनिक स्थाि'' से अमभप्रेत है कोई ऐस स्थ न, भिन य सांरचन िो नन िी सांपजत्त नहीां है और िो िनत के उपयोग के मलये खुली है च हे ऐस ेसांस्थ न, भिन य सरचन पांच यत मे ननहहत है अथि नहीां है;
(चौबीस) ''सावाजनिक सड़क'' से अमभप्रेत है कोई ऐसी सड़क, पगडांडी, म गि, चौक, पटरी य र स्त िो िनत -द्ि र , च हे स्थ यी रूप से य अस्थ यी रूप से उपयोग मे ल य ि त है;
(पच्चीस) ''सरपचं'' और ''उपसरपचं'' सेअमभप्रेत है ककसी ग्र म पांच यत क यथ जस्थनत क्रमश: सरपांच और उपसरपांच;
(पच्चीस-क) ''अिसुधूचत क्षते्र'' से अमभप्रेत है भ रत के सांविध न के अनचु्छेद 244 के खांड (1) म ननहदिष्पट अनसुधूचत िेत्र;)
(पच्चीस-ख) ''स्पशेल इकािाभमक जोि'' क िही अथि होग िो स्पेशल इक न ममक िोन्स एतट 2005 (2005 क सां. 28) की ध र 2 के खण्ड (य-क) म उसके मलए समनदेुमशत है;
(छलबीस) ''स्थायी सभमनत'' से अमभप्रेत है इस अधधननयम के उपबांधों के अधीन गहठत यथ जस्थनत ककसी ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत की स्थ यी सममनत;
(सत्त ईस) ''राज्य निवााचि आयोर्'' से अमभप्रेत है र य यप ल द्ि र सांविध न के अनचु्छेद 243-ट (1) के अधीन गहठत र य य ननि िचन आयोग;
(अट ठ ईस) ''कर'' के अन्तगित है इस अधधननयम के अधीन उद्ग्रहणीय कोई कर उपकर रेट य फीस। (उन्तीस) ''ग्राम'' से अमभप्रेत है कोई ऐस ग्र म जिसे र य यप ल द्ि र लोक अधधसचून द्ि र इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये ग्र म के रूप म विननहदिष्पट कक य गय है और उसके अन्तगित इस प्रक र विननहदिष्पट कक य गये ग्र मों क समहू;
स्पष्पटीकरण - शलद ''ग्राम'' म सजम्ममलत है र िस्ि ग्र म तथ िन ग्र म। (तीस) ''म्जला पचंायत'' से अमभप्रेत है ध र 10 की उपध र (3) के भधीन स्थ वपत जिल पांच यत। अध् याय 2 ग्राम सिा
3. ग्राम के सभ बन् ि में अधिसचूिा –– र य यप ल लोक अधधसचून द्ि र ककसी ग्र म य ग्र मों के समहू को इस अधधननयम के प्रयोिन के मलए ग्र म के रूप म विननहदिष्प ट करेग ।
4. ग्राम की मतदाता सचूी – ध र 3 अधीन विननहदिष्प ट प्रत् येक ग्र म के मलए एक मतद त सचूी होगी िो इस अधधननयम और उसके अधीन बन ए गय ननयमों के उपबांध के अनसु र तयै र की ि एगी। 11
5. ग्राम के मतदाताओ ंका रम्जस् रीकरण –– (1) ऐस प्रत् येक ् यजतत ि उस ग्र म स ेसम् बजन्धत विध न सभ ननि चक न म िली म रजिस् रीकृत ककये ि ने के मलए अहहित है य जिसक न म उसम प्रविष्प ट है और िो उस ग्र म क म मलूी त ैर से ननि सी है, उस ग्र म की मतद त सचूी म रजिस् रीकृत ककये ि ने क हकद र होग :
परन् त ु:–– क) कोई ् यजतत एक से अधधक ग्र म की मतद त सचूी म रजिस् रीकृत ककये ि ने क हकद र नहीां होगो;
ख) कोई ् यजतत मतद त सचूी म रजिस् रकृत ककये ि ने क हकद र नहीां होग यहद िह ककसी अन् य स् थ नीय प्र धधकरी से सम् बजन्धत ननि िचन न म िली म रजिस् रीकृत है। स् पष् टीकरण –– (1) अमभ् यजतत “म मलूी तौर से ननि सी क अथि िही होग िे उसके मलये लोक प्रनतननधधत् ि अधधननयम, 1950 (1950 क सां. 43) की ध र 20 म हदय गय है, ककन् त ुइस उप न् तरण के अध् यधीन रहत ेहुऐ कक उसम ककय गय “ननि िचन िते्र’’ के प्रनतननदेश क इस प्रक र अथि लग य ि एग कक िह ‘ग्र म’’ के प्रनत ननदेश है।
(2) कोई ् यजतत ककसी ग्र म की मतद त सचूी म रजिस् रीकृत ककये ि ने के मलये ननरहहित होग , यहद िह विध न सभ ननि िचन न म िली म रजिस् रीकृत ककये ि ने क मलए ननरहहित है। 5-क. ग्राम सिा का र् ि और निर्मि -- प्रत्येक ग्र म के मलए एक ग्र म सभ होगी । ग्र म सभ उसके मलए विननहदिष्पट न म से एक ननगममत ननक य होगी उसक श श्ित उत्तर धधक र होग और उसकी एक स म न्य मरु होगी और िह उतत न म से ि द चल एगी और उतत न म से उसके विरुद्ध ब द चल य ि एग और इस अधधननयम और उसके अधीन बन ए गए ननयमों के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए उसे ककसी िांगम य स्थ िर सांपजत्त अजिित करने, ध रण करने और ्ययन करने, सांविद करने और इस अधधननयम के प्रयोिन के मलए आिश्यक अन्य समस्त ब त करने की शजतत होगी।)
6. ग्राम सिा का सम्भमलि – (1) ग्र म सभ क सजम्मलन कम से कम िनिरी, अप्रलै, िुल ई तथ अतटूबर म होग तथ इसके अनतररतत ग्र म सभ , यहद अपेक्षित हो, अनतररतत सजम्मलन बलु सकेगी और जिले क कलतटर, ऐसे सजम्मलनों के समधुचत इांति म के मलये एक श सकीय अधधक री य कमिच री को न मननदेमशत करेग िो सजम्मलन की क यिसचूी (एिण् ड ) क पररच लन तथ त रीख समय तथ स् थन की सचून समय पर त मील ककय ि न सनुनजश्चत करेग और सजम्मलन की क यिि हहयों क सम्यक सांच लन भी सनुनजश्चत करेग )
(2) ग्र म सभ के प्रत्येक सजम्मलन के मलए, ग्र म सभ के सदस्यों की कुल सांख्य के एक दशम ांश से अन् यनू सदस्यों य ग्र म सभ के कम से कम प ांच सौ सदस्यों, इनम से िो भी कम हो, से गणपनूत ि होग ।
(3) ग्र म सभ के सममल की अध्यित सरपांच द्ि र य सरपांच की अनपुजस्थनत म उपसरपांच द्ि र की ि एगी। उस दश म िबकक सरपांच और उपसरपांच दोनो ही अनपुजस्थत हों िह ां ग्र म सभ के सजम्मलन की अध्यित ग्र म सभ के ऐसे पांच द्ि र की ि एगी िो सजम्मलन म ेउपजस्थत सदस्यों द्ि र उस प्रयोिन के मलये ननि िधचत ककय ि ए। 12
(4) यहद इस सम्बन्ध मे कोई विि द उद् भतू होत है कक तय कोई ्यजतत ग्र म सभ के सजम्मलन म े उपजस्थत होने क हकद र है, तो ऐसे विि द क विननश्चय अध्यित करने ि ले ् यजतत द्ि र ग्र म सभ िते्र की मतद त सचूी मे प्रविजष्पट को ध्य न म रखत ेहुए ककय ि एग और उसक विननश्चय अजन्तम होग ।
(5) ग्र म सभ ओां के बीच उद्ण्ड कोई विि द य ग्र म पांच यत िेत्र के सम विष्पट एक स ेअधधक ग्र म सभ ओां से सम्बद्ध कोई म मले और ध र 7 की उपध र (2) म अन्तवििष्पट समस्त म मल ेउस ग्र म पांच यत की समस्त ग्र म सभ ओां के सांयतुत सजम्मलन के समि ल ए ि एांगे।
(6) उपध र (5) के अधीन सांयतुत सजम्मलन मे ककय गय विननश्चय प्रत्येक ग्र म सभ द्ि र ककय गय विननश्चय समझ ि एग । 6-क. ग्राम सिा का ववशषे सम्भमलि - यहद सरपांच य ग्र म सभ के दस प्रनतशत स ेअधधक सदस्य य पच स सदस्य, िो भी कम हो, ग्र म सभ के विशषे सजम्मलन के मलए मलखखत मे अध्यपेि करत ेहै तो सधचि ऐसी अध्यपेि की प्र जप्त की त रीख से स त हदन के भीतर ऐस सजम्मलन बलु एग । 6-ख. ग्राम सिा का सधचव - ग्र म पांच यत क सधचि ग्र म सभ क भी सधचि होग , सधचि ग्र म सभ के ननयांत्रण धीन होग और ऐसे कति् यों क प लन करेग िो उसे ग्र म सभ द्ि र समनदेुमशत ककए ि ए। 6-र्. ग्राम सिा का ववनिश्चय - (1) ग्र म सभ के ककसी सजम्मलन के समि ल ए गए समस्त म मले यथ सांभि एक मत से विननजश्चत ककए ि एगे जिसम असफल रहने पर उपजस्थत सदस्यों की स म न्य सहमनत (िनरल कॉन् सने् सश) विननश्चय से ककय ि एग । परन् त ुिह ां ककसी ऐसे म मल ेपर मत विमभननत है िह ां ऐस म मल अग मी सजम्मलन के समि ल य ि एग , यहद लग त र दो स् थधगत सजम्मलनों म एकमत य स म न् य सहमनत (िनरल कॉन् सने् सश) स ेविननश् यच नही ककय ि त है तो ऐस म मल उपजस्थत सदस् यों के बहुतम द्ि र , गपु् त मतद न से विनन जश्चत ककय ि एग । तम बर बर होने के दश म सजम्मलन की अध् यित करने ि ले ् यजतत क द्वितीय य ननण ियक तम होग ।
(2) यहद इस सांबांध म कोई विि द उद्भतू होत है कक तय कोई ् यजतत मत देने क हकद र है तो ऐसे विि द क विननश्चय अध्यित करने ि ले ् यजतत द्ि र ग्र म सभ िेत्र की मतद त सचूी म प्रविजष्पट को ध्य न म रखत ेहुए ककय ि एग और उसक विननश्चय अांनतम होग ।
7. ग्राम सिा की शम्ततयां और कृत्य तथा उसका वावषाक सम्भमलि - (1) उन ननयमो के अधीन िो र य य सरक र इस ननममत्त बन ए और ऐसे स ध रण य विशषे आदेशों के, िो र य य सरक र द्ि र समय-समय पर ि री ककये ि एां, अधीन रहत ेहुए ग्र म सभ की ननम्नमलखखत शजततय ाँ तथ कृत्य होंगे, अथ ित:्–– (क) ग्र म के आधथिक विक स तथ ऐसी स्कीमों की पहच न तथ उनकी प्र थमम कत के मलए मसद्ध ांतों को अधधकधथत करन ;
(ख) स म जिक तथ आधथिक विक स के मलये ऐसी योिन एाँ जिनम समस्त ि वषिक योिन एां सजम्ममलत हैं, क यिक्रमों तथ पररयोिन ओां को ग्र म पांच यत द्ि र ऐसी योिन ओां, क यिक्रमों तथ पररयोिन ओां 13 क कक्रय न्ियन आरम्भ करने से पिूि अनमुोहदत करन ;
(ग) ग्र म पांच यत के ि वषिक बिट पर विच र करन और उस पर मसफ ररश करन ;
(घ) ग्र म पांच यत की सांपरीि ररपोटि तथ ि वषिक लेख ओां पर विच र करन ;
(ड.) ग्र म पांच यत द्ि र खण्ड (ख) म ननहदिष्पट योिन ओां, क यिक्रमों तथ पररयोिन ओां के मलये ननधधयों के समधुचत उपयोग को अमभननजश्चत करन तथ प्रम खणत करन ;
(च) गरीबी अन्मलून तथ अन्य क यिक्रमों के अधीन हहत धधक ररयों के रूप म ् यजततयों की पहच न करन तथ चयन करन ;
(छ) हहत धधक ररयों को ननधधयों य आजस्तयों के समधुचत उपयोग तथ वितरण को सनुनजश्चत करन ;
(ि) स मदु नयक कल्य ण क यिक्रमों के मलये लोगों को गनतशील करन ;
(झ) ग्र म म विक स स्कीमों की प्रसवुिध ओां के कक्रय न्ियन, उन्ह बन ए रखने तथ उनके स म्य पणूि वितरण के मलये ्यजततयों के सकक्रय योगद न को सनुनजश्चत करन ;
(ञ) िनस ध रण के बीच स म न्य चेतन म अमभिवृद्ध करन ;
(ञ-एक) स म जिक सेतटरों म ऐसी सांस्थ ओां तथ ऐसे कृत्यक ररयों पर, िो ग्र म पांच यत को अांतररत य ग्र म पांच यत के द्ि र ननयतुत ककये गये हैं उस पांच यत के म ध्यम से ननयांत्रण करन ;
(ञ-दो) ग्र म के िेत्र के भीतर के प्र कृनतक स्त्रोतों क जिनके अन्तगित भमूम, िल, िन आत ेहैं, सांविध न के उपबांधों और तत्समय प्रितृ्त अन्य ससुांगत विधधयों के अनसु र प्रबन्ध करन ;
(ञ-तीन) ग्र म पांच यत को लघ ुिल शयों के विननयमन तथ उपयोग मे सल ह देन ;
(ञ-च र) स्थ नीय योिन पर तथ ऐसी योिन ओ के स्त्रोतों और ् ययो पर ननयत्रण रखन ;) और स्िच्छत , सफ ई और उसेन क ननि रण और उसक उपशमन;
(ट) स िििननक कुओां, तड़ गों और त ल बों क ननम िण, मरम्मत और अनरुिण तथ धरेल ूउपभोग के मलए िल प्रद य;
(ड.) नह ने तथ धोने और प लत ूपशओुां को पीने के मलए िल प्रद य हेत ुबल के स्त्रोतो क सजन्नम िण और अनरुिण;
(ढ) ग्र मीण सड़को, पमुलयो, पलुो, ब धो तथ स िििननक उपयोधगत के अन्य सकमो तथ भिनों क सजन्नम िण और अनरुिण;
(ण) स िििननक सड़को, सांड सो, न मलयो, त ल बो, क्ष्यो तथ अन्य स िििननक स्थ नो क सजन्नम िण, अनरुिण और उनकी सफ ई;
(त) उपयोग म न ल ये ि ने ि ले कुओां, अस्िच्छ तड़ गों, ख ईयों तथ गड ढों को भरन और सीढ़ीद र 14 कुओां (ब िडड़यों) को स्िच्छ कुओ मे पररिनत ित करन ;
(थ) ग्र म म गो और अन्य स िििननक स्थ नो पर प्रक श की ्यिस्थ करन , (द) स िििननक म गो तथ स्थ नों और उन स्थलों म िो ननिी सम्पजत्त न हों य िो स िििननक उपयोग के मलए खुले हों, च हे ऐझे स्थल पांच यत म ननहहत हो य र य य सरक र के हो, ब ध ओां तथ आग े ननकले हुए भ ग को हट न ;
(ध) मनोरांिनों, खेल-तम शों, दकु नों, भोिनगहृों और पेय पद थो, ममठ इयो, फलों, दधू तथ इसी प्रक र की अन्य िस्तओुां के विके्रत ओां क विननयमन और उस पर ननयांत्रण;
(न) मक नों, सांड सों, छ लयों, न मलयों तथ तकश शौच लयी के सजन्नम िण क विननयमन;
(प) स िििननक भमूम क प्रबांध और ग्र म स्थल क प्रबांध, विस्त र और विक स;
(फ) (एक) शिों, पश-ुशिों और अन्य घणृोत्प दक पद थो के ्ययन के मलए स्थ नों क विननयमन;
(दो) ल ि ररस शिों और पश ुशिों क ्ययन;
(ब) कचर इकदठ करने के मलए स्थ नों क पथृकृ रिण;
(भ) म ांस के विक्रय तथ परीिण क विननयमन;
(म) ग्र म सभ की सम्पजत्त क अनरुिण;
(य) क िी ह ऊस की स्थ पन और प्रबांध और पशओु से सांबांधधत अमभलेखों क रख ि न ;
(कक) सांसद द्ि र बन ई गई विधध द्ि र य उसके अधीन र ष्परीय महत्ि के धोवषत ककये गए प्र चीन तथ ऐनतह मसक स्म रको को छोडकर अन्य ऐसे प्र चीन तथ ऐनतह मसक स्म रको क अनरुिण और च र ग हों तथ अन्य भमूमयों क बन य रख ि न िो ग्र म सभ म ननहहत य उसके ननयत्रण धीन हैं;
(खख) िन्म, मतृ्य ुऔर विि हों के अमभलखेो क रख ि न ;
(गग) िनगणन क यि म और र य य सरक र य केन्रीय सरक र य विधधपिूिक गहठत ककसी अन्य स्थ नीय प्र धधकां रण द्ि र सच मलत सिेिणों म सह यत करन ;
(घघ) स ांसधगिक रोगों की रोकथ म मे सह यत करन ;
(डड.) इनोन्के्रशन और टीक लग ने म सह यत करन तथ मनषु्पयों एिां पशओुां की सरुि के मलये ऐसे अन्य ननि रक उप यो को िो सबांधधत सरक री विभ गों द्ि र विहहत ककय ेि एां, प्रिनत ित करने म सह यत करन ;
(चच) ननिःशतत तथ ननर धश्रतों की सह यत करन ;
(छछ) यिु कल्य ण, पररि र कल्य ण तथ खेलकूद क अमभिधिन तयन ;
15 (िि) (क) िीिन तथ सम्पजत्त की सरुि के मलए;
(ख) आग की रोकथ म, आग बझु ने और ऐसे आग लग ि ने पर सम्पजत्त की सरुि करने के मलए रि सममनत की स्थ पन करन ;
(झझ) ििृ रोपण तथ ग्र मिनों क सांरिण;
(ञञ) दहेि िैसी स म जिक बरु ईयों को दरू करन ;
(टट) (एक) गांभीर तथ आप ती म मलों म ननधिन ् यजततयों के मलये धचककत्सीय सह यत की ् यिस्थ करने के प्रयोिन के मलए; य (दो) ककसी ननधिन ्यजतत य उसके कुटुम्ब के ककसी सदस्य की अय येजष्पट करने के प्रयोिन के मलए; य (तीन) ककसी ननधिन ्यजतत के फ यदे हेत ुककसी अन्य ऐसे प्रयोिन के मलये िैस कक र य य सरक र द्ि र समय-समय पर अधधसधूचत ककय ि ए, ऐसे ननबिन्धनों तथ शतो के अध्यधीन रहत ेहुए, िो विहहत की ि एां, उध र मांिूर करन ;
(ठठ) (एक) र य य सरक र, कलेतटर य इस सांबांध म र य य सरक र द्ि र प्र धधकृत ककसी अन्य अधधक री द्ि र अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयों तथ अन्य वपछड़ ेिगो की दश सधु रने के मलए उप यों के सांबांध म और विशषेत: अस्पशृ्यत ननि रण के सांबांध म हदये गए, य ि री ककये गए ननदेशों य आदेशों क क य िन्ियन;
परन्त ुिह ां ऐसे कोई कृत् य ग्र म सभ को सौंपे गए हैं िह ां िह यथ जस्थनत र य य सरक र जिल पांच यत य िनपद पांच यत के अधधक के रूप म क यि करेगी और उस प्रयोिन के मलए उसे आिश्यक ननधधय ां और अन्य सह यत की ् यिस्थ यथ जस्थनत र य य सरक र जिल पांच यत य िनपद पांच यत द्ि र की ि एगी;
(डड) बनुनय दी सवुिध ओां की योिन बन न और उसक प्रबांध करन ;
(ढढ) विमभन्न क यिक्रमों के अधीन हहत धधक ररयों क चयन करन ;
(णण) ग्र म सभ िेत्र के भीतर विक स स्कीमों और ननम िण क यि को कक्रय जन्ित करन ननष्पप हदत करन और उनक पयििेिण कलन , (तत) हहतग्र हहत मलूक स्कीमों और क यिक्रमों क ननयांत्रण तयन और उन्ह मॉनीटर करन ;
(थथ) ्य पक रूप म िन स ध रण म स म न्य ि गरुकत को प्रोन्नत करन ;
(दद) स मदु नयक क यि के मलए स्िजैच्छक श्रम और सह यत की ् यिस्थ करन तथ स मदु नयक स्ि ममत्ि की ध रण को प्रोन्नत बन , (धध) अपनी िेत्रीय अधधक ररत के भीतर जस्थत विननहदिष्पट बल िते्र तक लघ ुिल ननक यों की योिन 16 बन न , स्ि ममत्ि रखन और प्रबन्ध करन ;
(नन) मछली पकड़ने और अन्य ि खणजय यक प्रयोिनों के मलए ककसी विननहदिष्पट िते्र तथ लघ ुिल ननक य को पदटे पर देन ;
(पप) मसांच ई प्रयोिन के मलए नहदयो, िलध र , लघ ुिल ननक यो के उपयोग को विननयममत करन ;
(फफ) ग्र म सभ को अांतररत य उसके द्ि र ननयत ककये गए समस्त स म जिक िेत्रों म सांस्थ ओां और कृत् यक ररयों पर ननयांत्रण रखन ।)
(2) ग्र म सभ क ि वषिक सजम्मलन, आग मी वित्तीय िषि के प्र रम्भ होने के कम से कम तीन म ह पिूि ककय ि एग और ग्र म पांच यत ऐसे सजम्मलन के समि ननम्नमलखखत ब त ेरखेगी: - (क) लखे ओां क ि वषिक वििरण;
(ख) पिूििती वित्तीय बषि के प्रश सन की ररपोटि;
(ग) आग मी वित्तीय िषि के मलये प्रस्त वित विक स तथ अन्य क यि सम्बन्धी क यिक्रम;
(घ) अांनतम सांपरीि हटप्पण और उसके सम्बन्ध म हदये गये उत्तर, यहद कोई हों;
(ड.) ग्र म पांच यत क ि वषिक बिट तथ अगले वित्तीय िषि के मलये ि वषिक योिन । (2-क) ग्र म पांच यत ऐसे म मलो को ग्र म सभ के समि रखेगी जिन्ह कक िनपद पांच यत, जिल पांच यत, कलतटर य इस ननममत्त प्र धधकृत कोई अधधक री ऐसे सजम्मलन के समि रखे ि ने की अपेि करे।)
(3) ग्र म पांच यत इस ध र के अधीन अपने समय के म मलों के सम्बन्ध मे ग्र म सभ द्ि र दी गई मसफ ररशों को, यहद कोई हो, क य िजन्ित करेगी। 7-क. ग्राम सिा की स्थायी सभमनत तथा तदथा सभमनत - (1) ग्र म पांच यत अपने कृत्यों तथ कत्ति् यों क ननििहन करने के मलए ग्र म सभ की ननम्नमलखखत स्थ यी सममनतयों क गठन करेगी, अथ ित:्-
(1) ग्र म ननम िण सममनत; और
(2) ग्र म विक स सममनत।)
(2) उपध र (1) म उजल्लखखत स्थ यी सममनतयों के अनतररतत, ग्र म सभ , ककसी समयबद्ध क यि के कक्रय न्ियन के मलए एक य अधधक ऐसी तदथि सममनतयो क गठन कर सकेगी िसैी कक िह आिश्यक समझे। सममनत म ेऐसे सदस्य सम विष्पट होग ेिो सममनत को सौंपे गए क यि म हहत रखत ेहैं टेक होल्डर सममनत ग्र म सभ द्ि र क यि के सम पन ररपोटि प्रस्ततु करने तथ क यि के मलू्य ांकन करने के पश्च त ्अजस्तत्ि म नहीां रहेगी ।
(3) ऐसी सममनतयों िो ग्र म सभ की अधधक ररत के भीतर पहले से ही क यि कर रही हो, ग्र म सभ के अनमुोदन से क यि करती रह गी। 17
(4) सदस् यों की सांख् य , स् थ नों क आरिण, पद िधध, त् य गपत्र तथ हट ए ि ने के मलए प्रकक्रय , क यि सांच लन, सदस् य होने के मलए प त्रत , सजम्मलन, ररजतत को भरे ि ने क ढांग तथ स् थ यी सममनतयों और तदथि सममनतयों की प्रकक्रय ऐसी होगी िो कक विहहत की ि ए। 7-ख. स् थायी सभमनतयों का र् ि और उिके कृत् य –– (1) ग्र म ननम िण सममनत, ग्र म पांच यत के एक अमभकरण (एिेन् सी) के रूप म क यि करेगी और प ांच ल ख रूपये तक के समस् त ननम िण क यि तथ ग्र म पांच यत, ग्र म सभ द्ि र सौप गए अन् य क यों क ननष्प प दन करेगी।
(2) ग्र म पांच यत क सरपांच, ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत, क पदेन अध् यि होग । (***)
(4) ग्र म विक स सममनत क गठन तथ उसके कृत् य ऐसे होंगे िैसे कक विहहत ककए ि एां।
(5) ग्र म ननम णि सममनत के सदस् य, ग्र म विक स सममककत म ऐसी रीनत म सजम्ममलत ककए ि एांगे िैसी कक विहहत ि ए।
(6) सममनत के गठन तथ ननि िचन से सांबांधधत समस्त विि द ध र 122 तथ उसके अधीन बन ए गए ननयमों के उपबांधों द्ि र ननपट ये ि एांगे। (7-ग. ***) (7-घ. सभमनत की शम्ततयां कृत्य तथा कत्ताव्य - सममनत की शजततय ां, कृत्य तथ कत्ति् य ऐसे होंगे िो ग्र म सभ द्ि र समय-समय पर उस ेसौंपे ि एां। प्रत्येक सममनत, ग्र म सभ के प्रनत उत्तरद यी तथ िि बद र होगी और उसके ननयांत्रण तथ पयििेिण के अधीन क यि करेगी। (7-ड. सदस्य का हटाया जािा - ग्र म सभ को, अमभमलखखत ककए ि ने ब ले क रणों स ेककसी भी समय सममनत के ककसी भी सदस्य को हट ने की शजतत होगी।) (7-च ग्राम निमााण सभमनत तथा ग्राम ववकास सभमनत की शम्ततयां तथा कत्ताव्य – ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत सांयतुत रूप से ग्र म के सांपणूि विक स के मलए एक योिन तयै र करेगी तथ इसे ग्र म सभ के अनमुोदन के मलए प्रस्ततु करेगी।) (7-छ. स्थायी सभमनत का सधचव - ग्र म पांच यत क सधचि, ग्र म सममनत तथ ग्र म विक स सममनत, क भी पदेन सधचि होग । (7-छक. ग्राम सिा की दीघाकाभलक ववकास योजिा का तयैार क्रकया जािा - (1) ग्र म सभ आग मी दस िषो म प्र प्त होने ि ली अनमु ननत ननधध क मलू्य ांकन करेगी और विशषेज्ञों की सह यत से ग्र म विक स के मलए दस िषीय दीघिक मलक योिन तयै र करेगी और उसे अनमुोहदत करेगी।
(2) उपध र (1) के अधीन योिन , ग्र म सभ की भमूम उपयोग योिन तथ बनुनय दी सखु-सवुिध ओां की आिश्यकत ओां को ध्य न म रखत ेहुए, प्रनतिषि ग्र म सभ के ग्र म कोष को प्र प्त होने ि ले वित्तीय सांस धनों पर आध ररत ि वषिक योिन के म ध् यम से दीघिक मलक योिन प्र थममकत 18 के आध र पर तयै री की ि एगी। 7 -छख. ग्राम निमााण सभमनत तथा ग्राम ववकास सभमनत के अध् यक्ष और सदस्यों के ववरुद्ध अिशुासनिक कारावाई - ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत क अध्यि और प्रत्येक सदस्य उनके विरुद्ध कोई अनशु सननक क रिि ई की ि ने के मलए भ रतीय दण्ड सांहहत , 1860 (1860 क 45) की ध र 21 के अथि के अांतगित लोकसेिक समझे ि एगे।) (7-ज. ग्राम सिा के ववनिश्चय के ववरुद्ध सभमनत को अपील - ग्र म सभ के विननश्चय के विरुद्ध अपील, िनपद पांच यत के अध्यि, उस िेत्र की िनपद पांच यत के सदस्य तथ उपखण्ड अधधक री (र िस्ि) से ममलकर बनने ब ली सममनत की अपील सममनत को ऐसी रीनत मे होगी, िो कक विहहत की ि ए।) (7-झ. बजट - प्रत्येक ग्र म सभ , प्रनतिषि ऐसे प्ररूप मे तथ ऐसी रीनत म तथ ऐसी त रीख तक िो विहहत की ि ए, आग मी वित्तीय िषि के मलए अपनी प्र जप्तयों तथ ्यय क बिट प्र रूप तयै र करेगी।) (7-ञ. ग्राम कोष - (1) प्रत्येक ग्र म सभ एक ननधध स्थ वपत करेगी िो ननम्नमलखखत च र भ गो से ममलकर ग्र म कोष कहल एग : - (एक) अन्न कोष; (दो) श्रम कोष; (तीन) िस्त ुकोष; (च र) नगद कोष;
तथ उसमे ननम्नमलखखत िम होगी : - (क) द न;
(ख) अन्य स्रोतों से आय;
(ग) जिल पांच यत र ि ननधध स ेय बत्रस्तरीय पांच यतों की ननधध से प्र प्त कोई र मश भ-ूर िस्ि के आगम, भ-ूर िस्ि पर उपकर, गौण खननि पर प्र प्त रॉयल्टी, मछली पकड़ने के अधधक र के पटे्ट, चर ई फीस तथ श ल भिन उपकर से प्र प्त आय िो कक र य य सरक र द्ि र विहहत य ननयत की ि ए;
(ध) अनसुचूी 1-क तथ अनसुचूी 2-क म यथ उजल्लखखत अधधरोवपत कर, शलु्क, पथकर और फीस तथ ग्र म सभ की अन्य आय; और (ड.) केन्रीय सरक र य र य य सरक र द्ि र प्र योजित विमभन्न स् कीमों के अधीन ग्र म पांच यत द्ि र प्र प्त कोई र मश िो केन्रीय सरक र य र य य सरक र द्ि र विहहत म नदण्डो के अनसु र ग्र म सभ को आिांहटत की ि नी हो।
(2) इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ए गए ननयमों के उपनधो के अध्यधीन रहत ेहुए, ग्र म सभ म ननहहत समस्त सांपजत्त और ग्र म कोष इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलए य ग्र म के विक स सांबांधी कक्रय कल पों से सांबांधधत अन्य प्रयोिनों के मलए य ऐसे अन्य ्ययों के मलए उपयोजित ककय ि एग िो ग्र म सभ अनमुोहदत कर ;
परन्त ुककसी स्कीम के अधीन प्र प्त की गई ननधधयों क उपयोग यथ जस्थनत, केन्रीय सरक र 19 य र य य सरक र द्ि र ि री ककए गए म गिदशिक मसद्ध ांतों के अनसु र ककय ि एग ।
(3) ग्र म कोष ऐसी रीनत म तथ ऐसे प्ररूप म रख ि एग और सांध ररत ककय ि एग िैस कक विहहत ककय ि ए।
(4) ग्र म कोष क प्रितिन ग्र म विक स सममनत द्ि र ककय ि एग तथ ग्र म कोष म से समस् त रकम ग्र म सभ के अनमुोदन से ग्र म विक स सममनत क अध् यि तथ ग्र म पांच यत के सधचि के सांयतु त हस् त िर से आहररत की ि एांगी तथ आहरण क लेख ग्र म विक स सममनत के सधचि द्ि र सांध ररत ककय ि एग । ग्र म कोष म हुई समस् त प्र जप्तय ां तथ उससे ककए गए समस् त आहरणों के सांबांध म ि नक री ग्र म सभ के समि उसके आग मी सजम्मलन म रखी ि एगी। 7-ट. लेखा तथा सपंरीक्षा—ग्र म सभ समधुचत रूप से लेख पसु् तक सांध ररत करि एगी तथ लेख ओां क ि वषिक वििरण तयै करेगी। ग्र म सभ के लेख ओां की सांपरीि समय-समय पर ऐसी रीनत म तथ ऐसे प्र जध्स क री द्ि र की ि एगी िो कक विहहत ककय ि ए तथ प्रस् ततु सांपरीि ररपोटि ग्र म सभ के समि आग मी सजम्मलन म रखी ि एगी। 7- . सरकरी कमाचाररयों पर नियतं्रण – (1) ककसी ग्र म सभ को ककसी ऐसे सरक री कमिच री जिसक ग्र मसभ िते्र की सीम ओां के भीतर अधधक ररत िेत्र आत है, क िेतन रोकने, छुट्टी मांिूर करने, क यि क ननरीिण तथ पयििेिण करने की शजतत होगी।
(2) ग्र म सभ को उपध र (1) म ननहदिष्पट सरक री कमिच री के अिच र तथ कत्ति् य की उपेि के मलए श जस्तयों के अधधरोपण के सांबांध म मसफ ररश सिम प्र धधक री को करने की शजतत होगी।) 7-ड. ग्राम सिा के कृत्यों के सबंिं में राज्य सरकार की शम्तत - र य य सरक र, स ध रण य विशषे आदेश द्ि र ग्र म सभ को सौंपी गये कृत्यों तथ कत्ति् यों म िवृद्ध कर सकेगी य उन्ह ि वपस ले सकेगी िह ां र य य सरक र ग्र म सभ को सौपे गए ककन्हीां कृत्यों के ननष्पप दन को अपने ह थ म ले लेती है।) अध्याय 3 पचंायतों की स्थापिा
8. पचंायतों का र् ि - इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये - (क) ग्र म के मलये ग्र म पांच यत;
(ख) खण्ड के मलये िनपद पांच यत; और (ग) जिल के मलये जिल पांच यत;
क गठन ककय ि एग ।
9. पचंायत की अवधि - (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत अपने प्रथम सजम्मलन के मलये ननयत त रीख से प ांच 20 िषि तक के मलये बनी रहेगी और इससे अधधक नहीां, िब तक कक इस अधधननयम के अधीन समय स े पहल ेविघहटत नहीां कर दी ि ए।
(2) ककसी पांच यत क गठन करने के मलये ननि िचन - - (क) उपध र (1) म विननहदिष्पट उसकी अिधध की सम जप्त के पिूि, (ख) उसके विघटन की त रीख से छह म स की क ल िधध की सम जप्त के पिूि, परू कर मलय ि एग :
परन्त ुिह ां ऐसी शषे क ल िधध, जिसके मलये कोई विघहटत पांच यत बनी रहती, छह म स से कम है, िह ां ऐसी क ल िधध के मलये उस पांच यत क गठन करने हेत ुइस खण्ड के अधीन कोई ननि िचन कर न आिश्यक नहीां होग ।
(3) ककसी पांच यत की अिधध की सम जप्त के पिूि उस पांच यत के विघटन पर गहठत की गई कोई पांच यत उस क ल िधध के केिल उतने शषे भ ग के मलये बनी रहेगी, जिसके मलये विघहटत पांच यत, यहद िह इस प्रक र वि घहटत नहीां की ि ती तो िह उपध र (1) के अधीन बनी रहती।
10. ग्राम पचंायत, जिपद पचंायत और म्जला पचंायत की स्थापिा - (1) प्रत्येक ऐस ेग्र म के मलये िो ध र 3 के अधीन इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये ग्र म के रूप म विननहदिष्पट ककय गय है एक ग्र म पांच यत होगी।
(2) र य यप ल, अधधसचून द्ि र , ककसी जिले को खण्डों म विभ जित कर सकेग । अधधसचून म प्रत्येक ऐसे खण्ड क न म, उसक मखु्य लय और सम विष्पट िेत्र विननहदिष्पट ककय ि एग । प्रत्येक खण्ड के मलये एक िनपद पांच यत होगी िो उस खण्ड के न म से ि नी ि एगी।
(3) प्रत्येक जिले के मलये एक जिल पांच यत होगी :
परन् त ुतत् समय प्रितृ् त ससुांगत विधध के अधीन गहठत प्रत् येक नगर प मलक ननगम, नगर प मलक पररषद य नगर पांच यत अपनी अधधक ररत के भीतर के िेत्र के मलए एक पथृक प्रश सननक इक ई बनेगी।
11. पचंायतों का निर्मि - प्रत्येक ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल पांच यत उस न म से, िो यथ जस्थनत, ग्र म के मलये ध र 3 के अधीन आदेश म य िनपद पांच यत और जिल पांच यत के मलये ध र 10 के अधीन अधधसचून म उनके मलये विननहदिष्पट ककय गय है, एक ननगममत ननक य होगी, उनक श श्ित उत्तर धधक र होग और उनकी एक स म न्य मरु होगी और िे उतत न म से ब द चल एगी तथ उतत न म स ेउसके विरुद्ध ब द चल ए ि एांगे और इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ये गये ननयमों के उपबन्धों के अध्यधीन रहत ेहुए, उन्ह िांगम य स्थ िर सांपजत्त अजिित करने, ध रण करने य अन्तररत करने, सांविद करने और इस अधधननयम के प्रयोिन के मलये आिश्यक अन्य समस्त ब त करने की शजतत होगी।
12. ग्राम पचंायतों का वाडों में वविाजि - प्रत्येक ग्र म पांच यत िेत्र को दस से अन् यनू ि डों म , िैस कलेतटर 21 अिध ररत करे, विभ जित ककय ि एग तथ प्रत्येक ि डि एक सदस्यीय ि डि होग :
परन्त ुिह ाँ ग्र म पांच यत िेत्र की िनसांख्य एक हि र से अधधक हो, िह ाँ उसे ऐसी रीनत म ि डों म विभ जित ककय ि एग जिससे कक ि डों की कुल सांख्य बीस से अधधक न हो और प्रत्येक ब डि की िनसांख्य यथ स ध्य एक िैसी ही होगी :
परन्त ुयह और भी कक ग्र म पांच यत िेत्र की िनसांख्य क और ऐसी पांच यत म ि डों की सांख्य के बीच क अनपु त, ऐसे समणूि खण्ड के मलये जिसके भीतर पांच यत िेत्र आत है, यथ स ध्य एक िैस ही होग ।
13. ग्राम पचंायत का र् ि – (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत ननि िधचत पांचों तथ सरपांच से ममलकर बनेगी।)
(2) यहद कोई ग्र म य ि डि, यथ जस्थनत, ककसी सरपांच य पांच को ननि िधचत नहीां करत है तो उस स्थ न को भरने के मलये यथ जस्थनत, ऐसे ग्र म य ि डि म नई ननि िचन की क यिि हहय ां छ: म स के भीतर प्र रम्भ की ि एांगी :
परन्त ुइस उपध र के अधीन सरपांच क ननि िचन लांबबत होने के क रण ननि िधचत पांच ध र 17 की उपध र
(2), (3) तथ (4) के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए ध र 20 के अधीन प्रथम सजम्मलन म अपने म से एक सरपांच क ननि िचन कर गे िो इस उपध र के अधीन ननि िधचत सरपांच के पदभ र ग्रहण करने तक इस अधधननयम के अधीन सरपांच के समस्त कृत्यों क ननििहन तलेग :
परन्त ुयह और भी कक ग्र म पांच यत के गठन के मलये आगे की और क यिि हहय ां, इस उपध र के अनसु र पांच क ननि िचन लजम्बत होने के क रण रोकी नहीां ि एांगी :
परन्त ुयह और भी कक यहद कोई ग्र म य ि डि पनु: यथ जस्थनत ककसी सरपांच य ककसी पांच को ननि िधचत नहीां करत है तो यथ जस्थनत ऐसे ग्र म म य ऐसे ि डि म पांच के ननि िचन की नई क यिि हहय ां तब तक प्र रम्भ नहीां की ि एगी िब तक कक र य य ननि िचन आयोग क यह सम ध न न हो ि ए कक यथ जस्थनत ऐसे ग्र म से य ऐसे ि डि स ेसरपांच य पांच क ननि िचन ककये ि ने की सांभ ्यत है और यहद आयोग यह विननश्चय करत है कक सरपांच क नय ननि िचन नहीां ककय ि ए, तो प्रथम परन्तकु के अधीन ननि िधचत सरपांच इस अधधननयम के अधीन सरपांच के समस्त कृत्यों क ननििहन करत रहेग ।) (***)
(4) (एक) प्रत्येक ग्र म पांच यत म -– (क) अनसुधूचत ि नतयों, और (ख) अनसुधूच त िनि नतयों, के मलये स्थ न आरक्षित रखे ि एगे और इस प्रक र आरक्षित स्थ नों की सांख्य क अनपु त उस ग्र म पांच यत म प्रत्यि ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नो की कुल सांख्य के स थ यथ स ध्य िही होग िो उस ग्र म पांच यत िेत्र म अनसुधूचत ि नतयों की य अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य क उस ग्र म पांच यत िेत्र की कुल िनसांख्य के स थ है, ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र उस पांच यत म 22 मभन्न-मभन्न ि डों के मलये विहहत रीनत से (***) आिांहटत ककये ि सक गे। (दो) ककसी ग्र म पांच यत म िह ाँ अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों दोनो के मलये पच स प्रनतशत य पच्चीस प्रनतशत से कम स्थ न आरक्षित ककये गये है िह ां स्क स्थ नो की सांख्य के 25% के स्थ न अन्य वपछड़ ेिगो के मलये आरक्षित ककये ि एगे और ऐसे स्थ न उस ग्र म पांच यत के मभन् न ि डों को विहहत रीनत म चक्र नकु्रम म कलेत टर द्ि र आिांहटत ककये ि एांगे।
(5) उपध र (4) के अधीन आरक्षित ककये गये स्थ नो की कुल सांख्य के कम से कम आधे स्थ न यथ जस्थनत, अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो की महहल ओ के मलये आरक्षित रख ेि य गे।
(6) प्रत्येक ग्र म पांच यत म प्रत्यि ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नों की कुल सांख्य के कम से कम आधे स्थ न जिनके अन्तगित अनसुधूच त ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयों और अन्य वपछड़ ेिगि की महहल ओां के मलये आरक्षित स्थ नों की सांख्य भी है, महहल ओां के मलये आरक्षित रखे ि एांगे और ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र विहहत रीनत म ग्र म पांच यत म मभन्न- मभन्न ि डों के मलये लौट ननक ल कर और चक्र नकु्रम से आिांहटत ककये ि सक गे।
(7) ऐसे ि डों को जिनमे अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो की कोई िनसांख्य नहीां है, उन्ह यथ जस्थनत, अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ े िगो के मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय ि एग ।
14. मत देिे तथा अभ्यथी होिे के भलये अहाता - (1) ऐस प्रत्येक ्यजतत, जिसक न म ककसी ग्र म के मतद त ओां की सचूी म सजम्ममलत है, उस पांच यत के जिसके िेत्र म िह ग्र म सम विष्पट है पदध री के ननि िचन म मत देने के मलये अहहित होग ।
(2) ऐस प्रत्येक ्यजतत िब तक कक िह इस अधधननयम य तत्समय प्रितृ्त ककसी अन्य विधध के अधीन ननरहहित न हो ककसी (***) पांच यत के पदध री के रूप म (ननि िधचत) ककये ि ने के मलये अहहत होग । यहद ककसी न मननदेशन-पत्र म चुन ि धचन् ह न भर गय हो तो इस आध र पर न मननदेशन-पत्र ननरस्त नहीां ककय ि सकत । ऐसी जस्थनत म उधचत यह होग कक ननि िचन अधधक री अभ् य थी को स्िेच्छ से कोई धचह आिांहटत कर दे।
15. एक साथ सदस्यता का प्रनतषिे - कोई ्यजतत ककसी पांच यत के पदध री के रूप म ननि िचन के मलये यथ जस्थनत एक से अधधक ि डों य ननि िधचत िते्रों से खड़ होने के मलये प त्र नहीां होग ।
16. सहयोजि के भलए सम्भमलि -- (***)
17. सरपचं और उप-सरपचं का निवााचि - (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत म एक सरपांच तथ एक उप-सरपांच होग । कोई ्यजतत िो -– (एक) पांच के रूप म ननि िधचत ककये ि ने के मलये अहहत है;
(दो) सांसद के ककसी भी सदन क सदस्य य र य य विध न सभ क सदस्य नहीां है; और 23 (तीन) ककसी सहक री सोस इटी क सभ पनत य उप-सभ पनत नहीां है, उपध र (2), (3) और (4) के उपबन्धों के अध्यधीन रहत ेहुए, सरपांच के रूप म उन ्यजततयों द्ि र , जिनके न म ग्र म पांच यत िेत्र की मतद त सचूी म सजम्ममलत हैं, ऐसी रीनत म ननि िधचत ककय ि एग िो विहहत की ि ए।
(2) (एक) खण्ड के भीतर की ग्र म पांच यतों म अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों के मलये ग्र म पांच यत के सरपांचों के उतनी सांख्य म स्थ न आरक्षित रखे ि एांगे जिनक अनपु त खण्ड के सरपांचों की कुल सांख्य के स थ िही होग िो कक अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य क खण्ड की कुल िनसांख्य के स थ है :
परन्त ुउस खण्ड क भ ग बन ि ने ि ले अनसुधूचत िेत्रों से मभन्न ककसी ऐसे खण्ड म अनसुधूचत िनि नतयों के मलये आरक्षित ककये ि ने ि ले ग्र म पांच यत के सरांपच की सांख्य की गणन करने के प्रयोिन के मलये उस खण्ड के भीतर आने ि ले अनसुधूचत िते्रों की कुल िनसांख्य तथ उसम की अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य अपिजिित कर दी ि एगी। (दो) खण्ड म िह ां अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों की सजम्ममलत िनसांख्य पच स प्रनतशत से तय है, िह ां खण्ड के भीतर ग्र म पांच यतों म सरपांचों के कुल पदों के पच्चीस प्रनतशत स्थ न अन्य वपछड़ ेिगो के मलये आरक्षित ककये ि एांगे।
(3) खण्ड के भीतर सरपांचों की कुल सांख्य के कम से कम आधे स्थ न महहल ओां के मलए आरक्षित रखे ि एांगे।
(4) इस ध र के अधीन आरक्षित रख ेगये स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र खण्ड के भीतर ग्र म पांच यती मे बबहहत रीनत म चक्र नकु्रम से आिहटत ककये ि एगे :
परन्त ुऐसी ग्र म पांच यत को, जिसमे अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयो य अन्य वपछड़ ेिगि की िनसांख्य नहीां है, यथ जस्थनत, अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयो य अन्य वपछड़ ेिगि के मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय ि एग ।
(5) र य य ननि िचन आयोग, पांच यतों के प्रत्येक ननि िचन के पश्च त ्ग्र म पांच यतों के उपसरपांच क ननि िचन तरुन् त ऐसी रीनत म , िैसी कक विहहत की ि ए, करि एग ।
(6) यहद ग्र म पांच यत क सरपांच अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूच त िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो क नहीां है, तो उप सरपांच ऐसी ि नतयों य ऐसी िनि नतयों य ऐसे िगो के पांचो म से ननि िधचत ककय ि एग ।
(7) यहद सरपांच य उप-सरपांच सांसद के ककसी भी सदन क सदस्य य र य य बबध न सभ क सदस्य य ककसी सहक री सोस इटी क सभ पनत य उप-सभ पनत हो ि त है, तो उसके सम्बन्ध मे यह समझ ि एग कक उसने यथ जस्थनत सरपांच य उप-सरपांच के रूप म अपन पद उस त रीख से ररतत कर हदय है जिसको कक िह ऐस सदस्य य सभ पनत य उप-सभ पनत हुआ है और यह समझ ि एग कक ऐसे पद मे ध र 38 के प्रयोिन के मलये आकजस्मक ररजतत हो गई है। 24
(8) इस ध र म ेअन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, सरपांच को, इस अधधननयम के समस्त प्रयोिनो के मलये ग्र म पांच यत क पांच समझ ि एग ।
18. बहहर्ाामी सरपचं (या ग्राम निमााण सभमनत का अध्यक्ष) द्वारा कायािार का सौंपा जािा -- (1) नये ननि िधचत सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि के ब रे म यह समझ ि येग कक उसने ध र 20 म यथ उपबांधधत प्रथम सजम्मलन की त रीख से पद क क यिभ र ग्रहण कर मलय है ।
(2) यहद बहहग िमी सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि) अपने कलि ेम के कोई क गि पत्र य सांपजत्त नये ननि िधचत सरांपच (य ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि) को नहीां सौंपत है य सौंपने से इक र करत है, तो विहहत प्र धधक री मलखखत आदेश द्ि र बहहग िमी सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि] को ननदेश दे सकेग कक िह एक ऐसे समस्त क गि पत्र और सम्पजत्त, िो ऐसे सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि की हैमसयत से उसके कल िे म है, यथ जस्थनत, नये सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि), उप-सरपांच य ग्र म पांच यत के सधचि को तत्क ल सौंप दे।
(3) यहद बहहग िमी सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि उपध र (2) के अधीन ननदेश क अनपु लन नहीां करत है तो विहहत प्र धधक री उसके विरुद्ध ध र 92 के अनसु र क यिि ही करेग और ध र 98 के अधीन अमभयोिन आरम्भ करने के मलये आिश्यक क यिि ही करेग ।
(4) ऐस सरपांच य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि, जिसके विरुद्ध उपध र (3) के अधीन क रिि ई की गई है, और जिसको दोषी प य गय है, दोषी प ये ि ने की त रीख से छ: िषि की क ल िधध के मलये पांच यत क सदस्य य पदध री होने के मलये ननरहहित होग :
परन्त ुर य य सरक र द्ि र लेखबद्ध ककये ि ने ि ले क रणों से ऐसी ननरहित हट ई ि सकेगी य उसकी क ल िधध म कमी की ि सकेगी।
19. निवााचि की अधिसचूिा - सरपांच, उप-सरपांच और पांचों के प्रत्येक ननि िचन को विहहत प्र धधक री द्ि र ऐसी रीनत म , िैस कक विहहत ककय ि ए, प्रक मशत ककय ि एग ।
20. प्रथम सभमेलि और पदावधि -- (1) ग्र म पांच यत क प्रथम सम्मेलन ध र 19 के अधीन प्रक शन की त रीख से 30 हदन के भीतर ककय ि एग । ऐस सम्मेलन विहहत प्र धधक री द्ि र बलु य ि एग और सम्मेलन के सम्बन्ध म ध र 44 के उपबांध यथ शतय उतत सम्मेलन को ल ग ूहोंगे।
(2) ग्र म पांच यत के पदध री प्रथम सम्मेलन की त रीख से प ाँच िषि के मलये पद ध रण करेग ेइससे अधधक नहीां:
परन्त ुइस उपध र म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, ग्र म पांच यत क पदध री होने ि ल प्रत्येक ्यजतत -- (एक) उस ग्र म पांच यत िते्र क मतद त न रहने पर; थ । (दो) उसके र य य विध न सभ के सदस्य य सांसद के ककसी सदन के सदस्य होने पर, तत्क ल अपने पद पर नहीां रह ि एग । 25
(3) यहद उपध र (2) मे िखणित क ल िधध क अिस न होने के पिूि, ग्र म पांच यत पनुगिहठत नहीां की ि ती है तो िह क ल िधध क अिस न हो ि ने पर विघहट त हो ि एगी और ध र 87 के उपबांध उस पांच यत के सम्बन्ध म , छह म स से अनधधक क ल िधध के मलये, जिस क ल िधध के भीतर ग्र म पांच यत इस अधधननयम के उपबांधों के अनसु र पनुगिहठत की ि एगी, ल ग ूहोंगे।
21. सरपचं और उप-सरपचं के ववरुद्ध अववश्वास का प्रस्ताव -- (1) उपजस्थत और मतद न करने ि ले पांचों के तीन चौथ ई स ेअन् यनू ऐसे बहुमत से, िो तत्समय ग्र म पांच यत क गठन करने ि ले पांचों की कुल सांख्य के दो नतह ई से अधधक है, प ररत सांकल्प द्ि र अविश्ि स क प्रस्त ि ग्र म पांच यत द्ि र प ररत कर हदय ि ने पर, िह सरपांच य उप-सरपांच, जिसके विरूद्ध ऐस प्रस्त ि प ररत ककय ि त है, तत्क ल प्रभ ि से अपने पद पर नहीां रह ि येग ।
(2) इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ननयमों म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी कोई सरपांच य उप-सरपांच उस सजम्मलन की अध्यित नहीां करेग , जिसम उसके विरुद्ध अविश्ि स प्रस्त ि पर चच ि की ि ती है, ऐस सजम्मलन ऐसी रीनत म सांयोजित ककय ि एग िो विहहत की ि ए और उसकी अध्यित सरक र के ककसी ऐसे अधधक री द्ि र की ि एगी जिसे विहहत प्र धधक री ननयतुत करे। यथ जस्थनत सरपांच य उप सरपांच को उस सजम्मलन की क यिि ही म बोलने य भ ग लेने क अधधक र होग ।
(3) ककसी सरपांच य उप सरपांच के विरुद्ध अविश्ि स प्रस्त ि - - (एक) उस त रीख स,े जिसको िह सरपांच य उप-सरपांच अपन पद ग्रहण करत है 3(ढ ई िषि की क ल िधध के भीतर (दो) उस त रीख स,े जिसको यथ जस्थनत उस सरपांच य उप-सरपांच की पद िधध क अिस न होत है, पिूििती छह म स की क ल िधध के भीतर (तीन) उस त रीख से, जिसको पिूितन अविश्ि स प्रस्त ि न मांिूर ककय गय थ , 3(छ: म स) की क ल िधध के भीतर, नहीां ल य ि एग ।
(4) यहद यथ जस्थनत सरपांच य उप-सरपांच, उपध र (1) के अधीन प ररत ककये गये प्रस् त ि की विधधम न् यत को चुनौती देने की ि ांछ करत है तो िह उस त रीख से जिसको कक ऐस प्रस् त ि प ररत ककय गय थ स त हदन के भीतर कलेत टर को विि द ननहदिष्प ट करेग िो यथ सांभि उस त रीख से, जिसको कक िह उस े प्र प् त हुआ थ , तीस हदन के भीतर उसे विननजश्चत करेग और उसक विननश् चय अांनतम होग । 21 -क. ग्राम पचंायत के पदाधथकाररयों का वापस बलुाया जािा - - (1) ककसी ग्र म पांच यत के प्रत्येक सरपांच द्ि र अपन पद तत्क ल ररतत कर हदय गय समझ ि एग यहद उसे ऐसी प्रकक्रय के अनसु र िो कक विहहत की ि ए ग्र म पांच यत के भीतर ग्र म सभ क गठन करने ि ले सदस्यों की कुल सांख्य के आधे से अधधक सदस्यों के बहुमत द्ि र गपु्त मतद न से ि पस बलु य ि ए:
परन्त ुि पस बलु ने की ऐसी प्रकक्रय तब तक आरम्भ नहीां की ि एगी िब तक कक ग्र म सभ के सदस्यों की कुल सांख्य के कम से कम एक नतह ई सदस्यों द्ि र सचून पर हस्त िर न तय हदए ि एां और उसे विहहत प्र धधक री को प्रस्ततु न तय हदय ि ए :
26 परन्त ुयह और कक ऐसी कोई प्रकक्रय - - (एक) उस त रीख से जिसको कक ऐस सरपांच आम ननि चिन म ननि िधचत होकर अपन पद ध रण करत है ढ ई िषि के भीतर आरम्भ नहीां की ि एगी; य (दो) यहद उप चुन ि म ननि िधचत सरपांच की आधी क ल िधध क अिस न न हो गय हो, आरम्भ नहीां की ि एगी।
(2) ककसी ग्र म पांच यत के प्रत्येक पांच द्ि र अपन पद तत्क ल ररतत कर हदय गय समझ ि एग यहद ऐसे ि डि क गठन करने ि ली ग्र म सभ , जिसके कक मलये पांच ननि िधचत ककय ि ए, के सदस्यों की कुल सांख्य के आधे से अधधक बहुमत द्ि र गपु्त मतद न द्ि र उसे ि पस बलु मलय ि ए ।
(3) उपध र (1) के उपबांध ककसी पांच के ि पस बलु ए ि ने के सम्बन्ध म यथ िश्यक पररितिन सहहत ल ग ू होंगे।
(4) यहद यथ जस्थनत, कोई सरपांच य पांच पिूििती उपध र के अधीन उसे ि पस बलु ए ि ने की िधैत पर आिेप करने की ि ांछ करत है तो िह, उस त रीख से, जिसको कक िह अपन पद ररतत करत है स त हदन के भीतर, विि द को कलेतटर को ननहदिष्पट करेग िो, यथ सांभि उस त रीख स,े जिसको कक िह उस े प्र प्त हुआ थ 30 हदन के भीतर उसे विननजश्चत करेग और उसक विननश्चय अांनतम होग ।
22. जिपद पचंायत की सरंचिा -- (1) प्रत्येक िनपद पांच यत ननम्नमलखखत स ेममलकर बनेगी - - (एक) ननि िचन िेत्रो स ेननि िधचत सदस्य;
(दो) (***) (तीन) र य य विध न सभ के समस्त ऐसे सदस्य, िो ऐसे ननि िचन िते्री से िो पणूित: य अिर: खण्ड के भीतर पड़त ेहै, ननि िधचत हुए हैं:
परन्त ुर य य विध न सभ क ऐस सदस्य जिसक ननि िचन िेत्र पणूितय नगरीय िते्र म पड़त है, िनपद पांच यत क सदस्य नही होग :
परन्त ुयह और भी कक र य य विध न सभ क कोई ऐस सदस्य िो िनपद पांच यत क सदस्य है यहद िह अनपुजस्थनत, सणत य ककसी अन्य क रण से सममलन म उपजस्थत होने म असमथि है तो िनपद पांच यत के सममल मे उपजस्थत होने के मलये अपने ऐसे प्रनतननधध को न मननदेमशत कर सकेग जिसके प स ऐसी अहित एां हैं, िैस कक इस ननममत्त विहहत ककय ि ए;
(च र) िनपद पांच यत के प्र देमशक िेत्र मे के सरपचोँ क एक पचम श चक्र नकु्रम से एक िषि की क ल िधध के मलये, िैस कक विहहत प्र धधक री द्ि र ल ट ननक ल म अिध ररत ककय ि ए:
परन्त ुकोई भी सरपांच िो इस खण्ड के अधीन एक अिधध के मलये सदस्य है, अरी अिधध के मलये सदस्य होने के मलये प त्र नही होग :
परन्त ुयह और भी कक कोई भी सरपांच िो इस खण्ड के अधीन सदस्य है, ध र 47 के अधीन 27 सममनतयों क सदस्य नहीां होग ।)
(2) से (6) (***)
(7) यहद कोई ननि िचन िेत्र ककसी सदस्य को ननि िधचत नहीां करत है तो उस स्थ न को भरने के मलये ऐसे ननि िचन िते्र म नई ननि िचन की क यिि हहय ां छह म स के भीतर प्र रम्भ की ि एांगी:
परन्त ुिनपद पांच यत के अध्यि तथ उप ध्यि के ननि िचन की आगे की और क यिि हहय ाँ, इस उपध र के अनसु र ककसी सदस्य क ननि िचन लजम्बत होने के क रण रोकी नहीां ि एांगी :
परन्त ुयह और भी कक यहद कोई ननि िचन िेत्र पनु: ककसी सदस्य को ननि िधचत नहीां करत है तो ऐसे ननि िचन िेत्र म सदस्य के ननि िचन की नई क यिि हहय ाँ तब तक प्र रम्भ नहीां की ि येगी िब तक कक र य य ननि िचन आयोग क यह सम ध न न हो ि ए कक ननि िचन िेत्र स ेसदस्य क ननि िचन ककये ि ने की सांभ ्यत है।
23. खण्ड का निवााचि क्षेत्रों में वविाजि -- (1) उपध र (2) के उपनधों के अध्यधीन रहत ेहुए, र य य सरक र, अधधसचून द्ि र ककसी खण्ड को इतनी सांख्य म ननि िचन िते्रों म इस प्रक र विभ जित करेगी जिसस े कक प्रत्येक ननि िचन िेत्र की िनसांख्य यथ स ध्य प ांच हि र हो और प्रत्येक ननि िचन िेत्र एक सदस्यीय ननि िचन िते्र होग :
परन्त ुिह ां ककसी खण्ड की िनसांख्य पच स हि र से कम है, िह ां उस खण्ड को कम से कम दस ननि िचन िेत्रों म विभ जित ककय ि एग और प्रत्येक ननि िचन िेत्र की िनसांख्य यथ शतय एष्पक िैसी होगी:
परन्त ुयह और भी कक ककसी खण्ड मे ननि िचन िेत्रों की कुल सांख्य पच्चीस से अधधक नही होगी ।
(2) ककसी िनपद पांच यत के प्र देमशक िेत्र की िनसांख्य के और ऐसी िनपद पांच यत के ननि िचन िेत्रो की सांख्य के बीच क अनपु त, सम्पणूि र य य म यथ स ध्य एक िैस ही होग ।
(3) (एक) प्रत्येक िनपद पांच यत मे - - (क) अनसुधूचत ि नतयों, और (ख) अनसुधूचत िनि नतयो के मलये स्थ न आरक्षित रख ेि एांगे और इस प्रक र आरक्षित स्थ नो की सांख्य क अनपु त उस िनपद पांच यत मे प्रत्यि ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नों की कुल सांख्य के स थ यथ स ध्य िही होग िो उस िनपद पांच यत िते्र म अनसुधूचत ि नतयो की अथि उस िनपद पांच यत िेत्र म अनसुधूचत िनि नतयो की िनसांख्य क उस िेत्र की कुल िनसांख्य के स थ है और ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र उस िनपद पांच यत मे विहहत रीनत म मभन्न-मभन्न ननि िचन िेत्रो के मलये (***) आिांहटत ककय े ि सकेगे :
परन्त ुउस िनपद पांच यत िते्र क भ ग बन ि ने ि ले अनसुधूचत िेत्रों से मभन्न ककसी ऐसे िनपद पांच यत के अनसुधूचत िनि नतयो के मलये आरक्षित ककये ि ने ि ले स्थ नो की सांख्य की गणन करने के प्रयोिन 28 के मलये उस िनपद पांच यत के भीतर आने ि ले अनसुधूचत िेत्रो की कुल िनसांख्य तथ उसम की अनसुधूच त िनि नतयों की िनसांख्य अपिजिित तय दी ि एगी। (दो) ककसी िनपद म िह ां अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों, दोनों के मलए पच स प्रनतशत य पच स प्रनतशत से कम स्थ न आरक्षित ककये गये हैं िह ां कुल स्थ नो की सांख्य के पच्चीस प्रनतशत स्थ न अन्य वपछड ेिगो के मलये आरक्षित ककये ि येग ेऔर ऐसे स्थ न से मभन्न-मभन्न ननि िचन िेत्रों को विहहत रीनत मे चक्र नकु्रम म कलेतटर द्ि र आिांहटत ककये ि येगे।
(4) उपध र (3) के अधीन, आरक्षित ककये गये स्थ नो की कुल सांख्य के कम से कम (आधे) स्थ न अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों य यथ जस्थनत अन्य वपछड़ ेिगो की महहल ओ के मलये आरक्षित रखे ि य गे।
(5) प्रत्येक िनपद पांच यत म प्रत्यि ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नों की कुल सांख्य के कम स े कम (आधे) स्थ न (जिनके अन्तगित अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयो और अन्य वपछड़ े िगो की महहल ओां के मलये आरक्षित स्थ नों की सांख्य भी है) महहल ओां के मलये आरक्षित रख ेि येग े और ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र िनपद पांच यत म विहहत रीनत म ेमभन्न-मभन्न ननि िचन िेत्रो के मलये ल ट ननक लकर और चक्र नकु्रम से आिांहटत ककये ि सकेगे। (***)
(6) ऐसे ननि िचन िेत्रों म , जिनम अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो की िनसांख्य नहीां है, यथ जस्थनत, अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो के मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय ि येग ।)
24. सहयोजि के भलए सम्भमलि -- (***)
25. जिपद पचंायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निवााचि -- (1) र य य ननि िचन आयोग, पांच यतों के प्रत्येक ननि िचन के पश्च त ्िनपद पांच यतों के अध्यि एिां उप ध्यि क ननि िचन तरुांत ऐसी रीनत म , िैसी कक विहहत की ि ए, करि एग ।
(2) (एक) िनपद पांच यत के अध्यि क पद - - (क) अनसुधूचत ि नतयों; और (ख) अनसुधूचत िनि नतयों;
के मलये आरक्षित रख ि एग और जिले म अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों के मलये आरक्षित अध्यि के पदों की सांख्य क अनपु त उस जिले म ऐसे पदों की कुल सांख्य के स थ यथ स ध्य िही होग िो उस जिले म यथ जस्थनत, अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य क जिले की कुल िनसांख्य के स थ है :
परन्त ुउस जिले क भ ग बन ि ने ि ले अनसुधूचत िते्रों से मभन्न ककसी जिले के अनसुधूचत िनि नतयों के मलये आरक्षित ककये ि ने ि ले िनपद पांच यत के अध्यि के पदों की सांख्य की गणन करने के प्रयोिन 29 के मलये उस जिले के भीतर आने ि ले अनसुधूचत िते्रों की कुल िनसांख्य तथ उसम की अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य अपिजिित कर दी ि एगी। परन ् त ुयह और भी कक िनपद पांच यत के अध्यि के पदों की कुल सांख्य के कम से कम आधे पद न्यनूतम एक के अध्यधीन रहत ेहुए महहल ओां के मलये आरक्षित रखे ि येगे :
परन्त ुयह भी कक इस ध र के अधीन आरक्षित पद विहहत प्र धधक री द्ि र जिले के भीतर िनपद पांच यतों म विहहत रीनत म चक्र नकु्रम से आरक्षित ककये ि येगे :
परन्त ुयह भी कक ऐसी िनपद पांच यतो को, िह ां यथ जस्थनत, अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों के मलये स्थ नो क आरिण नहीां है, यथ जस्थनत ऐसी ि नतयों य ऐसी िनि नतयो के अध्यि के पदो क आरिण करने के मलये अपिजिित कर हदय ि एग । (दो) जिले म िह ां अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों की सजम्ममलत िनसांख्य पच स प्रनतशत से कम है, िह ां जिले के भीतर िनपद पांच यतों के अध्यिो म से पच्चीस प्रनतशत पद अन्य वपछड़ े िगो के मलये आरक्षित ककय ेि येगे।
(3) उपध र (2) तथ (4) के उपनयों के अध्यधीन रहत ेहुए िनपद पांच यत के अध्यि तथ उप ध्यि, उसके ननि िधचत सदस्यों द र तथ उनम से ननि िधचत ककये ि एांगे।
(4) यहद ककसी िनपद पांच यत क अध्यि अनसुधूचत ि नत य अनसु ूधच त िनि नत य अन्य वपछड़ िगो क नहीां है तो उप ध्यि ऐसी ि नतयो य िनि नतयो य ऐसे िगो मे से ननि िधचत ककय ि येग ।
(5) यहद ककसी िनपद पांच यत क अध्यि य उप ध्यि सांसद के ककसी सदन क सदस्य य र य य विध न सभ क सदस्य य ककसी सहक री सोस इटी क सभ पनत य उप सभ पनत हो ि त है, तो उसके ब रे म यह समझ ि येग कक उसने यथ जस्थनत, अध्यि य उप ध्यि के रूप म अपन पद उस त रीख से ररतत कर हदय है जिसको कक िह ऐस सदस्य य सभ पनत य उप सभ पनत हुआ है और ध र 38 के प्रयोिनों के मलये यह समझ ि येग कक ऐसे पद म आकजस्मक ररजततां हो गई है।
26. सदस्यों, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के िामों का प्रकाशि -- िनपद पांच यत के सदस्यों, अध्यि और उप ध्यि के न म विहहत प्र धधक री द्ि र ऐसी रीनत म िैस कक विहहत ककय ि ए प्रक मशत ककये ि एांगे।
27. प्रथम सम्भमलि और पदावधि -- (1) िनपद पांच यत क प्रथम सजम्मलन ध र 26 के अधीन प्रक शन की त रीख से तीस हदन के भीतर ककय ि एग । ऐस सजम्मलन विहहत प्र धधक री द्ि र बलु य ि एग और सजम्मलन के सांबांध म ध र 44 के उपबांध यथ शतय उतत सजम्मलन को ल ग ूहोगे।
(2) इस अधधननयम म िब तक अन्यथ उपबांधधत न हो िनपद पांच यत के पदध री प्रथम सजम्मलन की त रीख से प ाँच िषि के मलये पद ध रण करेग,े इससे अधधक नहीां :
परन्त ुइस उपध र म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी िनपद पांच यत क कोई पदध री खण्ड के भीतर की ग्र म पांच यत के िेत्र क मतद त न रहने पर तत्क ल अपने पद पर नहीां रह ि एग ।
(3) यहद उपध र (2) म विहहत क ल िधध क अिस न होने के पिूि, िनपद पांच यत निीनत: गहठत नहीां 30 की ि ती है तो िह उतत क ल िधध क अिस न हो ि ने पर विघहटत हो ि एगी और ध र 87 के उपबांध उसके सम्बन्ध म छह म स स ेअनधधक क ल िधध के मलये, जिस क ल िधध के भीतर िनपद पांच यत इस अधधननयम के उपबांधों के अनसु र पनुगिहठत की ि एगी, ल ग ूहोगे।
28. अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के ववरुद्ध अववश्बाम का प्रस्ताव - - (1) उपजस्थत तथ मतद न करने ि ल ेननि िधचत सदस्यों से तीन चौथ ई से अन् यनू ऐसे बहुमत से िो तत्समय िनपद पांच यत क गठन करने ि ले ननि िधचत सदस्योंकी कुल सांख्य के दो नतह ई से अधधक है, प ररत सांकल्प द्ि र अविश्ि स क प्रस्त ि िनपद पांच यत द्ि र प ररत क र हदय ि ने पर, िह अध्यि य उप ध्यि, जिसके बबम्ब ऐस प्रस्त ि प ररत ककय गय है, तत्क ल अपने पद पर नहीां रह ि एग ।
(2) इस अधधननयम य उसके अधीन बन ये गये ननयमो मे अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी अध्यि य उप ध्यि उस सजम्मलन की अध्यित नहीां करेग जिसम उसके विरुद्ध अविश्ि स के प्रस्त ि पर चच ि की ि ती है, ऐस सजम्मलन ऐसी रीनत म सांयोजित ककय ि एग िो विहहत की ि ए और उसकी अध्यित सरक र के ककसी ऐसे अधधक री द्ि र की ि एगी जिसे विहहत प्र धधक री ननयतुत कर । यथ जस्थनत अध्यि य उप ध्यि को उस सजम्मलन की क यिि ही म बोलने य अन्यथ भ ग लेने क अधधक र होग ।
(3) अध्यि य उप ध्यि के विरुद्ध कोई अविश्ि स प्रस्त ि – (एक) उस त रीख स,े जिसको िह अध्यि य उप ध्यि अपन पद ग्रहण करत है, ढ ई िषि की क ल िधध के भीतर;
(दो) उस त रीख स ेजिसको यथ जस्थनत उस अध्यि य उप ध्यि की पद िधध क अिस न होत है, पिूििती छह म स की क ल िधध के भीतर;
(तीन) उस त रीख स,े जिसको पिूितन अविश्ि स प्रस्त ि न मक ककय गय थ , 2(छह म स) की क ल िधध के भीतर, नहीां ल य ि एग ।
(4) यहद यथ जस्थनत अध्यि य उप ध्यि उपध र (1) के अधीन प ररत ककये गये प्रस्त ि की विधधम न्यत को चुनौती देने की ि ांछ करत है, तो िह उस त रीख से जिसको कक ऐस प्रस्त ि प ररत ककय गय थ दस हदन के भीतर आयकु को विि द ननहदिष्पट करेग िो यथ सांभि उस त रीख से जिसको कक िह उसे प्र प्त हुआ थ , तीस हदन के भीतर उसे विननजश्चत करेग और उसक विननश्चय अनतम होग ।)
29. म्जला पचंायत का र् ि -- (1) प्रत्येक जिल पांच यत ननम्नमलखखत से ममलकर बनेगी :–– (एक) ननि िचन िेत्रों स ेननि िधचत सदस्य;
(दो) (***) (तीन) लोक सभ के समस्त ऐसे सदस्य, िो सांसदीय ननि िचन िेत्रों क प्रनतननधधत्ि करत ेहैं िो पणूित: य अांशत: जिले के भ ग हैं;
31 (च र) मध्यप्रदेश र य य से ननि िधचत र य य सभ के समस्त ऐसे सदस्य जिनक न म जिले म की ग्र म पांच यत िते्र की मतद त सचूी म आय है;
(प ांच) र य य विध न सभ के समस्त सदस्य िो उस जिले से ननि िधचत हुए हैं:
परन्त ुलोक सभ के ऐसे सदस्य और र य य विध न सभ के ऐसे सदस्य जिनक ननि िचन िेत्र पणूितय नगरीय िेत्र म पड़त है, जिल पांच यत के सदस्य नहीां होंगे। परन्त ुयह और भी कक र य य विध न सभ क कोई ऐस सदस्य य कोई ऐस सांसद सदस्य िो जिल पांच यत क सदस्य है, यहद िह अनपुजस्थनत, रूग्णत य ककसी अन्य क रण से सजम्मलन म उपजस्थत होने म असमथि है तो जिल पांच यत के सजम्मलन म उपजस्थत होने के मलये अपने ऐसे प्रनतननधध को न मननदेमशत कर सकेग जिसके प स ऐसी अहित एां हैं, िैस कक इस ननममत्त विहहत ककय ि ए। (छह) जिले म की िनपद पांच यतों के समस्त अध्यि :
परन् त ुिनपद पांच यत क कोई अध्यि िो इस खण्ड के अधीन सदस्य है ध र 47 के अधीन सममनतयों क सदस् य नहीां होग ।
(2) (***)
(3) (***)
(4) यहद कोई ननि िचन िते्र ककसी सदस्य को ननि िधचत नहीां करत है तो उस स्थ न को भरने के मलये ऐसे ननि िचन िते्र म नई ननि िचन क यिि हहय ां छह म स के भीतर प्र रम्भ की ि य गी:
परन्त ुजिल पांच यत के अध्यि तथ उप ध्यि के ननि िचन की आगे की और क यिि हहय ां इस उपध र के अनसु र ककसी सदस्य क ननि िचन लजम्बत होने के क रण रोकी नहीां ि य गी :
परन्त ुयह और भी कक यहद कोई ननि िचन िेत्र पनु: ककसी सदस्य को ननि िधचत नहीां करत है तो ऐसे ननि िचन िेत्र म नई ननि िचन की क यिि हहय ां तब तक प्र रम्भ नहीां की ि येगी िब तक कक र य य ननि िचन आयोग क यह सम ध न न हो ि ये कक ऐसे ननि िचन िते्र से सदस्य क ननि िचन ककये ि ने की सांभ ्यत है।)
30. म्जल ेका निवााचि क्षते्रों में वविाजि -- (1) उपध र (2) के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए र य य सरक र अधधसचून द्ि र ककसी जिले को इतनी सांख्य म ननि िचन िेत्रों म विभ जित करेगी जिससे कक प्रत्येक ननि िचन िेत्र की िनसांख्य , य ित्स ध् य पच स हि र हो और प्रत्येक ननि िचन िते्र एक सदस्यीय ननि िचन िेत्र होग :
परन्त ुिह ां ककसी जिले की िनसांख्य प ांच ल ख स ेकम है, िह ां उस जिले को कम से कम दस ननि िचन िेत्रो म विभ जित ककय ि एग और प्रत्येक ननि िचन िेत्र की िनसांख्य यथ शतय एक िैसी होगी:
परन्त ुयह और भी कक जिले म ननि िचन िेत्र की कुल सांख्य पतैीस से अधधक नही होगी।
(2) ककसी जिल पांच यत के प्र देमशक िते्र की िनसांख्य के और ऐसे जिल पांच यत िेत्र के ननि िचन िेत्रो 32 की सांख्य के बीच क अनपु त, सम् पणि र य य म यथ स ध्य, एक िैस ही होग ।
(3) (एक) प्रत्येक जिल पांच यत म,े - - (क) अनसुधूचत ि नतयों और (ख) अनसुधूचत िनि नतयों, के मलये स्थ न आरक्षित रख ेि य गे और इस प्रक र आरक्षित स्थ नो की सांख्य क अनपु त उस जिल पांच यत म प्रत्येक ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नों की कुल सांख्य के स थ यथ स ध्य िही होग िो उस जिल पांच यत िेत्र म अनसुधूचत ि नतयों की अथि अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य क उस िते्र की कुल िनसांख्य के स थ है और ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र उस जिल पांच यत म मभन्न-मभन्न ननि िचन िेत्री के मलये (***) आिांहटत ककये ि सकेगे :
परन्त ुउस जिले क भ ग बन ि ने ि ले अनसुधूचत िते्रों से मभन्न ककसी ऐसी जिल पांच यतों म अनसुधूचत िनि नतयों के मलये आरक्षित ककये ि ने ि ले स्थ नो की सांख्य की गणन करने के प्रयोिन के मलये उस जिले के भीतर आने ि ले अनसुधूचत िेत्रो की कुल िनसांख्य तथ उसमे की अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य अपिजिित कर दी ि येगी। (दो) ककसी जिल पांच यत म िह ां अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों, दोनों के मलए पच स प्रनतशत य पच स प्रनतशत से तय स्थ न आरक्षित ककये गये हैं िह ां कुल स्थ नों की सांख्य के पच्चीस प्रनतशत स्थ न अन्य वपछड़ ेिगो के मलये आरक्षित ककये ि येगे और ऐसे स्थ न मभन्न-मभन्न ननि िचन िेत्रों को विहहत रीनत म चक्र नकु्रम से कलेतटर द्ि र आिांहटत ककये ि येगे।
(4) इस प्रक र आरक्षित ककये गये स्थ नों की कुल सांख्य के कम से कम आधे स्थ न, यथ जस्थनत अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो की महहल ओां के मलये आरक्षित रखे ि येगे।
(5) जिल पांच यत म प्रत्यि ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नों की कुल सांख्य के कम से कम आधे स्थ न (जिनके अन्तगित अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयों और अन्य वपछड़ ेिगो की महहल ओां के मलये आरक्षित स्थ नों की सांख्य भी है) महहल ओां के मलये आरक्षित रखे ि एांगे और ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र जिल पांच यत म विहहत रीनत म मभन्न-मभन्न ननि िचन िते्रों के मलये ल ट ननक ल कर और चक्र नकु्रम म आांिहटत ककये ि सक गे। (***)
(6) ऐसे ननि िचन िते्रों को, जिनम अनसुधूचत ि नतयों, अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो की िनसांख्य नहीां है, यथ जस्थनत, अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो के मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय ि एग ।
31. सहयोजि के भलए सम्भमलि -- (***)
32. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निवााचि - - (1) र य य ननि िचन आयोग, पांच यतों के प्रत्येक ननि िचन के पश्च त ् जिल पांच यतों के अध्यि एिां उप ध्यि क ननि िचन तरुन्त ऐसी रीनत मे, िैसी कक विहहत की ि ए, 33 करि एग ।)
(2) (एक) अध्यि के पद (क) अनसुधूचत ि नतयों और (ख) अनसुधूचत िनि नतयों, के मलये आरक्षित रख ेि येग ेऔर अनसुधूच त ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों (जिनके अन्तगित अध्य य 14-क के अधीन अनसुधूचत िते्रों म अनसुधूचत िनि नतयों के मलये आरक्षित अध्यि के पदों की सांख्य भी है) के मलये आरक्षित अध्यि के पदों की सांख्य क अनपु त र य य म ऐसे पदो की कुल सांख्य के स थ यथ शतय िही होग िो र य य म यथ जस्थनत अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य क र य य की कुल िनसांख्य के स थ है:
परन्त ुजिल पांच यत के अध्यि के पदो की कुल सांख्य के कम से कम (आधे) पद महहल ओां के मलये आरक्षित रखे ि येगे :
परन्त ुयह और कक इस ध र के अधीन आरक्षित अध्यि के पद विहहत प्र धधक री द्ि र र य य के भीतर जिल पांच यत म , विहहत रीनत मे चक्र नकु्रम से आरक्षित ककये ि येगे:
परन्त ुयह भी कक ऐसी जिल पांच यत को, िह ां यथ जस्थनत अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूच त िनि नतयों के मलये स्थ नों क आरिण नहीां है, िह ां यथ जस्थनत, ऐसी ि नतयों य िनि नतयों के पदों क आरिण करने के मलये ल ट ननक लने से अपिजिित कर हदय ि येग । (दो) र य य के भीतर जिल पांच यतों के अध्यिों के पदों म स ेपच्चीस प्रनतशत पद अन्य वपछड़ ेिगो के मलये आरक्षित ककये ि येगे।
(3) उपध र (2) तथ (4) के उपबन्धों के अध्यधीन रहत ेहुए जिल पांच यत के अध्यि तथ उप ध्यि, उसके ननि िधचत सदस्यों द्ि र तथ उनम से ननि िधचत ककये ि येगे।)
(4) यहद जिल पांच यत क अध्यि, अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूच त िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो क नहीां है तो उप ध्यि ऐसी ि नतयों य िनि नतयों य िगो के सदस्यों म स ेननि िधचत ककय ि एग ।
(5) यहद ककसी जिल पांच यत क अध्यि य उप ध्यि, सांसद के ककसी सदन क सदस्य य र य य विध न सभ क सदस्य य ककसी सहक री सोस इटी क सभ पनत य उपसभ पनत हो ि त है, तो उसके ब रे म यह समझ ि येग कक उसने यथ जस्थनत, अध्यि य उप ध्यि के रूप म अपन पद उस त रीख से ररतत कर हदय है जिसको कक िह ऐस सदस्य य सभ पनत य उपसभ पनत हो ि त है और ध र 38 के प्रयोिन के मलये यह समझ ि येग कक ऐसे पद म आकजस्मक ररजतत हो गई है।
33. सदस्यों, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के िामों का प्रकाशि -- जिल पांच यतों के सदस्यों, अध्यि और उप ध्यि के न म विहहत प्र धधक री द्ि र ऐसी रीनत म प्रक मशत ककये ि एांगे िो कक विहहत की ि ए। 33-क. भलवपकीय र्लनतयों या लोप का ीक क्रकया जािा -- इस अधधननयम म य उसके अधीन बन ये गये 34 ननयमों म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, ध र 13 की उपध र (4), (5) और (6), ध र 17 की उपध र (2), (3) और (4), ध र 23 की उपध र (3), (4) और (5), ध र 25 की उपध र (2), ध र 30 की उपध र (3), (4) और (5) तथ ध र 32 की उपध र (2) के अधीन स्थ नों के आरिण से सम्बजन्धत कोई मलवपकीय गलती य लोप िो अमभलखे म देखने से ही प्रकट है, ननि िचन क यिि हहय ाँ प्र रम्भ होने के पिूि ककसी भी समय, विहहत प्र धधक री द्ि र र य य सरक र की य इस प्रयोिन के मलये प्र धधकृत ककये गये अधधक री की पिूि अनमुनत से सधु री ि सक गी।
34. प्रथम सम्भमलि और पदावधि -- (1) जिल पांच यत क प्रथम सजम्मलन ध र 33 के अधीन प्रक शन की त रीख से तीस हदन के भीतर ककय ि एग । ऐस सजम्मलन विहहत प्र धधक री द्ि र बलु य ि एग और सजम्मलन के सम्बन्ध म ध र 44 के उपबांध यथ शतय उतत सजम्मलन को ल ग ूहोंगे।
(2) िब तक इस अधधननयम म अन्यथ उपबांधधत न हो, जिल पांच यत के पदध री प्रथम सजम्मलन की त रीख से प ांच िषि के मलये पद ध रण करेग,े इससे अधधक नहीां :
परन्त ुइस उपध र म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, जिल पांच यत क कोई भी पदध री- (क) जिले के भीतर के ग्र म पांच यत िते्र क मतद त ;
(ख) (***) न रहने पर तत्क ल अपने पद पर नहीां रह ि एग ।
(3) यहद उपध र (2) म विहहत क ल िधध क अिस न होने के पिूि, जिल पांच यत निीनत: गहठत नहीां की ि ती है तो िह उतत क ल िधध क अिस न हो ि ने पर विघहटत हो ि एगी और ध र 87 के उपबांध उसके सम्बन्ध म छह म स स ेअनधधक क ल िधध के मलये, जिस क ल िधध के भीतर जिल पांच यत इस अधधननयम के उपबांधों के अनसु र पनुगिहठत की ि एगी, ल ग ूहोंगे।
35. अध् यक्ष और उपाध्यक्ष के ववरुद्ध अववश्वास प्रस्ताव -- (1) उपजस्थत तथ मतद न करने ि ले ननि िधचत सदस्य के तीन चौथ ई से अन् यनू ऐसे बहुमत से, िो तत्समय जिल पांच यत क गठन करने ि ले ननि िधचत सदस्य की कुल सांख्य के दो नतह ई से अधधक है, प ररत सांकल्प द्ि र अविश्ि स क प्रस्त ि जिल पांच यत द्ि र प ररत कर हदय ि ने पर, िह अध्यि य उप ध्यि, जिसके विरुद्ध ऐस प्रस्त ि प ररत ककय ि त है तत्क ल प्रभ ि से अपने पद पर नहीां रह ि एग ।
(2) इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ननयमों म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, कोई अध्यि य उप ध्यि उस सममल की अध्यित नहीां करेग जिसम उसके विरुद्ध अविश्ि स के प्रस्त ि पर चच ि की ि ती है । ऐस सजम्मलन ऐसी रीनत म सांयोजित ककय ि एग िैसी कक विहहत की ि ए और उसकी अध्यित सरक र के ऐसे अधधक री द्ि र की ि एगी जिसे विहहत प्र धधक री ननयतुत करे। यथ जस्थनत अध्यि य उप ध्यि को उस सजम्मलन की क यिि ही म बोलने य अन्यथ भ ग लेने क अधधक र होग ।
(3) अध्यि य उप ध्यि के विरुद्ध कोई अविश्ि स क प्रस्त ि : - 35 (एक) उस त रीख से जिसको िह अध्यि य उप ध्यि अपन पद ग्रहण करत है, ढ ई िषि की क ल िधध के भीतर;
(दो) उस त रीख स,े जिसको यथ जस्थनत उस अध्यि य उप ध्यि की पद िधध क अिस न होत है, पिूििती छह म स की क ल िधध के भीतर;
(तीन) उस त रीख स,े जिसको पिूितन अविश्ि स क प्रस्त ि न मांिूर ककय गय थ छह म स की क ल िधध के भीतर ल य ि येग ।
(4) यहद यथ जस्थत अध् यि य उप ध् यि, उपध र (1) के अधीन प ररत ककये गये प्रस् त ि की विधधम न् यत को चुनौती देने की ि ांछ करत है, तो िह उस त रीख स ेजिसको कक ऐस प्रस् त ि प ररत ककय गय थ , पन् रह हदन के भीतर, र य य सरक र को विि द ननहदिष्प ट करेग िो यथ सांभि उस त रीख से जिसको कक िह उसे प्र प् त हुआ, पैंत लीस हदन के भीतर उसे विननजश्चत करेग और उसक विननश् चय अांनतम होग ।
36. पचंायत का पदिारी होिे के भलये निरहाताएं -- (1) कोई ् यजतत ककसी पांच यत क पदध री होने क प त्र नहीां होग , -- (क) िो इस अधधननयम के प्र रम्भ होने के य तो पिूि य उसके पश्च त ्- - (एक) मसविल अधधक र सांरिण अधधननयम, 1955 (1955 क सां. 22) के अधीन य स्ि पक पद थों (न रकोहटतस) के उपयोग, उपभोग य विक्रय से सम्बजन्धत ककसी विधध के अथि र य य के भ ग म प्रितृ्त तत्सम न विधध के अधीन ककसी अपर ध क मसद्धदोष ठहर य गय है, िब तक कक उसकी दोषमसवद्ध के समय से प ांच बषि की क ल िधध य ऐसी तय क ल िधध िो र य य सरक र ककसी विमशष्पट म मले म अनजु्ञ त करे, ्यतीत न हो चुकी हो; य (दो) ककसी अन्य अपर ध क मसद्धदोष ठहर य गय है और कम से कम छह म स के क र ि स स े दांड हदष्प ट ककय गय है, िब तक कक उसके छोड़ ेि ने से प ांच िषि की क ल िधध य ऐसी कम क ल िधध, िो र य य सरक र ककसी विमशष्प ट म मल म अनजु्ञ त करे, ् यतीत न हो चुकी हो;
य (ख) िो विकृत धचत् त क है और ककसी सिम न् य य लय द्ि र ऐस घोवषत कर हदय गय है; य (ग) िो हदि मलय न् य य-ननणीत ककये ि ने ि ल आिेदक है य िो अननु् मोधचत हदि नयल है; य (***) (गख) जिसने सांपणूि शोध् यों क सांद य नहीां ककय है, िो पांच यत द्ि र िसलूी योग् य हैं और ऐसे आशय की घोषण कक उसके द्ि र ककसी भी मद म पांच यत को ककसी शोध् य धन क सांद य नहीां ककय ि न है, न मननदेशन-पत्र के स थ फ इल नहीां की है; य (गग) जिसने पांच यत तथ सरक र की ककसी भमूम य भिन पर अधधक्रमण ककय है; य ) 36 (घ) पथ िो ककसी पांच यत के अधीन ल भ क कोई पद ध रण करत है, य ककसी अन्य स्थ नीय प्र धधक री की य ककसी सहक री सोस इटी की य र य य सरक र य केन्रीय सरक र की य केन्रीय सरक र य र य य सरक र के ननयांत्रण धीन ककसी पजललक सेतटर उपक्रम की सेि म है :
परन्त ुककसी ् यजतत को मध्यप्रदेश भ-ूर िस्ि सांहहत , 1959 (क्रम ांक 20 सन 1959), के अधीन पटेल के रूप म ननयतुत ककये ि ने के क रण इस खड के अधीन ननरहहित हुआ नहीां समझ ि एग ;
य (ड.) िो र य य सरक र की य केन् र स रक र की य ककसी पांच यत की य अन्य स्थ नीय प्र धधक री की य ककसी सहक री सोस यटी की य केन् रीय सरक री की य र य य सरक र के ननयांत्रण धीन ककसी पजललक सेतटर उपक्रम की सेि से भ्रष्पट च र अथि ननष्पठ हीनत के क रण पदच् यतु कर हदय गय है; य (च) िो पांच यत के स थ, उसके द्ि र य उसकी ओर से की गई ककसी सांविद मे प्रत्यित: य अप्रत्यित: कोई अांश य हहत रखत है, िबकक िह ऐस अांश य हहत रखत है :
परन्त ुककसी भी ्यीतत को खांड (च) के अधीन केिल इस क रण से ननरहहित हुआ नही समझ ि एग कक - - (एक) ककसी सांयतु त स्टॉक कम्पनी (य ि स्ट स्टॉक कम् पनी) म उसक कोई अांश है य मध्यप्रदेश सोस इटी रजिस्रीकरण अधधननयम, 1973 क्रम ांक 44 सन 1973), के अधीन रजिस्रीकृत ककसी सांगम मे य ककसी सहक री सोस इटी म , िो पांच यत के स थ सांविद करेगी य जिसे पांच यत द्ि र य उसकी ओर से ननयोजित ककय ि एग , उसक कोई अांश य हहत है; य (दो) ऐसे ककसी सम च र-पत्र म जिसम पांच यत के क यिकल पों से सम्बजन्धत कोई विज्ञ पन हदय ि त है, उसक कोई अांश य हहत है; य (तीन) िह पांच यत द्ि र य उसकी ओर से कोई डडबेन् चर ध रण करत है य पांच यत द्ि र य उसकी ओर से मलये गये ककसी उध र से अन्यथ सम्बजन्धत है; य (छ) िो पांच यत की ओर से ितैननक विधध-्यिस यी के रूप म ननयोजित ककय गय है; य (ि) िो इस प्रक र के कुष्पठ रोग से पीडड़त है िो सांक्र मक है; य (झ) जिसने ककसी विदेशी र य य की न गररकत स्िेच्छ पिूिक ग्रहण कर ली है य ककसी विदेशी र य य के प्रनत ननष्पठ य अनसुजतत की कोई अमभस्िीकृनत दे दी है; य (ञ) िो इस अधधननयम के अधीन प्रथम ब र ककये ि ने ब ले ककसी ननि िचन म न मननदेशन-पत्र प्रस्ततु करने की त रीख के पिूििती प ांच िपि की क ल िधध के दोर न ध र 130 के अधीन ननरमसत अधधननयम के अधीन ननरहहित कर हदय गय है और ऐसी ननरहित की क ल िधध ्यतीत नहीां हुई है य ऐसी ननरहित नहीां हट दी गई है; य (ट) िो तत्समय प्रितृ्त ककसी विधध के द्ि र य उसके अधीन र य य विध न सभ के ननि िचन के 37 प्रयोिन के मलये ननरहहित है :
परन्त ुकोई भी ्यजतत इस आध र पर ननरहहित नहीां होग कक िह 25 बषि से कम आय ुक है यहद उसने 21 िषि की आय ुपणूि कर ली है;
(ठ) िो र य य विध न-मण्डल द्ि र बन यी गयी ककसी विधध के द्ि र य उसके अधीन इस प्रक र ननरहहित है;
(***)
(2) यहद कोई ्यजतत पांच यत के पदध री के रूप म ननि िधचत (***) ककय ि ने पर – (क) उपध र (1) म िखणित ककन्हीां भी ननरहित ओां के अध्यधीन हो ि त है और ऐसी ननरहित हट ई ि ने योग्य नहीां है य हट ई ि ने योग्य होत ेहुए भी हट ई नहीां गई है य िो उसकी ननरहित को, िो ध र 122 के अधीन ककसी चुन ि य धचक द्ि र प्रश्नगत और विननजश्चत न की गई हो, को ल त ेहुए पद धधक री हो ि त है;
(ख) पांच यत के विरुद्ध विधध ्यिस यी के रूप म ननयोिन स्िीक र कर लेत है;
(ग) पांच यत की इि ित के बबन , पांच यत य उसकी सममनत के क्रमिती सजम्मलनों स ेअनपुजस्थत रहत है य छह म स की क ल िधध म हुए सजम्मलनों म से आधे सजम्मलनों म उपजस्थत नहीां होत है;
तो िह उपध र (3) के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए ऐस पदध री नहीां रह ि एग और उसक पद ररतत हो ि एग :
परन्त ुिह ां ककसी पदध री ने खण्ड (ग) के अधीन अनपुजस्थत रहने की इि ित के मलये पांच यत को आिेदन ककय है, और पांच यत आिदेन की प्र जप्त की त रीख से एक म स की क ल िधध के भीतर आिेदन पर अपने विननश्चय से आिेदक को सधूचत नहीां करती है तो यह समझ ि येग कक आिेहदत इि ित पांच यत द्ि र दे दी गयी है।
(3) प्रत्येक म मले म यह विननजश्चत करने के मलये कक तय उपध र (2) के अधीन कोई पद ररतत हुआ है, सिम प्र धधक री ग्र म पांच यत और िनपद पांच यत के म मले म कलतेटर और जिल पांच यत के सांबांध म आयतुत होग िो य तो ् यजतत द्ि र उसको हदये गये आिेदन पर य स्िपे्ररण स ेअपन विननश्चय दे सकेग । िब तक यथ जस्थनत कलेतटर य आयतुत यह विननजश्चत नहीां करत है कक पद म ररजतत हुई है तब तक िह ्यजतत पदध री बन रहेग :
परन्त ुककसी पदध री के विरुद्ध इस उपध र के अधीन कोई आदेश उसे सनुि ई क यजुततयतुत अिसर हदये बबन प ररत नहीां ककय ि एग ।
(4) उपध र (3) के अधीन यथ जस्थनत कलेतटर य आयतुत के विननश्चय से ्यधथत कोई ्यजतत ऐसे विननश्चय की त रीख से तीस हदन की क ल िधध के भीतर क्रमश: आयतुत य र िस्ि मांडल को अपील कर सकेग और ऐसी अपील म उसक आदेश अांनतम होग । 38
37. पचंायत के पदाधिकाररयों द्वारा त्यार्पत्र -- (1) ग्र म पांच यत क कोई पांच य िनपद पांच यत क कोई सदस्य य जिल पांच यत क कोई सदस्य यथ जस्थनत सरपांच य अध्यि को इस आशय की मलखखत सचून देकर अपन पद त्य ग सकेग ।
(2) ग्र म पांच यत क सरपांच य उपसरपांच य िनपद पांच यत य जिल पांच यत क अध्यि य उप ध्यि विहहत प्र धधक री को मलखखत सचून देकर अपन पद त्य ग सकेग ।
(3) सचून देने की रीनत तथ त्य गपत्र ननविदत्त करने तथ उसके प्रभ िी होने की प्रकक्रय ऐसी होगी िो विहहत की ि ए:
परन्त ुत्य गपत्र ननविदत्त करने ि ल ् यजतत उसके प्रभ िशील होने के पिूि अपन त्य गपत्र ि पस ले सकेग ।
38. ररम्ततयों का िरा जािा --- (1) (क) पांच यत के ककसी पदध री की पद िधध क अिस न होने के पिूि उसकी मतृ्य ुहो ि ने य उसके द्ि र त्य गपत्र हदए ि ने, उसके विरुद्ध अविश्ि स प्रस्त ि प ररत हो ि ने य उसके हट हदये ि ने य उसके र य य विध न सभ क सदस्य य ससद के ककसी सदन क सदस्य हो ि ने की दश म यह समझ ि येग कक ऐसे पद म आकजस्मक ररजतत हो गई है और ऐसी ररजतत इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ये गये ननयमों के उपबधों के अनसु र ननि िचन द्ि र यथ शतय शीघ्र भरी ि येगी। (ख) ककसी ग्र म पांच यत के सरपांच के पद मे आकजस्मक ररजतत हो ि ने की दश म यथ जस्थनत ग्र म पांच यत क सधचि, पांच यत क एक विशषे सजम्मलन तत्क ल-बलु येग ककन्त ुिो ऐसी ररजतत के सम्बन्ध म विहहत प्र धधक री से सचून प्र प्त होने की त रीख से पन्रह हदन के पश्च त ्की न हो और सदस्यअपने मे से ककसी एक ्यजतत को ननि िधचत कर ग ेिो तब तक अस्थ ई रूप से पद ध रण करेग िब तक कक इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ये गये ननयमों के उपबांधों के अनसु र यथ जस्थनत निीन सरपांच ननि िधचत नहीां हो ि त है और यथ जस्थनत ऐस स्थ न पन्न सरपांच ननि िचन के लजम्बत रहने के दौर न सरांपच के समस्त कत्ति् यों क प लन और उसकी समस्त शजततयों क प्रयोग करेग :
परन्त ुयहद सरपांच क पद अनसुधूचत ि नतयो य अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो के सदस्य के मलये य महहल के मलये आरक्षित है तो स्थ न पन्न सरपांच ऐसे प्रिगि से सम्बजन्धत सदस्यो मे से ननि िधचत ककय ेि येग:े परन्त ुयह और भी कक िह ां सरपांच क पद अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगों की महहल के मलये आरक्षित है और उस प्रिगि की कोई ऐसी अन्य महहल नहीां है जिसे स्थ न पन्न सरपांच के रूप म ननि िधचत ककय ि सके, िह ां अन्य आरक्षित प्रिगो मे से ककसी अन्य महहल को आकजस्मक ररजतत के दौर न स् थ न पन् न सरपांच के रूप म ननि िधचत ककय ि सकेग ।] (ग) यहद बहहग िमी पदध री पांच यत के ऐसे ककसी अमभलखे, िस्त,ु धन य सम्पजत्त अपने उत्तरिती को तत्क ल नहीां सौंपत है तो विहहत प्र धधक री मलखखत आदेश द्ि र उस ेऐसे सौंप देने क ननदेश दे सकेग और ऐसे ननदेश क अनपु लन न करने पर विहहत प्र धधक री उसके वि्ि ध र 92 के अनसु र क यिि ही कर सकेग और उसे अमभयोजित करने के मलये ध र 98 के अधीन आिश्यक कदम उठ सकेग । 39
39. पचंायत के पदिारी का निलभबि --- (1) विहहत प्र धधक री ऐसे ककसी पदध री को पद स ेननलजम्बत कर सकेग -- (क) जिसके विरुद्ध भ रतीय दण्ड सांहहत , 1860 (1860 क सां. 45) के अध्य य 5 - क, 6, 9], 9 -क, 10, 12 और अध्य य 16 की ध र 302, 303, 304 -ख, 305, 306, 312 से 318 तक, 366 - क, 366 - ख, 373 से 377 तक और अध्य य 17 की ध र 395 से 398 तक, 408, 409, 458 से 460 तक तथ अध्य य 18 के अधीन य ख द्य स मग्री और औषधध अपममश्रण के ननि रण, (जस्त्रयों तथ ब लक के सम्बन्ध म अननैतक ्य प र, दमन, मसविल अधधक रों के सांरिण और भ्रष्पट च र ननि रण] सम्बन्धी तत्समय प्रितृ्त ककसी भी विधध के अधीन ककन्हीां द जण्डक क यिि हहयों म आरोप विरधचत ककये गये हो य
(2) उपध र (1) के अधीन हदये गये ननलम्बन आदेश की ररपोटि र य य सरक र को दस हदन की क ल िधध के भीतर की ि एगी और िह ऐसे आदेशों के अध्यधीन रहत ेहुए होग िो र य य सरक र प ररत करन उधचत समझे । यहद ननलम्बन आदेश की पजुष्पट र य य सरक र द्ि र ऐसी ररपोटि की प्र जप्त की त रीख से 90 हदन के भीतर नहीां की ि ती है तो िह ननष्पप्रभ िी कर हदय गय समझ ि एग ।
(3) यथ जस्थनत ग्र म पांच यत के सरपांच, िनपद पांच यत य जिल पांच यत के अध्यि को उपध र (1) के अधीन ननलजम्बत कर हदये ि ने की दश म , सम्बजन्धत पांच यत क सधचि य मखु्य क यिप लन अधधक री, पांच यत क एक विशषे सजम्मलन तत्क ल बलु येग ककन्त ुिो ऐसी ररजतत के सम्बन्ध म विहहत प्र धधक री से सचून प्र प्त होने की त रीख से पन्रह हदन के पश्च त ्नहीां हो और सदस्य अपने म से ककसी एक ्यजतत को ननि िधचत कर ग ेिो अस्थ यी रूप से यथ जस्थनत सरपांच य अध्यि क पद ध रण करेग और ऐस स्थ न पन्न सरपांच य अध्यि, उस क ल िधध के दौर न, जिसम ऐस ननलम्बन च ल ूरहत है, यथ जस्थनत सरपांच य अध्यि के समस्त कत्ति् यों क प लन और उसकी समस्त शजततयों क प्रयोग करेग :
परन्त ुयहद सरपांच य अध्यि क पद अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो के सदस्य य इन प्रिगो म स ेककसी प्रिगि की महहल के मलये आरक्षित है तो, स्थ न पन्न सरपांच य अध्यि उसी प्रिगि के सदस्यों म से ननि िधचत ककय ि एग :
परन्त ुयह और भी कक िह ां सरपांच य अध्यि क पद अनसुधूचत ि नतयों य अनसुधूचत िनि नतयों य अन्य वपछड़ ेिगो की महहल के मलये आरक्षित है और पांच यत म उस प्रिगि की अन्य कोई महहल सदस्य नहीां है, जिसे यथ जस्थनत स्थ न पन्न सरपांच य अध्यि के रूप म ननि िधचत ककय ि सके, िह ां अन्य आरक्षित प्रिगो की ककसी अन्य महहल सदस्य को यथ जस्थनत स्थ न पन्न सरपांच य अध्यि के रूप म ननि िधचत ककय ि सकेग ।]
(4) कोई ्यजतत, जिसे उपध र (1) के अधीन ननलजम्बत कर हदय गय है, ककसी ऐसी अन्य पांच यत के सदस्य के य पदध री के पद से भी तत्क ल ननलजम्बत हो ि एग जिसक कक बह सदस्य य पदध री है। ऐस ्यजतत, अपने ननलम्बन के दौर न, इस अधधननयम के अधीन ननि िचन [***] के मलये भी ननरहहित होग ।
40. पचंायत के पदिाररयों का हटाया जािा --- (1) र य य सरक र य विहहत प्र धधक री, ऐसी ि ांच करने 40 के पश्च त ्िैसी िह उधचत समझ,े ककसी पदध री को, ककसी भी समय हट सकेग -- (क) यहद िह अपने कत्ति् यों के ननििहन म अिच र क दोषी रह है; य (ख) यहद उसक पद पर बन रहन लोकहहत म अि ांछनीय है:
परन्त ुककसी भी ्यजतत को पद से तब तक नहीां हट य ि एग िब तक कक उसे यह क रण बत ने क अिसर न दे हदय गय हो कक उसे उसके पद से तयों न हट हदय ि ए । स्पष्टीकरण --- इस उपध र के प्रयोिन के मलये ''अिच र'' के अन्तगित है --- (क) ऐस कोई क यि जिसक --- (एक) भ रत की प्रभसुत्त , एकत और अखांडत पर, य (दो) र य य के सभी लोगों म समरसत और सम न भ्र ततृ्ि की ऐसी भ िन के ननम िण पर िो धमि, भ ष , िेत्र, ि नत य िगि पर आध ररत सभी भेदभ िों से परे हो, (तीन) जस्त्रयों के सम्म न पर, प्रनतकूल प्रभ ि पड़त है, य (ख) इस अधधननयम के अधीन कत्ति् यों के ननििहन म घोर उपेि ;
(ग) पांच यत के ककसी पदध री द्ि र पांच यत म अपने ककसी न तदे र के मलये ननयोिन प्र प्त करने के मलये अपनी जस्थनत य प्रभ ि क प्रत्यित: य अप्रत्यित: प्रयोग करन य ककसी न तदे र को आधथिक फ यद पहुांच ने के मलये कोई क रिि ई करन िैसे कक ककसी प्रक र क कोई पट ट देन , उनके म ध्यम से पांच यत म ककसी क यि को करि न । परन्त ुयह और कक ि ांच म अांनतम आदेश सांबांधधत पद धधक री को क रण बत ओ सचून ि री होने की त रीख से 90 हदन के भीतर प ररत ककय ि एग और िह ां लजम्बत प्रकरण 90 हदन के भीतर विननजश्चत नहीां ककय ि त है, िह ां विहहत प्र धधक री अपने अगले िररष्पठ अधधक री को मलखखत म समस्त त्यों से सधूचत करेग और ि ांच के ननपट रे के मलए समय म िवृद्ध करने क अनरुोध करेग ककन्त ुसमय म ऐसी िवृद्ध 30 हदन से अधधक नहीां होगी।] स्पष्टीकरण --- इस खण्ड के प्रयोिन के मलये अमभ्यजतत ''न तदे र'' से अमभप्रते है वपत , म त , भ ई, बहहन, पनत, पत्नी, पतु्र, पतु्री, स स, श्िसरु, स ल /बहनोई, देिर, स ली, भ भी, ननद, देिर नी, िेठ नी, द म द य पतु्र-िधु।]
(2) कोई ्यजतत, जिसे उपध र (1) के अधीन हट हदय गय है, तत्क ल ककसी ऐसी अन्य पांच यत क सदस्य नहीां रहेग जिसक कक िह सदस्य है । ऐस ् यजतत इस अधधननयम के अधीन ननि िचन [***] के मलये भी छह िषि की क ल िधध के मलये ननरहहित हो ि एग ।
41. एक से अधथक पद िारण करिे का वजाि --- (1) कोई ऐस ्यजतत िो पांच यतों के एक से अधधक पदों पर ननि िधचत हो ि त है तो उस त रीख स,े जिसको कक िह ननि िधचत हुआ है य यहद िह मभन्न-मभन्न त रीखों को ननि िधचत हुआ है तो िसैी पश्च त ्िती त रीखों से 10 हदन के भीतर विहहत 41 प्र धधक री को उसके द्ि र हस्त िररत मलखखत सचून पररदत्त करके यह प्रज्ञ वपत कर सकेग कक िह ऐसी पांच यतों म से ककस पांच यत म पदध री के रूप म सेि करने की इच्छ करत है और तदपुरर, ऐसी अन्य पांच यतों म से जिनम िह सेि करने की इच्छ नहीां करत है, उसक स्थ न ररतत हो ि एग ।
(2) उपयुितत क ल िधध के भीतर ऐसी प्रज्ञ पन के ्यनतक्रम के सम्बन्ध म यह समझ ि येग कक उतने पदों म से केिल एष्पक पद के मलये अधधम न के ननम्नमलखखत क्रम म विकल्प ल ेमलय है --- (क) जिल पांच यत क सदस्य, (ख) िनपद पांच यत क सदस्य, (ग) ग्र म पांच यत क सरपांच, (घ) ग्र म पांच यत क पांच:
परन्त ुयहद ऐस कोई ् यजतत सचून पररदत् त करने के पिूि ककसी पांच यत के सजम्मलन म ह जिर हुआ है, तो उसके सम्बन्ध म यह समझ ि येग कक उसने उतत पांच यत म पद के मलये विकल्प ले मलय है।
(3) उपध र (1) के अधीन कोई प्रज्ञ पन अांनतम तथ अप्रनतसांहणीय समझी ि येगी।
(4) इस ध र के प्रयोिनों के मलये कोई ् यजतत, पररण म की घोषण की त रीख को ननि िधचत हुआ समझ ि येग । अध्याय 4 निवााचि का सचंालि
42. राज्य निवााचि आयोर् की शम्ततयां --- पांच यतों के मलये कर ये ि ने ि ले समस्त ननि िचनों के मलये ननि िचक न म िमलयों तयै र कर ने क और उन सभी ननि िचनों क अधीिण, ननदेशन तथ ननयांत्रण की समस्त शजततय ाँ र य य सरक र द्ि र गहठत र य य ननि िचन आयोग म ननहहत होंगी । 42 -क. अधिकाररयों और कमाचारीवनृ्द को नियतुत करिे और उिके कत्ताव्य और कृत्यों को समिदेुभशत करिे की शम्तत --- (1) ध र 42 के अधीन शजततयों क प्रयोग करत ेहुए र य य ननि िचन आयोग, र य य सरक र के पर मशि से पांच यत के ननि िचन क सांच लन करने के मलये अधधक ररयों और कमिच रीिनृ्द के सदस्यों की ननयजुतत कर सकेग ।
(2) र य य ननि िचन आयोग, उपध र (1) के अधीन ननयतुत ककये गये अधधक ररयो और तमिच रीिनृ्द के सदस्यों को ऐसे कति् य और कृत्य समनदेुमशत तत सकेग और ऐसे अधधक ररयों और कमिच रीिनृ्द के सदस्यों को ऐसी शजततय ां और ऐसे िेत्रो के सम्बन्ध म िैसे कक िह आिश्यक समझे य ननि िचनों के सांच लन और उससे सांसतत य उससे आनषुांधगक विषयो के सम्बन्ध म उधचत समझ,े ननहहत कर सकेग ।]
43. नियम बिािे की शम्तत --- र य य सरक र, र य य ननि िचन आयोग के पर मशि से, ननि िचक न म िमलय ां तयै र करने और पांच यतो के सभी ननि िचनो क सांच लन करने के मलये ननयम बन एगी । 42 अध्याय 5 पचंायतों के कामकाज का सचंालि तथा पचंायत के सम्भमलि की प्रक्रिया
44. सम्भमलि की प्रक्रिया --- (1) इस अधधननयम के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए, पांच यत के सजम्मलन तथ क मक ि के सांच लन की प्रकक्रय ऐसी होगी िो विहहत की ि ए ।
(2) ककसी पांच यत के अध्यि और ककसी पांच यत के अन्य सदस्यों को, च हे िे प्र देमशक ननि िचन िेत्रों से प्रत्यि ननि िचन द्ि र चनेु गये हो य नही, पांच यतो के सजम्मलन म मत देने क अधधक र होग ।
(3) ककसी जिल पांच यत और िनपद पांच यत के सजम्मलन के मलये गणपनूत ि, तत्समय सम्बजन्धत पांच यत गहठत करने ि ले सदस्यों के एक नतह ई से होगी और ग्र म पांच यत के सजम्मलन के मलये गणपनूत ि तत्समय सम्बजन्धत पांच यत गहठत करने ि ले सदस्यो के आधे से होगी] यहद सजम्मलन मे उपजस्थत सदस्यो से गणपनूत ि न हो तो पीठ सीन प्र धधक री सजम्मलन को ऐसी त रीख और समय तक के मलये स्थधगत करेग िैस कक उसके द्ि र ननयत ककय ि ए। इस प्रक र ननयत ककय ेगये सजम्म लन की सचून पांच यत के क य िलय म धचपक दी ि एगी। इस प्रक र स् थधगत सजम्मलन के मलये कोई गणपनूत ि आिश् यक नहीां होगी और कोई नय विषय सजम्मलन के समि विच र के मलये नहीां ल य ि येग ।
(4) अध् यि य सरपांच, यथ जस्थनत जिल पांच यत, िनपद पांच यत य ग्र म पांच यत क सजम्मलन प्रत् येक म स म कम से कम एक ब र बलु एग , यहद अध् यि य सरपांच ककसी म स म सजम्मलन बलु ने म असफल रहत है तो यथ जस्थनत, जिल पांच यत य िनपद पांच यत क मखु् य क यिप लक अधधक री य ग्र म पांच यत क सधचि, विगत सजम्मलन की त रीख के पश् च त ्25 (पच् चीस) हदन क अिस न होत ेही सम् बजन्धत पांच यत के सजम्मलन की सचून ि री करेग ।
(5) ग्र म पांच यत के विगत सजम्मलन तथ च ल ूसजम्मलन के बीच की क ल िधध के आय और ् यय की ररपोटि और स थ ही स थ च ल ूवित्तीय िषि म च ल ूसजम्मलन तक की सांचयी आय और ् यय की ररपोटि ककन् हीां अन् य विषयों के स थ-स थ ग्र म पांच यत के सधचत द्ि र ग्र म पांच यत के स मने रखी ि येगी और ऐसी ररपोटि पर ग्र म पांच यत द्ि र चच ि की ि एगी। िनपद पांच यत और जिल पांच यत की दश म ऐसी ररपोटि मखु् य क यिप लक अधधक री द्ि र उसके सजम्मलन म तीन म स म एक ब र रखी ि एगी। ररपोटि ऐसी रीनत म तयै र की ि एगी िो विहहत की ि ए।
(6) यहद पांच यत के पच स प्रनतशत से अधधक सदस्य, पांच यत के विशषे सजम्मलन के मलये मलखखत अध्यपेि करत ेहैं तो यथ जस्थनत, अध्यि य सरपांच ऐस सजम्मलन ऐसी अध्यपिे प्र प्त होने के स त हदन के भीतर बलु एग । यहद यथ जस्थनत, अध्यि य सरपांच ऐसी अध्यपेि पर सजम्मलन बलु ने म असफल रहत है तो िे सदस्य, जिन्होने विशषे सजम्मलन के मलये अध्यपेि की है, स्ियां ही सजम्मलन बलु सक गे और तदपुरर यथ जस्थनत, जिल पांच यत य िनपद पांच यत क मखु्य क यिप लक अधधक री, ग्र म पांच यत क सधचि] सजम्मलन की सचून ि री करेग ।
(7) यहद यथ जस्थनत, [***] अध्यि य सरपांच, उपध र (4) य (6) के अनसु र क यि करने म कम से कम तीन अिसरों पर असफल रहत है तो िह ध र 40 के अधीन उसके पद स ेहट हदये ि ने के 43 द नयत्ि धीन होग और ध र 40 के उपबांध उसे ल ग ूहोगे जिसे इस प्रक र हट य गय है।
45. पचंायत द्वारा अनंतम रूप से निपटाये र्ये ववषयों पर पिुववाचार --- पांच यत द्ि र एक ब र अांनतम रूप से ननपट हदये गये ककसी विषय पर उसके द्ि र छह म स के भीरत तब तक पनुवििच र नहीां ककय ि एग िब तक कक उसके सदस् यों के कम से कम तीन चौथ ई सदस् यों की, िो मत देने के मलये हकद र हैं, अमभमलखखत सम् मनत उसके सम् बन् ध म अमभप्र प् त न कर ली गई है य िब तक कक विहहत प्र धधक री ने उस पर पनुवििच र करने के मलए ननदेश न हदये हों। अिीिस्थ अभिकरण
46. ग्राम पचंायत की स्थायी सभमनतयां --- (1) ग्र म पांच यत अपने कृत्यों तथ कत्ति् यों के ननििहन के मलये, तीन से अनधधक स्थ यी सममनतय ाँ गहठत कर सकेगी और ऐसी सममनतय ां ऐसी शजततयों क प्रयोग कर गी िो ग्र म पांच यत द्ि र उनको सौंपी ि ए। ये सममनतय ाँ ग्र म पांच यत के स म न्य ननयांत्रण के अधीन होंगी।
(2) कोई भी ्यजतत, एक समय म , दो से अधधक सममनतयों क सदस्य नहीां होग ।
(3) स्थ यी सममनत के सदस्यों की पद िधध और स्थ यी सममनत के क म- क ि के सांच लन की प्रकक्रय ऐसी होगी िो विहहत की ि ए।
47. जिपद पचंायत और म्जला पचंायत की स्थायी सभमनतयां --- (1) प्रत्येक िनपद पांच यत और प्रत्येक जिल पांच यत अपने 3[ननि िधचत सदस्यों] म से ननम्नमलखखत स्थ यी सममनतय ाँ गहठत करेगी, अथ ित ्--- (क) सामान् य प्रशासि सभमनत –- िनपद पांच यत य जिल पांच यत की स् थ पन और सेि ओां, प्रश सन, एकीकृत ग्र मीण विक स योिन , बिट लखे,े कर ध न, और अन् य वित्तीय म मलों तथ उन विषयों स,े िो ककसी अन् य सममनत को आिांहटत कृत् यों के अन् तगित नहीां आत ेहैं, सम्बजन्धत समस् त विषयों के मलय ;
(ख) कृभम सभमनत --- कृवष, पशपु लन, विद्यतु शजतत, कृष्पयकरण जिसम मदृ सांरिण और समोच् यबांध न (कां टूर कां डड ांग) सजम्ममलत हैं, के मलये और मत्स् यप लन, कम् पोष्प ट ख द बन ने बीि वितरण और कृवष एिां पशधुन विक स से सम् बजन्धत अन् य विषयों के मलये;
(र्) भशक्षा सभमनत --- मशि के मलये जिसम प्रौढ़ मशि सजम्ममलत है, नन:शत तों तथ ननर धश्रतों के स म जिक कल्य ण, महहल एिां मशश ुकल्य ण, अस्पशृ्यत ननि रण, ब ढ़, सखू भकूम्प, ओल िजृष्पट, दमुभिि, हटडडीदल तथ अन्य ऐसी आप नतक जस्थनतयों स ेउत्पन्न होने ि ली आपद ओां से र हत के मलए और मद्यत्य ग य मद्यननषधे, स्ि स््य और स्िच्छत , आहदम ि नत तथ हररिन कल्य ण के मलये;
(घ) सचंार तथा सकंमा सभमनत --- सांच र, लधु मस ांच ई, ग्र मीण गहृ ननम िण, ग्र मीण िलप्रद य िल ननक स तथ अन्य लोक सांकमों के मलये;
(ङ) सहकाररता और उद्योर् सभमनत --- सहक ररत , ममत्ययत और अल्प बचत, कुटीर तथ ग्र मोद्योग, ब ि र एिां स ांजख्यकी के मलये;
44 (च) स्वास््य महहला एव ंबाल कल्याण सभमनत --- लोक स्ि स््य तथ स्िच्छत , महहल एिां ब ल कल्य ण, लोक स्ि स््य य जन्त्रकी, ग्र मीण िल प्रद य तथ िल ननक स के मलये। (छ) वि सभमनत --- स म जिक ि ननकी, एकीकृत पड़त भमूम विक स क यिक्रम, र ष्परीय उद्य न, लप ुिनोपि क विक स तथ अन्य ि ननकी क यिक्रमों के मलए।
(2) उपध र (1) म विननहदिष्पट प ांच स्थ यी सममनतयों के अनतररतत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत बबहहत प्र धधक री के अनमुोदन से ककन्हीां ऐसे अन्य विषयों के मलये, िो उतत उपध र म विननहदिष्पट नहीां हैं, एक य अधधक ऐसी सममनतयों क गठन कर सकेगी। (2-क) उपध र 1) य उपध र (2) के अधीन ककसी सममनत को सौपे गये विषय को िनपद पांच यत य जिल पांच यत विहहत प्र धधक री के अनमुोदन से ककसी अन्य ऐसी सममनत को पनु: आिांहटत कर सकेगी य ककसी ऐसी सममनत को कोई ऐस विषय सौंप सकेगी िो अन्यथ विननहदिष्पट नहीां है।]
(3) स म न्य प्रश सन सममनत म उपध र (1) म विननहदिष्पट तथ उपध र 2) के अधीन गहठत समस्त स्थ यी सममनतयों के सभ पनत होग।े
(4) स म न्य प्रश सन सममनत को छोडकर प्रत्येक सममनत म कम से कम प ांच सदस्य होगे िो यथ जस्थनत िनपद पांच यत य जिल पांच यत के सदस्यों द्ि र अपने म स ेविहहत रीनत म , ननि िधचत ककय ेि एांगे:
परन्त ुकोई सममनत अधधक से अधधक दो ऐसे ् यजततयों को सहयोजित कर मकेगी जिन्ह उस सममनत को सौंपे गये विषयों क अनभुि य विशषे ज्ञ न है, इस प्रक र सहयोजित ् यजततयों को सममनत की क यिि हहयों म मत देने क अधधक र नहीां होग :
परन्त ुयह और भी कक मशि सममनत के सदस्यों म तय से तय एक महहल तथ अनसुधूचत ि नत य अनसुधूचत िनि नत क एक ्यजतत होग । […………] (4 - क) (क) विध न सभ क प्रत्येक ऐस सदस्य िो िनपद पांच यत क सदस्य है उस पांच यत की प्रत् येक सममनत क पदेन सदस्य होग ;
(ख) सांसद क प्रत्येक ऐस सदस्य िो जिल पांच यत क सदस्य है उस पांच यत म अपनी पसन्द की ककन् हीां भी दो सममनतयों क पदेन सदस्य होग ; और (र्) जिल पांच यत की प्रत्येक सममनत, दो से अनधधक ऐसे विध नसभ सदस्यों को िो उस पांच यत के सदस्य हैं, इस शति के अध्यधीन रहत ेहुए सहयोजित करेगी कक विध न सभ क कोई भी सदस्य दो स ेअधधक सममनतयों क सदस्य नहीां होग ।
(5) स म न्य प्रश सन सममनत तथ मशि सममनत को छोड़कर प्रत्येक सममनत अपने ननि िधचत सदस्यों म से सभ पनत क ननि िचन ऐसे समय के भीतर तथ ऐसी रीनत म करेगी िैस कक विहहत ककय ि ए:
परन्त ु- - 45 (एक) यथ जस्थनत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत क अध्यि, स म न्य प्रश सन सममनत क पदेन सभ पनत होग ;
(दो) यथ जस्थनत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत क उप ध्यि, मशि सममनत क पदेन सभ पनत होग ; और (तीन) यथ जस्थनत, जिल पांच यत तथ िनपद पांच यत क अध्यि तथ उप ध्यि उस सममनत से मभन्न ककसी अन्य सममनत क सदस्य नहीां होग , जिसक कक िह इस परन्तकु के खण्ड (एक) तथ (दो) के फलस्िरूप सभ पनत है ।
(6) प्रत्येक सममनत, उसे सौपे गये विषयों के सम्बन्ध म , यथ जस्थनत िनपद पांच यत य जिल पांच यत की ऐसी शजततयों क प्रयोग तथ ककन्हीां ऐसे कृत्यों क प लन करेगी, िो विहहत ककये ि एां ।
(7) कोई भी ् यजतत, एक ही समय म , तीन से अधधक ऐसी सममनतयों क , िो स म न्य प्रश सन सममनत से मभन्न हों, सदस्य नहीां होग । 47 – क. त्यार्पत्र --- स म न्य प्रश सन सममनत से मभन्न ककसी स्थ यी सममनत क कोई सदस्य तथ स म न्य प्रश सन सममनत और मशि सममनत से मभन्न ककसी स्थ यी सममनत क सभ पनत अपन त्य गपत्र ्यजततश: यथ जस्थनत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत के अध्यि को ननविदत्त करके अपन पद त्य ग सकेग और उसक त्य गपत्र अध्यि द्ि र उसकी प्र जप्त की त रीख से प्रभ िशील होग । 47 - ख. सदस्य या सिापनत के निवााचि की ववधथमान्यता के सभबन्ि में वववाद --- (1) ननि िचन विि दों से सम्बजन्धत ध र 122 और उसके अधीन बन ये गये ननयमों के उपबांध ध र 46 और 47 के अधीन सदस्य य सभ पनत के ननि िचन के सम्बन्ध म यथ िश्यक पररितिन सहहत ल ग ूहोग।े
(2) ऐसे ननि िचन विि दों से सम्बजन्धत समस्त विधधक क रिि इय ाँ िो र य य सरक र और उसके अधीनस्थ अधधक ररयों के समि लजम्बत हैं, ध र 122 के अधीन अधधक ररत रखने ि ले विननहदिष्पट अधधक ररयों को अांतररत हो ि एांगी।]
48. सरपचं, उपसरपचं, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शम्ततयां और कत्ताव्य --- सरपांच तथ उपसरपांच और अध्यि तथ उप ध्यि ऐसी शजततयों क प्रयोग और ऐसे मलू्यों क प लन करेग िो विहहत ककये ि एां। अध्याय 6 पंचायतों के कृत्य
49. ग्राम पचंायत के कृत्य --- ग्र म पांच यत क यह कत्ति् य होग कक िह, िह ां तक ग्र म पांच यत ननधध म गुांि इश हो, अपने िते्र के भीतर ननम्नमलखखत कृत्य कर ---
(1) से (17) लपु्त
(18) स िििननक ब ि रों तथ स िििननक मेलों स ेमभन्न ब ि रों तथ मेलों की स्थ पन और प्रबन्ध और विननयमन 46
(19) से (29) लपु्त परन्त ुिह ां ऐसे कोई कृत्य ग्र म पांच यत को सौंपे गये हैं, बही बह यथ जस्थनत र य य सरक र, जिल पांच यत य िनपद पांच यत के अधधकत्त ि के रूप म क यि करेगी और उस प्रयोिन के मलये उसे आिश्यक ननधधय ां और अन्य सह यत की ् यिस्थ यथ जस्थनत र य य सरक र, जिल पांच यत य िनपद पांच यत द्ि र की ि एगी। 49 - ि. ग्राम पचंायत के अन्य कृत्य --- इस अधधननयम के तथ उसके अधीन बन ए गये ननयमों के उपबन्धों के अध्यधीन रहत ेहुए, तथ ऐसी नीनतयों, ननदेशों, अनदेुशों, स ध रण य विशषे आदेशों के िैसे कक र य य सरक र द्ि र समय- समय पर ि री ककय ेि एां, अध्यधीन रहत े हुए ग्र म पांच यत के ननम्नमलखखत कति् य होगे --- (एक) पांच यत िेत्र के आधथिक विक स तथ स म जिक न्य य के मलये ि वषिक योिन तयै र करन और उसे िनपद पांच यत की योिन म सजम्ममलत ककये ि ने के मलये विहहत समय के भीतर िनपद पांच यत को प्रस्ततु करन ;
(दो) से च र लपु्त] (प ांच) ककसी विधध द्ि र उसे सौंपी गई य िो उसे केन्र य र य य सरक र य जिल पांच यत य िनपद पांच यत द्ि र सौंपी गई हों, ऐसी स्कीमों, सांकमो, पररयोिन ओां के ननष्पप दन को सनुनजश्चत करन ;
(छ:) से (आठ) लपु्त] (नौ) ध र 61 - क म यथ पररभ वषत 'ग्र म पांच यत िते्र' के भीतर आने ि ली क लोननयों की स्थ पन के मलये आिेदनों पर विच र करन ;
(दस) से (चौदह) लपु्त] (पन्रह) स्थ नीय योिन ओां, सांस धनों और ऐसी योिन ओां के मलये ्ययों पर ननयांत्रण रखन । (सोलह) ग्र म सभ द्ि र गहठत की गई सममनतयों के कक्रय कल पों क समन्िय करन , मलू्य ांकन करन और उनको म नीटर करन । (सत्रह) ग्र म सभ को समनदेुमशत कृत्यों से सांबांधधत सांकमों, स्कीमों तथ पररयोिन ओां के सांबांध म केन्रीय सरक र य र य य सरक र द्ि र उपललध कर ई गई ननधधयों को केन्रीय सरक र य र य य सरक र द्ि र ननयत ककये गये म नदांडों के अनसु र ग्र म सभ को पनु: आिांहटत करन ।] 50 जिपद पचंायत के कृत्य --- (1) इस अधधननयम और उसके अधीन बन ये गये ननयमों के उपबन्धों और ऐसे स ध रण य विशषे आदेशों के, िो र य य सरक र द्ि र समय-समय पर ि री ककये ि एां, अध्यधीन रहत ेहुए िनपद पांच यत क यह कत्ति् य होग कक िह िह ां तक िनपद पांच यत ननधध म गुांि इश हो, खांड म ननम् नमलखखत क यि के मलये यजुततयतुत ्यिस्थ कर --- (क) एकीकृत ग्र मीण विक स, कृवष, स म जिक ि ननकी, पशपु लन और मत् स् य प लन, स्ि स््य और स्िच्छत , प्रौढ़ मशि , सांच र और लोक सांकमि, सहक ररत , कुटीर उद्योग, महहल यिु तथ ब ल 47 कल्य ण, ननशततों तथ ननर धश्रतों क कल्य ण और वपछड़ ेिगो क कल्य ण, पररि र ननयोिन तथ खेलकूद और ग्र मीण रोिग र क यिक्रम;
(ख) आग, ब ढ़, य , भकूम्प, दमुभिि, हटड डीदल, मह म री और अन्य प्र कृनतक आपद ओां म आप नतक सह यत की ्यिस्थ करन ;
(ग) स्थ नीय तीथि-य त्र ओां तथ त्यौह रों के सम्बन्ध म ्यिस्थ करन ;
(घ) स िििननक नौध टों क प्रबन्ध करन ;
(ङ) स िििननक ब ि रों, स िििननक मेलों तथ प्रदशिननयों क प्रबन्ध करन ; और (च) र य य सरक र य जिल पांच यत के अनमुोदन से कोई अन्य कृत्य करन । (1-क) इस अधधननयम के तथ इसके अधीन बन ए गये ननयमों के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए तथ ऐसी नीनतयों, ननदेशों, अनदेुशों, स ध रण य विशषे आदेशों के िैसे कक र य य सरक र द्ि र समय-समय पर ि री ककये ि एां अध्यधीन रहत ेहुए िनपद पांच यत के ननम्नमलखखत कति् य होगे--- (एक) इस अधधननयम द्ि र उस ेसौंपी गई तथ र य य सरक र य जिल पांच यत द्ि र उसे सौंपी गई आधथिक विक स और स म जिक न्य य की स्कीमों के सम्बन्ध म ि वषिक योिन तयै र करन और उसे जिल पांच यत की योिन म सजम्मजतत ककय ेि ने के मलये विहहत समय के भीतर जिल पांच यत को प्रस्ततु करन ;
(दो) समस्त ग्र म पांच यतों तथ िनपद पांच यत के आधथिक विक स तथ स म जिक न्य य की स्कीमों के सम्बन्ध म ि वषिक योिन ओां पर विच र करन और उन्ह समेककत करन और समेककत योिन को जिल पांच यत को प्रस्ततु करन ;
(तीन) िनपद पांच यत ननधध म स ेह थ म मलये ि ने ि ले सांकमो और विक स स्कीमों की योिन तयै र करन ;
(च र) िनपद पांच यतों के भीतर की िेत्रीय योिन तथ अिसांरचन त्मक (इन्र स्रतचर) विक स को ह थ म लेन ;
(प ांच) पांच यत ननधध म से विक स स्कीमों के सांकमो को मांिूर करन , उनक पयििेिण करन , म नीटर करन और प्रबन्ध करन तथ इस प्रयोिन के मलये पांच यत ननधध म स ेखचि उपगत करन ;
(छह) ककसी विधध द्ि र उसे सौंपी गई य िो उसे केन् र य र य य सरक र य जिल पांच यत द्ि र सौंपी गई हों ऐसी स्कीमों, सांतयो, पररयोिन ओां के ननष्पप दन को सनुनजश्चत करन ;
(स त) ग्र म पांच यत के म ध्यम से य ननष्पप दन एि मसयों के म ध्यम से ऐसे सांकमो, स्कीमों, क यिक्रमों और पररयोिन ओां को, िो र य य सरक र द्ि र पांच यतों को अांतररत की गई हैं, ल ग ूकरन , ननष्पप हदत करन , पयििेिण करन , म नीटर करन तथ प्रबांध करन ;
(आठ) जिल पांच यतों को ऐसे सांतयौ य विक स स्कीमो के सम्बन्ध म विच र करने के मलये, जिन्ह जिल 48 पांच यत द्ि र खण्ड म प्र रम्भ ककय ि सकत है, मसफ ररश करन और िह सीम उपदमशित करन िह ां तक कक ऐसे सांकमों य स्कीमों के मलये स्थ नीय सांस धन उपललध हो सकत ेहैं;
(नौ) खण्ड के भीतर की ग्र म पांच यतों के बीच समन्िय स्थ वपत करन और उनक म गिदशिन करन , (दस) ऐसी योिन ओ, पररयोिन ओां, स्कीमो य अन्य सांकमों क िो खण्ड म की दो य अधधक ग्र म पांच यतों के स झे के हों, ननष्पप दन सनुनजश्चत करन , (ग्य रह) अांतररत की गई स्कीमों, सकमों तथ पररयोिन ओां के सम्बन्ध म , केन्र य र य य सरक र य जिल पांच यत द्ि र उपललध कर यी गयी ननधधयों को यथ जस्थनत, केन्र य र य य सरक र य जिल पांच यत द्ि र ननयत ककये गये म नदण्डों के अनसु र ग्र म पांच यत को पनु: आिांहटत करन ;
(ब रह) ककसी विधध द्ि र य केन्र य र य य सरक र द्ि र उसको सीपी गई शजततयों क प्रयोग करत ेहुए सांस धन िुट ने के मलये समस्त आिश्यक उप य करन ;
(तरेह) ऐसी अन्य शजततयों क प्रयोग मन तथ ऐसे अन्य कृत्यों क प लन करन िो कक र य य सरक र द्ि र उसे सौंपे ि एां।
(2) िनपद पांच यत अपनी अधधक ररत के भीतर यथ जस्थनत स मदु नयक विक स खांड य आहदम ि नत विक स खांड के प्रश सन क ननयत्रण तथ पयिििेण करेगी और ऐसे खण्डों को र य य सरक र द्ि र सौपे गये कृत् य तथ सौंपी गई स्कीमों क कक्रय न्ियन िनपद पांच यत के अधीिण, ननदेशन तथ ननयांत्रण के अधीन ऐसे अनदेुशों के अनसु र ककय ि एग िो र य य सरक र द्ि र समय-समय पर हदये ि एां ।
51. राज्य सरकार के कनतपय कृत्यों का [जिपद पचंायत या म्जला पचंायत] को सौंपा जािा -- (1) र य य सरक र ऐसे ककसी विषय के सम्बन्ध म , जिस पर र य य सरक र क क यिप मलक प्र धधक र है य ऐसे कृत्यों के सम्बन्ध म , िो केन्रीय सरक र द्ि र र य य सरक र को सौंपे गये हैं, कोई कृत्य 1[िनपद पांच यत य जिल पांच यत] को सौंप सकेगी और 1[ िनपद पांच यत य जिल पांच यत] ऐसे कृत्यों क प लन करने के मलये ब ध्य होगी, ऐसे कृत्यों क प लन करने के मलये उसे आिश्यक शजततय ां होगी।
(2) िह ां, िनपद पांच यत य जिल पांच यत] को उपध र (1) के अधीन कृत्य सौंपे ि त ेहैं, िहॉ 1[िनपद पांच यत य जिल पांच यत] उन कृत् यों क ननििहन करने म र य य सरक र के अमभकत ि के रूप म क यि करेगी।
(3) र य य सरक र द्ि र िनपद पांच यत य जिल पांच यत को ऐसी र मश सांदत्त की ि एगी िो इस ध र के अधीन िनपद पांच यत य जिल पांच यत को सौंपे गये कृत्यों के ननििहन के मलये आिश्यक समझी ि ए।
(4) िनपद पांच यत य जिल पांच यत, इस ध र के अधीन उसे सौंपे गये उन कृत्यों क ननििहन करने के प्रयोिनों के मलये, र य य सरक र के य उसके द्ि र ननयतुत ककसी अन्य प्र धधक री के स ध रण ननयांत्रण के अधीन रहेगी और ऐसे ननदेशों क प लन करेगी िो समय-समय पर उसे हदये ि एां। 49
52. म्जला पचंायत के कृत्य -- (1) इस अधधननयम के तथ उसके अधीन बन ए गये ननयमों के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए तथ ऐसी नीनतयों, ननदेशों, अनदेुशों, स ध रण य विशषे आदेशों के िैस ेकक र य य सरक र द्ि र समय- समय पर ि री ककये ि य अध्यधीन रहत े हुए जिल पांच यत के ननम् नमलखखत कति् य होग --- (एक) जिले के आधथिक विक स और स म जिक न्य य के मलये ि वषिक योिन एां तयै र करन और पांच यतों को ऐसी योिन के समजन्ित क य िन्ियन को सनुनजश्चत करन ;
(दो) ककसी विधध द्ि र उसे सौंपी गई स्कीमों के और उन स्कीमों के, िो केन्र य र य य सरक र द्ि र उस ेसौंपी गई हैं, सम्बन्ध म ि वषिक योिन एां तयै र करन ;
(तीन) िनपद पांच यतों के तथ ग्र म पांच यतों के कक्रय कल पों क समन्िय, मलू्य ांकन, म नीटर करन और उनक म गिदशन करन ;
(च र) िनपद पांच यतों द्ि र तयै र की गई योिन ओां क समग्र पयििेिण, समन्िय तथ समेकन सनुनजश्चत करन ;
(पॉच) ककसी विधध द्ि र उस ेसौंपी गई य िो उस ेकेन्र य र य य सरक र द्ि र सौंपी गई हैं, ऐसी स्कीमों, सांकमों, पररयोिन ओां क ननष्पप दन सनुनजश्चत करन ;
(छह) केन्र य र य य सरक र द्ि र अांतररत ककये गये य प्रत्य योजित ककये गये कृत्यों, सांकमों, स्कीमों तथ पररयोिन ओां क ननष्पप दन सनुनजश्चत करन ;
(स त) अांतररत ककये गये कृत्यों, सांकमों, स्कीमों तथ पररयोिन ओां के सम्बन्ध म केन्र य र य य सरक र द्ि र उपललध कर ई गई ननधधयों को केन् र य र य य सरक र द्ि र ननयत म नदण्डों के अनसु र िनपद पांच यतों तथ ग्र म पांच यतों को पनु: आिांहटत करन ;
(आठ) उन अनदु नों के प्रस्त िों को, िो िनपद पांच यत से ककन्हीां विशषे प्रयोिनों के मलये प्र प्त हुए है, समजन्ित करन और उन्ह र य य सरक र को अग्रवेषत करन ;
(नौ) ऐसी योिन ओां, पररयोिन ओां, स्कीमों तथ अन्य सांकमों क , िो दो य अधधक िनपद पांच यतों के स झे की हों, ननष्पप दन सनुनजश्चत करन , (दस) ग्र म पांच यत के म ध्यम स ेय ननष्पप दन एिजेन्सयों के म ध्यम से सांकमों, स्कीमों और पररयोिन ओां को, िो र य य सरक र द्ि र पांच यतों को अांतररत की गई हैं, उनकी ननधध के स्त्रोतो को विच र म े ल ए बबन ननष्पप हदत करन ;
(ग् य रह) विक स सम्बन्धी कक्रय तक पों, पय ििरण के सांरिण, स म जिक ि ननकी, पररि र कल्य ण, ननिःशततों, ननर धश्रतों, महहल ओां, यिु ओां, ब लकों तथ सम ि के कमिोर िगों के कल्य ण के सम्बन्ध म र य य सरक र को सल ह देन ;
(ब रह) पांच यतों म ननयतुत ककये गये और पदस्थ ककये गये कमिच ररयों क , जिसके अन्तगित र य य सरक र द्ि र पांच यतो को स्थ न न्तररत ककय गय कमिच रीिृांद आत है, प्रश सन करन तथ उनक ननयांत्रण 50 करन ;
स्पष्टीकरण --- र य य सरक र द्ि र स्थ न तीरत ककये गये कमिच रीिृांद के प्रश सन तथ उनके ननयांत्रण के अन्तगित ऐसी शजततयों क प्रयोग करन आत है िैस कक र य य सरक र द्ि र समय- समय पर विशषे य स ध रण आदेश द्ि र अिध ररत ककय ि ए;
(तरेह) ककसी विधध द्ि र य केन् र य र य य सरक र उसको सौंपी गई शजततयों क प्रयोग करत ेहुए सांस धन िुट ने के मलये समस्त आिश्यक उप य करन ;
(चौदह) ऐसी अन्य शजततयों क प्रयोग करन तथ ऐसे अन्य कृत्यो क प लन करन , िो र य य सरक र द्ि र उसे प्रदत्त की ि एां य उस ेसौंपे ि एां ।]
(2) (क) मध्यप्रदेश सोस इटी रजिस्रीकरण अधधननयम, 1973 (क्रम क 44 सन ्1973) य तत्समय प्रितृ्त र य य की ककसी अन्य अधधननयममनत म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, जिले म क जिल ग्र मीण विक स अमभकरण जिले की जिल पांच यत म विलीन हुआ समझ ि एग और उतत अमभकरण की समस्त आजस्तय ां तथ द नयत्ि और उसके कृत्य सम्बजन्धत जिल पांच यत को अन्तररत हो ि एांगे और उसमे ननहहत रहेग और उनक ननििहन तथ अनपु लन सम्बजन्धत जिल पांच यत द्ि र ककय ि एग । (ख) इस अधधननयम म य उसके अधीन बन ए गये ककन्हीां ननयमो य उपबबधधयो म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, इस उपध र के प्र रम्भ होने की त रीख को जिल ग्र मीण विक स अमभकरण के समस्त स्थ यी कमिच ररयों के िेतन, भत्त ेतथ अन्य सवुिध एां िही होगी िो कक विद्यम न िेतन, भत्त ेतथ अन्य प्रसवुिध एां हैं।]
53. पचंायतों के कृत्यों के सभबन्ि में राज्य सरकार की शम्तत --- (1) (क) ऐसी शतों के अध्यधीन रहत े हुए िैसी कक र य य सरक र द्ि र स ध रण य विशषे आदेश द्ि र विननहदिष्पट की ि एां, पांच यतों को समधुचत स्तर पर ऐसी शजततय ाँ तथ प्र धधक र होग िो कक अनसुचूी-4 म सचूीबद्ध विषयों के सम्बन्ध म , जिसके अन्तगित आधथिक विक स एिां स म जिक न्य य के मलये योिन ओां की तयै री और स्कीमों क कक्रय न्ियन तथ ध र 49, 49क-, 50, 52 और अध्य य 14-क के अधीन उन्ह सौंपे गये अन्य कत्ति् य और कृत्य आत ेहैं, स्ि यत्त श सन की सांस्थ ओां के रूप म क यि करने के मलये उन्ह समथि बन ने हेत ुआिश्यक हो। (ख) र य य सरक र, अधधसचून द्ि र पांच यतों को स्कीमों के दित पणूि क य िन्ियन के मलये अपेक्षित कमिच ररयों के ककसी क डर य ककन्हीां क डरों के चयन, भती, ननयजुतत तथ प्रबन्ध हेत ुर य य सरक र द्ि र अनमुोहदत कमिच रीिनृ्द सम्बन्धी ढ ांचे (स्ट कफां ग पेटनि) और ऐसी अन्य शतो के अध्यधीन रहत े हुए, िैस कक िह उधचत समझ,े समधुचत स्तर पर शजततय ाँ तथ जिम्मेद ररयों प्रद न कर सकेगी।]
(2) र य य सरक र, स ध रण य विशषे आदेश द्ि र , पांच यतों के ककन्हीां कृत् यों म िवृद्ध कर सकेगी य ऐसी पांच यतों को सौंपे गये कृत्यों तथ कत्ति् यों को ि वपस ले सकेगी । िब र य य सरक र पांच यत को सौंपे गये ककन्हीां कृत्यों के ननष्पप दन को अपने ह थ म ले लेती है तो पांच यत ऐसे कृत्यों के मलये उस समय तक उत्तरद यी नहीां होगी िब तक कक र य य सरक र ऐसे कृत्य पांच यत को पनु: न सौंप दे । 51 पचंायतों की शम्ततया ं
54. सावाजनिक स्वास््य, सवुविाएं और सरुक्षा बाबत ्ग्राम पचंायत की शम्ततयां --- ऐसे ननयमों के अध्यधीन रहत ेहुए, िो र य य सरक र द्ि र इस ननममत्त बन ये ि ए, ग्र म पांच यत को --- (एक) घणृोत्प दक य खतरन क िस्तओुां के ्य प र के विननयमन करने;
(दो) सांरचन ओ तथ ििृों को हट ने;
(तीन) स्िच्छत , सफ ई, िलननक स, िलसांकमों, िलप्रद य के स्त्रोतों क अनरुिण करने;
(च र) िल के उपयोग क विननयमन करने;
(प ांच) पशिुधों क विननयमन करने;
(छह) कमिश ल ओां, क रख नों तथ अन्य औद्योधगक इक ईयों की स्थ पन क विननयमन करने, (स त) पय ििरणीय ननयांत्रण सनुनजश्चत करने;
(आठ) ऐसे अन्य कृत्य करने, िो इस अधधननयम के उपबन्धों द्ि र य उनके अधीन आिश्यक हैं, की शजतत होगी।
55. िविों के पररनिमााण पर नियतं्रण --- (1) इस ध र के उपबन्धों के अध्यधीन रहत ेहुए, कोई भी ् यजतत ग्र म पांच यत की मलखखत अनजु्ञ के बबन और इस अधधननयम के अधीन इस सम्बन्ध म बन ई गई उपविधधयों के अनसु र के मसब य, ककसी भिन क पररननम िण नही करेग य ककसी विद्यम न भिन म कोई पररितिन य पररिधिन नहीां करेग य ककसी भिन क पनुननिम िण नहीां करेग । यहद आिेदन प्र प्त होने की त रीख से पैंत लीस हदन के भीतर ऐसी अनजु्ञ देने से इांक र करने की सांसचून ग्र म पांच यत द्ि र नहीां दी ि ती है तो यह उपध ररत ककय ि एग कक अनजु्ञ दे दी गई है।
(2) यहद कोई ् यजतत, ग्र म पांच यत की अनजु्ञ के बबन , और ककन्हीां ऐसी शतो के, जिनके अधीन अनजु्ञ दी गई है, प्रनतकूल, ककसी भिन क पररननम िण करत है, उसमे पररितिन अथि पररिधिन करत है, य उसक पनुननिम िण करत है, तो ग्र म पांच यत ऐसे ्यजतत को मलखखत सचून द्ि र ऐस ननदेश दे सकेगी कक िह ऐसे पररननम िण, पररितिन, पररिधिन य पनुननिम िण को रोक दे और सचून मे विननहदिष्पट क ल िधध के भीतर ऐसे पररननम िण, पररितिन, पररिधिन य पनुननिम िण को पररिनत ित कर दे य धगर दे, िैस कक िह लोक हहत म आिश्यक समझे।
(3) यहद कोई ्यजतत ग्र म पांच यत द्ि र उपध र (2) के अधीन त मील की गई सचून म अन्तवििष्पट ननदेशों क प लन ऐसी सचून म विननहदिष्पट क ल िधध के भीतर नहीां करत है तो ग्र म पांच यत स्ियां ऐसी क यिि ही िो ऐसे ् यजतत द्ि र की ि ने के मलये अपेक्षित है, ऐसे ् यजतत के ् यय पर कर सकेगी और ऐसे ् यय क सांद य उस ् यजतत द्ि र उस त रीख स,े जिसको ग्र म पांच यत द्ि र म ांग सचून त मील की गई है, तीस हदन के भीतर ककय ि एग । विननहदिष्पट क ल िधध के भीतर ् ययो क सांद य न ककये ि ने पर, उनकी िफ्ती भ-ूर िस्ि के बक य के तौर पर की ि िेगी । 52 (3-क) उपध र (3) म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी िो कोई इस ध र के ककन् हीां उपबांधों क य उसके अधीन बन ए गये ननयमों य उपविधधयों क य ग्र म पांच यत द्ि र दी गई अनजु्ञ की शतो क उल्लांघन करत है य उपरोतत म से ककन्हीां उपबांधों के अधीन हदये गये ककन्हीां विधधपणूि ननदेशों य अध्यपेि ओां क प लन करने म असफल रहत है तो िह ग्र म पांच यत द्ि र य इस प्रयोिन के मलये र य य सरक र द्ि र प्र धधकृत अधधक री द्ि र अमभयोजित ककय ि सकेग और दोषमसवद्ध पर िह स ध रण क र ि स से िो छह म स तक क हो सकेग य िुम िने से िो दो हि र रुपये तक क हो सकेग य दोनों से, और अपर ध के च ल ूरहने की दश म ऐसे और िुम िने से िो प्रथम दोषमसवद्ध की त रीख के पश्च त ् प्रत्येक हदन के मलये जिसको कक अपर ध च ल ूरहत है, दो सौ पच स रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग ।]
(4) उपध र (2) के अधीन ग्र म पांच यत के ककसी ननदेश य सचून के विम्द अपील विहहत प्र धधक री को की ि सकेगी और विहहत प्र धधक री क ऐसी अपील पर विननश्चय अांनतम होग ।
56. सावाजनिक मार्ो तथा खुले स्थलों पर रुकावटें, बािा तथा अधििमण --- (1) कोई भी िो, ग्र म पांच यत िेत्र के भीतर ककसी स िििननक म गि य खुले स्थलों पर य ऐसे म गि पर जस्थत ककसी न ली पर--- (क) ककसी हदि ल, ब ड़, बांगले, खम्भ,े स्ट ल, बर मदे, चबतूरे, कुसी, सीढ़ी य कोई अन्य सांरचन क ननम िण करके य बन कर; य (ख) ग्र म पांच यत की मलखखत, अनजु्ञ के बबन य ऐसी अनजु्ञ म उजल्लखखत शतो के प्रनतकूल कोई बर मद , छय ि , कमर य अन्य ककसी सांरचन क ननम िण इस प्रक र करके कक जिससे िह ककसी स िििननक सड़क पर य ऐसी सड़क पर जस्थत ककसी न ली पर आगे ननकल हुआ प्रलांबबत हो; य (ग) ककसी स्थल से ममट टी, रेत य अन्य स मग्री आपर धधक रूप से हट कर, य (घ) ककसी च र ग ह य अन्य भमूम म अप्र धधकृत रूप से खतेी करके कोई रुक िट, ब ध य अधधक्रमण करेग , िुम िने से, िो एक हि र रुपये तक क हो सकेग और च ल ूरहने ि ले अपर ध के म मले म ऐसे और िुम िने से िो ऐसे अपर ध के मलये प्रथम दोषमसवद्ध की त रीख के पश्च त ्ऐसे प्रत्येक हदन के मलये जिसके दौर न ऐस अधधक्रमण, ब ध च ल ूरहती है य आगे ननकल हुआ भ ग बन रहत है, बीस रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि सकेग । ( 2) उपध र (1) म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, ग्र म पांच यत को ऐसी ककसी ब ध य अधधक्रमण को हट ने और च र ग ह य ककसी अन्य भमूम पर, िो ननिी सम्पजत्त न हो, अप्र धधकृत रूप से उग ई गई फसल को हट ने की शजतत होगी और उसे ककसी ऐसे खुले स्थल म कक, िो ननिी सम्पजत्त न हो च हे िह स्थल ग्र म पांच यत म ननहहत हो य न हो, उसी प्रक र की ककसी अप्र धधकृत ब ध य अधधक्रमण य आगे ननकले हुए भ ग को हट ने के मलये भी िसैी ही शजतत होगी, और इस प्रक र हट ये ि ने के ् ययों क सांद य उस ् यजतत द्ि र ककय ि येग जिसने उतत अधधक्रमण ककय है और रेझ े ्ययों क सांद य न ककये ि ने पर ऐस ् यय भ-ू र िस्ि के बक य के तौर पर उस ् यजतत से िसलू ककय ि सकेग :
53 परन्त ुउपध र (1) तथ इस उपध र म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, यहद ग्र म पांच यत, र य य सरक र म ननहहत ककसी भमूम पर से ककसी रुक िट, ब ध य अधधक्रमण को हट ने के मलये सांकल्प करती है, तो िह ऐसी भमूम से ऐसी स्क िट, ब ध य अधधक्रमण को हट ने के मलये तहसीलद र को सांसधूचत तत सकेगी और तहसीलद र ऐस करने के मलये मध्यप्रदेश भ-ूर िस्ि सांहहत , 1959 (क्रम ांक 20 सन ्1959) के उपबन्धों के अधीन क यिि ही करेग ।
(3) ग्र म पांच यत, इस ध र म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी त्यौह रों तथ उत्सिों के अिसरों पर, अधधक स ेअधधक दस हदन के मलये ककसी स िििननक स्थ न क , ऐसी रीनत म जिससे िनत को य ककसी ्यजतत को असवुिध न हो, अस्थ यी रूप से अधधभोग ककये ि ने य उस पर कोई पररननम िण ककये ि ने य आगे ननकल हुआ भ ग ननममित करने की अनजु्ञ इस अधधननयम के अधीन बन ई गई उपबबधधयों के अनसु र दे सकेगी ।
(4) ग्र म पांच यत इस ध र के अधीन प्रदत्त शजततयों क प्रयोग करत ेहुए कोई आदेश तब तक प ररत नहीां करेगी िब तक कक सम्बजन्धत ्यजतत को सनुि ई क यजुततयतुत अिसर नहीां दे हदय गय है । 56 - क िारा 55 तथा 56 के अिीि ग्राम पचंायत की शम्ततयों का प्रत्यायोजि --- विशषे आधथिक पररिते्र के म मले म ध र 55 तथ 56 के अधीन ग्र म पांच यत की शजततय ाँ विक स आयतुत के प्रत्य योजित की ि एांगी ।
57. मार्ो का िामकरण करिे तथा िविों पर िमाकं डालिे की शम्तत --- ग्र म पांच यत ककसी म गि क न मकरण करि सकेगी तथ ककसी भिन पर क्रम ांक भी डलि सकेगी तथ समय-समय पर म गों के ऐसे न म तथ भिनों के क्रम ांक म पररितिन भी करि सकेगी ।
58. बाजारों या मेलों का ववनियमि --- (1) मध्यप्रदेश कृवष उपि मण्डी अधधननयम, 1972 (क्रम ांक 24 सन ् 1973) म यथ उपबांधधत के मसि य, ग्र म पांच यत के अल ि कोई ् यजतत, ग्र म पांच यत िेत्र के भीतर ब ि र य मेले के प्रयोिन के मलये कोई स्थ न न तो ननयत करेग न स्थ वपत करेग और न ही उपयोग करेग :
परन्त ुर य य सरक र, अधधसचून द्ि र , ककसी ब ि र य मेले को स िििननक ब ि र य स िििननक मेल घोवषत कर सकेगी और इस प्रक र घोवषत यथ जस्थनत स िििननक ब ि र य स िििननक मेल िनपद पांच यत म ननहहत होग ।
(2) र य य सरक र, उपध र (1) म विननहदिष्पट ब ि र य मेले के विननयमन के मलये ननयम बन सकेगी।
59. सड़कों को घमुाव देिे, मोहिे, चाल ूि रखिे या बदं करिे की जिपद पचंायत की शम्तत --- िनपद पांच यत विहहत प्र धधक री की मांिूरी से, ककसी ऐसी सड़क को, िो िनपद पांच यत के ननयांत्रण तथ प्रश सन के अधीन है य उसम ननहहत है, धुम ि दे सकेगी, मोड़ सकेगी, च ल ूनहीां रहने दे सकेगी य उसे स्थ यी रूप से बांद कर सकेगी ।
60. जिपद पचंायत में निहहत सडकों और िभूमयों पर अधििमण --- (1) िो कोई, िनपद पांच यत म ननहहत ककसी सड़क, म गि, भमूम, भिन य सांरचन पर कोई पररननम िण करेग यह अधधक्रमण करेग य कोई 54 ब ध खड़ी करेग , दोषमसवद्ध पर, िुमीन से, िो एक हि र रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग ।
(2) मखु्य क यिप लक अधधक री को ऐसी ब ध य अधधक्रमण हट ने की शजतत होगी और इस प्रक र हट य े ि ने के ् ययों क सांद य उस ् यजतत द्ि र ककय ि एग जिसने उतत ब ध खड़ी की है य अधधक्रमण ककय है तथ उसके द्ि र सांद य न ककय ि ने पर उसे भ-ूर िस्ि के बक य के तौर पर िसलू ककय ि सकेग :
परन्त ुमखु्य क यिप लक अधधक री ऐसी ब ध य अधधक्रमण को हट ने की क यिि ही करने के पिूि, मलखखत सचून द्ि र , उस ्यजतत से, जिसने ऐसी ब ध खड़ी की है य अधधक्रमण ककय है, यह अपेि कर सकेग कक िह सचून म विननहदिष्पट समय के भीतर उसे हट ले य इस सांबांध म क रण दमशित करे कक उसे तयों न हट हदय ि ए ।
(3) इस ध र म की कोई ब त, ककसी िनपद पांच यत को त्यौह रों तथ अिसरों पर ऐसी क ल िधध के मलये, िो िह उधचत समझ,े उपध र (1) म उजल्लखखत स्थ नों क , ऐसी रीनत म जिससे िनत को य ककसी भी ् यजतत को असवुिध न हो, अस्थ यी रूप से अधधभोग करने य उस पर कोई पररननम िण करने की अनशु देने से ननि ररत नहीां करेग ।
61. समझौता करिे की शम्तत --- पांच यत, विहहत प्र धधक री की पिूि मांिूरी से, ककसी ऐसे ि द के सम्बन्ध म िो उसके द्ि र य उसके विरुद्ध सांजस्थत ककय गय है, य ककसी ऐसे द िे य म ांग के सम्बन्ध म िो इस अधधननयम के अधीन उसके द्ि र की गई ककसी सांविद से उद् भतू है, समझौत ऐसे ननबांधनों पर कर सकेगी िो िह उधचत समझे। अध्याय 6 - क कॉलोिी निमााण 61 क. पररिाषा -- इस अध्य य के प्रयोिनों के मलये ''ग्र म पांच यत िते्र'' से अमभपे्रत हे ऐस िते्र िो- (एक) मध्यप्रदेश नगर प मलक ननगम अधधननयम, 1956 (क्रम ांक 23 सन ्1956) के अधीन गहठत ककये गये ककसी नगरप मलक ननगम की सीम ओां से सोलह ककलोमीटर;
(दो) मध्यप्रदेश नगरप मलक अधधननयम, 1961 (क्रम ांक 37 सन ्1961) के अधीन गहठत की गई ककसी नगरप मलक पररषद य नगर पांच यत की सीम ओां से आठ ककलोमीटर;
(तीन) उपरोतत (एक) तथ (दो) म विननहदिष्पट से मभन्न ककसी नगरीय िते्र की सीम ओां से तीन ककलोमीटर;
(च र) र ष्परीय र िम गि अधधननयम, 1956 (1956 क सांख्य ांक 47) के अधीन विननहदिष्पट ककये गये य घोवषत ककये गये र ष्परीय र िम गि य मध्यप्रदेश ह ईिे एतट, 1936 (क्रम ांक 34 सन ्1936) की ध र 2 के अधीन अधधसधूचत ककये गये लोकम गि के प श्िि से एक ककलोमीटर, की दरूी के भीतर ग्र म पांच यत म जस्थत है । 55 61-ख. कॉलोिी निमााण करिे वाले का रम्जस्रीकरण -- (1) ऐस कोई ् यजतत िो ग्र म पांच यत िते्र म ककसी भमूम को भ-ू खण्डों म विभ जित करने के प्रयोिन के मलये उस िेत्र क विक स करत ेहुए य विक स न करत ेहुए कॉलोनी की स्थ पन ह थ म लेने क आशय रखत है, ऐसे ् यजततयों को, िो इन भ-ू खण्डों पर आि सीय, गरै आि सीय य सांयतुत आि स क ननम िण कर बसने की ि ांछ रखत ेहैं, क्रमश: य एक स थ अन्तरण करत है य अन्तरण करने क कर र करत है, रजिस् ररीकरण प्रम ण-पत्र प्रद न करने के मलये ग्र म पांच यत द्ि र कॉलोनी की स्थ पन के समथिन म सम् यक रूप स ेप ररत ककये गये सांकल्प की प्रनत के स थ उप-खण्ड अधधक री (र िस्ि) को आिदेन करेग ।
(2) उपध र (1) के अधीन रजिस्रीकरण के मलये आिेदन प्र प्त होने पर उपखण्ड अधधक री (र िस्ि) इस ननममत्त बन ये गये ननयमों के अध्यधीन रहत ेहुए तीस हदन के भीतर य तो रजिस्रीकरण प्रम ण- पत्र ि री करेग य ि री करने से इन् क र करेग परन्त ुयहद उपखण्ड अधधक री (र िस्ि) रजिस्रीकरण प्रम ण-पत्र ि री करने से इन्क र करत है तो इन्क र करने के क रण आिेदक को सधूचत ककए ि एांगे।
(3) र य य सरक र को, रजिस्रीकरण प्रम ण -पत्र ि री ककये ि ने के मलये ननयम बन ने की शजतत होगी जिनम आिेदन क प्ररूप, रजिस्रीकरण के मलये फीस की रकम तथ अन्य ननबन्धन और शत े विहहत की ि एांगी। 61 -र्. कालोनियों का ववकास -- इस अधधननयम तथ इस ननममत्त बन ये ननयमों के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए ग्र म पांच यत िेत्र म कॉलोननयों क विक स ह थ म लेने के मलये रजिस्रीकरण प्रम ण -पत्र कॉलोनी बन ने ि ले को हकद र बन येग । 61 -घ. अविै कॉलोिी निमााण के भलये दण्ड -- (1) कॉलोनी ननम िण करने ि ल कोई ् यजतत, िो मध्यप्रदेश भ-ूर िस्ि सांहहत , 1959 (क्रम ांक 20 सन ्1959) की ध र 172 के तथ उसके अधीन बन ये गये ननयमों के उपबांधों क उल्लांघन करके ककसी भमूम य उसके भ ग को ् यपिनत ित करत है, िह भमूम के अिधै ्यपितिन क अपर ध करत है।
(2) कॉलोनी ननम िण करने ि ल कोई ्यजतत, िो कॉलोनी स्थ वपत करने के उद्दशे्य से, अपनी भमूम को य ककसी अन्य ्यजतत की भमूम को, इस अधधननयम य इस ननममत्त बन ए गये ननयमों म अनधु्य त अपेि ओां को भांग करके भ-ूखण्डों म विभ जित करत है, बह अिधै कॉलोनी ननम िण क अपर ध करत है।
(3) िो कोई, अिधै ्यपितिन क य अिधै क लोनी ननम िण क अपर ध करेग य उसके ककये ि ने क दषु्प पे्ररण करेग , िह स द क र ि स से, िो छह म स तक क हो सकेग य िुम िने से, िो कम से कम दस हि र रुपये तक क हो सकेग , य दोनों स,े दजण्डत ककय ि येग । 56
(4) िो कोई अिधै ् यपितिन के य अिधै कॉलोनी ननम िण के ककसी िेत्र म कोई भिन सजन्नममित करत है, िह अिधै सजन्नम िण क अपर ध करत है।
(5) िो कोई अिधै सजन्नम िण क अपर ध मगे , िह स द क र ि स स,े िो छह म स तक क हो सकेग य िुम िने से, िो कम स ेकम एक हि र रुपये तक क हो सकेग , य दोनों स,े दजण्डत ककय ि एग । 61 –ड़. अविै सम्न्िमााण के अपराि का दषु् पे्ररण करिे के भलये दण्ड -- िो कोई अिधै ् यपितिन के य अिधै कॉलोनी ननम िण के य अिधै सजन्नम िण के ककसी िेत्र मे – (एक) भिन के सजन्नम िण के मलये अमभन्य स (ले-आउट) य नतश मांिूर करने की शजतत रखने ि ल अधधक री होत ेहुए ऐस अमभन्य स य नतश मांिूर य अनमुोहदत करेग , य (दो) ऐस अधधक री होत ेहुए जिसक प्र थममक कत्ति् य ऐस करन हो, ऐसे िेत्र म भमूम के अिधै ्यपितिन की य ककसी भिन के अिधै सजन्नम िण की ररपोटि समधुचत प्र धधक री को करने क ि नबझूकर लोप करेग ; य (तीन) ऐस अधधक री य ऐस कमिच री होत ेहुए िो ऐसे ककसी िते्र म भमूम के अिधै ्यपितिन के य अिधै कॉलोनी ननम िण के य भिन के अिधै सजन् नम िण के विरुद्ध क रिि ई करने क उत्तरद यी है, क रिि ई करने म असफल रहत है; य (च र) विद्यतु य िल प्रद य सांयोिन (कनेत शन) मांिरू करने के मलये सिम अधधक री य प्र धधकर होत े हुए ऐसे ककसी िेत्र म के ककसी भिन के सम्बन्ध म ऐसे सांयोिन की मांिूरी देग ; य (प ांच) पिूोत त अधधक ररयों पर, ऐसी मांिूरी देने के मलये य भमूम के ऐसे अिधै ्यपितिन की य िते्र म ककसी भिन के सजन्नम िण की ररपोटि करने क लोप करने के मलये, अिधै रूप से असर ड लेग , िह स द क र ि स स,े िो छह म स तक हो सकेग , य िमु िने से, य दोनों स ेदजण्डत ककय ि येग .
परन्त ुखण्ड (च र) म अन्तवििष्प ट कोई ब त उन म मलो म ल ग ूनही होगी िह ां कलेत टर र य य सरक र के अनमुोदन से प्रम खणत करत है कक अिधै ् यपितिन य अिधै कॉलोनी ननम िण के िेत्र म भबन के सम्बन्ध म विद्यतु तथ िल प्रद य क सांयोिन देने म लोकहहत म कोई आपजत्त नहीां है। 61 -च. अविै व्यपवताि अए या अविै कॉलोिी निमााण के क्रकसी शे्रत्र में के ए-खण्डों के अन् तरण का शनू्य होिा -- (1) मध्यप्रदेश भ-ूर िस्ि सहहत , 1959 (क्रम ांक 20 सन ्1959) म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, कॉलोनी ननम िण करने ि ले ककसी ्यजतत द्ि र अिधै ्यपितिन के य अिधै कॉलोनी ननम िण के ककसी िेत्र म भ-ूखण्डों क ककय गय कोई अन्तरण य अन्तरण क कोई कर र शनू् य होग ।
(2) विहहत प्र धधक री पिक रों को क रण दमशित करने हेत ुसचून देने के पश्च त ्उस भमूम क प्रबन्ध 57 ग्रहण कर सकेग , उस िेत्र के सम्बन्ध म योिन बनि एग तथ उसे विकमसत करि एग , और उसके पश्च त ्उस भमूम को अधधम न्यत: भ-ूखण्ड ध रकों के बीच ऐसी रीनत म और ऐसी शतो के अध्यधीन रहत ेहुए िैस कक विहहत ककय ि ए, आिांहटत करेग ।
(3) शतों की पनूत ि हो ि ने पर, आिांहटती के सम्बन्ध म यह समझ ि एग कक बे कॉलोनी ननम िण करने ि ले ् यजतत की ओर से भ-ूखण्ड क विधधम न्य अन्तररती है और उस भ-ूखण् ड के प्रबन्धक के रूप मे विहहत प्र धधक री की शजततय ां सम प्त हो ि एांगी। 61 -.छ. अविै कालोिी में अन्तग्रास्त िभूम का समपहरण -- अिधै कॉलोनी ननम िण के अधीन भमूम म कॉलोनी ननम िण करने ि ले ् यजतत क अधधक र, हक य हहत, कॉलोनी ननम िण करने ब ले ् यजतत के ध र 61-ध की उपध र (3) के अधीन दोषमसद्ध ठहर ये ि ने पर और उस त रीख से समपहृत हो ि एग और समस्त विल् लांगमों (इनकम् रेन् सजे़) ) स ेमतुत रूप म ग्र म पांच यत म ननहहत हो ि एग ।] अध्याय 7 पचंायत की निधि और उसकी सभपम्त्त
62. राज्य सरकार कनतपय सभपम्त्त पचंायत में निहहत कर सकेर्ी -- (1) र य य सरक र, अधधसचून द्ि र और ऐसी शतो और ननबांधनों के अध्यधीन रहत ेहुए, जिन्ह अधधरोवपत करन िह उधचत समझ,े ऐसी ककसी सम्पजत्त को िो र य य सरक र म ननहहत हो, यथ जस्थनत ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत म ननहहत कर सकेगी।
(2) र य य सरक र, उपध र (1) के अधीन पांच यत म ननहहत की गई ककसी सम्पजत्त क पनुग्रिहण कर सकेगी, ऐसे अांतरण के मलये पांच यत द्ि र सांदत्त की गई रकम य पांच यत द्ि र ऐसी सम्पजत्त पर पररननममित ककसी भिन य ननष्पप हदत ककये गये ककसी सांकमि के उस ब ि र मलू्य से िो पनुग्रिहण की त रीख को हो, से मभन्न कोई प्रनतकर देय नहीां होग :
परन्त ुननहहत ककये ि ने के ननबन्धनों तथ उसकी शतो के उल्लांघन म ननममित य पररननममित ककये गये भिन, सांरचन य सांकमों के सम्बन्ध म कोई प्रनतकर देय नहीां होग ।
63. पचंायत को निधियों का समिदेुशि -- र य य सरक र, ऐसे प्रयोिनों के मलये तथ ऐसी शतो और सीम ओां के अध्यधीन रहत ेहुए, िैस कक र य य सरक र ठीक समझ,े ककसी भी पांच यत को र य य सरक र द्ि र उद् गहृीत और सांगहृीत ऐसे कर, पथ कर तथ फीस समनदेुमशत कर सकेगी और र य य की सांधचत ननधध म स ेसह यत अनदु न दे सकेगी।
64. पचंायत को सहायता अिदुाि -- र य य सरक र, पांच यतों को ऐसी सह यत अनदु न देगी िैस वित्त आयोग की मसफ ररशों के आध र पर विननजश्चत ककय ि ए । 58
65. स्थावर सभपम्त्त का अतंरण -- (1) ककसी पांच यत म ननहहत य पांच यत की ककसी स्थ िर सम्पजत्त क विक्रय, द न, बांधक य विननमय द्ि र य तीन िषि से अधधक क ल िधध के मलये पदटे द्ि र य अन्यथ कोई अांतरण,र य य सरक र की य उसके द्ि र इस सम्बन्ध म प्र धधकृत ककसी अधधक री की मांिूरी से ही ककय ि एग अन् यथ नहीां।
(2) स्थ िर सम्पजत्त के अन्तरण की प्रकक्रय ऐसी होगी िो विहहत की ि ए।
66. पचंायत निधि -- (1) प्रत्येक पांच यत एक ननधध स्थ वपत करेगी िो पांच यत ननधध कहल एगी और पांच यत द्ि र प्र प्त समस्त र मशय ां उतत ननधध क भ ग होंगी।
(2) पांच यत म ेननहहत समस्त सम्पजत्त और पांच यत ननधध क इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ए गये ननयमों के उपबांधों के अध्यधीन रहत ेहुए उपयोिन, इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये य स ध रणत:
पांच यतों के विक स सम्बन्धी कक्रय कल पों से सम्बजन्धत अन्य प्रयोिनों के मलये य अन्य ् यय के मलये ककय ि एग िो र य य सरक र ककसी पांच यत के आिदेन पर य अन्यथ लोकहहत म अनमुोहदत करे। पांच यत ननधध ननकटतम सरक री खि ने य उपखि ने य ड कघर य सरक री बैंक य अनसुधूचत बैंक य उसकी श ख म रखी ि एगी।
(3) र य य सरक र य ककसी अन्य ्यजतत य स्थ नीय प्र धधक री द्ि र ककसी विननहदिष्पट क यि य प्रयोिन के मलये पांच यत को आिांहटत ककसी र मश क उपयोग केिल उसी क यि य प्रयोिन के मलये तथ ऐसे अनदेुशों के अनसु र ककय ि येग िो र य य सरक र इस सम्बन्ध म स ध रणत: य विशषेत: ि री कर ।
(4) पांच यत ननधध म से समस्त रकम -- (एक) ग्र म पांच यत के म मले म सरपांच तथ सधचि के सांयतुत हस्त िरों से, (दो) यथ जस्थनत िनपद पांच यत य जिल पांच यत के म मले मे मखु्य क यिप लक अधधक री य ककसी अन्य अधधक री के िो मखु्य क यिप लक अधधक री द्ि र प्र धधकृत ककय गय हो, हस्त िर स,े ननक ली ि एांगी:
परन् त ुिनपद पांच यत य जिल पांच यत के म मले म समस्त रकम केिल, ि वषिक बिट के अनसु र विस्ततृ क यि योिन की ्यिस्थ करने के प्रयोिनों हेत ुयथ जस्थनत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत की स म न्य प्रश सन सममनत के पिूि अनमुोदन से ही ननक ली ि एांगी :
परन् त ुयह और भी कक पांच यत ननधध म की समस् त प्र जप्तयों तथ पांच यत ननधध म स ेसमस् त आहरण से सम् बजन्धत ि नक री पांच यत के समि उसके आग मी सजम्मलन म रखी ि एगी।]
67. सवंवदा निष् पाहदत करिे का ढंर् -- पांच यतों द्ि र सांविद ओां को ननष्पप हदत करने क ढांग ऐस होग िो विहहत ककय ि ए। 59
68. सहायता अिदुाि देिे की शम्तत -- पांच यत, र य य सरक र य विहहत प्र धधक री की पिूि मांिूरी के अध्यधीन रहत ेहुए, स िििननक उपयोधगत के ककसी क यि के मलये सह यत अनदु न दे सकेगी। अध्याय 8 पचंायतों की स्थापिा, बजट तथा लेख े
69. सधचव तथा मखु्य कायापालक अधिकारी की नियमु्तत -- (1) र य य सरक र य विहहत प्र धधक री, ककसी ग्र म पांच यत के मलये य एक से अधधक ग्र म पांच यतों के समहू के मलये एक सधचि ननयतुत कर सकेग :
परन्त ुइस अधधननयम के प्रितृ्त होने के ठीक पिूि ग्र म पांच यत के सधचि क प्रभ र ध रण करने ि ल ्यजतत, इस ध र के अनसु र सधचि की ननयजुतत हो ि ने तक, उस रूप म कृत्य करत रहेग :
परन्त ुयह और भी कक कोई ् यजतत ग्र म पांच यत के सधचि क क यिभ र ग्रहण नही करेग यहद ऐस ्यजतत सम्बजन्धत ग्र म पांच यत के ककसी पद धधक री क न तदे र है। स्पष्टीकरण -- इस उपध र के प्रयोिन के मलये, अमभ्यजतत ''न तदे र'' क अथि है वपत , म त , भ ई, बहहन, पनत, पत्नी, पतु्र, पतु्री, ससरु, स स, स ल , बहनोई, देिर, स ली, भ भी, ननद, देिर नी, िेठ नी, द म द य पतु्रिधु।
(2) र य य सरक र प्रत्येक िनपद पांच यत के मलये एक मखु्य क यिप लक अधधक री ननयतुत करेगी और एक य उससे अधधक अनतररतत मखु्य क यिप लक अधधक ररयो को भी ननयतुत कर सकेगी, िो ऐसे कृत्यों क ननििहन तथ ऐसे कत्ति् यों क प लन कर गे िो कक मखु्य क यिप लक अधधक री द्ि र उन्ह समनदेुमशत ककये ि एां।
(3) र य य सरक र प्रत्येक जिल पांच यत के मलये एक मखु्य क यिप लक अधधक री, ननयतुत करेगी और एक य अधधक अनतररतत मखु्य क यिप लक अधधक री, उप मखु्य क यिप लक अधधक री तथ क यिप लक अधधक री भी ननयतुत कर सकेगी िो ऐसे कृत्यों क ननििहन और ऐसे कत्ति् यो क प लन करेग िो उसे मखु्य क यिप लक अधधक री द्ि र समनदेुमशत ककये ि एां।
(4) ग्र म पांच यत के सधचि य िनपद पांच यत य जिल पांच यत के मखु्य क यिप लक अधधक री की छुट्टी, सेि ननिजृत्त य मतृ्य ुय त्य गपत्र के क रण य अन्यथ अनपुजस्थनत के दौर न, विहहत प्र धधक री, यथ सांभि शीघ्र, यथ जस्थनत ग्र म पांच यत के सधचि य िनपद पांच यत य जिल पांच यत के मखु्य क यिप लक अधधक री के पद क क यि चल ने के मलये ऐस इांति म करेग िैस िह उधचत समझे । कोई ् यजतत, ऐसे पद पर क यि करत ेसमय उन समस्त शजततयों क प्रयोग करेग िो इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ननयमों द्ि र यथ जस्थनत ग्र म पांच यत के सधचि य िनपद पांच यत य जिल पांच यत के मखु्य क यिप लक अधधक री] को प्रदत्त की गई हैं।
(5) ग्र म पांच यत क सधचि, िनपद पांच यत तथ जिल पांच यत क मखु्य क यिप लक अधधक री यथ जस्थनत, 60 ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत तथ जिल पांच यत के अमभलखेों को रखने और उनके बन ये रखने के मलये उत्तरद यी होग ।
70. पचंायत के अन् य अधिकारी और सेवक - - (1) प्रत् येक पांच यत ध र 69 के उपबांधों के अध् यधीन रहत े हुए, विहहत प्र धधक री के पिूि अनमुोदन से, ऐसे अन् य अधधक ररयों तथ सेिकों की ननयजुतत कर सकेगी जिन्ह िह अपने कति् यों के दि ननििहन के मलये आिश्यक समझे।
(2) ऐसे अधधक ररयों और सेिकों की अहित एां, भरती की पद्धनत, िेतन, छुट्टी, भत्त ेतथ सेि की अन्य शत े जिनम अनशु सननक म मल ेसजम्ममलत हैं, ऐसी होंगी, िो विहहत की ि ए।
71. शासकीय सेवकों की प्रनतनियमु्तत - - र य य सरक र अपने ऐसे सेिकों को, जिन्ह िह आिश्यक समझ,े पांच यत की सेि म प्रनतननयजुतत कर सकेगी । ऐसे प्रनतननयतुत सेिकों की सेि शत ेऐसी होंगी िो र य य सरक र द्ि र समय-समय पर, विहहत की ि एां ।
72. मखु् य कायापालक अधिकारी तथा सधचव के कृत् य – ग्र म पांच यत के सधचि, िनपद पांच यत के मखु्य क यिप लक अधधक री तथ जिल पांच यत के मखु्य क यिप लक अधधक री के कृत् य ऐसे होग िो विहहत ककये ि एां।
73. बजट तथा वावषाक लेखे - - (1) प्रत्येक पांच यत, प्रनतिषि ऐसे प्र रूप म तथ ऐसी रीनत म तक ऐसी त रीख तक, िैस विहहत ककय ि ए, आग मी वित्तीय िषि के मलये अपनी प्र जप्तयों तथ ्यय के बिट क प्र तकलन तयै र करेगी।
(2) उपध र (1) के अधीन तयै र ककय ेगये बिट प्र तकलन ऐसे प्र धधक ररयों द्ि र और ऐसी रीनत म िैस विहहत ककय ि ए, अनमुोहदत ककये ि येगे ।
(3) पांच यतों द्ि र ि वषिक लेखे तथ प्रश सन की ररपोटि विहहत प्र धधक री को विहहत रीनत म प्रस्ततु की ि एगी। अध् याय 9 करािाि और दावों की वसलूी
74. िभूम पर उपकर उद्ग्रहण करिे की शम्तत - - (1) प्रत्येक भ-ू ध री तथ सरक री पट टेद र उसके द्ि र ग्र म सभ िेत्र म ध ररत भमूम के सम्बन्ध म ऐसी भमूम पर ननध िररत भ-ूर िस्ि य लग न के प्रनत रुपय य उसके ककसी ऐसे भ ग पर िो पच स पसैे स ेअधधक हो, पच स पसैे की दर से प्रत्येक र िस्ि िषि के मलये इस अधधननयम के प्रयोिन के मलये उपकर क भगुत न करने क द यी होग ।
(2) कोई ग्र म सभ विहहत रीनत म इस प्रभ ि क सांकल्प प ररत करके उपध र (1) म विननहदिष्पट दर को, दस रुपये की सीम तक बढ़ सकेगी।
(3) उपध र (1) तथ (2) के अधीन उद् गहृीत ककय गय उपकर और ध र 77 की उपध र (3) के अधीन 61 उद् गहृीत ककय गय विक स कर उस भ-ू र िस्ि य लग न य ककसी अन्य उपकर य कर के अनतररतत होग िो ऐसी भमूम पर मध्यप्रदेश भ-ू र िस्ि सांहहत , 1959 (क्रम ांक 20 सन ्1959) य तत्समय प्रितृ्त ककसी अन्य अधधननयममनत के अधीन लग य गय हो और िह यथ शतय उसी रीनत म देय होग तथ सांगहृीत ककय ि एग जिस रीनत म भ-ू र िस्ि देय होत है तथ सांगहृीत ककय ि त है । स्पष्टीकरण - - इस ध र म अमभ्यजतत ''भ-ू ध री'', '' सरक री पट टेद र'', '' भ-ू र िस्ि '' और '' लग न' के िही अथि होग िो मध्यप्रदेश भ-ू र िस्ि सांहहत , 1959 (क्रम ांक 20 सन ्1959) म उनके मलये हदये गये हैं।
75. खण्ड के िीतर सभपम्त्त के अन्तरण पर शलु्क - - उन मलखतों पर, िो खण्ड के भीतर जस्थत स्थ िर सम्पजत्त के विक्रय, द न य बांधक स ेसम्बजन्धत हों, भ रतीय स्ट म्प अधधननयम, 1899 (1899 क सां.
2) के अधीन अधधरोवपत शलु्क म , ऐसी सम्पजत्त के मलू्य पर य बांधक की दश म उस रकम पर, िो मलखत द्ि र प्रनतभतू की गई है, एक प्रनतशत की िवृद्ध की ि एगी:
परन्त ुबांधक के सम्बन्ध म उद् गहृीत ककय गय ऐस अनतररतत स्ट म्प शलु्क उस पर लग ए गये स्ट म्प शलु्क की रकम से अधधक नहीां होग :
परन्त ुयह और भी कक ऐसी मलखत के सम्बन्ध म , जिसे भ रतीय स्ट म्प अधधननयम, 1899 के य उसकेअधीन बन ए गये ननयमों के अधीन स्ट म्प शलु्क से छूट दी गई है, कोई अनतररतत स्ट म्प शलु्क उद् गहृीत नहीां ककय ि एग ]
76. म्जला पचंायत राज निधि - - (1) जिल स्तर पर ''जिल पांच यत र ि ननधध'' के न म से एक पथृक ननधध (िो इसम इसके पश्च त ्''उतत ननधध'' के न म से ननहदिष्पट है) गहठत की ि एगी और उसे ऐसी रीनत म , िैसी कक र य य सरक र द्ि र विहहत की ि ए, चल य ि एग ।
(2) ध र 77 की उपध र (3) के अधीन विक स कर और उसके स थ ऐसे अन्य कर, शलु्क, पथकर, फीस तथ अन्य प्र जप्तय ां िैसी कक र य य सरक र द्ि र विननहदिष्पट की ि एां के आगम, उसम से ऐसे-िसलूी प्रभ रों की, िैस ेकक समय-समय पर र य य सरक र द्ि र अिध ररत ककएि एां, कटौती करने के पश्च त ् उतत ननधध म िम ककए ि एांगे।
(3) ध र 75 के अधीन अनतररतत स्ट म्प शलु्क के आगम प्रथमत: र य य की सांधचत ननधध म , ऐसी रीनत म िैसी कक विहहत की ि ए, िम ककय ेि एांगे और र य य सरक र प्रत्येक वित्तीय िषि के प्र रम्भ होने पर, यहद विध नसभ द्ि र इस ननममत्त विधध द्ि र ककये गये विननयोग द्ि र ऐस उपबांध ककय ि ए, र य य की सांधचत ननधध म से ऐसी रकम ननक ल सकेगी िो पिूििती वित्तीय िषि म र य य सरक र द्ि र उग हे गये आगमों के बर बर होगी । 62 76-क. रकम का पचंायतों के बीच सवंवतरण : (1) एिां (2) ***]
(3) ककसी िनपद पांच यत िते्र से ध र 77 की उपध र (3) के अधीन उग ह गय विक स कर सांबांधधत िनपद पांच यत और उस िनपद पांच यत के भीतर की ग्र म पांच यतो को, ऐसे अनपु त म तथ ऐसी रीनत म , िैसी कक विहहत की ि ए, अांतररत ककय ि एग ।
(4) अनतररतत स्ट म्प शलु्क से सांबांधधत रकम िनपद पांच यतों को सह यत अनदु न के रूप म , ऐसे ननयमों के अध्यधीन रहत ेहुए, िैसे कक इस ननममत्त बन ए ि एां, दी ि एगी।
(5) ननधध म िम की गई ध र 76 की उपध र (2) के अधीन विननहदिष्पट ककए गए अन्य करों, शलु्कों, पथकरों, फीस तथ अन्य प्र जप्तयों से सांबांधधत रकम पांच यतों के बीच, ऐसी रीनत म िैसी कक विहहत की ि ए सांवितररत की ि एगी।]
77. अन्य कर - - (1) इस अधधननयम के उपबांधों तथ ऐसी शतो और अपि दों के िो विहहत ककये ि एां, अध्यधीन रहत ेहुए, प्रत्येक ग्र म पांच यत और िनपद पांच यत अनसुचूी-1 म विननहदिष्पट कर अधधरोवपत करेगी।
(2) िनपद पांच यत के पिूि अनमुोदन से ग्र म पांच यत और जिल पांच यत के पिूि अनमुोदन से िनपद पांच यत, अनसुचूी-2 म विननहदिष्पट करों म से कोई भी कर अधधरोवपत कर सकेगी।
(3) िनपद पांच यत कृवष भमूम पर विक स कर उद् गहृीत कर सकेगी । इस प्रक र उद् गहृीत कर उसी रीनत म देय होग जिस रीनत म भ-ू र िस्ि देय होत है । 77 - क. कर अधिरोवपत करिे की शम्तत - - (1) इस अधधननयम के उपबांधों तथ ऐसी शतों और अपि दों के िो कक विहहत ककए ि एां अध्यधीन रहत ेहुए, प्रत्येक ग्र म सभ अनसुचूी 1-क म विननहदिष्पट करों को अधधरोवपत करेगी।
(2) ग्र म सभ , अनसुचूी 2 - क म विननहदिष्पट कोई भी कर अधधरोवपत कर सकेगी ।]
78. करों का ववनियमि करिे की राज्य सरकार की शम्तत - - र य य सरक र, ध र 77 के अधीन करों के अधधरोपण, ननध िरण, सांग्रहण तथ हहस्स ब ांटने क विननयमन करने के मलये ननयम बन सकेगी।
(2) ककसी ननध िरण के सम्बन्ध म कोई आपजत्त इस अधधननयम के य उसके अधीन बन ए गये ननयमों के उपबांधों के अनसु र ही ली ि एगी अन्यथ नहीां और ककसी ् यजतत के, उस पर कर-ननध िरण य कर लग ए ि ने के द नयत्ि को इस अधधननयम के य उसकेअधीन बन ए गये ननयमों के उपबांधों के अनसु र ही प्रश्नगत ककय ि एग अन्यथ नहीां।
79. करािाि के ववरुद्ध अपील - - ध र 77 के अधीन अधधरोवपत ककसी कर के विरुद्ध अपील विहहत प्र धधक री 63 को ऐसी रीनत म तथ ऐसे समय के भीतर की ि सकेगी, िैस कक विहहत ककय ि ए और ऐसे प्र धधक री क उस पर विननश्चय अांनतम होग ।
80. बाजार फीस आहद का ेके पर हदया जािा - - पांच यत, अनसुचूी- 3 म विननहदिष्पट ककसी फीस के सांग्रहण क क यि स िििननक नील म द्ि र तथ विहहत रीनत म ठेके पर दे सकेगी।
81. बकाया की वसलूी - - इस अधधननयम के अधीन अधधरोवपत कर य फीस तथ िुम िने की कोई बक य य इस अधधननयम के अधीन शोध्य कोई रकम, कलेतटर द्ि र इस प्रक र िसलू की ि एगी म नो िह भ-ूर िस्ि की बक य हो ।
82. अपवचंि के भलये शाम्स्त - - िब कोई ्यजतत ककसी कर, फीस, दर य ककसी अन्य शोध्य रकम क सांद य करने म चूक करत है तो, िह बक य की रकम के अनतररतत श जस्त के तौर पर प ाँच सौ रुपये की य ऐसे कर, फीस, दर की रकम की, य अन्य ककसी शोध्य रकम की िो भी उच्चतर हो, दस गनु र मश क सांद य करने के मलये द यी होग ।]
83. करों में राहत देिे के बारे में राज्य सरकार की शम्तत - - (1) यहद र य य सरक र को, उसे की गई मशक यत पर य अन्यथ , यह प्रतीत होत है कक ककसी पांच यत द्ि र अधधरोवपत ककय ेगये कर क भ र करद त ओां पर अत्यधधक है, तो िह पांच यत से इस ब रे म ररपोटि म ांगने के पश्च त ्ककसी कर को सम प्त कर सकेगी य ककसी क र की रकम य दर को ननलजम्बत य कम कर सकेगी।
(2) र य य सरक र, स्िप्रेरण से य अन्यथ , पांच यत को उस विषय म अपने विच र अमभ्यतत करने क अिसर देने के पश्च त ्आदेश द्ि र , ककसी ्यजतत य ्यजततयों के िगि को य ककसी सम्पजत्त य ककसी भी िणिन की सम्पजत्तयों को ककसी कर के सांद य से पणूित: य अांशत: छूट ऐसी शतों के स थ दे सकेगी िो ऐसे आदेश म विननहदिष्पट की ि एां।
84. पचंायतों के काया का निरीक्षण - - (1) र य य सरक र के ऐसे अधधक री, जिन्ह र य य सरक र द्ि र इस ननममत्त सम्यक् रूप से प्र धधकृत ककय गय है, ऐसे ननबांधनों के अध्यधीन रहत ेहुए, िो विहहत ककये ि य , ककसी पांच यत की क यिि हहयो क ननरीिण कर सक गे।
(2) उपध र (1) के अधीन प्र धधकृत अधधक री, पांच यतों क ननरीिण करने के मलये ऐसी शजततयों क प्रयोग कर गे िो विहहत की ि य ।
(3) पांच यत के पदध री और अधधक री तथ सेिक ऐसी समस्त ि नक री देने तथ अमभलेख उपललध कर ने के मलये ब ध्य होग िो ननरीिण अधधक री द्ि र म ांगी ि ए।
85. आदेशों आहद का निष्पादि, निलबंबत करिे की शम्तत - - (1) र य य सरक र य विहहत प्र धधक री, मलखखत आदेश द्ि र , और उसम कधथत ककये ि ने ि ले क रणों से, पांच यत द्ि र प ररत ककसी सांकल्प के, ि री 64 ककये गये ककसी आदेश य दी गई अनजु्ञजप्त य अनजु्ञ के ननष्पप दन को ननलजम्बत कर सकेग य ककसी पांच यत द्ि र ककसी कृत्य के प लन को प्रनतवषद्ध कर सकेग , यहद उसकी र य म , - - (क) क ऐस सांकल्प, आदेश, अनजु्ञजप्त, अनजु्ञ य क यि िधै रूप से प ररत, ि री, मांिूर य प्र धधकृत नहीां ककय गय है/नहीां की गई है, य (ख) ऐस सांकल्प, आदेश, अनजु्ञजप्त, अनजु्ञ य क यि इस अधधननयम द्ि र प्रदत्त शजततयों के परे है य ककसी विधध के प्रनतकूल है, य (ग) ऐसे सांकल्प य आदेश के ननष्पप दन से य ऐसी अनजु्ञजप्त य अनजु्ञ के लग त र प्रितृ्त बने रहने से य ऐस क यि ककये ि ने से - - (एक) पांच यत म ननहहत ककसी धन की ह नन, दु् यिय य दरुुपयोग होन य उसम ननहहत ककसी सम्पजत्त क नकुस न होन सांभ ्य है;
(दो) स िििननक स्ि स््य, सरुि य सवुिध पर प्रनतकूल प्रभ ि पड़न सांभ ्य है;
(तीन) िनत य ्यजततयों के ककसी िगि य ननक य को िनत य िोभ होन सांभ ्य है; य (च र) श ांनत भांग होन सांभ ्य है ।
(2) िब कभी विहहत प्र धधक री द्ि र उपध र (1) के अधीन कोई आदेश ककय ि त है, तो िह तत्क ल और प्रत्येक दश म आदेश की त रीख से अधधक से अधधक दस हदन के भीतर, उस आदेश की एक प्रनत और उसके स थ उसके ककये ि ने के क रणों क वििरण र य य सरक र य र य य सरक र द्ि र इस प्रयोिन के मलये न मननहदिष्पट ककये गये अधधक री को अग्रवेषत करेग और र य य सरक र य उसके द्ि र न मननहदिष्पट ककय गय अधधक री ऐसे आदेश की पजुष्पट कर सकेग य अप स्त कर सकेग य उसे पनुरीक्षित कर सकेग य उसे उप न्तररत कर सकेग य यह ननदेश दे सकेग कक िह आदेश उप न्तरण सहहत य उसके बबन स्थ यी रूप स ेऐसी क ल िधध के मलये, िैसी िह ठीक समझ,े प्रितृ्त बन रहेग :
परन्त ुविहहत प्र धधक री द्ि र उपध र (1) के अधीन प ररत ककय गय कोई भी आदेश, र य य सरक र य उसके द्ि र न मननहदिष्पट ककसी भी अधधक री द्ि र तब तक पषु्पट, अप स्त, पनुरीक्षित य उप ांतररत नहीां ककय ि एग िब तक कक सम्बजन्धत पांच यत को प्रस्त वित आदेश के विरुद्ध सनुि ई क यजुततयतुत अिसर नहीां दे हदय ि त है ।
86. कनतपय मामलों में पचंायतों को सकंमों का निष्पादि करिे के भलये आदेश देिे की राज्य सरकार की शम्तत - - (1) र य य सरक र य विहहत प्र धधक री, मलखखत आदेश द्ि र , ककसी भी पांच यत को इस अधधननयम द्ि र उसके अधीन य तत्समय प्रितृ्त ककसी अन्य विधध द्ि र य उसके अधीन उस पर 65 अधधरोवपत ककसी भी ऐसे कत्ति् य क प लन करने य ककसी ऐसे सांकमि के सम्बन्ध म ननदेश दे सकेगी /सकेग जिसक उसके द्ि र यथ जस्थनत प लन य ननष्पप दन नहीां ककय ि रह है और जिसक प लन य ननष्पप दन ऐसी पांच यत द्ि र लोकहहत म ककय ि न र य य सरक र य विहहत प्र धधक री की र य म आिश्यक है ।
(2) पांच यत, उपध र (1) के अधीन ि री ककये गये ननदेशों क अनपु लन करने के मलये आबद्ध होगी और यहद िह ऐस नहीां करती है तो र य य सरक र य विहहत प्र धधक री को उन ननदेशों को पांच यत के ् यय से, यहद कोई हों, अनपु लन कर ने की समस्त शजततय ाँ होंगी, और ऐसी शजततयों क प्रयोग करने म िह, उस पांच यत य उसके अधधक री य सेिक जिसकी शजततयों प्रयोग म ल ई ि ती हैं, के सम न ही उस अधधननयम के अधीन उसी सांरिण क तथ उसी सीम तक हकद र होग ।
87. व्यनतिम, शम्ततयों के दरुुपयोर् आहद के भलये पचंायतों को ववघहटत करिे की राज्य सरकार की शम्तत - - (1) यहद ककसी भी समय र य य सरक र य विहहत प्र धधक री को यह प्रतीत होत है कक कोई पांच यत, इस अधधननयम द्ि र उसके अधीन य तत्समय प्रितृ्त ककसी अन्य विधध के अधीन उस पर अधधरोवपत कत्ति् यों क प लन करने म ब र- ब र ्यनतक्रम कर रही है य अपनी शजततयों से परे क यि करती है य अपनी शजततयों क दरुुपयोग करती है य र य य सरक र य सिम प्र धधक री के ककसी आदेश क प लन नहीां करती है, तो र य य सरक र य विहहत प्र धधक री, ऐसी ि ाँच करने के पश्च त,् िैसी िह उधचत समझ,े आदेश द्ि र ऐसी पांच यत को विघहटत कर सकेग और उसके नए मसरे से गठन के मलये आदेश दे सकेग ।
(2) उपध र (1) के अधीन कोई आदेश तब तक प ररत नहीां ककय ि एग िब तक पांच यत को अपन स्पष्पटीकरण देने के मलये यजुततयतुत अिसर न दे हदय गय हो, स्पष्पटीकरण म ांगने की सचून यथ जस्थनत, ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत के सरपांच य अध्यि को सम्बोधधत की ि एगी और उसकी त मील ध र 119 के उपबांधों के अनसु र की ि एगी । सचून के सम्बन्ध म पांच यत क उत्तर पांच यत के सांकल्प द्ि र समधथित होग ।
(3) उपध र (1) के अधीन पांच यत के विघहटत हो ि ने पर ननम्नमलखखत पररण म होगे, अथ ित ्--- (क) समस्त पदध री ऐसे आदेश की त रीख से अपने-अपने पद ररतत कर द ग;े (ख) पांच यत की समस्त शजततयों तथ उसके कत्ति् यों क , पांच यत क पनुगिठन होने तक प्रयोग और प लन ऐसे ् यजतत य ् यजततयों की ऐसी सममनत द्ि र ककय ि एग जिसे र य य सरक र य विहहत प्र धधक री इस सम्बन्ध म ननयतुत करे और िह ां ्यजततयों की कोई सममनत इस प्रक र ननयतुत की ि ती है, िह ां र य य सरक र य विहहत प्र धधक री ऐसी सममनत क प्रध न भी ननयतुत करेग ;
(ग) िह ां कोई सममनत खण्ड (ख) के अधीन ननयतुत की ि ती है, िह ां ऐसी सममनत क , उसके द्ि र सम्यकरूपेण प्र धधकृत कोई सदस्य, पांच यत की ओर से ि द चल सकेग य विधधक क यिि ही सांजस्थत 66 कर सकेग य पांच यत के विरुद्ध चल ये गये ककसी ब द य सांजस्थत ककसी विधधक क रिि ई म प्रनति द कर सकेग ।
(4) कोई ऐस ्यजतत िो, पांच यत के विघहटत रहने की क ल िधध के दौर न पांच यत की शजततयों क प्रयोग और उसके कति् यों क प लन करने के मलए ननयतुत ककय गय है अपनी सेि ओां के मलये सांबांधधत पांच यत ननधध से ऐस सांद य प्र प्त कर सकेग िो र य य सरक र, आदेश द्ि र , अिध ररत कर ।
(5) उपध र (1) के अधीन विघहटत ककसी पांच यत क इस अधधननयम के उपबांधों के अनुस र पुनगिठन उसके विघटन के छह म स के भीतर ककय ि एग । ऐसी पनुगिहठत पांच यत उस पांच यत की शषे अिधध के मलये कृत्य करेगी:
परन्त ुयहद अनिमसत क ल िधध छह म स से कम है तो इस क ल िधध के मलये पांच यत क पनुगिठन नहीां ककय ि एग ।
88. पचंायत के कायाकलापों की जांच --- र य य सरक र. समय- समय पर, अपने ककन्हीां अधधक ररयों द्ि र ककसी पांच यत की ि ांच. उससे सम्बजन्धत विषयों के ब रे म य ककसी ऐसे विषय के ब रे म , जिसके सम्बन्ध म र य य सरक र की मांिूरी, अनमुोदन, सम्मनत य आदेश इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ननयमों य तत्समय प्रितृ्त ककसी विधध द्ि र य उस्के अधीन अपेक्षित है, करि सकेगी।
89. हानि, दरुुपयोजि के भलये पचंों आहद का दानयत्व --- (1) पांच यत [य ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत य ग्र म सभ की सममनत क प्रत्येक पांच, सदस्य, पदध री, अधधक री य सेिक पांच यत य ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत य ग्र म सभ की सममनत के ककसी धन य अन्य सम्पजत्त की ऐसी ह नन, दिुिय य दरुुपयोंिन के मलये. जिसम िह एक पि रह है य िो उसके द्ि र अिच र के य उस कत्ति् य के प्रनत घोर उपेि के क रण हुई है, ्यजततगत रूप से द दी होग । िह रकम, ऐसी ह ननन, दु् यिय य दरुुपयोिन की प्रनतपनूत ि करने के मलये अपेक्षित है, ननहहत प्र धधक री द्ि र िसलू की ि एगी परन्त ुइस ध र के अधीन कोई िसलूी तब तक नहीां की ि एगी िब तक सम्बजन्धत ् यजतत को सनुि ई क यजुततयतुत अिसर न दे हदय गय हो ।
(2) यहद सम्बजन्धत ्यजतत रकम क सांद य नहीां करत है तो ऐसी रकम भ-ूर िस्ि के बक य के तौर पर िसलू की ि एगी और सम्बजन्धत पांच यत 3[य ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत] 4[य ग्र म सभ की सममनत] की ननधध म िम की ि एगी ।
90. पचंायतों और अन्य स्थािीय प्राधिकाररयों के बीच वववाद --- (1) दो य अधधक पांच यतों के बीच य पांच यत और ककसी अन्य स्थ नीय प्र धधक री के बीच ककसी ऐसे विषय के सम्बन्ध म , जिसम िे सांयतुत रूप से हहतबद्ध हैं, कोई विि द उत्पन्न होने की दश म , ऐस विि द र य य सरक र को ननहदिष्पट ककय ि एग और र य य सरक र क उस पर विननश्चय अांनतम होग :
परन्त ुयहद विि द पांच यत और छ िनी बोडि के बीच है तो र य य सरक र क विननश्चय केन्रीय सरक र के अनमुोदन के अध्यधीन होग । 67
(2) र य य सरक र, इस अधधननयम के अधीन बन ए गये ननयमों द्ि र पांच यतों के और पांच यत तथ अन्य स्थ नीय प्र धधक ररयों के बीच उन विषयों म जिनम िे सांयतुत रूप से हहतबद्ध हों, सम्बन्धों क विननयमन कर सकेगी।
91. अपील और पिुरीक्षण --- इस अधधननयम के अधीन पांच यतों के तथ अन्य प्र धधक ररयों के आदेशों य क यिि हहयों के विरुद्ध अपील य पनुरीिण ऐसे प्र धधक री को तथ ऐसी रीनत म होग िैस विहहत ककय ि ए।
92. अभिलेख और वस्तएंु वापस करािे तथा िि वसलू करिे की शम्तत --- (1) िह ां विहहत प्र धधक री की यह र य हो कक कोई ् यजतत पांच यत 2[य ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत] 3[य ग्र म सभ की सममनत] क कोई अमभलेख य िस्तएुाँ य धन अपनी अमभरि म अप्र धधकृत रूप से रख े हुए है तो िह, मलखखत आदेश द्ि र यह अपेि कर सकेग कक ऐस अमभलेख य िस्तुएां य धन, ऐसे अधधक री की उजस्थनत म जिसे विहहत प्र धधक री इस सम्बन्ध म ननयतुत करे, पांच यत य ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत य ग्र म सभ की सममनत को तरुन्त पररदत्त य सांदत्त कर हदय ि ए।
(2) यहद कोई ् यजतत उपध र (1) के अधीन ननदेमशत ककये गये अनसु र अमभलेख य िस्तएुाँ पररदत्त नहीां करत है य धन क सांद य नहीां करत य ऐस करने से इक र करत है तो विहहत प्र धधक री उस े धगरफ्त र करि सकेग और उसे ि रांट के स थ, िो ऐसे प्र रूप म होग , िो विहहत ककय ि ए, मसविल िेल म 30 हदन से अधधक न होने ि ली क ल िधध के मलये परररुद्ध रखे ि ने के मलये भेि सकेग ।
(3) विहहत प्र धधक री -- (क) कोई ऐस धन िसलू करने के मलये यह ननदेश दे सकेग कक ऐस धन भ-ूर िस्ि के बक य के तौर पर िसलू ककय ि ए, और (ख) ककसी ऐसे अमभलेख य ककन्हीां ऐसी िस्तओुां को ि पस करने के मलये तल शी ि रांट ि री कर सकेग और उसके सम्बन्ध म ऐसी समस्त शजततयों क प्रयोग कर सकेग , िो ककसी मजिस्रेट द्ि र दण्ड प्रकक्रय सांहहत , 1973 (1974 क सां. 2) के अध्य य 7 के उपबांधों के अधीन विधधपिूिक प्रयोग म ल ई ि सकती हों ।
(4) उपध र (1) य (2) (3) के अधीन कोई क रिि ई तब तक नहीां की ि एगी िब तक कक सम्बजन्धत ्यजतत को इस सम्बन्ध म क रण बत ने के मलये यजुततयतुत अिसर न दे हदय गय हो कक उसके विरुद्ध ऐसी क रिि ई त यों न की ि ए।
(5) कोई ऐस ् यजतत जिसके विरुद्ध इस ध र के अधीन कोई क रिि ई की ि ती है, ऐसी क रिि ई आरम् भ की ि ने से छह िषि की क ल िधध के मलये, ककसी पांच यत य ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत य ग्र म सभ की सममनत क सदस् य होने के मलये ननरहहित होग ।
93. शम्ततयों का प्रत्यायोजि --- (1) र य य सरक र, अधधसचून द्ि र , इस अधधननयम द्ि र , य उसके अधीन उसे प्रदत्त समस्त य ककन्हीां शजततयों को, ननयम बन ने सम्बन्धी शजततयों के मसि य, अपने अधीनस्थ ककसी अधधक री को य ककसी पांच यत को प्रत्य योजित कर सकेगी । 68
(2) उपध र (1) के अधीन प्रत्य योजित शजततयों क प्रयोग, र य य सरक र द्ि र इस सम्बन्ध म ि री ककये गये स ध रण य विशषे आदेशों के अनसु र ककय ि एग ।
(3) र य य सरक र, अधधसचून द्ि र , इस अधधननयम के अधीन विमभन्न प्र धधक ररयों को विहहत कर सकेगी।
94. नियतं्रण की सािारण शम्तत --- इस अधधननयम से य उसके अधीन बन ये गये ननयमों से सम्बजन्धत समस्त विषयों म ि ेसमस्त अधधक री, िो इस अधधननयम द्ि र उसके अधीन क यि करने के मलये सशतत हैं उसी प्र धधक री के ननयांत्रण के अध्यधीन होगे जिसके प्रश सननक ननयांत्रण के अधीन ि े स म न्यत: अपने पद के कृत्यों क प लन करत ेहैं। अध्याय 11 नियम और उपववधियााँ
95. नियम बिािे की शम्तत --- (1) र य य सरक र, इस अधधननयम के प्रयोिनों को क य िजन्ित करने के मलये ननयम बन सकेगी।
(2) विमशष्पटत: और पिूिग मी शजतत की ् य पकत पर प्रनतकूल प्रभ ि ड ले बबन ऐसे ननयमों म उन समस्त य ककन्हीां विषयों के मलये उपबन्ध हो सक ग ेजिनके मलये इस अधधननयम के ककसी उपबन्ध के अधीन ननयमों द्ि र विहहत ककय ि न य उपबजन्धत ककय ि न अपेक्षित है।
(3) समस्त ननयम पिूि प्रक शन की शति के अध्यधीन होंगे।
(4) समस्त ननयम विध न सभ के पटल पर रखे ि य गे ।
(5) कोई ननयम बन त ेसमय, र य य सरक र यह ननदेश दे सकेगी कक उसक भांग, िुम िने से, िो दो सौ पच स रुपये तक क हो, कर सकेग और च ल ूरहने ि ले भांग की दश म , अनतररतत िुम िने से, िो प्रथम दोषमसवद्ध के पश्च त ्से ऐसे प्रत्येक हदन के मलये, जिसके दौर न भांग च ल ूरहत है, प ांच रुपये तक क हो सकेग , दण्डनीय होग ।
96. उपववधियां --- (1) पांच यत य ग्र म सभ । इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ये गये ननयमों से सांगत उपबबधधय ां बन सकेगी।
(2) उपध र (1) के अधीन उपविधधय ां बन त ेसमय, पांच यत य ग्र म सभ यह ननदेश दे सकेगी कक उसक भांग, िुमनन से िो दो सो पच स रुपये तक क हो सकेग और च ल ूरहने ि ले भांग की दश म अनतररतत िुम ने से, िो प्रथम दोषमसवद्ध के पश्च त ्से ऐसे प्रत्येक हदन के मलये, जिसके दौर न भांग च ल ूरहत है, प ांच रुपये तक क हो सकेग , दण्डनीय होग ।
(3) कोई उपविधध तब तक प्रितृ्त नहीां होगी िब तक कक विहहत प्र धधक री द्ि र उसकी पजुष्पट न कर दी ि ए।
(4) उपविधधय ां बन ने तथ उनके अनमुोदन की रीनत ऐसी होगी िो विहहत की ि ए । 69
97. आदशा (मॉडल) उपववधियॉ --- (1) र य य सरक र, पांच यतों य ग्र म सभ के म गिदशिन के मलये समय-समय पर आदशि उपविधधय ां बन सकेगी।
(2) र य य सरक र ककसी पांच यत य ग्र म सभ को यह ननदेश दे सकेगी कक िह ऐसी आदशि उपविधधयों को इस प्रक र उप ांतररत करत ेहुए, जिससे िे स्थ नीय पररजस्थनतयों के मलये उपयतुत हो सके, अांगीक र कर ।
(3) यहद पांच यत य ग्र म सभ उपध र (2) के अधीन ननदेशों क प ल छह म ह के भीतर नहीां करती है, तो भ रत सरक र ऐसी पांच यत य ग्र म सभ को ऐसी आदशि उपविधधय ां ल ग ूकर सकेगी।
(4) ध र 96 की उपध र (4) के उपबांध इस ध र के अधीन उपविधधयों को अांगीक र ककये ि ने पर उनके ल ग ूककये ि ने के सम्बन्ध म ल ग ूहोगे । अध् याय 12 शाम्स्त
98. निरहहात हो जािे पर पचं, सदस्य, सरपचं, उप-सरपचं, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष [***] की हैभसयत में काया करिे के भलये शाम्स्त --- 1) िो कोई यह ि नत ेहुए कक िह ककसी पांच यत के पांच य सदस्य क पद ध रण करने क हकद र नहीां है य उस रूप मे पद ध रण करने क हकद र नहीां रह गय है ऐसे पांच य सदस्य की हैममयत से क यि करेग दोषमसवद्ध पर िुम िने से, िो ऐसे प्रत्येक हदन के मलये, जिसको िह ऐसे पांच य सदस्य की हैमसयत से बठैत है य मत देत है, पच स रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग । 2) िो कोई यह ि नत ेहुए कक िह सरपांच य उपसरपांच, अध्यि य उप ध्यि, क पद ध रण करने क हकद र नहीां है य उस रूप मे ऐस पद ध रण करने क हकद र नहीां रह गय है, उस हैमसयत से क यि करेग , दोषमसवद्ध पर, िुम िने से, िो ऐसे प्रत्येक हदन के मलये जिसको िह उस हैमसयत म क यि य कृत्य करेग , एक सौ रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग । 3) कोई ्यजतत, जिसकी पद िधध क अिस न हो गय है य जिसने त्य गपत्र दे हदय है य जिसके विरुद्ध अविश्ि स क प्रस्त ि प ररत कर हदय है य जिसे पांच यत के ककसी पद स ेहट हदय है, अपने कलिे य ननयांत्रण म के ऐसे ककसी अमभलखे, िस्त ुय धन य अन्य सम्पनत, िो पांच यत म ननहहत है य पांच यत की है, अपने पदोत्तरित्ती को तत्क ल नहीां सौंपेग , िह दोषमसवद्ध पर, िुम िने से, िो दो हि र रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग ।]
99. हहतबद्ध सदस्यों द्वारा मत हदये जािे के भलये शाम्स्तयां --- िो कोई ककसी ऐसे म मले म िो पांच यत के विच र धीन हो हहतबद्ध होत ेहुए उस म मले म मत देग , दो्षमसवद्ध पर, िुम िन से िो दो सौ पच स रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग ।
100. क्रकसी सदस्य, पदयारी या सेवक द्वारा सवंवदा में हहत अम्जात करिे के भलये शाम्स्त --- यहद पांच यत क कोई सदस्य य पदध री य सेिक पांच यत के स थ य उसके द्ि र य उसकी ओर से की गई ककसी सांविद य ककये गये ककसी ननयोिन मे प्रत्यित: य अप्रत्यित: कोई ियैजततक अांश य हहत, विहहत 70 प्र धधक री की मांिूरी य अनजु्ञ के बबन ि नत ेहुए अजिित क त है, तो उसके ब रे मे यह समझ ि एग कक उसने भ रतीय दण्ड सांहहत , 1860 (1860 क सां. 45) की ध र 168 के अधीन अपर ध ककय है।
101. अधिकाररयों आहद का सदोष अवरोि --- कोई भी ्यजतत, िो पांच यत के ककसी अधधक री य सेिक को य ककसी ऐसे ्यजतत को जिसे ऐसे अधधक री य सेिक ने ककसी स्थ न, भिन य भमूम पर थ उसम प्रिेश करने की अपनी शजततय ां विधधपिूिक प्रत्य योजित की हैं, उस स्थ न, भिन य भमूम पर य उसम प्रिेश करने की उसकी विधधपिूिक शजततयों क प्रयोग करने से रोकेग तो उसके ब रे म यह समझ ि एग कक उसने भ रतीय दण् ड सांहहत , 1860 (1860 क सां. 45) की ध र 341 के अधीन अपर ध ककय है।
102. पचंायतों के सदस्य आहद को बािा पहंुचािे का प्रनतषिे --- कोई भी ् यजत त िो पांच यत के ककसी सदस्य, पदध री य सेिक को य ककसी ऐसे ्यजतत को, जिसके स थ ककसी पांच यत द्ि र य उसकी ओर स े कोई सांविद की गई है, उसके कति् य के ननििहन म य कोई ऐसी ब त करोगे मे जिसे करने के मलये िह सशतत है, ब ध पहुांच एग िह दोषमसवद्ध पर, िुम िने से, िो दो सौ पच स रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ि एग ।
103. सचूिा को हटािे या भमटािे का प्रनतदेय --- कोई भी ्यजतत, िो पांच यत य उसके ककसी अधधक री द्ि र य उसके आदेशों के अधीन प्रदमशित की गई ककसी सचून को य पररननममित ककये गये ककसी सांकेत य धचढ़ को उस ननममत्त ककसी प्र धधक र के बबन हट एग , विनष्पट करेग य विरूवपत करेग य अन्य प्रक र स ेममट येग िह दोषमसवद्ध पर, िुम िने से, िो पच स रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग ।
104. जािकारी ि देिे या भम्या जािकारी देिे के भलये शाम्स्त --- कोई ् यजतत िो इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ननयमों द्ि र उसके अधीन ि री की गई ककसी सचून य ककसी अन्य आदेमशक द्ि र कोई ि नक री देने के मलये अपके्षित ककय गय है, ऐसी ि नक री देने क लोप करेग य ि नबझूकर ममध्य ि नक री देग , दोषमसवद्ध पर, िुम िने से, िो दो सो पच स रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग ।
105. बोली लर्ािे का प्रनतषिे --- (1) पांच यत क कोई सदस्य य सेिक य ऐस कोई अधधक री, जिस ेइस अधधननयम के अधीन िांगम य स्थ िर सम्पजत्त के विक्रय के सम्बन्ध म ककसी कत्ति् य क प लन करन है, ऐसे विक्रय म बेची ि ने ि ली ककसी सम्पजत्त के मलये प्रत्यित: य अप्रत्यित: बोली नहीां लग एग य उसम कोई हहत अजिित नहीां करेग ।
(2) कोई ् यजतत िो उपध र (1) के उपबन्धों क उल्लांघन करेग दोषमसवद्ध पर, िुम िने से, िो दो सौ पच स रुपये तक क हो सकेग , दजण्डत ककय ि एग और यहद िह पांच यत क अधधक री य सेिक है तो िह सेि से हट ए ि ने क भी द यी होग ।
106. क्रकसी िी पचंायत को िकुसाि की प्रनतपनूत ा क्रकये जािे की प्रक्रिया --- यहद ककसी क यि, उपेि य ् यनतक्रम द्ि र जिसके क रण ककसी ्यजतत ने इस अधधननयम के द्ि र य अधीन अधधरोवपत कोई श जस्त उपगत की है और ककसी ऐसे ्यजतत द्ि र ककसी पांच यत की सम्पजत्त को कोई नकुस न पहुांच य गय है, तो िह ऐसे नकुस न की प्रनतपनूत ि करने और स थ ही ऐसी श जस्त क सांद य करने के मलये 71 द यी होग और विि द के म मले म नकुस न क मलू् य उस मजिस् रेट द्ि र अिध ररत ककय ि एग , जिसने ऐसी श जस्त उपगत करने ि ले ् यजत त को मसद्धदोष ठहर य है और भांग करने पर ऐसे मलू् य क सांद य न ककय ि ने पर, िह र मश भ-ूर िस् ि के बक य के तौर पर िसलूी योग् य होगी। अध्याय 13 प्रकीणा
107. सदिावपवूाक क्रकये र्ये कायो का पररत्राण --- ककसी पांच यत य ग्र म सभ य उसकी ककन्हीां सममनतयों य उसके ककसी पदध री, अधधक री य सेिक के विरुद्ध य ककसी ऐसी पांच यत य ग्र म सभ उसकी सममनत, उसके पदध री, अधधक री य सेिक के, ननदेश के अधीन क यि करने ि ले ककसी ्यजतत के विरुद्ध ककसी ऐसी ब त के सम्बन्ध म , िो इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ककन् हीां ननयमों य ककसी उपविधध के अधीन सदभ िपिूिक की गई है य जिसक सदभ िपिूिक ककय ि न आशनयत रह है, कोई ि द नहीां चल य ि एग ।
108. सचूिा के अिाव में वाद का वजाि --- (1) ककसी 1[पांच यत य ग्र म सभ ] य उसके ककसी पदध री, अधधक री य सेिक के य इस अधधननयम म िखणित प्र धधकररयों म से ककसी प्र धधक री के ननदेश नसु र क यि करने ि ले ककसी ् यजतत के विरुद्ध ककसी ऐसे ि द के सम्बन् ध म , िो इस अधधननयम के अधीन की हो य की ि ने के मलये त त्पनयित है, कोई ि द तब तक, सजस्मत नहीां ककय ि एग िब तक, उस पर मसविल प्रकक्रय सांहहत , 1908 (1908 क स. 5) की ध र 80 के अधीन सप्यकृ रूप से सचून त मील न कर दी गई हो।
(2) ऐस प्रत्येक ब द ख ररि कर हदय ि एग . िब तक कक िह अमभकधथत ि द हेत ुप्रोद्भतू होने की त रीख से छह म स के भीतर सांजस्थत न ककय गय हो।
(3) इस ध र म की कोई भी ब त विननहदिष्पट अनतुोष अधधननयम, 1963 (1963 क स. 74) की ध र 38 के अधीन सांजस्थत ककये गये ककसी ि द को ल ग ूनहीां समझी ि एगी ।
109. सदस्यों, अधिकाररयों आहद के ववरुद्ध कनतपय वादों में प्रनतवाद पचंायत या ग्राम सिा के खचा पर क्रकया जाएर्ा --- कलेतटर की पिूि अनजु्ञ से, पांच यत य ग्र म सभ के ककसी पदध री अधधक री य सेिक के विरुद्ध ऐसे ब द म , िो इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ननयमों य उपविधधयों के अधीन उसके द्ि र की गई ककसी ब त य ककसी क यिि ही से उद् भतू हुआ हो, प्रनति द ऐसे ्यजतत की ओर स े सम्बजन्धत पांच यत य ग्र म सभ द्ि र ककय ि एग और ऐसे प्रनति द पर उपगत ्यय क सांद य सम्बजन्धत पांच यत य ग्र म सभ की ननधध म स ेककय ि एग ।
110. कर आहद के सभबन्ि में अन्य कायावाही का वजाि --- (1) ककसी मलू्य ांकन, ननध िरण य उद्ग्रहण के सम्बन्ध म कोई आिेप इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ननयमों म उपबांधधत रीनत से मभन्न ककसी रीनत म नहीां ककए ि एांगे।
(2) नकुस नी के मलये य विननहदिष्पट प लन के मलये कोई ब द ककसी पांच यत य ग्र म सभ य उसके ककसी पदध री, अधधक री य सेिक के विरुद्ध इस आध र पर नहीां चल य ि एग कक इस अधधननयम म 72 विननहदिष्पट ककन्हीां कत्ति् यों क प लन नहीां ककय गय है ।
111. पचंायत के सदस्य या सेवक लोक सेवक होंर्े --- पांच यत क प्रत्येक पदध री और उसक प्रत्येक अधधक री य सेिक भ रतीय दण्ड सांहहत , 1860 (1860 क सां. 45) की ध र 21 के अथि के अन्तगित लोक सेिक समझे ि एांगे ।
112. ररम्तत या र् ि की प्रक्रिया आहद में त्रहुट होिे के कारण पचंायत के काया अववधिमान्य िहीं होंर्े--- पांच यत क कोई क यि केिल इस क रण स ेअविधधम न्य नहीां होग कक --- (क) उसम कोई ररजतत है य उसके गठन म कोई त्रहुट है; य (ख) ककसी पदध री के रूप म क यि करने ि ले ककसी ्यजतत के ननि िचन, सहयोिन य ननयजुतत म कोई त्रहुट है; य (ग) उसकी प्रकक्रय म कोई ऐसी अननयममतत है िो म मले के गणु गणु पर प्रभ ि नहीां ड लती है । 113 िभूम का अजाि --- (1) िह ां इस अधधननयम के प्रयोिन के मलये कोई भमूम अपेक्षित हो और पांच यत कर र द्ि र उसे अजिित करने म असमथि हो, तो र य य सरक र ऐसी पांच यत के ननिेदन पर और कलतेटर की मसफ ररश पर, भमूम अििन अधधननयम, 1894 (1894 क सां. 1) के उपबन्धों के अधीन उसे अजिित करने की क यिि ही कर सकेगी और उस अधधननयम के अधीन अधधननणीत प्रनतकर क तथ उन क यिि हहयों के सम्बन्ध म र य य सरक र द्ि र उपगत समस्त अन्य प्रभ रों क पांच यत द्ि र सांद य कर हदय ि ने पर िह भमूम उस पांच यत म ननहहत हो ि एगी जिसके मलये िह इस प्रक र अजिित की गई है।
(2) पांच यत, र य य सरक र की पिूि मांिूरी के बबन ककसी ऐसी भमूम को, िो उपध र (1) के अधीन अजिित की गई है, अांतररत नहीां करेगी य ऐसी भमूम को उस प्रयोिन, जिसके मलये िह अजिित की गई है, से मभन्न प्रयोिन के मलये ्यपिनत ित नहीां करेगी।
114. केन्रीय सरकार या राज्य सरकार अिजु्ञम्प्त या अिजु्ञा अभिप्राप्त िहीं करेर्ी --- इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ककसी ननयम य उपविधध म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, केन्रीय सरक र य र य य सरक र को इस ब त के मलये अपके्षित नहीां ककय ि एग कक िह ऐसी सरक र की ककसी सम्पजत्त य ऐसी सरक र के अधधभोग म के य ननयांत्रण धीन ककसी स्थ न के सम्बन्ध म कोई अनजु्ञ य अनजु्ञजप्त अमभप्र प्त कर ।
115. पचंायत की िि उिार लेिे की शम्तत --- स्थ नीय प्र धधक ररयों द्ि र उध रों के मलये ि ने से सम्बजन्धत तत्समय प्रितृ्त ककसी अधधननयममनत म अन्तवििष्पट ननबिन्धनों के अध्यधीन रहत ेहुए, कोई पांच यत इस अधधननयम के प्रयोिनों को क य िजन्ित करने के मलये, र य य सरक र की पिूि मांिूरी से उध र ले सकेगी:
परन्त ुस्थ नीय प्र धधकरण उध र अधधननयम, 1914 (1914 क सां. 9) म य मध्य भ रत स्थ नीय अधधक री ऋण विध न सांित 2007 (1950) (क्रम ांक 64 सन ् 950) म तथ उतत अधधननयममनतयों के अधीन बन ए गये, ननयमों म अन्तवििष्पट कोई भी ब त ककसी ऐसे उध र के सम्बन्ध 73 म ल ग ूनहीां होगी िो सरक र से य ककसी ऐसे अन्य प्र धधक री से मलय गय हो, िो तत्समय प्रितृ्त ककसी विधध के अधीन गहठत ककय गय हो, तथ जिस ेर य य सरक र से अनदु न ममलत हो।
116. वसलू ि की जा सकिे वालो ििराभशयां तथा अिपुयोर्ी सामग्री का बटे्ट खात ेमें डाला जािा --- पांच यतो को शोध्य ऐसी धनर मशय ां िो िसलू न की ि सकती हों तथ ऐसी स मग्री िो उपयोगी न हो, विहहत रीनत मे बटे्ट ख त ेमे ड ल दी ि एगी।
117. सदस्यों आहद को पाररश्रभमक का प्रनतबेथ --- पांच यत के ककसी भी सदस्य को पांच यत द्ि र भी प्रक र क कोई प ररश्रममक य भत्त इस सम्बन्ध म बन ए गये ननयमों के अनसु र ही हदय ि एग अन्यथ नहीां ।
118. पचंायत या ग्राम सिा के अभिलेख आहद का निरीक्षण क्रकया जा सकेर्ा --- इस अधधननयम के अधीन बन ए गये ननयमों क अध्यधीन रहत ेहुए और ऐसी फीस के सांद य करने पर, िो विहहत की ि ए, 1[पांच यत य ग्र म सभ ] तथ उसकी ककसी सममनत के अमभलेखो क ऐसे ्यजततयो द्ि र ननरीिण ककय ि सकेग िो उसकी ि ांछ कर , और उनकी प्रम खणत प्रनतमलवपय ां ऐसे ् यजततयों को िो उनके मलये आिदेन म , ऐसी फीस क सांद य करने पर, िैस कक विहहत की ि ए, दी ि एांगी।
119. दस्तावेज आहद तामील करिे की पद्धनत --- इस अधधननयम म अन्यथ उपबांधधत के मसि य इस अधधननयम य उसके अधीन बन ए गये ककसी ननयम, उपविधध य आदेश के अधीन ककसी सचून य अन्य दस्त िेिों की त मील विहहत रीनन म की ि एगी ।
120. अधिनियम के प्रयोजिों के भलये प्रवेश आहद --- ककसी पांच यत य ग्र म सभ के पद धधक ररयों य ऐसी पांच यत य ग्र म सभ द्ि र इस ननममत्त प्र धधकृत अधधक री के मलये यह विधधपणूि होग कक िह सयूोदय य सयू िस्त के बीच, ऐसे सह यकों के स थ जिन्ह िह आिश्यक समझ,े ककसी भिन य भमूम म य उस पर पांच यत य ग्र म सभ से सम्बजन्धत ककसी क यि के सम्बन्ध म प्रिेश करे:
परन्त ुऐसे ककसी भी भिन य भमूम म िो उस समय अधधभोग म है, तब तक प्रिेश नहीां ककय ि एग िब तक कक अधधभोधगयों को चौबीस घांटे की मलखखत सचून न दे दी गई हो :
परन्त ुयह और भी कक म नि ननि स के रूप म उपयोग म ल ए ि ने ि ले भिन की दश म अधधभोधगयों की स म जिक तथ ध ममिक रूहढ़यों क सम्यक् ध्य न रख ि एग ।
121. निवााचि मामलों में न्यायालयों द्वारा हस्तक्षेप का वजाि --- इस अधधननयम के अधीन ककय गय य ककय ि न त त्पनयित ननि िचन िेत्र क पररसीमन य ऐसे ननि िचन िते्रों म स्थ नों के आिांटन से सम्बजन्धत ककसी विधध की विधधम न्यत ककसी न्य य लय म प्रश्नगत नहीां होगी ।
122. निवााचि याधचका --- (1) इस अधधननयम के अधीन ककये गये ककसी ननि िचन [***] को --- (एक) ग्र म पांच यत य ग्र म सभ के म मले म उपखण्ड अधधक री (र िस्ि) को (दो) िनपद पांच यत के म मले म कलेतटर को, और (तीन) जिल पांच यत के म मले म सांभ ग आयतुत को विहहत रीनत म केिल य धचक पेश करके ही प्रश्नगत 74 ककय ि एग अन्यथ नहीां।
(1) ऐसी कोई भी अिी तब तक ग्रहण नहीां की ि गगी िब तक िह त रीख से, जिसको प्रश् नगत ननि िचन [***] अधधसधूचत ककय गय थ , तीस हदन के भीतर पेश न की ि ए।
(2) ऐसी अिी की ि ांच य उसक ननपट र ऐसी प्रककय के अनसु र ककय ि एग िो विहहत की ि ए।
123. ऐसे व्यम्ततयों को निष्काभसत करिे की शम्तत जो फीस का सदंाय करिे से इंकार करें --- िब इस अधधननयम के अधीन कोई फीस अधधरोवपत की गई है य उसे िसलू करने क अधधक र इस अधधननयम के अधीन ठेके पर दे हदय गय है, तो ऐसी फीस क सांग्रहण करने के मलये सम्बजन्धत पांच यत य ग्र म सभ द्ि र ननयोजित कोई ्यजतत य पांच यत य ग्र म सभ य ठेकेद र द्ि र इस ननममत्त सम् यकरूपेण प्र धधकृत ककय गय कोई ् यजतत फीस क सांग्रहण करने के ठेके की शतो के अध्यधीन रहत ेहुए उस स्थ न से जिसके उपयोग के मलये फीस देय हो, ऐसे ककसी भी ्यजतत को ननष्पक मसत कर सकेग िो फीस क सांद य करने के मलये द यी है ककन्त ुउसक सांद य करने से इांक र करत है।
124. स्वामी या अधििोर्ी द्वारा व्यनतिम क्रकये जािे पर पचंायत या ग्राम सिा सकंमों का निष्पादि कर सकेर्ी और व्यय वसलू कर सकेर्ी --- इस अधधननयम के उपबांधों के अधीन ककसी भिन य भमूम के स्ि मी य अधधभोगी द्ि र कोई सांकमि ननष्पप हदत ककय ि न अपके्षित है, और ऐसे सांकमो के ननष्पप दन म ् यनतक्रम ककय ि त है, तो च हे ऐसे ् यनतक्रम के मलये ककसी श जस्त क उपबांध ककय गय हो य न ककय गय हो पांच यत य ग्र म सभ ऐसे सांकमि ननष्पप दन करि सकेगी, और उसके द्ि र उपगत ् ययों क , िब तक इस अधधननयम म अमभ्यतत रूप से अन्यथ उपबांधधत न हो, पांच यत य ग्र म सभ को सांद य उस ्यजतत द्ि र ककय ि एग जिसके द्ि र ऐस सांकमि ननष्पप हदत ककय ि न च हहये थ और सांद य करने म ् यनतक्रम ि ने की दश म , िह भ-ूर िस्ि के बक य के तौर पर िसलूी योग्य होग ।
125. ग्राम पचंायत के मखु्यालय का बदला जािा, ग्राम सिा का वविाजि, समामेलि तथा पररवताि ---
(1) र य यप ल य उनके द्ि र प्र धधकृत प्र धधक री, आदेश द्ि र , ककसी ग्र म पांच यत के मखु्य लय को बदल सकेग य ककसी ग्र म पांच यत की सीम ओां म ककसी ऐसे स्थ नीय िेत्र को, िो उसके स मीप्य म हो, सजम्ममलत करके य उसम स ेककसी ऐसे स्थ नीय िते्र को, िो उसम सम विष्पट हो, अपिजिित करके, पररिनत ित कर सकेग य दो य अधधक ग्र म पांच यतों को सम ममेलत कर सकेग और उसके स्थ न पर एक ग्र म पांच यत गहठत कर सकेग य ककसी ग्र म पांच यत िते्र को विभ जित कर सकेग और उसके स्थ न पर दो य अधधक ग्र म पांच यत िते्र गहठत कर सकेग :
परन्त ुइस ध र के अधीन कोई आदेश तक तक नहीां ककय ि एग िब तक कक इस ननममत्त कोई प्रस्त ि, सझु ि तथ आिेप आमांबत्रत करत ेहुए ऐसी रीनत म , िो विहहत की ि ए, प्रक मशत न कर हदय गय हो और आिेपों पर विच र न कर मलय गय हो ।
(2) उपध र (1) के अधीन आदेश ि री होने पर, र य यप ल य प्र धधकृत प्र धधक री ऐसे प ररण ममक आदेश प ररत करेग िो आिश्यक हों । 75
126. ग्राम का ववस्थापि (डडसईस्टैम्ललशमेंट) --- (1) र य यप ल य उनके द्ि र प्र धधकृत प्र धधक री मलखखत आदेश द्ि र ककसी ग्र म को विस्थ वपत कर सकेग :
परन्त ुकोई भी ऐस आदेश तब तक ि री नहीां ककय ि येग िब तक कक प्रस्त ि की ऐसी सचून जिसके द्ि र उन ्यजततयों स,े जिनके उससे प्रभ वित होने की सांभ िन है, आिेप उसम विननहदिष्पट की ि ने ि ली त रीख तक आमांबत्रत करत ेहुए विहहत रीनत से प्रक मशत न कर दी गई हो और प्र प्त हुए आिेपों पर विच र न कर मलय गय हो ।
(2) उपध र (1) के अधीन आदेश ककय ि ने पर, र य यप ल य उनके द्ि र विहहत प्र धधक री ऐसे प ररण ममक आदेश प ररत कर सक ग,े िो आिश्यक हों ।
127. खण्ड तथा म्जला पचंायत की सीमाओ ंमें पररवताि --- (1) र य यप ल अधधसचून ककसी खण्ड के मखु्य लय म पररितिन य द्ि र ककसी खण्ड की सीम ओ मे ककसी ऐसे स्थ नीय िेत्र को, िो उसके स मीप्य म है, सजम्ममलत करके य उसम से ककसी ऐसे स्थ नीय िेत्र को िो उसमे सम विष्पट है, अपिजिित करके पररितिन कर सकेग :
परन्त ुकोई भी ऐसी अधधसचून तब तक ि री नहीां की ि एगी िब तक कक ऐसे आशय को सज्ञ वपत करने ि ली ऐसी सचून , जिसके द्ि र उन ् यजततयो स,े जिनक खण्डों की सीम ओ म ककये ि ने ि ले पररितिन स ेप्रभ वित होन सांभ ्य है, आिेप उसमे विननहदिष्पट की ि ने ि ली त रीख तक आमांबत्रत करत ेहुए, विहहत रीनत म प्रक मशत न कर दी गई हो तथ प्र प्त हुई आपजत्तयों पर विच र न कर मलय गय हो:
परन्त ुयह और भी कक ककसी खण्ड के मखु्य लयों म पररितिन सम्बन्धी ऐसी अधधसचून तभी ि री की ि एगी िबकक िह खण्ड की सीम ओां के ब हर जस्थत उसके मखु्य लय को उस खण्ड की सीम ओां के भीतर ककसी स्थ न म पररिनत ित करने के उद्देश्य स ेि री की गई हो, अन्यथ नहीां ।
(2) उपध र (1) के अधीन अधधसचून ि री होने पर, र य यप ल य उनके द्ि र प्र धधकृत प्र धधक री ऐसे प ररण ममक आदेश प ररत कर सक गे िो आिश्यक हों ।
(3) ककसी जिल ेकी सीम ओ के पीरितिन होने पर, र य य सरक र जिल पांच यत के ब रे म ऐसे प ररण ममक आदेश प ररत कर सकेगी िसैे कक आिश्यक हो ।
128. सरकारी िभूमयों का प्रबिं --- पांच यतों को अन्तररत की गई ककसी सरक री भमूम क प्रबांध ऐसी पांच यत य ग्र म सभ द्ि र ऐसे ननयमों के अनसु र ककय ि एग िो र य य सरक र इस ननममत्त बन ए। अध्याय 14 सपंरीक्षा
129. पचंायतों की सपंरीक्षा --- (1) पांच यतों के लखे ओां की सांपरीि करने के मलये र य य सरक र के ननयांत्रण धीन एक पथृक् तथ स्ितांत्र सांपरीि सांगठन होग ।
(2) सांपरीि सांगठन म र य य सरक र द्ि र ननयतुत ककये ि ने ब ले ऐसे अधधक री तथ सेिक होंगे िैस 76
(3) पांच यतों के लेख ओां की सांपरीि , सांद य की ि ने ि ली सांपरीि फीस और ऐसी सांपरीि ररपोटों पर क यिि ही की रीनत ऐसी होगी िो विहहत की ि ए। अध्याय 14 - क अिसुधूचत क्षेत्रों में पचंायतों के भलये ववभशष्ट उपबिं 129 – क. पररिाषाएं -- इस अधधननयम म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी तथ इस अध्य य म , िब तक सांदभि से अन्यथ अपेक्षित न हो, - - (क) ''ग्राम सिा'' से अमभप्रेत है ऐस ननक य िो उन ्यजततयों से ममलकर बनेग जिनके न म ग्र म स्तर पर य उसके ऐसे भ ग म , जिसके मलये उसक गठन ककय गय है, पांच यत िते्र से सम्बजन्धत ननि िचक न म िमलयों म सजम्ममलत हैं । (ख) ''ग्राम'' से अमभप्रेत है, अनसुधूचत िते्र म कोई ऐस ग्र म जिसम स ध रणतय आि स य आि सों क समहू अथि छोट ग ाँि य छोटे ग ांिों क समहू ऐस होग जिसम समदु य सम विष्पट हो और िो परम्पर ओां और रूहढ़यों के अनसु र अपने क यिकल पों क प्रबन्ध करत हो । 129 - ख. ग्राम तथा ग्राम सिा का र् ि --- (1) र य यप ल, लोक अधधसचून द्ि र इस अध्य य के प्रयोिनों के मलये ककसी ''ग्र म'' को विननहदिष्पट कर सक गे ।
(2) स ध रणतय , ग्र म के मलये िैस कक उपध र (1) म पररभ वषत है, एक ग्र म सभ होगी:
परन्त ुग्र म सभ के सदस्य, यहद ऐस च ह तो ककसी ग्र म म एक से अधधक ग्र मसभ क गठन ऐसी रीनत म ककय ि सकेग , िैस कक विहहत ककय ि ए और ऐसी प्रत्येक ग्र म सभ के िेत्र म आि स य आि सों क अथि छोट ग ांि य छोटे ग ाँिों क समहू होग जिसम समदु य सम विष्पट हों और िो परम्पर ओां और रूह ढयों के अनसु र अपने क यिकल पों क प्रबन्ध करेग ।
(3) ग्र मसभ के प्रत्येक सजम्मलन के मलए ग्र म सभ के सदस्यों की कुल सांख्य के एक दशम ांश से य ग्र म सभ के कुल पॉच सौ सदस् य इनम से िो भी कम हो, से अन्यनू सदस् यों से गणपनूत ि होगी।
(4) ग्र मसभ के सजम्म लन की अध् यित , ग्र मसभ के अनसूधूचत िनि नतयों के ककसी ऐसे सदस् य द्ि र की ि एगी िो पांच यत क सरपांच य उपसरपांच य कोई सदस् य न हो और िो उस सजम्मलन म उपजस्थत सदस् यों की बहुमत द्ि र इस प्रयोिन के मलये ननि िधचत ककय गय हो। 129–र्. ग्राम सिा की शम्ततयॉ और कृत् य –-- ककसी अनसुधूचत िेत्र म , ग्र म सभ को ध र 7 के अधीन प्र प्त शजततयों तथ कृत् यों के अनतररत त ननम् नमलखखत शजततयॉ तथ कृत् य भी होंग,े अथ ित ्--- (एक) ्यजततयों की परम्पर ओां तथ रूहढ़यों, उनकी स ांस्कृनतक पहच न और स मदु नयक स धनों को तथ विि दों के ननर करण के रूहढ़गत ढांग को सरुक्षित तथ सांरक्षित करन ;
(दो) [***] 77 (तीन) ग्र म के िते्र के भीतर के प्र कृनतक स् त्रोतों को, जिनके अन् तगित भमूम, िल तथ िन आत ेहैं, उसकी परम् पर के अनसु र और सांविध न के उपबांधों के अनरुूप और तत् समय प्रितृ्त अन् य सांसगुत विधधयों की भ िन क सम् यक् ध् य न रखत ेहुए प्रबन् ध करन ;
(च र) [***] (प ांच) ग्र म के ब ि रों तथ मेलों क जिनमे पशमेुल सजम्ममलत है, च हे िे ककसी भी न म से ि ने ि ए, ग्र म पांच यत के म ध्यम से प्रबांध मन ;
(छह स्थ नीय योिन ओां पर, जिनम िनि तीय उप-योिन एां सजम्ममलत हैं, तथ ऐसी योिन ओ के मलये स् त्रोतों और ्ययों पर ननयत्रण रखन ; और (स त) ऐसी अन् य शजततयों क प्रयोग तथ ऐसे कृत् यों क प लन करन जिस ेर य य सरक र तत् समय प्रितृ्त ककसी विधध के अधीन उसे प्रदत्त करे य न् यस् त करे। 129-घ. ग्राम पचंायत के कृत्य --- इस अधधननयम द्ि र प्रदत्त शजततयों की ्य पकत पर प्रनतकूल प्रभ ि ड ले बबन ककसी अनसुधूचत िेत्र म , ग्र म पांच यत को, ग्र म सभ के स ध रण अधीिण, ननयांत्रण तथ ननदेश के अधीन ननम्नमलखखत शजततयों भी होगी, अथ ित ्--- (एक) [***] (दो) ग्र म के ब ि रो तथ मेली क जिनम पशमेुल सजम्ममलत है, च हे िे ककसी भी न म से ि ने ि ए, प्रबांध करन ;
(तीन) से (छ:) [***] (स त) स्थ नीय योिन ओां पर, जिनम िनि तीय उप- योिन एां सजम्ममलत है, तथ ऐसी योिन ओां के मलये स्त्रोतों और ्ययो पर ननयत्रण रखन ; और (आठ) ऐसी अन्य शजततयों क प्रयोग तथ ऐसे श्तों क ननििहन करन जिसे र य य सरक र तत्समय प्रितृ्त ककसी विधध के अधीन उसे प्रदत्त करे य न्यस्त मे । 129 -ङ. स्थािों का आरक्षण --- (1) अनसुधूचत िते्रों म प्रत्येक पांच यत म अनसुधूचत ि नतयों तथ अनसुधूचत िनि नतयों के मलये स्थ न क आरिण उस पांच यत म उनकी अपनी-अपनी िनसांख्य के अनपु त म होग :
परन्त ुअनसुधूचत िनि नतयों के मलये आरिण स्थ नों की कुल सांख्य के आधे स ेकम नहीां होग :
परन्त ुयह और भी कक अधधसधूचत िेत्री म सभी स्तरों पर पांच यत के यथ जस्थनत सरपांच य अध्यि के समस्त स्थ न अनसुधूचत िनि नतयों के सदस्यों के मलये आरक्षित रहेगे:
1[परन्त ुयह भी कक उन अनसुधूचत िते्रों म की ग्र म पांच यतों को, जिनम अनसुधूचत िनि नतयों की िनसांख्य नहीां है अनसुधूचत िनि नतयों के पांचो य सरपचों के मलये आरक्षित यथ जस्थनत स्थ नों य पदो के आिांटन से विहहत रीनत मे अपिजिित कर हदय ि एग ।] 78
(2) र य य सरक र ऐसी अनसुधूचत िनि नतयों के ् यजततयों को न मननहदिष्पट कर सकेगी जिनक अनसुधूचत िेत्रों म मध्यिती स्तर पर पांच यत म य अनसुधूचत िेत्रों म जिल स्तर पर पांच यत मे कोई प्रनतननधधत्ि नहीां है:
परन्त ुऐस न मननदेशन उस पांच यत मे ननि िधचत ककये ि नेि ले कर सदस्यों के दशम ांश से अधधक नहीां होग ।
(3) अनसुधूचत िेत्रो मे पांच यत म , अन्य वपछड़ ेिगो के ् यजततयों के मलये ऐसी सांख्य म स्थ न आरक्षित ककये ि एांगे िो अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों, यहद कोई हों, के कर, आरक्षित स्थ नों के स थ ममल कर उस पांच यत के समस्त स्थ नों के तीन-चौथ ई स्थ नों से अधधक नहीां होग । 129 -च. जिपद तथा म्जला पचंायत की शम्ततयां --- इस अधधननयम द्ि र प्रदत्त शजततयों की ्य पकत पर प्रनतकूल प्रभ ि ड ले बबन अनसुधूचत िते्रों म यथ जस्थनत िनपद पांच यत य जिल पांच यत को ननम्नमलखखत शजततय ाँ भी होंगी, अथ ित ्--- (एक) ककसी विननहदिष्पट िल िते्र तक के लध ुिल शयों की योिन बन न , उन पर स्ि ममत्ि रखन तथ उनक प्रबांध करन ;
(दो) समस्त स म जिक सतेटरों म उनको अन्तररत सांस्थ ओां तथ कृत्यक ररयों पर ननयांत्रण रखन ;
(तीन) स्थ नीय योिन ओां पर, जिनम िनि तीय उप-योिन एाँ सजम्ममलत हैं, तथ ऐसी योिन ओां के मलये स्त्रोतों और ्ययों पर ननयांत्रण रखन ; और (च र) ऐसी अन्य शजततयों क प्रयोग तथ ऐसे कृत्यों क प लन करन जिसे र य य सरक र, तत्समय प्रितृ्त ककसी विधध के अधीन उसे प्रदत्त करे य न्यस्त करे । अध्याय 15 निरसि
130. निरसि तथा व्यावमृ्त्त --- (1) इस अधधननयम के प्र रम्भ की त रीख को तथ त रीख स,े मध्यप्रदेश पांच यत र ि अधधननयम, 1990 (क्रम ांक 13 सन ्1990) िो इसम इसके पश्च त ्ननरमसत अधधननयम के न म से ननहदिष्पट है ननरस्त हो ि एग :
परन्त ुननरसन क ननम्नमलखखत पर प्रभ ि नहीां पड़गे : - (क) ननरमसत अधधननयम के पिूि क य िन्ियन य उसके अधीन सम्यक रूपेण की गयी य भोगी गयी कोई भी ब त; य (ख) ननरमसत अधधननयम के अधीन अजिित, प्रोद् भतू य उपगत कोई अधधक र, विशषे धधक र, ब ध्यत य द नयत् ि; य (ग) ननरमसत अधधननयम के विम्द ककये गये ककसी अपर ध के सम्बन्ध म उपगत कोई श जस्त, समपहरण य दण्ड; य 79 (घ) पिूोतत ककसी ऐसे अधधक र, विशषे धधक र, ऐसी ब ध्यत , ऐसे द नयत्ि, ऐसी श जस्त, ऐसे समपहरण य दण्ड के सम्बन्ध म कोई अन्िेषण, विधधक क यिि ही य उपच र, और कोई ऐस अन्िेषण, विधधक क यिि ही य उपच र सांजस्थत ककय ि सकेग , ि री रख ि सकेग य प्रिनत ित ककय ि सकेग और कोई भी ऐसी श जस्त, समपहरण य दण्ड अधधरोवपत ककय ि सकेग म नो कक यह अधधननयम प्रिनत ित ही न हुआ हो:
परन्त ुयह और भी कक पिूििती परन्तकु के अध्यधीन रहत ेहुए, ननरमसत अधधननयम के अधीन ककय गय कोई क यि य की गई क यििही (जिसम की गई कोई ननयजुतत य ककय गय प्रत्य योिन, ि री की गई अधधसचून , सचून , आदेश, अनदेुश य ननदेश, विरधचत कोई ननयम, विननयम, उपविधध, प्ररूप य स्कीम, अमभप्र प्त प्रम ण-पत्र, दी गई अनशु य अनजु्ञजप्त, ककय गय रजिस्रीकरण, अधधरोवपत कर य उद् गहृीत फीस य रेट सजम्ममलत हैं) िह ां तक कक िह इस अधधननयम के प्रितृ्त होने के ठीक पिि प्रितृ्त है इस अधधननयम के उपबांधो से असगत नहीां है, इस अधधननयम के तत्स्थ नी उपबांधों के अधीन ककय गय समझ ि एग य की गई समझी ि एगी और तद्नसु र प्रितृ्त बनी रहेगी िब तक कक बम इस अधधननयम के अधीन की गई ब त य ककसी क यिि ही द्ि र अधधजष्पठत न कर दी ि ए।
(2) ननरमसत अधधननयम की ध र 127 के अधीन ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल पररषद् के मलये विद्यम न ् यिस्थ तय तक ि री रहेगी िब तक कक इस अधधननयम के अधीन तत्स्थ नी ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल पांच यत िैसी भी दश हो, गहठत न कर दी ि ए ।
(3) कलेतटर विद्यम न ग्र म पांच यत की आजस्तयों तथ द नयत्िो क प्रभ िन इस अधधननयम के अधीन गहठत उसकी तत्स्थ नी ग्र म पांच यत के बीच ऐसे म गिदशिक मसद्ध तों के अनसु र करेग िो र य य सरक र द्ि र इस प्रयोिन के मलये ि री ककये ब ए।
(4) विद्यम न िनपद पांच यत तथ जिल पररपद की आजस्तय ां तथ द नयत्ि इस अधधननयम के अधीन गहठत क्रमश: िनपद पांच यत तथ जिल पांच यत को अांतररत हो ि एगे । व्यावमृ्त्त ---- मध्यप्रदेश पांच यत र ि (सांशोधन) अधधननयम, 2001 के उपबांध अधधसधूचत िते्र को ल ग ू नहीां होगे िह ां तक कक िे अधधननयम के अध्य य 14-क के उपबधों और पांच यत-उपबांध (अनसुधूचत िेत्रों क विस्त र) अधधननयम, 1996 (1996 क सख्य ांक 40) के उपबांधों से असांगत हों ।
131. ववद्यमाि स्थायी कमाचाररयों के सभबन्ि में व् यावमृ्त्तयााँ --- इस अधधननयम म य उसके अधीन बन ए गये ककसी ननयम य उपविधध म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होत ेहुए भी, पांच यत के समस्त स्थ यी अधधक ररयों तथ सेिकों य अन्य तमिच ररयों के िेतन तथ भत्त,े पेशन तथ सेि ननिजृत्त फ यदे िो उस त रीख को हैं जिसको यह अधधननयम प्रितृ्त होत है, विद्यम न िेतन और भत्त,े पेशन तथ सेि ननिजृत्त फ यदे होंगे।
132. कह िाइयां दरू करिे की शम्तत --- (1) यहद इस अधधननयम के उपबांधों को प्रभ िशील करने म कोई कहठन ई उदभतू होती है, तो र य य सरक र आदेश द्ि र , उसके उपबांधों से असांगत न होने ि ली कोई भी ऐसी ब त कर सकेगी िो उसे ऐसी कहठन ई दरू करने के प्रयोिन के मलये आिश्यक य समीचीन 80 प्रतीत होती है:
परन्त ुइस ध र के अधीन कोई ऐस आदेश, इस अधधननयम के प्रितृ्त होने की त रीख स े दो िषि की क ल िधध क अिस न हो चुकने के पश्च त ्नहीां ककय ि एग ।
(2) इस ध र के अधीन ककय गय प्रत्येक आदेश विध न सभ पटल पर रख ि एग । 81 अिसुचूी - 1 [{िारा 77 की उपिारा (1) देखखये] क- ग्राम पचंायतों द्वारा अधिरोवपत क्रकये जािे वाले अनिवाया कर
(1) से (4), [***]
(5) उन ्यजततयों पर ब ि र फीस िो ग्र म पांच यत के य उसके ननयांत्रण धीन ककसी ब ि र य स्थ न य उसम के ककसी भिन य सरांचन म विक्रय के मलये म ल रखत ेहैं ।
(6) ग्र म पांच यत के य उसके ननयांत्रण धीन ककसी ब ि र य ककसी स्थ न म बेचे गये पशओुां के रजिस्रीकरण पर फीस।
(7) [***] ख- जिपद पचंायतों द्वारा अधिरोवपत क्रकया जािे वाला कर न टय गहृों य न टय प्रदशिनों तथ स िििननक मनोरांिन के अन्य प्रदशिनों पर कर । अिसुचूी - 1 -क [िारा 77 -क (1) देखखये] ग्राम सिा द्वारा अधिरोवपत क्रकये जािे वाले अनिवाया कर
(1) ननम्नमलखखत से मभन्न भमूमयों य भिनों य दोनों पर, जिनक पूाँिी मलू्य भमूम के मलू्य को सजम्ममलत करत ेहुए, छह हि र रुपये से अधधक हो, सांपजत्त कर --- (क) सांघ य र य य सरक र, ग्र म सभ , ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत के स्ि ममत्ि के य उसम ननहहत भिन तथ भमूमय ाँ;
(ख) अनन्यरूपेण ध ममिक य शिैखणक प्रयोिनों के मलए उपयोग म ल ए ि ने ि ले भिन तथ भमूमय ाँ य उनक कोई भ ग, जिनके अन्तगित बोडड िग ह ऊस भी हैं ।
(2) ननिी सांड सों पर कर, िो उन भिनों के जिनसे ऐसे सांड स सांलग्न हैं, भिन के स्ि मी य अधधभोगी द्ि र उस दश म देय होग , िबकक उनकी सफ ई ग्र म सभ अमभकरण द्ि र की ि ती है ।
(3) प्रक श-कर, यहद ग्र म सभ द्ि र प्रक श ्यिस्थ की गई है ।
(4) ग्र म सभ िेत्र की सीम ओां के भीतर कोई िजृत्त य ्य प र करने ि ले य आिीविक कम ने ि ले ्यजततयों पर कर । 82 अिसुचूी - 2 [िारा 77 की उपिारा (2) देखखये ] क- ग्राम पचंायतों द्वारा अधिरोवपत क्रकये जािे वाले अन्य वकैम्ल्पक कर, फीस आहद
(1) से (2) [***]
(3) ग्र म पांच यत िेत्र की सीम ओां के भीतर ककर ये पर चल ई ि ने के उपयोग म आने ि ली बलैग डड़यों, स इककलों, ररतशो पर कर।
(4) [***]
(5) िल कर (रेट) िह ां ग्र म पांच यत द्ि र ननयममत िल-प्रद य की ्यिस्थ की ि ती है ।
(6) िल ननक स के मलये फीस, िहॉ िल ननक स पद्धनत ग्र म पांच यत द्ि र प्र रम्भ कर दी गई है।
(7) [***]
(8) मोटरय नों से मभन्न य नों के स्ि ममयों द्ि र देय फीस, िह ां मोटरय नों से मभन्न ऐसे य न ग्र म पांच यत िेत्र के भीतर प्रिेश करत ेहैं ।
(9) से (14) [***] ख- जिपद पचंायत द्वारा अधिरोवपत क्रकये जािे वाले अन्य वकैम्ल्पक कर िनपद पांच यत द्ि र इस अधधननयम के अधीन दी गई ककसी अनजु्ञजप्त य अनजु्ञ के मलये िनपद पांच यत म ननहहत य उसके द्ि र अनरुक्षित भमूमयों य अन्य सम्पजत्तयों के उपयोग य उनके अधधभोग के मलये फीस। 83 अिसुचूी - 2 - ि [िारा 77 -क (2) देखखये] ग्राम सिा द्वारा अधिरोवपत क्रकये जािे वाले अन्य वकैम्ल्पक कर, फीस आहद
(1) अनसुचूी 1 -क की मद 1 के अन्तगित न आने ि ले भिन पर कर ।
(2) सि री करने, चल ने, खीचने य बोझ ढोने के मलए उपयोग म ल ए ि ने ब ले पशओुां पर य कुत्तों य सअुरों पर कर िो उनके स्ि ममयों द्ि र देय होग ।
(3) सर यों, धमिश ल ओां, विश्र म गहृों, िधश ल ओां तथ पड़ ि स्थलों के उपयोग के मलए फीस ।
(4) िल दर (रेट) िह ां ग्र म सभ द्ि र ननयममत िल प्रद य की ्यिस्थ की ि ती है ।
(5) मण्डी िेत्र को छोड़कर ग्र मसभ िेत्र म मध्यप्रदेश कृवप उपि मण्डी अधधननयम, 1972 (क्रम ांक 24 सन ्1973) के अथि के अन्तगित के्रत , अमभकत ि, आढ़नतय , तलुयै य म पक की िजृत्त करने ि ले ्यजततयों पर कर।
(6) लोकोषयोधगत के विशषे सांकमों पर अस्थ ई कर।
(7) स िििननक सांड सो के ननम िण य अनरुिण के मलए कर तथ कूड कचर हट ने और उसके ्ययन के मलए स म न्य सफ ई कर।
(8) बलैग ड़ी स्टैण्ड तथ त ांग स्टैण्ड के मलये फीस।
(9) ककसी स िििननक स्थ न पर अस्थ ई सरचन य उसके आगे ननकले हुए ककसी भ ग के मलए य उस पर अस्थ ई रूप से अधधभोग रखने के मलए फीस ।
(10) ग्र म सभ म ननहहत च र ग हों पर पशओुां को चर ने के मलए फीस ।
(11) कोई भी अन्य कर जिस ेअधधरोवपत करने के मलए र य य विध न मण्डल को भ रत के सांविध न के अधीन शजतत प्र प्त है ।] 84 अिसुचूी - 3 [िारा 80 देखखये] ग्राम पचंायतों द्वारा फीस सगं्रहण काया का ेके पर हदया जािा
(1) उन ् यजततयों पर फीस िो ग्र म पांच यत के य उसके ननयांत्रण धीन ककसी ब ि र य स्थ न म विक्रय के मलये म ल रखत ेहों य उसम के ककसी भिन य सांरचन के उपयोग के मलये फीस ।
(2) ग्र म पांच यत के य उसके ननयांत्रण धीन ककसी ब ि र य स्थ न म बेचे गये पशओुां के रजिस्रीकरण पर फीस ।
(3) सर यों, धमिश ल ओां, विश्र म गहृों, िधश ल ओां तथ पड़ ि स्थलों के उपयोग के मलये फीस ।
(4) बलैग ड़ी स्टैण्ड य त ांग स्टैण्ड के मलये फीस ।
(5) ग्र म पांच यत म ननहहत चर ग हों पर पशओुां को चर ने के मलये फीस ।
(6) िनपद पांच यत द्ि र अधधरोवपत कोई अन्य फीस । अिसुचूी - 4 [िारा 53 की उपिारा (1) देखखये]
(1) कृवष, कृवष विस्त र सममनत करत ेहुए ।
(2) भमूम सधु र कर भमूम सांरिण ।
(3) लघ ुमस ांच ई, िल प्रबांध और िल फैल ि विक स ।
(4) पशपु लन, दगु्ध उद्योग और कुत कुट प लन ।
(5) मत्स्यप लन ।
(6) स म जिक ि ननकी और कृवष ि ननकी ।
(7) लघ ुिन उपि ।
(8) ख द्य प्रसांस्करण उद्योग सजम्ममलत करत ेहुए लघ ुउद्योग ।
(9) ख दी, ग्र म तथ कुटीर उद्योग ।
(10) ग्र मीण आि स ।
(11) पेयिल ।
(12) ईधन तथ च र ।
(13) सड़क पमुलय , पलु, प रघ ट (फैररि) िल म गि तथ आि गमन के अन्य स धन ।
(14) विद्यतु क वितरण सजम्ममलत करत ेहुए ग्र मीण विद्यतुीततण ।
(15) अप रांपररक ऊि ि स्त्रोत ।
(16) गरीबी- उन् मलून योिन ।
(17) प्र थममक तथ म ध्यममक विद्य लयों को सजम्ममलत करत ेहुए मशि ।
(18) तकनीकी प्रमशिण तथ ्य िस नयक मशि ।
(19) प्रौढ़ तथ अनौपच ररक मशि ।
(20) पसु्तक लय।
(21) स ांस्कृनतक कक्रय कल प।
(22) ब ि र तथ मलेे। 85
(23) अस्पत ल, प्र थममक धचककत्स केन्र तथ औषध लयों को सजम्ममलत करत ेहुए स्ि स््य तथ स्िच्छत ।
(24) पररि र कल्य ण।
(25) महहल एिां ब ल विक स।
(26) विकल ांग और म नमसक रूप से ब धधतों को सजम्ममलत करत ेहुए सम ि कल्य ण।
(27) कमिोर िगो क तम ण विशषेत: अनसुधूचत ि नतयों और अनसुधूचत िनि नतयों क ।
(28) लोक वितरण पद्धनत।
(29) स मदु नयक आजस्तयों क सांध रण। THE CHHATTISGARH PANCHAYAT RAJ (SANSHODHAN) ADIDNIYAM, 2003 No. 8 of 2003* (Received the assent of the Governor on the 22nd April, 2003; assent first published in the Chhattisgarh Rajpatra (Asadharan) dated 29-4-2003.)
An Act further to amend the Chhattisgarh Pancliayat Raj Adhiniyam, 1993.
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature in the Fifty-fourth Year of the Republic of India as follows :-
1. Short title and commencement.- (1) This Act may be called the Chhattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) Adhiniyam, 2003.
(2) It shall come into force on such date as the State Government may, by notification, appoint.
2. Amendment of Section 28.- In sub-section ( 4) of Section 28 of the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. 1 of 1994) (hereinafter referred to as the Principal Act) for the words "the Commissioner", the words "Director, Panchayat" shall be substituted.
3. Amendment of Section 36.- In Section 36 of the Principal Act, in sub-section
(3) and (4) for the words "the Commissioner", the words "Director, Panchayat" shall be substituted.
4. Amendment of Section 122.- In clause (iii) of sub-section (1) of Section 122 of the Principal Act, for the words "the Divisional Commissioner", the words "Director, Panchay.at" shall be substituted.
CHHATTISGARH PANCHAYAT RAJ (SANSHODHAN) ADHINIYAM, 2004 No. 9 of2004* CONTENTS Sections: Sections:
I . Short title and commencement. 6. Amendment of Section 49.
2. Amendment of Section 6. 7. Amendment of Section 55.
3. Amendment of Section 36. 8. Amendment of Section 65.
4. Amendment in Section 39. 9. Amendment of Section 88.
5. Amendment in Section 46.
[Received the assent of the Governor on the 30th July, 2004; assent first published in the Chhattisgarh Rajpatra (Asadharan) dated 3-8-2004.)
An Act further to amend the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993.
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature iil the Fifty-fifth Year of the Republic of India as follows :-
1. Short title and commencement.-(!) This Act may be called the Chhattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) Adhiniyam, 2004.
(2) It shall extend to the whole of Chhattisgarh State.
(3) It shall come into force on such date as the State Government, by notification, appoint.
2. Amendment of Section 6.- (1) In sub-section (1) of Section 6 of the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No: 1 of 1994) (hereinafter referred to as the Principal Act) the following shall be inserted :- "(1-A) The meetings of the Gram Sabha shall be organised in eac~ village of the Gram Panchayat.
(2) In clause (a) of sub-section (2) of Section 6 of the Principal Act, the following shall be added:- "The Sarpanch & Panch shall be responsible for the quorum of the meetings of the Gram Sabha for their constituencies as the case may be".
(3) In clause (b) of sub-section (2) of Section 6, after proviso, the following proviso shall be added:- "Provided further that the resolutions for the Annual working plan, selection of beneficiaries, Annual budget, Audit report and Annual accounts and admi~strative report, shall be passed in the meeting which has requisite
9uorum.".
( 4) In sub-section (3) of Section 6 of the Principal Act, the following proviso shall be inserted:- "In case of absence of quorum in three consecutive meetings of the Gram Sabha, notice shall be served on the Panch/Sarpanch and two more opportunities shall be provided to him to fulfill quorum in the next two meetings of the Gram Sabha. In case of failure to do so, proceedings shall be initiated for removal of the office bearer.".
3. Amendment of Section 36.-After clause (m) of sub-section (1) of Section 36 of the Principal Act, the following clauses shall be inserted :- "(p.) who are not literate :
Provided that this condition shall not be applicable to the person who has exceeded the age of 30 years;
(o) even after 1 year of being elected, does not have pour flush latrine in his residential premise;
(p) has not paid all the dues, which are recoverable by Panchayat against any type of outstanding dues of on account of advance or any other account even after giving demand notice which of not less than 30 days, and has not filed with nomination paper, the declaration of such intention that no money is due to be paid by him on any account payable to the Panchayat.
(q) has encroached upon any land and buildings of Panchayat or Government.".
4. Amendment in Section 39.-In sub-section (I) of Section 39 of the Principal Act, after clause (a) the following clause (b) shall be inserted :- "(b) on whom, show cause notice along with charge sheet under this Act, has been served for removal from office.".
5. Amendment in Section 46.-In Section 4~ of the Principal Act,-
(1) In sub-section (1) for the word "three", the word "five" shall be substituted;
(2) After sub-section (2) of Section 46 of the Principal Act, the following proviso shall be inserted :- "Provided that any committee may co-opt not more than two such members who have the necessary experience or special knowledge of the subject assigned to that committee. The member co-opted as such shall not have the power to vote in the proceedings of the committee :
Provided that, the Gram Panchayat, may invite Government officers or subject matter specialists to advice it on any subject under its consideration.".
6. A_ll)~ndment of Section 49.-(1) After clause (b) of serial no. (25) of Section 49 of the Pnnc1pal Act, the following clause shall be inserted :- "(25-c) the free food grains shall be provided to the needy persons out of the grant made available for basic services. .
(2) After the serial no. (29) of Section 49 of the Principal Act, the following serial number shall be inserted :- "(30) the establishment, maintenance and supervision of fair price shops under public distribution system.".
7. Amendment of Section 55.- In sub-section (1) of Section 55 of the Principal Act, the following sub-section shall be inserted :- "( 1-A) After I January, 2005, permission of construction/reconstruction/ repairing of any building, shall not be granted by the Gram Panchayat unless it has provision of pour flush latrine.".
8. Amendment of Section 65.- In sub-section ( 1) of Section 65 of the Principal Act, for the words "Three years", the words "Five years" shall be substituted.
9. Amendment of Section 88.- In Section 88 of the Principal Act, the following proviso shall be inserted:- "Provided that the Collector may cause an enquiry into the activities of any Gram Panchayat conducted by any officer not below Class II.".
'ffi{ fr€ * ermfa em ga* crrq Trdrn (fu{r srsErc )+ issr fu ergcd xcis S.z-zz-ffisird rqs / 3s fr. n. M, fqni-d 30-05-2001."
rid?Ii mcis 'ffisrrE/g,f/ oslzo t z-zo r s-" EfurE uqq{ (wqrqnur) qrkfiR t r+lRrd scis roo I trugr, gx-*n, ft-rio z: q++t zors- qrEr 3, rrd 1936 ftEr srhfrtn{mdfrtrrrr t'xra-q, c-6rr$ tff{, Tqr rugr sqg1, fui* z: vr+t zors rri* aso/d. l7/21-er/qrs./8. rr./rs.
- ederrq fteTr< srn +rFrqftfua gTRIftqq fre qr G{i6 z r-ot -zots *1 reanff orgwft urwtget, q.r<emvdenmqff qrrort+ ftcn-*rRrafrqrqnrt.
u*e.c *{qqrd* crc Saar sna{ngu{, gcfl qrid, srftftfi qfuq 199 BdqrE {q[d, tria z: v++0 zots yds.reqfuHqc (sci6 4F12ols) ufur6 riqrqatrq t{silE{l sr&fuqq, zotl edsrE ri?rqfr {q qfEt+qc, ree3 (jr. I {a ree4) ai dr {uiffa tti ig qftsfucc.
rrna'runrw *ffi s{ { u-d{rc fttri rtcqd ar{ FrFfrfua sq lqe erfuFrqfoa d : - slh6 =rm, f{(dn l. (r) rE o&frwe*e6{alrrarm frftiqt) er&frqq, 2014 i5-(dtqrn.
?qr qRq.
(z) lvotfrwn{wfoderErrqt&n.
(3) qE rreqx I gs* r+rsn ffareu A raa &n.
qrr 2 sr {dtrn. z. s*mra{arraa* sT&ftzrc, lee3 (!6. r qr994)#uRr zt€re t+a) *qwtq ftrftfud eia:erfoa frut qrq, oqk- "(ttt-o) "qdrfirgfic"no{n{Ad t fr{ni a a,Trc g;rq, ft-d dd 6S $ qffirt, T+{dc qr-{offlqr qqqrt oTrqR qi ftqrqnr t, d tiqftdw * r*tsri * qts wr*ka gtre *1uve gan*suirrnvr$n."
t{rs.r. l. udqreqqrrd {q Neitn) iEqA{,2014 (!6. I q20l4l aivtrqam f+tfurftqtvnrt.
nqgr, fuqis zr s€0 zors rli* aso/d. 17121-ir/yrs./8. rr./rs.
- wa**iEtrn* wg*<:latuue (3)+lrJqrqriB-*qrcqqr+drlq Risitn ) oT&ftqc, z0I4 G6cis 4 q20Is1ar oiM erg*r<twvra+rrk+neqaqdrrrdrRnftqrqratt.
s,rftsrrE *{qqrd* cHtaqr snaqngsR, gr*r utia, qftftR sfus.
Bd€rr6 {crqd, feti+ r:w++0 zors roo (r ) CHHATTISGARH ACT (No.4 of 2015) THE CHHATTISGARH PANCHAYAT RAJ (SANSHODHAI9 ADHINTTAM,2Ol4 An Act further to amend the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. I of 1994).
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature in the Sixty-fifth Year of the Republic of India, as follows :- l. (l) This Act may be called the Chhattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) short title, extent Adhiniyam,2014. and rment.
@ It shall extend to the whole State ofchhattisgarh.
(3) It shall come into force fiom the date ofits publication in the Official Gazette.
2. Aft clause (xiii) of Section 2 of the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, Amendmert or 1993 (No. I of 1994), the following shallbe inserted, namely:- section 2' "(xiii-a) "One rotation" means two consecutive general elections, but whenever delimitation is done on the basis oflatest census or otherwise then the election conducted subsequent to the publication of such delimitation shall be treated as the first election."
3. The Chlattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) Adhyadesh, 2014 (No. I of 2014) is Repeal.
hereby, repealed.
riam*, gau au iua em$, r*e'c anr nrsffq {Eundq, wgr Q gtsr aur r+rRro - zors.
offi€ +€ + en<.fu erd gf* cjrq glrdri(fufl glsEd-c)+ iqul fu oqna. mci6 S.z-zz-6fuc qwa / rs ft. 8. frdr$, fr+d 3o-05-2oor."
{fu{Fcid ' ffiwrq/gf/ oe f 20 ts - zo r s."
1l\rttl=t (snnqnq) urfu*,R t rfirftH a;qifi zso l wgr, go-*n, frai* zr srfu 20rs- {rnq r, rm rsrz fd& sft fur* q,dftt+rrr +iTl-dq, reT{A uEFT, irqt {Flgt uugt, ftaim zr eTfta zots m.ci{ 3673/dl. r:r/zr-or/urs./o.rr./rs.-BdqlrqftqristTrqrmfuderfuRqflftr€qrftffi* zo-ol-zots*1 {wqm ff qgqfr crq d g-e t, wqeru e-dmunut * qrTorff + ft q r*rRn ftqr qmr t.
ed€.r6 * ttqqra } <re fr am orr?vgun, gtttvttia, srfttftqP{q.
499 500 B-dsrrd{qrd, ftttr z: sTftd zors dd-s{a srfufrqq (s'tri{ ls q2ols) E*grr6 fqrq-flq NYfrqc) erfuftqq, zors oatsle riar+atrs qftFq-fi, 1ee3 (jF. r sl reea) d eh {vrifha rd fu qfhf{qc.
trrra rronrq o 1M q,(l odsrEfrsrqwgd anr Fmfrfua sq fr qE e{ftrfrqkd d : - efgq .nc,f{Rrt "qI rrtc.
l. (r) (21
(3) rceftfrqc s*$rEqqr+a-{q trftis-{l eTBftqc, zors 6{dr+rtt.
EE{rffRRiW6*qrE{qi&tt.
re n-sc*i qq+ r6nri*arflu Arga&n.
Eru cr rr tHq-q. Bdt,Edilq-dirs erEftqc, rss: (s. trr11994) ff tntr roftsq-fi[ (4) +€w (\rs) + ern qt, €rqft fua sfuiErfod fr qr w, erqf (: - "(gs) qmq"md*:rrqifr, vtrisarrqkqqrffi enq erRrsrff/offi, ffi €@6rdqta-{ sre*rff, q-cq-q{amdEnr nTRr{-d fu'+r ,r+rd, + €gm awrari:"
sg1, furi+ z: wfu zors rcia :e z:/d. 13el21-B{/qrs./8. rr./rs.- urrt * dRtin * org*< :ls * uus (:) * er5w,rr i w fu{rrr # {-cdq{ otfrqfir friis u :-ol- rs +T eiH ergarq rtqqn * crBroR t wqarrr u-orQm ftur unr t.
ederq * {qqrd * are t aw oningun, grrr Yria, eftfu<tfue.
CHHATTISGARH ACT (No. l5 of2015 ) THE CHIIATflSGARH PANCIIAYAT RAJ (SANSHODHAI9 ADHINTTAM, 2015 An Act further to amend the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. I of 1994).
Short title, extent and commencemcnt.
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature in the Sixty-sixth Year ofthe Republic oflndia, as follows i
1. (l) This Act may be called the Chlattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) Adhiniyam,20l5.
Edsrrq{qq-d, ftrto zr qfto zors soo (l) (?) It shall extend to the whole State ofChhafrisg4rh.
(3) It shall come into force from the date ofits publication in the Official Gazette.
2. For clause(i) ofslb-section (4) ofSection 66 ofthe Chhattisgarh PanchayatRaj Adhiniyam, Amendmetrt of I 993 (No. 1 of I 994), the following sha.ll be substituted, namely i section 66' "O the joirtt signature of sarpanch and secretary or any other offrcer/employeq who has been authori.zed by the ChiefExecutive Officer, J.anpad P.anchayat, in case ofa Giam Panchayaq" dqrd6, gaqne[As?Frxfr, dwreamqrc&qgrqr-eq, ncEa*{ts{dqr!-6rkd - 201s.
'ffis fr{e t er-<ifa em gm* alre Urrfli(fufl smftfi-c)+ isur fu eqm *qto S.z-zz-Efurq rrwe / rs ft. 8. frar$, frci'{ 3o-05-2ool."
ri*fir.ci6 'ffirc/gd I ot f zo rt - zo r s."
ffi {rErrtEr (wqrqnq) urk*,n t rfirfta ncis sl l vugt, *r*t, frqi+ zr crd, zoro -€e r, xris 1e38 fufura€t{rnfuffiq nugt, du*n, frqi6 zr qrd, zoro (** r, rsss) arqim-ur/fr.v./frun/2016.
-Bdqjrqftqn<molcfrqrasn6rdriaffi{{aiEftF|qcrdd}ftqqol*Bwiql*qrcqfrvffier,qriqrqatm ({silr{) fr?fud, zoro (oqis s rrt20r6) Srilrdn, ftiqi+ 2t crd, zoro algt:*urfuagenQ, +1 w+sunq ff q-+fl + frrn u-*rfua ftqr qnr t.
er./- (tn-q e+f) rguvfue.
187 rd{irq trdqd, fucis zr qrj:ore BdsrqB?)Ts (reio 5s126161 dfur6 riqr{rdttril (d'vftm) ffiro, zorr Bdgrrq {at{dirq erfEfrfi, rqqr (s. I v{ tee4) 6i qti {{frftrd *.ti tg ffi6.
rnra rronrq* sgwa:l s{t u*fl'c ftqH su-sd Ertr mfud qqfr q6 o1&Fmka fr : - qfkq {rII. l. (1) 116 e&ftal udwrq.iqrrairq f{irier{l3rEfrqq, 2016 iFEaIg{n.
f*mn rm cr{q.
(21 gsflftlaneqqf B-d{qE lqttltn.
(3) qerrqc*fr re*r-fisnffaftonu-6atm.
qrtr :r 6r tri!r.r. 2. E-dsrE riamdrrs grfufrq{, tgq: (sci6 1q1994)fftrmre ffsq-trru (t) * qus (c) qq (ur) * eflq qr, ftiafufua ufusrfta ftqr er}, ercrh - "(E) Qffiqrqarqrqdtqrqdsat,- (q-d) .iqqq*ftr&, r{qter; *t
(a) .iq*sw*qsqrff*ftri, a{ qr {rsq qffe{r, s*ofqd:
qigq-evrqqn {€{sitn* r{adi} X{ Fefft a ucurM+ ft w t aqrd Aqr.
(vr) ffi fi-drqqftini, uaqrErrfl-qnq cd."
s*w qtie.nuilqrmtrq zrr', m$q ffiissdrqr Eqrt +kd fii sflr ffrat * wr i gun o€ * fti, rrs qr*n t u*trra tiqrqa rrq eT&ftqc, rss: (scis 0I stlee4) fr {{ q-{+€mBftsqfr'mt.
wa: 116 foiu-*u-qa{_ {qs, erqq qEmr fr<i+sqrd, zore {qrrdGsr*qfdflqd+ (urwrfiFfiq) Edtlr€rrdrd, frcis z r qrd zo to 18rl (r) ssFiq 6-dsrE riqrq-d rq qefirq{, 1ee3 (r6.{ir6 0r rrl rer4) * qm sr fr Eqqnr (r) } Eq< (E) qd (ot) *l g{imE<trr
(l) +tiqk ftd drgdqr qeqr0 AA 6r qrd idfrr- "(a) dmfiTdt:
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(qI) ffi fi-drcqtRt, Frskdddr+*\r6s{qc rf EEdrf{drfl-{rffi rd."
t+qsd rgu.x&e, sd$EffqriRqL riqir{', SM nqrfrBqErq*, uSwre amnrs&o ga"rroa, rr<grigfunavrmr&a - :or.
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ffi {|\ruEr (srsrqnur) urnrfiR t rfirftd rui* rss l {qgr,rrfuqn,frcis zq$zoto -asnq 17,rt;h re38 frEr sft form sd ftrilrT +iil-f,q, rrdrfr qEFT, ;ilttt 11-qg{ uqgt, ftqis zq$ zoto ncisnsea/d. rsr/zr-or/urs.le..a.lrc.
-BdsqcfrtrastTrslffifude{Efrqcfu€qrfrtims2-65-roru6 {wqm fi e-gqft crw d ge t, v+qanr wftrtrnur ff qrl-*.rff + fts u-*rfua ftqr qm t.
e*erc* {rqqrd t crc Q aen qRqflgqR, d. +. tdr, gTftfuff qfuc.
389 390 R#qrrdim[d, frciqi 7qf, 2016 ydaqq sT&ftqq (sci6 22 tr12016) Efur6 tqrq-dirq N{frr{) sr&ftqc, zorr oaftcqe iqrqa-qrs erftf+cc, ree3 (s. r qa ree4) oi dr duifhc tri tg srftF{qc.
rrrca wnrqt sgsa* q{i B-dtrc f{tln qu-s6 6Rr FrEfrfua qq fr q6 o1fuFmftra $ : - ilkR :rrf,, 1. (1) q6 sr&ftw u*flq{qr++trs tr{qild{l srfufrqq, 2016 iF{i qfl.
l**<n nqr qnt.
(21 r{-orft<nqryf sdsqq rqi&n.
(3) qauqc*ix*ronnffantqnr{adm.
qm :r m ririq-<. 2. E*€ird riqr+a rm er&fuqq, tsst (s'cis I q1994)ffqnr 36ffsq-qnr (r) + qu-s (B) r"i (vr) * em qr, ftqfrfua xRenfta ftqr vrn, qqfq,- "(6) *ffiqrqtrqr6{i{qrqrdsai,-
(sd) daq<*ftri, r$qffer; dr
(i) riq*sqr*q-€ro*ftri, r{qrsc-sqqffqr, .rSuf ct:
vigu-tur+rn w *ie-< + u-g{a+* $FHf B( qquftql+ ft qq tdrta.d +n
(ur) ffiffiqqts1t,vaqkerfi-qra-qad."
nqg{, fr{is z q{ zot o ani* aserl$. 1s3/21-st/qrs./8. rr./ro . - una * €Btrn * wgd< rat * urc (l) * wgs-iur fr E€ fttrrrr # qc{sd qfrqa{rAiifi oz-os-zore qT eim wgan rrwum*utfu+ntvrqam r+rRn B,arunrt.
edwrq * {qqrd * treQ am on?nqvn, d. *.d-dr, erfrtn{foq.
BdsrErMTd, ftrio z u6 zoro 3eo (l ) CHiIATTISGARH ACT (No.22 of 2016) TIIE CHHATTISGARII PANCHAYAT RAJ ( SANSHODIIAN) ADHINIYAM,2016 An Art further to amend the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No.1ofr994).
Be it enacted by the Cbhattisgarh Legislature in the Sixty-seventh Year of the Republic oflndia, as follows :-
1. 0) ThisAct may be called the Chhattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) short title, €xtent Adhiniyam,20l6. end commencement' @ It shall extend to the whole State of Chhattisgarh.
(3) It shall come into force from the date of its publication in the Official Gaz€fre.
2. For clause (n) and (o) ofsub-section (1) ofSection 36 ofthe Chhattisgarh Panchayat Amendment of Raj Adhiniyam, 1993 (No. I of 1994) the following shall be substituted, namely i sectior 36' "(n) has not passed,- (, 5th Standard Examination for the post ofPanch; and (iD 8th Standard or equivalent Examination for ofiice bearer above Panch, liom any recognized Institution or Board :
Provided that this provision shall not be applicable in the matter ofoffice bearers elected before enforcement ofthis amendment.
(o) Whose Residential Premise does not have flush latrine."
{qrds, Eiur dEri-€q qrcf, r*e{a am xrc&qSiqndq, rragr Q gtsn aurr*rRn - u o rr.
'ffis fu + e{=drtd els gst ir,q UriTr{(fufl ersfts-c)+ isur fu oqna. xqin *.2-zz-udu.c rrwe / ra ft. t. M, fr{is 30-os-2oor."
qfu{r'qi6 ' t*mrq/gf / o e f 20 t t - 20 t s."
ffi (srsrqrur) urkffi t rfirRrd 9;qi6 rla 1 trugi, vfu+n, fui+ zz sTftd 2017---- d{rr€ 2 , {rifi le3e frfu sft frqr* *dfrtTFr riilfrq, F6lrA r{q, Tqr {rqgt ttq$ frrim zz srfrd zorz rqis rzos/S. ss/zr-sr/yrs .le..a.ln. E*{rdr6frgriqgrmlffifuder&fu{fr€q(ftRi+ rz-oa-zotz*1 {qqm ff srgffi ym d ge t, wqeru vdueru fi sr{*rft + fr rA umrft n fuqr qrn t.
odeiE * {rqqta * mn t aw entvrgvn, sfr. *. ildl, alftfun qfuq.
287 288 , f<iis 22 erftar 2ot7 fu3TDTfuq ls.qim 5vlzorz) E+qrr6 riilTd 1Tq (ti{frtr{) q&frqq, zotT effisrrq {ar+a tre erftfu{c, tes3 (in. I F{ rssl) q} dr r{sfrfud 6{A eg srlqftqc.
rrra rrunrq t st.es-dA q{ fr udsrc fr qmcu-sd ERT Frqft rfua sq n s-d sTfu Frqfud d - ilkE ;rr{, l. (l) qEeTETfrqqBderrariqr+atrstt{sfrT{l qDTfrqc, 2017 m-6-drsr.
ifitn aer gnc.
(2) es-+rfoffRvgPfonftsqEtrqttln.
(3) qarreq-*frqq+y-*rqn*mftetu-{a&n.
qtrl 666 iFT 2. ud€rlq {ar+atrq eTBTfrqs, 1993 (iF. r wl rola) fitrnrroi,eq-qr{(a)fr,- srtlq-'r'
(6) qu-e td)t*rnqr, F*frfudqfrenkdfsqrfira, 3.EIE:- "(A) ffiq-qd;flTdtqrc-dfr, g@q.r&m{ erEr*:rff r,tivorrr*ffi, sFfi sr-gqfrEfr fr *-e€ aru wEr6-a ffi sTfuEilfr + {gffi Effrqt Q, " (€) uu-s (d)*qsr<- ftqkfuafr.ervri, erufiq:- " 1#ty ft -dr .iaru-d + Hrq-e i, gq *lfu d-i sTRrfi rft \d sft sffi /ffi t{gm66r*9," nugt, ftai* zz er*a zorz mni*rzoqld.ts/zr-or/urs.la.t.ln -tina*riftun*erg*e:nr*qw(:)ftwgnturfrgtfrumfivm{q*s{Rrqa{r fr qis 2 2 - 4 - 2 0 t 7 6t eiffi e€{rq {rwqrd * qrEr*R e \'r{gRT u-+rfr m ft qr snn t.
Bdsrc * trwqm + cr€ QaQir sila{rEqR, d. ft. tdr, e{frkn Efud BdsrEttdqe, frqis 22 sTfrd 2ol7 288 (l) CHHAITISGARH ACT (No. 5 of 2017) THE CHHATTISGARH PANCHAYAT RAJ ( SANSHODHAN) ADHINIYAM,2OIT An Act further to amend the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. I of 1994).
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature in the Sixty-eighth Year of the Republic of India, as follows ;- I (l) This Act may be called the Chhattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) Short title, extent andAdhiniYam'20l7' commencement.
Q) It shall extend to the whole State of Chhattisgarh.
(3) It shall come into force liom the date of its publication in the Official Gazette.
2. InSection66oftheChhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. I of 1994), in Amendment of sub-section (4), - Section 66'
(a) clause (ii) shall be substituted by the following, namely :- '(ii) in case ofJanpad Panchayat, the joint signature of Chief Executive OfficerandAssistant Accounts Officer, in his absence, any Officer authorized by the Collector;"
O) After clause (ii), the following shall be added, namely :- "(iii) in case of Zlla Panchayat, thejoint signature of Chief Executive Officer and Senior Accounts Officer/Accounts Officer;"
*iara+, grr aur agt {cin, uilErc aru rnv$u gaunau, uvgi * gBd Hen FFTRrT - 20 17.
4 offis fr€ + erf,,td sm gffi* irq Uqdri(fucr sr6fd-c)+ isur fu qm. $qi6*.2-zz-ffirE rme / :r fr. t. ftdr$, fuis 30-05-2001."
d*+{q.cin 'ffieirq/gf/ oe I zort - 20 t s."
ffi IIGffiET (wsrqnq) urfufiR t rfirRta aiqi6 sls l vqgt, rirtaqrt,frri+ rfrtwt 20ts- qrqqE 12,{rin 1941 fr& sft frsilS qr{fct{m riTrfrq, F6TA qEH,;[qt{qgt €rerrn :
emardR, frFi6 r fuawq 2s1e eiqi6sclr/d. rsr/zr-er/urs.le..t.lrt.-ffiftutivur.*Tftq616oq&fucfusqrfttim23-s6-rrtrqi {wqmff ergqft vrqdg$t,vrqemv4urunu*qrT+,r0+ft qmftraft qrqmt.
yfure * rrqqn * rn i aw on?urgvn, r{q gun arg{, srftftn qfuq.
1097 1098 , ftni'-6sfueqrzors fue&fuq (s'ci{ r4v{201e) u*srr6 riqrqd {rq (rt{nq{) er&F+rq, zuts Bdwq fqwd uq qfufrfi, tee3 (r. r vl tcsl) 6l *r d{f,ftd o-d tg srftFrm.
1l r+rarrurqrqtvrreq{fr u*e.,cfr qrqqu'sdeRrffi futsqiqcqerffidd:- qfkq rrr, r. (r) Wsr&fuflY*err6{qr+aqq({i$ffi)sl&fuc, 20le r5E-drrhr.
P*qan aqr rnq.
(2) vr*rftwnvqtfy,tfrwreqqfr&n.
(3) rrcqqq*tgs*ffirsnftdrfrqtu-{a&n.
qRr 2 i6r {ntm. 2. EffislrEriar{d{lqe$lfuqq, 1993 (i5. I {q 1994) (srsfrgs+cEl.qWqeftqc*qrct ftHetl61Erir z i, quc Rct-ol qT dqfuqrvrA.
qnr 13 il ridrc. 3. qto&funffqrltrfl,- \
(r) sq-qRr (n)*qre @1*ucgmmofrqftqrqri;aqr (21 3rr-Erir (o)*re*orifrqftqrqrn.
ErRr 17 il qqltri. 4. qdqRlfuqffqm tzfr,-
(1) sq-Ent (a)tqerqq{gfifldqfuqrqri;aer (21 srr-Em (4)+Adqqrgsf,srq "{€*tft"q1frqftq1wi.
lrRr 23 ei dvrka. . 5. qroftftwffsrr{2rfr,-
(l) sq-qnl (r)*sue (d)tqqfiqldqfrqtvri;aar
(2) sq-Enr 151ft qqg+mrdqfrqrqrn.
qnr 2s ar rilrirc. 6. qas{elfucfftrRr zs#sq-qRT (2)l,vqqq{gm*rdqfuqrwA.
Errtr 30 w rfvrlra. 7. qro&furffErtlol,-
(r) tsq-qnr (r)*que t*l*vercq{q6;nrfrufuurvri;
(z) sq-EIRI (r)*qu-e (d)+A#qqE6fr,srq'?€*rfr"q.tdqfrqtvri;aqr
(3) sq-Err (s)*vqmo, dqfuqrqrn.
qnr 32 ei {srim. 8. qaerRrfuqffqRrszffw-sm (z)i,uqcvqgmmrduft*vri.
g.dm.rq rrqq{, frii'-6 3 futqq 261 e l09s (1) wacm,fr{is rfrroqt zots m'cio rsnr/d. rse/zr-er/urs.lr..\.lrs.- rnw*{tsurq+ arg-sq slttique (l) * ergwurfrwftqrrrff fr qifi r - s - z o r I ur eiffi ergarn rt drqrd t nBmn t v*qeru r+rRra ftqI ilfl r t.
efu * vsqqra t rrn I aw on?wgun, r{c s;rrn ag;r, .,nt* "e*.
1l CHHATTISGARH ACT (No.14of 2019) TIIE CHHATTISGARH PANCHAYAT RAJ (SANSHODHAI9 ADHINTTAM, 2OI9 An Act further to amend the Chhattisgarh Panchayat Raj' Adhiniyam, 1993 (No.1of 1994).
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature in the Seventieth Year of the Republic oflndia, as follows :-
1. (l) This Act may be called the Chhattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) Short title, extent Adhiniyam,2,l9. I :11,r"o.",n.n,.
@ It extends to the whole State of Chhattisgarh.
(3) It shall come into force from the date of its publication in the OfficialGazette.
2. InSection2of theChhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. lof 1994), Amendment of (hereinafterreferredto as the PrincipalAdhiniyam), clause (xiii-a) shall be omitted. Section 2' Amendment of3. In Section l3ofthe PrincipalAdhiniyam,- section 13.
(1) the proviso of clause (ii) of sub-section (4) shall be omitted; and @ the proviso of sub-section (6) shall be omitted.
4. In Section lTofthe PrincipalAdhiniyam,- $fff;ni?:
of
(l) the first proviso of sub-section (4) shall be omitted; and @ in second proviso of sub-section (4), the word "further" shall be omitted.
5. In Section 23 ofthe PrincipalAdhiniyam,- $ffljfl;::
or
(l) the proviso of clause (ii) of sub-section (3) shall be omitted; and @ the proviso of sub-section (5) shall be omitted.
6. In sub-section (2) of Section 25 of the principal Adhiniyam, the fnst proviso shall be Amendment of omitted. section 25' roes (2) Effis{E rrq{d, ffifi 3 ftrdqt 20 1 e Amendmcnt of 7. In Section 30 ofthe PrincipalAdhiniyam,- Section 30.
, (l) the first proviso of clause (ii) of sub-section (3) shall be omiued;
@ in second proviso of clause (ii) of sub-section (3), the word "furthef' shall be omitted; and
(3) the proviso of sub-section (5) tryll be omitted.
Amendment of 8. ln sub-section (2) of Sectiorri 32 ofthe principalAdhiniyam, the first proviso shall be Section 32. omitted.
tarro,grraurft mrrrcff,Effis{qenrvrc&nglulme,a4sqgsrea:FRigfr rutr6rQm-zptr.
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fu 1lsfrtEr (qflsrRur) ureq,ntrrnro g;qis es6 l qg, ttr*n, ftqis zr frqqi 261e -f1q 2, rF[ te4t frB sil-{ fffrft znrd t+nt fTrilq, qErr-ft qq=I, ;tcII vFqgv cterl ;lrtt Grecl qrR, ft-qi-6 zs frsqq zorg wqrq fi'tza/€t. zsr/21-<t/ctr,./6.q./$. - E-d-sq-6 funq HqT or ffifuo orBftqq frre w ftqio to-tz-zots o) \,r'qqrd +1 orgqfr qrw d T+1 t, gtr{gm sfsrErruur ot qri-orfr d fuq q-orPrf, fo-qr qror tr E-ft€-q_6 d sr-.qqra d crq t nert errAtnEqri, Tfrq ErTR arEt' uhp-m vfue' tTtt t7t2 Bffislrattqqd, fttio zr ftqwt zors Efts-q-B crBfoqq (m. zo e1 zors) EilsE qqrqo srq sTtrftqq. rsss (6'qrfi r v1 rss+) of fir fffud o.d tE erfuf+{rq t srEf, rfq-{rwq d rg-fl{d sS t Eifls-r-6 ftqrrrqu-€d grcr frqfufufl sq fr q6 crfrFrqfufl d :- slkq crq. f{fir* 1- ec]T crtq.
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9.
erecr qqr, ftqt-qr zs ftsqq 2s19 fr 'qw B12B/&. zy /21--31/yt5./w.tT./1s. - qrrf, d {ifrErrq d srgd-q s+a d qo-s (3) d ci-gs{q t gs flefl-rl of sq*icqo 3tffqe-{ ffi5 zs-rz-201s qt oinm ergqrE yrwqqreT d srM t vo-{grr e-orRrf, fu-qr qrf,r t t Edsr-E d sr-qqra d cH t a:n qr*rr-gsrr, Tfiq Eqrt drqr. 3Tfrftff HFds.
t7t2 (2) 6ffiqrE{-qqd, frqi6 zr fr€qi zorg CHHATTISGARHACT (No. 20 of20l9) THE CHHATTISGARH PANCHAYAT RAJ (SANSHODHAN) ADHINIYAM, 20 I 9.
A Aet further to amend the Chhattisgarh Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. I of 1994).
Be it enacted by the Chhattisgarh Legislature in the Seventieth Year of the Republic of Indiq as follows :- Short title" extent and 1.
commencement Amendment of Section 2. 2.
Amendment of Scetion 13. 3.
Amendment of Section 22. 4.
Amendment of Scetion 29. 5.
(l) This Act may be called the Chhattisgarh Panchayat Raj (Sanshodhan) Adhiniyam,20l9.
(2) It shall extend to the whole State of Chhattisgarh.
(3) It shall come into force from the date of its publication in the Offieial Gazette.
In Chhattisgar,h Panchayat Raj Adhiniyam, 1993 (No. I of 1994), (hereinafter as the Principal Act), in Section 2, after clause (xxx), the following shall be added, namely:- "(xxxi) "Person with disability" means a persons with disability as defined in the Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 (No.49 of 2016);"
In the Frincipal Act, in Section 13, after sub-section (l), the following shall be substituted, namely :* "Provided that, where after the election of Panchayat, if tlere is no representation of person with disability, the State Government or any authority authorized by it shall nominate one person with disability as prescribed, to be eligible for being office bearer of Panchayat. Such nominated person shall be nominated for the remaining period of that Panchayat which shall be limited not less than the period of 2 years. The rights and duties of such nominated person under the provisions of this act shall be, as may be prescribed."
In the Principal Act, in Section 22, in sub-section (1), after clause (i), the following shall be added, namely:- "Provided that, where after the election ofPanchayat, ifthere is no representation of person with disability, the state government or any authority authorized by it shall nominate two persons with disability (one male and one female) as prescribed, to be eligible for being office bemer of Panchayal. Such nominated person shall be nominated for the rernaining period of that Panchayat which shall be limited not less than the period of I year. The rights and duties of such nominated person under the provisions of this act shall be, as may be presuibed."
In the Frincipal Act, in Section 29, in sub-section (li, after clause (i), the following shall be added, namely:- "Provided that, where after the electi,on of Panchayat, if there is no representation of person with disability, the state government or any authority authorized by it shall nominate two persons with disability (one male and one female) as prescribed, to be eligible for being office bearer of Panchayat. Such nominated person shall be nominated for the remaining period of that Panchayat which shall be limited not less than the period of I year. The rights and duties of such nominated person under the provisions ofthis act shall be, as may be prescribed."
In the Principal Act, in Section 36, in sub-section (l), for elause (n), the following shall be substituted, namely :- "(n) who are not literate;"
6.
I Amendment of Seetion 36.
Edsrc rtcqd, ftqi+ zr friqEr zo r q t7t2 (31 7 . In the Frincipal Act, in Section 44,- Amcndmcnt of Section 44.
(r) in sub.section (2), after the words "meeting of the Panchayats", for the punctuation full stop ".", the punctuation colon ":" shall be substituted;
(ii) after sub-section (2), the following shall be added, namely:- kovided that rights - related to participation in meetinglproceedings of the Panchayat of nominated persons with disability shall be, as may be prescribed but they strall not have right to vote."
8. In the Principal Act, in Section 46, in sub-section (2), after the second AmendmcntofScction,l6.
proviso, the following shall be added, namely:- "Provided frrrther that nominated persons with disability shall be member of such Committees, as msy be prescribed."
9. In the Principal Act, in Section 47, in sub-section (4), after the second AmendmentofSection{?.
proviso, the following shall be added, namely:- nProvided further that nominated persons with disability shatl be member of such Committees, as may be prescribed."
{arr*, gru au Asi smm, Bdsrrq am vnrfra grna+, nugr n gBa aw yflfra - zo r s “ “ ” 656 (1) 656 (2) 656 (3) 656 (4) 656 (5) 656 (6) 656 (7) 656 (8)