1767 GI/2021 (1) रजिस्ट्री स.ं डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i)
PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार स ेप्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY कारपोरेट कार्य मतं्रालर् अजधसचूना नई दिल्ली, 24 माचय, 2021 सा.का.जन. 207(अ).— कें द्रीर् सरकार, कंपनी अजधजनर्म, 2013 (2013 का 18) की धारा 467 की उपधारा
(1) द्वारा प्रित्त िजिर्ों का प्रर्ोग करते हुए उि अजधजनर्म की अनुसूची-III में 1 अप्रलै, 2021 से प्रवृत्त जनम्नजलजखत और संिोधन करती ह,ै अर्ायत:्- उि अनुसूची में,- (क) भाग-I में,-
(i) पैरा 4 में, खंड (i) में िीर्यक “कंपनी का तलुन-पत्र और लाभ हाजन जववरण तैर्ार करन ेके जलए साधारण अनुििे” के अधीन, उप-िीर्यक “साधारण अनुििे” के अंतगयत, “होगा” िब्ि के जलए “चाजहए” और “व्यापारावतय” िब्ि के जलए, िोनों स्ट्र्ानों पर िहां र्ह आता ह,ै “कुल आर्” िब्ि रखे िाएंगे;
(ii) भाग-I में तुलन-पत्र,- स.ं 158] नई दिल्ली, बुधवार, माचय 24, 2021/चतै्र 3, 1943 No. 158] NEW DELHI, WEDNESDAY, MARCH 24, 2021/CHAITRA 3, 1943 सी.जी.-डी.एल.-अ.-26032021-226114 CG-DL-E-26032021-226114 सी.जी.-डी.एल.-अ.-26032021-226114 CG-DL-E-26032021-226114 सी.जी.-डी.एल.-अ.-26032021-226114 CG-DL-E-26032021-226114 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (क) िीर्यक “II आजस्ट्तर्ों” के अधीन, उप-िीर्यक “गैर-चालू आजस्ट्तर्ों”, के अधीन “संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण” िब्िों के पश्चात् “और अमूतय आजस्ट्तर्ां,” िब्िों को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा और “मूतय आजस्ट्तर्ां,” िब्िों के जलए “संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण” िब्िों को रखा िाएगा, (ख) पैरा 6 में, िीर्यक “तुलन-पत्र तरै्ार करन ेके जलए साधारण अनुिेि” के अधीन “टटप्पण” में, (I) िीर्यक “क. िेर्रपूंिी” के अधीन मि (ठ) और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के पश्चात ् जनम्नजलजखत को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- “(ड) कंपनी संप्रवतयकों* की िेर्रधाटरता को जनम्नानुसार प्रकट करेगी:
वर्य के अतं में संप्रवतयकों द्वारा धाटरत िेर्र वर्य के िौरान पटरवतयन की प्रजतित*** क्रम सं. संप्रवतयक का नाम िेर्रों की संख्र्ा** कुल िेर्रों का प्रजतित*** कुल *र्हां संप्रवतयक से अजभप्रेत कंपनी अजधजनर्म, 2013 में की गई पटरभार्ा के अनुसार संप्रवतयक ह।ै **िेर्रों के प्रत्र्ेक वगय के जलए अलग से ब्र्ौरे दिए िाएंगे। ***प्रजतित पटरवतयन को वर्य के प्रारंभ में जनधायटरत संख्र्ा के अनुसार संगणना की िाएगी अर्वा र्दि इसे वर्य के िौरान पहली बार िारी दकर्ा गर्ा ह ैतब इसकी संगणना इस ेिारी करने की तारीख के अनुसार संगजणत दकर्ा िाएगा”। (II) मि (iv) और उनस ेसंबंजधत प्रजवजिर्ों के बाि, िीर्यक “च. अल्पावजध ऋण” के अतंगयत जनम्नजलजखत को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत् :
“(v) िीर्ायवजध ऋण की चालू पटरपक्व राजि को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा।”;
(III) िीर्यक “चक. व्यापाटरक िेर्ताओं” और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के बाि जनम्नजलजखत को अतंःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:् “चख. भगुतान के जलए िेर् व्यापार िेर्ताए ं जनम्नजलजखत कालावजध की अनसूुची को भुगतान के जलए िेर् व्यापाटरक िेर्ताओं के जलए रखा िाएगा:- व्यापाटरक िेर्ता अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) जवजिजिर्ां भुगतान की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा राजि 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक कुल
(i) एमएसएमई
(ii) अन्र्
(iii) जववादित िेर्- एमएसएमई
(iv) जववादित िेर्- अन्र् [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 3 #इसी प्रकार की सूचना वहां िी िाएगी िहां उसके प्रकटन के मामले में भुगतान की कोई िेर्ता तारीख जनर्ियि नहीं की गई ह।ै ऐसी जस्ट्र्जत में इसे संव्यवहार की तारीख से दकर्ा िाएगा। जबल से इतर िेर्ताओं को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा;
(IV) “छ. अन्र् चालू िेर्ताए”ं िीर्यक के अंतगयत मि (क) को लोप दकर्ा िाएगा;
(V) िीर्यक “झ. मूतय आजस्ट्तर्ों” के अतंगयत,- (क) “मूतय आजस्ट्तर्ां” िब्िों के स्ट्र्ान पर, “संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण” िब्ि रखे िाएंग;े (ख) मि (iii) के जलए जनम्नजलजखत को रखा िाएगा, अर्ायत्:- “(iii) पनु:मूल्र्ांकन के कारण (र्दि पटरवतयन 10% अर्वा संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण के प्रत्र्ेक वगय के जनवल वाहक मूल्र् के कुल से अजधक ह)ै के कारण व्यापाटरक संर्ोिनों के िटरए टरपोर्टिंग अवजध ििायन े वाले संर्ोिनों, जनपटानों, अजधग्रहणों के प्रारंभ और अतं में आजस्ट्तर्ों के प्रत्र्ेक वगय की सकल और जनवल वाहक राजिर्ों के समार्ोिन तर्ा अन्र् संर्ोिनों और संबंजधत हाजनर्ों/प्रजतलोमों को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा।” (VI) िीर्यक “ञ. अमूतय आजस्ट्तर्ों” के अंतगयत मि (ii) के जलए जनम्नजलजखत को रखा िाएगा, अर्ायत्:- “(ii) पुन: मूल्र्ांकन के कारण पटरवर्तयत राजि, व्यापाटरक संर्ोिनों के िटरए वधयनों, जनपटानों और अजधग्रहणों को ििायने वाली टरपोर्टिंग आजस्ट्तर्ों के प्रत्र्ेक वगय की सकल और जनवल वाहक राजिर्ों के समार्ोिन (र्दि पटरवतयन चालू आजस्ट्त के प्रत्र्ेक वगय के जनवल वाहक मूल्र् का कुल 10% र्ा उससे अजधक हो) और अन्र् संर्ोिनों तर्ा संबंजधत अवमूल्र्न और जवकार हाजनर्ों अर्वा जवपरीत पटरजस्ट्र्जतर्ों को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा।”;
(VII) िीर्यक “ठ. िीर्ायवजध ऋण और अजग्रम” के अतंगयत मि (i) की उप-मि (ख) को जवलोप दकर्ा िाएगा;
(VIII) िीर्यक “ड. के अंतगयत अन्र् गरै-चालू आजस्ट्तर्ों” के अंतगयत,- (क) मि संख्र्ा (i) के पश्चात,् जनम्नजलजखत को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:् “(झक) प्रजतभूजत िमा” (ख) मि (iii) के पश्चात ्जनम्नजलजखत को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:् “(iv) िेर् व्यापार प्राप्र् राजिर्ों के जलए जनम्नजलजखत अवजध अनुसूजचर्ां िी िाएंगी:
व्यापाटरक प्राप्र् अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) जवजिजिर्ां भुगतान की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा राजि# 6 माह से कम 6 माह–1 वर्य 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्ों से अजधक कुल
(i) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -सही माना गर्ा
(ii) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -संिेहात्मक 4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] माना गर्ा
(iii) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -सही माना गर्ा
(iv)जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -संिेहात्मक माना गर्ा #ऐसी सूचना वहां भी िी िाएगी िहां भुगतान की कोई भी िरे् तारीख जवजनर्ियि नहीं की गई ह ैतर्ा ऐसे मामल े में प्रकटन कार्य संव्यवहार की तारीख से दकर्ा िाएगा। जबल से इतर िेर्ताओं को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा।”;
(IX) िीर्यक “त. व्यापाटरक प्राप्र्ों के अंतगयत”, मि (i) के स्ट्र्ान पर जनम्नजलजखत को रखा िाएगा, अर्ायत्:
“(i) िेर् व्यापाटरक प्राप्र्ों के जलए, जनम्नजलजखत अवजध अनुसूजचर्ों को दिर्ा िाएगा:
व्यापाटरक प्राप्र् अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) जवजिजिर्ां भुगतान की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा राजि# 6 माह से कम 6 माह–1 वर्य 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्ों से अजधक कुल
(i) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -सही माना गर्ा
(ii) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -संिेहात्मक माना गर्ा
(iii) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -सही माना गर्ा
(iv) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -संिेहात्मक माना गर्ा #ऐसी सूचना वहां भी िी िाएगी िहां भुगतान की कोई भी िरे् तारीख जवजनर्ियि नहीं की गई ह।ै ऐसे मामल ेमें प्रकटन कार्य संव्यवहार की तारीख से दकर्ा िाएगा। जबल से इतर िेर्ताओं को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा।”;
[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 5 (X) िीर्यक “फ.” के बाि, जनम्नजलजखत को अतं:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- “फक. िहां कंपनी न ेतलुन-पत्र तारीख पर बैंकों और जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं से जविेर् प्रर्ोिन के जलए जलए गए ऋण का उपर्ोग नहीं दकर्ा ह,ै वहां कंपनी को र्े ब्र्ौरे िनेे होंगे दक उनका उपर्ोग कहां दकर्ा गर्ा ह।ै”;
(XI) िीर्यक “ब.” में, “संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण” िब्िों के बाि, “अमूतय आजस्ट्तर्ां”, िब्िों को अतं:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा;
(XII) िीर्यक “भ.” को लोप दकर्ा िाएगा;
(XIII) िीर्यक “भ.” के बाि जनम्नजलजखत को अतं:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:् “म. अजतटरि जवजनर्ामक सचूना
(i) स्ट्र्ावर सपंजत्त का स्ट्वाजमत्व जवलखे कंपनी के नाम पर नहीं ह ै कंपनी सभी स्ट्र्ावर संपजत्तर्ों (उन संपजत्तर्ों को छोड़कर िहां कंपनी ने उन्हें पटे्ट पर जलर्ा ह ैतर्ा पटे्ट संबंधी करारों को पट्टाधारक के पक्ष में सम्र्क जनष्पादित दकर्ा गर्ा हो) के ब्र्ौरे उपलब्ध कराएगी जिनके स्ट्वाजमत्व जवलेख में नीचे दिए गए प्रपत्र में कंपनी के नाम पर नहीं चढे हुए हैं तर्ा िहां ऐसी स्ट्र्ावर संपजत्त संर्ुि रूप से अन्र् व्यजिर्ों के नाम पर चढी हुई ह,ै वहां इस संबंध में कंपनी की जहस्ट्सेिारी की हि तक संबंजधत ब्र्ौरों को प्रस्ट्तुत दकर्ा िाएगा। तुलन-पत्र में रूपरेखा की मि संपजत्त की मि का वणयन सकल वाहक मूल्र् के नाम पर धाटरत जवलेखनामें क्र्ा स्ट्वाजमत्व जवलेख धारक संप्रवतयक/जनिेिक अर्वा संप्रवतयक*/जनिेिक का संबंधी/ अर्वा संप्रवतयक/जनिेिक का कमयचारी ह ै संपजत्त दकस तारीख से धाटरत ह ै कंपनी** के नाम पर धाटरत न होने के कारण पीपीई - भूजम भवन - - - - **र्दि इस पर जववाि ह ै तो उसका भी उल्लेख करें जवजनधान संपजत्त - भूजम भवन पीपीई सदक्रर् उपर्ोग से जनवृत्त होकर जनस्ट्तारण के जलए धाटरत ह ै - अन्र् #र्हां संबंधी से अजभप्रेत कंपनी अजधजनर्म, 2013 में की गई पटरभार्ा ह।ै 6 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] *र्हां संप्रवतयक से अजभप्रेत कंपनी अजधजनर्म, 2013 में पटरभाजर्त संप्रवतयक ह।ै
(ii) िहां कंपनी ने अपनी संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण का पुनः मलू्र्ांकन करार्ा ह,ै वहां कंपनी र्ह प्रकट करेगी दक क्र्ा र्ह पुनःमलू्र्ांकन कंपनी का जनर्म 2 (रजिस्ट्रीकृत मलू्र्ांकक और मलू्र्ांकनकताय) जनर्म, 2017 के अंतगयत र्र्ा-पटरभाजर्त रजिस्ट्रीकृत मलू्र्ांकक के द्वारा दकए गए मूल्र्ांकन पर आधाटरत ह।ै
(iii) जनम्नजलजखत प्रकटन कार्य-कलाप वहां दकए िाएगं े िहां ऋण अर्वा अजग्रम राजि ऋण के रूप में होत े हुए संप्रवतयक, जनििेकों, केएमपी और संबंजधत पक्षों (कंपनी अजधजनर्म, 2013 के अंतगयत र्र्ा-पटरभाजर्त) र्ा तो पृर्क रुप में अर्वा संर्ुि रूप में दकसी ऐसे व्यजि को िी गई ह,ै जिसका जववरण जनम्नानुसार हो:
(क) मांग पर भुगतान दकए िाने र्ोग्र् अर्वा (ख) िोधन की दकसी ितें अर्वा अवजध को जवजनर्ियि दकए जबना उधार लेने वाले का प्रकार िेर् ऋण की प्रकृजत के अनुसार ऋण अर्वा अजग्रम राजि ऋण की प्रकृजत के अनुसार कुल ऋण और अजग्रम राजि की प्रजतितता संप्रवतयक जनिेिक केएमपी संबंजधत पक्ष
(iv) पूिंी-कार्य प्रगजत पर (क) पूिंी-कार्य प्रगजत पर के जलए जनम्नजलजखत अवजध अनसुचूी िी िाएगी:
सीडब्ल्र्आूईपी अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) सीडब्ल्र्ूआईपी की अवजध के जलए सीडब्ल्र्आूईपी में राजि कुल* 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक प्रगजतिील पटरर्ोिनाएं अस्ट्र्ार्ी रूप से स्ट्र्जगत पटरर्ोिनाएँ *कुल राजि का तुलन-पत्र में सीडबल्र्आूईपी राजि के सार् जमलान दकर्ा िाएगा। (ख) पूंिी-कार्य प्रगजत पर, के जलए जिसके पूरा दकए िान ेकी तारीख समाप्त हो चुकी ह ैअर्वा जिसकी लागत अपनी मलू र्ोिना की तलुना में बढ गई ह ैतब ऐसी जस्ट्र्जत में जनम्नजलजखत सीडब्ल्र्आूईपी की पणूयता अनसुचूी िी िाएगी **:
(राजि रुपर्े में) सीडब्ल्र्ूआईपी जनम्नजलजखत अवजध में परूा करने के जलए 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक पटरर्ोिना 1 पटरर्ोिना 2 ” [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 7 **उन पटरर्ोिनाओं के ब्र्ौरे अलग से दिए िाएंगे जिनके कार्यकलाप लंजबत कर दिए गए हैं। (V) जवकासाधीन अमतूय आजस्ट्तर्ा ं (क) जवकासाधीन अमतूय आजस्ट्तर्ों के जलए जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची को दिर्ा िाएगा*:
जवकास अवजध अनसुचूी के अतंगयत अमतूय आजस्ट्तर्ा ं (राजि रुपर्े में) जवकास के अंतगयत अमूतय आजस्ट्तर्ां की अवजध के जलए सीडब्ल्र्आूईपी में राजि कुल 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक प्रगजतिील पटरर्ोिनाएं अस्ट्र्ार्ी रूप से स्ट्र्जगत पटरर्ोिनाएँ (ख) जवकासाधीन अमूतय आजस्ट्तर्ों के संबंध में जिनकी कार्ायवजध परूी हो चुकी ह ैअर्वा जिनकी लागत उनकी मलू्र् र्ोिना की तुलना में ज्र्ािा हो गई ह ैवहा ंजवकास पणूयता अनसुचूी के अतंगयत अमतूय आजस्ट्तर्ों को प्रकट दकर्ा िाएगा**:
(राजि रुपर्े में) जवकासाधीन अमूतय आजस्ट्तर्ां में पूणय करन ेके जलए 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक पटरर्ोिना 1 पटरर्ोिना 2 **जिन पटरर्ोिनाओं के कार्यकलाप लंजबत कर दिए गए हैं उनके ब्र्ौरे पृर्क रूप से दिए िाएगंे।
(vi) धाटरत बनेामी सपंजत्त के ब्र्ौरे बेनामी संव्यवहार (प्रजतर्ेध) अजधजनर्म, 1988 (1988 का 45) और उससे संबंजधत जनर्म के अंतगयत दकसी बेनामी संपजत्त को धाटरत करन े के जलए कंपनी के जवरूद्ध िहां कोई कार्यवाही िुरू की गई ह ैवहां कंपनी जनम्नजलजखत बातों को प्रकट करेगी :- (क) अियन के वर्य सजहत ऐसी संपजत्त के ब्र्ौरे, (ख) उससे संबंजधत राजि, (ग) फार्िाप्रिों के ब्र्ौरे, (र्) र्दि संपजत्त अजभलेख में ििय ह ैतब तलुन-पत्र में उस मि का उल्लेख दकर्ा िाएगा, (ङ) र्दि संपजत्त अजभलेख में ििय नहीं ह ैतब संबंजधत तथ्र्ों का उल्लखे कारणों सजहत दकर्ा िाएगा, (च) िहां कहीं इस जवजध के तहत कंपनी के जवरूद्ध संव्यवहार में जवसंगजत अर्वा अंतरण के रूप में की गई ह ै वहां उसके ब्र्ौरे प्रस्ट्तुत दकए िाएंगे, (छ) कार्यवाजहर्ों की प्रकृजत, उसकी जस्ट्र्जत और संबंजधत कंपनी के जवचार। 8 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(vii) िहां कंपनी न े चाल ू आजस्ट्तर्ों की प्रजतभूजत के आधार पर बैंकों अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं से ऋण जलर्ा ह ै वहां जनम्नजलजखत को प्रकट दकर्ा िाएगा :- (क) क्र्ा बैंकों अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं के सार् कंपनी द्वारा फाइल की गई चालू आजस्ट्तर्ों से संबंजधत जतमाही जववरजणकाएं अर्वा जववरण बही खातों में दिए गए जववरण के अनुसार ह।ै (ख) र्दि नहीं तो वास्ट्तजवक जवसंगजतर्ों, र्दि कोई हैं, का सार पर्ायप्त रूप से स्ट्पि दकर्ा िाए।
(viii) िरुाग्रही चकूकताय* िहां कहीं कंपनी को दकसी बैंक अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ा अर्वा अन्र् ऋणिाता द्वारा िरुाग्रही चूककताय र्ोजर्त दकर्ा गर्ा ह ै वहां जनम्नजलजखत ब्र्ौरे प्रस्ट्ततु दकए िाएँगे:
(क) िरुाग्रही चूककताय के रूप में की गई र्ोर्णा की तारीख, (ख) चूकों के ब्र्ौरे (चूकों की मात्रा और प्रकृजत), *“र्हां “िरुाग्रही चूककताय” से अजभप्रेत ह ै ऐसा व्यजि अर्वा िारीकताय जिसे भारतीर् टरिवय बैंक द्वारा िारी िरुाग्रही चूककतायओं से संबंजधत दििा-जनिेिों के अनुसार दकसी बैंक अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ा (अजधजनर्म के तहत पटरभाजर्त) अर्वा उसके संर् द्वारा िरुाग्रही चूककताय के रूप में वगीकृत दकर्ा गर्ा हो।
(ix) सचूी स ेहटार्ी गई कंपजनर्ों के सार् सबंधं िहां कंपनी ने कंपनी अजधजनर्म, 1956 की धारा 560 अर्वा कंपनी अजधजनर्म, 2013 की धारा 248 के अंतगयत सूची से हटार्ी गई कंपजनर्ों के सार् कोई संव्यवहार दकए हैं वहां कंपनी जनम्नजलजखत ब्र्ौरे प्रकट करेगी :- सूची से हटार्ी गई कंपजनर्ों का नाम सूची से हटार्ी गई कंपजनर्ों के सार् संव्यवहार की प्रकृजत िेर् बकार्ा सूची से हटार्ी गई कंपजनर्ों के सार् संबंध, र्दि कोई ह,ै को प्रकट दकर्ा िाए प्रजतभूजतर्ों में जवजनधान प्राप्र् राजिर्ां िेर् राजिर्ां सूची से हटार्ी गई कंपजनर्ों द्वारा धाटरत िेर्र अन्र् बकार्ा िेर् (जवजनर्ियि दकर्ा िाए)
(x) कंपनी रजिस्ट्रार के सार् प्रभारों अर्वा ऋणमजुि का रजिस्ट्रीकरण िहां कहीं सांजवजधक अवजध से आग ेकंपनी रजिस्ट्रार के सार् दकसी प्रभार अर्वा भुगतान को रजिस्ट्रीकृत दकर्ा िाना है वहां उससे संबंजधत जववरण और कारणों को प्रकट दकर्ा िाएगा।
(xi) कंपजनर्ों के स्ट्तरों की सखं्र्ा की अनपुालना िहां कहीं कंपनी न ेकंपनी (स्ट्तरों की संख्र्ा पर प्रजतर्ेध) जनर्म, 2017 के सार् पटठत अजधजनर्म की धारा 2 के खंड (87) के अंतगयत जनधायटरत स्ट्तर संख्र्ा की अनुपालना नहीं की ह ैवहां जवजनर्ियि स्ट्तर और ऐसी अधोस्रोत कंपजनर्ों में कंपनी से संबंध/धाटरत की सीमा में कंपनी का नाम और सीआईएन प्रकट दकर्ा िाएगा।
(xii) जनम्नजलजखत अनपुातों को प्रकट दकर्ा िाएगा (क) चालू अनुपात, (ख) ऋण-साम्र्ा अनुपात, [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 9 (ग) ऋण सेवा व्याजप्त अनपुात, (र्) साम्र्ा अनुपात पर लाभ, (ड़) सूचीकृत व्यापारावतय अनपुात, (च) व्यापार प्राप्र् राजि व्यापारावतय अनुपात, (छ) व्यापार िेर्ता व्यापारावतय अनपुात, (ि) जनवल पूंिी व्यापारावतय अनुपात, (झ) जनवल लाभ अनुपात, (ञ) जनर्ोजित पूंिी पर लाभ, (ट) जवजनधान पर लाभ। कंपनी उपर्ुयि अनुपातों की संगणना के जलए अपनी मिों को अंि और मूल्र्ाजभिार्क के सार् जमलाकर स्ट्पि करेगी। जपछल ेवर्य की तलुना में 25% से अजधक अनुपात के पटरवतयन के जलए और आग ेस्ट्पिीकरण प्रिान दकर्ा िाएगा।
(xiii) व्यवस्ट्र्ाओं स ेसबंजंधत अनमुोदित र्ोिना/र्ोिनाओं की अनपुालना िहां कहीं सक्षम प्राजधकारी द्वारा कंपनी अजधजनर्म, 2013 की धारा 230 से 237 के संबंध में दकसी व्यवस्ट्र्ा र्ा र्ोिना को अनुमोदित दकर्ा गर्ा ह ैवहां कंपनी र्ह प्रकट करेगी दक ऐसी व्यवस्ट्र्ा वाली र्ोिना की उपलजब्ध कंपनी के खातों में ििय की िाए और इसके अलावा लेखा मानकों और इस संबंध में जवचलन आधार के अनुसार उसे स्ट्पि भी दकर्ा िाए।
(xiv) ऋण ली गई जनजधर्ों और िरे्र प्रीजमर्म का उपर्ोग :
(क) िहां कहीं कंपनी ने इस आिर् के सार् (चाह ेजलजखत अर्वा अन्र्र्ा रूप में) जविेिी कंपजनर्ों (मध्र्स्ट्र्ों) सजहत दकसी अन्र् व्यजि (व्यजिर्ों) अर्वा कंपनी (कंपजनर्ों) के जलए जनजधर्ों को अजग्रम अर्वा ऋण के रूप में जलर्ा ह ैअर्वा उन जनजधर्ों का जनवेि (चाह े वे ऋण ली हुई जनजधर्ां अर्वा िेर्र प्रीजमर्म हो अर्वा कोई अन्र् संसाधन अर्वा जनजधर्ों की कोई अन्र् प्रकार हो) दकर्ा हो और र्ह दक
(i) मध्र्स्ट्र् प्रत्र्क्षत: अर्वा अप्रत्र्क्षतः व्यजिर्ों को कंपनी की ओर से अर्वा दकसी अन्र् ढंग से जचजन्हत अन्र् व्यजिर्ों अर्वा कंपजनर्ों (अंजतम लाभार्ी) को ऋण िेगा अर्वा जनवेि करेगा, र्ा
(ii) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों की ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार उपलब्ध कराएगा; “वहां कंपनी जनम्नजलजखत मामलों को प्रकट करेगी :- (I) प्रत्र्ेक मध्र्स्ट्र् के संपणूय ब्र्ौरों सजहत मध्र्स्ट्र् के पास जनवेि की गई अर्वा ऋण के तौर पर ली गई अर्वा अजग्रम िी गई जनजध की तारीख और रकम। (II) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों के पणूय ब्र्ौरों सजहत ऐसे मध्र्स्ट्र्ों द्वारा अन्र् मध्र्स्ट्र्ों अर्वा अंजतम लाभार्र्यर्ों को इससे आग ेिी गई अजग्रम राजि अर्वा दिए गए ऋण अर्वा जनवेि की गई राजि की तारीख और मात्रा। (III) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों को अर्वा उनकी ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार प्रिान करन े की राजि और तारीख। (IV) इस आिर् की र्ोर्णा करना दक जविेिी जवजनमर् प्रबंधन अजधजनर्म, 1999 (1999 का 42) और कंपनी अजधजनर्म की जनस्ट्तारण संबंजधत उपबंधों की ऐसे संव्यवहार के सार् पूणय अनुपालना की गई ह ैऔर र्ह दक ऐसे संव्यवहार में धन िोधन जनवारण अजधजनर्म, 2002 (2003 का 15) के जनवारण संबंधी र्ुजि का उल्लंर्न नहीं दकर्ा गर्ा ह।ै;
10 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (ख) िहां कहीं दकसी कंपनी ने इस आिर् के सार् (जलजखत अर्व अन्र्र्ा रुप में) जविेिी कंपजनर्ों (जवत्त पोर्ण पक्ष) सजहत दकसी व्यजि/व्यजिर्ों अर्वा कंपनी/कंपजनर्ों से कोई जनजध प्राप्त की ह ैदक कंपनी
(i)प्रत्र्क्षतः अर्वा अप्रत्र्क्षतः जवत्त पोर्ण पक्ष (अंजतम फार्िाग्राही) की ओर से अर्वा दकसी अन्र् तरीके से अन्र् जचजन्हत व्यजिर्ों अर्वा कंपजनर्ों को ऋण िगेी अर्वा उनके सार् जनवेि करेगी। र्ा
(ii) अंजतम लाभार्ी की ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार प्रिान करेगी वहां कंपनी को जनम्नजलजखत बातें प्रकट करनी होगी :- (I) प्रत्र्ेक जवत्त पोर्ण के ब्र्ौरों सजहत जवत्त पोर्ण पक्षों से प्राप्त जनजध की तारीख और राजि। (II) अन्र् पक्षों अर्वा फार्िाग्राजहर्ों के ब्र्ौरों सजहत अन्र् मध्र्स्ट्र्ों अर्वा फार्िाग्राजहर्ों को और अजधक अजग्रम िी गई जनजध अर्वा दिए गए ऋण अर्वा जनवेि दकए गए धन की तारीख और राजि। (III) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों की ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार प्रिान करन ेकी राजि और तारीख। (IV) इस आिर् की र्ोर्णा करना दक जविेिी जवजनमर् प्रबंधन अजधजनर्म, 1999 (1999 का 42) के उपबंधों और कंपनी अजधजनर्म के ऐसे आिान-प्रिान के जनजमत्त अनुपालना की गई ह ैऔर इन आिान- प्रिानों के द्वारा धन िोधन जनवारण अजधजनर्म, 2002 (2003 का 15) का उल्लंर्न नहीं हुआ ह।ै;
(iii) भाग-II में- लाभ और हाजन का कर्न,– (क) “III.कुल रािस्ट्व (I+II)” िीर्य के तहत, “रािस्ट्व” िब्ि के स्ट्र्ान पर “आर्” िब्ि रखा िाएगा;
(ख) “लाभ और हाजन का कर्न तैर्ार करने के जलए साधारण अनुिेि” िीर्यक के तहत – (I) उप-मि (ख) के पश्चात्, पैरा 2, मि (क) में, जनम्नजलजखत अतं:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत्:- “(खक) प्राप्त अनुिानों अर्वा िानों (धारा 8 स ेसंबंजधत कंपजनर्ों के मामल ेमें ही सुसंगत)”;
(II) मि (viii) और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के बाि पैरा “5. अजतटरि सूचना”, में जनम्नजलजखत को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- “(ix) अप्रकटटत आर् कंपनी आर्कर अजधजनर्म, 1961 (र्र्ा अनुसंधान अर्वा सवेक्षण अर्वा आर्कर अजधजनर्म, 1961 के दकसी अन्र् सुसंगत उपबंध) के तहत कर मूल्र्ांकन वर्य के िौरान आर् के रूप में गरै-प्रस्ट्ततु अर्वा अप्रकटटत बही खातों में गरै-अजभजलजखत दकसी संव्यवहार से संबंजधत ब्र्ौरों को प्रस्ट्तुत करेगी िब तक दक उसे अन्र्र्ा दकसी र्ोिना के तहत ऐसे प्रकटन के जलए सुरक्षा प्राप्त न हो और वह र्ह भी बताएगी दक क्र्ा पूवय में गरै-अजभजलजखत आर् तर्ा संबंजधत आजस्ट्तर्ों को आलोच्र् वर्य के िौरान बही खातों में अजभजलजखत दकर्ा गर्ा ह ैअर्वा नहीं।;
(x) कारपोरेट सामाजिक िाजर्त्व (सीएसआर) िहां कहीं कंपनी धारा 135 के क्षेत्राजधकार में आती ह ैवहां सीएसआर संबंधी कार्यकलापों के बारे में जनम्नजलजखत को प्रकट दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 11 (क) वर्य के िौरान कंपनी द्वारा व्यर् की गई अपेजक्षत रकम, (ख) व्यर् की गई रकम, (ग) वर्य के अतं में कमी, (र्) पूवयवती वर्य की कमी को जमलाकर कुल र्ोग, (ङ) कमी का कारण, (च) सीएसआर से संबंजधत कार्यकलापों की प्रकृजत, (छ) संबंजधत पक्ष के संव्यवहार के ब्र्ौरे अर्ायत ् संबंजधत लेखा-मानकों के अनुसार सीएसआर व्यर् के संबंध में कंपनी द्वारा जनर्ंजत्रत न्र्ास को दिर्ा गर्ा अिंिान, (ि) िहां कहीं संजविात्मक िाजर्त्व को ग्रहण करने के बाि की गई िेर्ता के संबंध में उपबंध बनाए गए हैं वहां वर्य के िौरान उन उपबंधों के तहत दकए गए संव्यवहार को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा।
(xi) दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी के ब्र्ौरे िहां कहीं कंपनी ने जवत्तीर् वर्य के िौरान दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी में जनवेि दकर्ा ह ैवहां जनम्नजलजखत को प्रकट दकर्ा िाएगा:- (क) दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी के समावेि के सार् दकए गए संव्यवहार पर लाभ अर्वा हाजन, (ख) टरपोर्टिंग तारीख के अनुसार धाटरत करेंसी की राजि, (ग) दक्रप्टो करेंसी/वचुयअल करेंसी में दकए गए व्यापार अर्वा दकए गए जनवेि के प्रर्ोिन के जलए दकसी व्यजि से प्राप्त िमा राजि अर्वा अजग्रम राजि।”;
(ख) भाग II में,
(i) पैरा 5 में, “इंडएएस के अनपुालनार्य कंपनी के जवत्तीर् ब्र्ौरे तैर्ार करन ेके जलए अपेजक्षत साधारण अनुिेि” िीर्यक के तहत व्यापारावतय, िब्ि के जलए िोनों स्ट्र्ानों पर िहां र्ह आता ह ै“कुल आर्” िब्ि रखे िाएंग;े
(ii) भाग-I में– तुलन-पत्र,- (क) “साम्र्ा और िेर्ताए”ं िीर्यक के अंतगयत, उप-िीर्यक “िेर्ताओं” में,- (I) मि “(1) गैर-चालू िेर्ताओं” की उप-मि “(क) जवत्तीर् िेर्ताओं” को (i) के बाि जनम्नजलजखत को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- “(iक) पट्टा िेर्ताए”ं (II) मि (2) “चालू िेर्ताओं” की उप-मि “(क) जवत्तीर् िेर्ताओं” में (i) के बाि जनम्नजलजखत को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- “(iक) पट्टा िेर्ताए”ं 12 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (ख) “साम्र्ा में पटरवतयन का कर्न” िीर्यक और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के जलए जनम्नजलजखत को रखा िाएगा, अर्ायत्:- “साम्र्ा में पटरवतयनों का कर्न कंपनी का नाम ....................
क. साम्र्ा िेर्रपूंिी (I) चाल ूटरपोर्टिंग अवजध चालू टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में िेर् पूवयवती अवजध में हुई त्रुटटर्ों के कारण साम्र्ा िेर्रपूंिी में पटरवतयन चालू टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में पुनः उजल्लजखत िेर् चालू वर्य के िौरान साम्र्ा िेर्र पूंिी में पटरवतयन चालू टरपोर्टिंग अवजध के अंत में िेर्
(2) पूवयवती टरपोर्टिंग अवजध पूवयवती टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में िेर् पूवयवती अवजध में हुई तु्रटटर्ों के कारण साम्र्ा िेर्रपूंिी में पटरवतयन चालू टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में पुनः उजल्लजखत िेर् पूवयवती वर्य के िौरान साम्र्ा िेर्र पूंिी में पटरवतयन पूवयवती टरपोर्टिंग अवजध के अतं में िेर् ख. अन्र् साम्र्ा (I) चाल ूटरपोर्टिंग अवजध आरजक्षत जनजध और अजधिेर् िरे्र आवेिन राजि- लजंबत आबटंन जमजित जवत्तीर् ससंाधनों का साम्र्ा र्टक आरजक्षत पूंिी प्रजतभूजत प्रीजमर्म अन्र् आरजक्षत पूंिी (प्रकार जवजनर्ियि करें) प्राप्त उपाियन अन्र् व्यापक आर् स्रोतों के िटरए ऋण जनपटान अन्र् व्यापक आर् स्रोतों के िटरए साम्र्ा जनपटान नकिी प्रवाह से संबंजधत प्रभावी अंि पुन:मूल्र्ांकन अजधिेर् जवििेी प्रचालन से संबंजधत जवत्तीर् जववरण के संबंध में जवजनमर् अन्र् व्यापक आर् स्रोतों से िुड़ी अन्र् मिें (दकस्ट्म जवजनर्ियि करें) िय़ेर वारेंट्स पर प्राप्त धन कुल [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 13 जभन्नताएं चालू टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में िेर् लेखागत नीजत अर्वा पूवयवती अवजध में हुई त्रुटटर्ों में पटरवतयन चालू टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में पुनःउजल्लजखत िेर् चालू वर्य के जलए कुल व्यापक आर् लाभांि धाटरत उपाियन में अंतरण कोई अन्र् पटरवतयन (जवजनर्ियि करे) चालू टरपोर्टिंग अवजध के अंत में िेर् 14 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(2) पूवयवती टरपोर्टिंग अवजध आरजक्षत राजि और अजधिरे् िरे्र आविेन राजि- लजंबत आबटंन जमजित जवत्तीर् संसाधनों के साम्र्ा र्टक आरजक्षत पूंिी प्रजतभूजत प्रीजमर्म अन्र् आरजक्षत पूंिी (प्रकार जवजनर्ियि करें) प्राप्त उपाियन अन्र् व्यापक आर् स्रोतों के िटरए ऋण जनपटान अन्र् व्यापक आर् स्रोतों के िटरए साम्र्ा जनपटान नकिी प्रवाह से संबंजधत प्रभावी अंि पुन:मूल्र्ांकन अजधिेर् जविेिी प्रचालन से संबंजधत जवत्तीर् जववरण के संबंध में जवजनमर् जभन्नताएं अन्र् व्यापक आर् स्रोतों से िुड़ी अन्र् मिें (दकस्ट्म जवजनर्ियि करें) िय़ेर वारेंट्स पर प्राप्त धन कुल चालू टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में िेर् लेखागत नीजत अर्वा पूवयवती अवजध में हुई तु्रटटर्ों में पटरवतयन चालू टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ में पुनःउजल्लजखत िेर् पूवयवती वर्य के जलए व्यापक आर् [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 15 अंििान धाटरत उपाियन में अंतरण कोई अन्र् पटरवतयन (जवजनर्ियि करे) चालू टरपोर्टिंग अवजध के अंत में िेर् टटप्पण: लाभ अर्वा हाजन के िटरए उजचत मलू्र् पर जनधायटरत जवत्तीर् िेर्ताओं के बारे में ऋण संबंधी िोजखम की बाबत पटरभाजर्त लाभ र्ोिनाओं और उजचत मलू्र् पटरवतयनों के पनु:
मापन को संबंजधत टटप्पण में प्रासंजगक धन राजि के सार् ऐसी मिों से िुडे़ पृर्क प्रकटन सजहत धाटरत उपाियन के एक भाग के रूप में मान्र्ता िी िाएगी र्ा आरजक्षत और अजधिेर् के तहत परृ्क कॉलम में ििायर्ा िाएगा। 16 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (ग) “तुलन-पत्र तैर्ार करने के जलए साधारण अनुिेि” िीर्यक के अंतगयत “टटप्पण” में,- (I) पैरा 6 में,- (क) “क. गरै-चालू आजस्ट्तर्ों” िीर्यक के अतंगयत,-
(i) मि (iii) के जलए “I. संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण” उप-िीर्यक के अंतगयत जनम्नजलजखत मि को रखा िाएगा, अर्ायत:्- “(iii) पुनःमूल्र्ांकन (र्दि संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण के प्रत्र्के वगय का जनवल वाहक मूल्र् 10 प्रजतित अर्वा उससे अजधक ह)ै और अन्र् संर्ोिनों और संबंजधत अवक्षर्ण और न्र्ूनता हाजनर्ों अर्वा उत्क्रमण के कारण व्यापार संर्ोिनों और पटरवतयन राजि के िटरए वधयनों, जनपटानों, अजधग्रहणों को प्रकट करन े वाली टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ और अंत में आजस्ट्तर्ों के प्रत्र्ेक वगय के जनवल और सकल राजि से संबंजधत समार्ोिन को पृर्क रूप से प्रकट दकर्ा िाएगा।”;
(ii) मि (ii) के जलए “IV. अन्र् गैर-चालू आजस्ट्तर्ां”, उप-िीर्यक के तहत जनम्नजलजखत मि रखी िाएगी, अर्ायत:्- “(ii) पनुःमूल्र्ांकन (र्दि संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण के प्रत्र्के वगय का जनवल वाहक मलू्र् 10 प्रजतित अर्वा उससे अजधक ह)ै और अन्र् संर्ोिनों और संबंजधत अवक्षर्ण और न्र्ूनता हाजनर्ों अर्वा उत्क्रमण के कारण व्यापाटरक संर्ोिनों और पटरवतयन राजि के िटरए वधयनों, जनपटानों, अजधग्रहणों को प्रकट करने वाली टरपोर्टिंग अवजध के प्रारंभ और अंत में आजस्ट्तर्ों के प्रत्र्ेक वगय के जनवल और सकल राजि से संबंजधत समार्ोिन को अलग-अलग प्रकट दकर्ा िाएगा।”
(iii) मि (iii) के पश्चात् “VII. व्यापार प्राप्र् राजिर्ां” उप-िीर्यक के तहत जनम्नजलजख मि को अंत:स्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- “(iv) व्यापार प्राप्र् बकार्ा के स्ट्र्ान पर जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची िी िाएगी:
व्यापाटरक प्राप्र् अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) जवजिजिर्ां भुगतान की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा राजि# 6 माह से कम 6 माह–1 वर्य 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्ों से अजधक कुल
(i) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-सही माना गर्ा
(ii) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-जिनमें के्रजडट िोजखम में महत्वपूणय वृजद्ध हुई ह।ै
(iii) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां- क्षीण के्रजडट
(iv) जववादित व्यापाटरक [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 17 प्राप्र् राजिर्ां- सही माना गर्ा
(v) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-जिनमें के्रजडट िोजखम में महत्वपूणय वृजद्ध हुई ह।ै
(vi) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-क्षीण के्रजडट #इसी प्रकार की सूचना वहां भी िी िाएगी िहां भुगतान की िेर् तारीख जवजनर्ियि नहीं की गई ह।ै ऐसे मामले में प्रकटन प्रदक्रर्ा संव्यवहार की तारीख से होगी। जबल से इतर िेर्ताओं को परृ्क रूप से प्रकट दकर्ा िाएगा”;
(iv) उप-मि (i) में “VIII. ऋण” िीर्यक के तहत उप-मि (क) को लोप दकर्ा िाएगा;
(v) उप-िीर्यक “IX” और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के जलए जनम्नजलजखत रखा िाएगा, अर्ायत्:- “IX. अन्र् जवत्तीर् आजस्ट्तर्ां
(i) प्रजतभूजत िमाए ं
(ii) 12 महीने से अजधक पटरपक्वता के सार् बैंक िमाए ं
(iii) अन्र् (जवजनर्ियि दकर्ा िाए)”;- (ख) “ख. चाल ूआजस्ट्तर्ां” िीर्यक के अंतगयत,-
(i) मि (iii) और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के बाि “III. व्यापार प्राप्र् राजिर्ां”, उप-िीर्यक में जनम्नजलजखत को अंतःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत् :
“(iv) व्यापार प्राप्र् बकार्ा के जलए, जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची को दिर्ा िाएगा :
व्यापाटरक प्राप्र् अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) जवजिजिर्ां भुगतान की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा राजि# 6 माह से कम 6 माह–1 वर्य 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्ों से अजधक कुल
(i) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-सही माना गर्ा
(ii) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-जिनमें के्रजडट िोजखम में महत्वपूणय वृजद्ध हुई ह।ै
(iii) अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां- क्षीण के्रजडट 18 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(iv) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां- सही माना गर्ा
(v) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-जिनमें के्रजडट िोजखम में महत्वपूणय वृजद्ध हुई ह।ै
(vi) जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां-क्षीण के्रजडट # ऐसी ही सूचना वहां भी िी िाएगी िहां भुगतान की िेर् तारीख जवजनर्ियि नहीं की गई ह ै तर्ा ऐसे मामल े में प्रकटीकरण संव्यवहार की तारीख से होगा। जबल से इतर िेर् राजि को परृ्क रूप से प्रकट दकर्ा िाएगा”;
(ii) मि (i) में “V. ऋण” उप-िीर्यक के अतंगयत उप-मि (क) को लोप दकर्ा िाएगा;
(iii) उप-िीर्यक “V. ऋण” और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के पश्चात जनम्नजलजखत अंतःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत्:
“Vक. अन्र् जवत्तीर् आजस्ट्तर्ां : र्ह सवय अनन्र् िीर्यक ह ैजिसमें वे जवत्तीर् आजस्ट्तर्ां िाजमल हैं िो अन्र् जवत्तीर् आजस्ट्त प्रवगों र्र्ा-प्रजतभूजत िमा के सार् मले नहीं खाती हैं।” (ग) िीर्यक “र्. साम्र्ा” के अंतगयत मि (ठ) के बाि “I. साम्र्ा िेर्र पूंिी” उप-िीर्यक में जनम्नजलजखत मि को अंतःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत ्:- “(ड) कंपनी संप्रवतयकों की िेर्रधाटरता* जनम्नानुसार प्रकट करेगी :
वर्य के अतं में संप्रवतयकों द्वारा धाटरत िेर्र वर्य के िौरान पटरवतयन %*** क्र.सं. संप्रवतयक का नाम िेर्रों की संख्र्ा** कुल िेर्रों का प्रजतित** कुल * र्हां संप्रवतयक स ेअजभप्रेत कंपनी अजधजनर्म, 2013 में पटरभाजर्त संप्रवतयक ह।ै **िेर्रों के प्रत्र्ेक वगय के जलए अलग से ब्र्ौरे दिए िाएंगे। ***प्रजतित में पटरवतयन की गणना वर्य के प्रारंभ में संबंजधत संख्र्ा के बारे में की िाएगी अर्वा र्दि इसे वर्य के िौरान पहली बार िारी दकर्ा गर्ा ह ैतब इसकी गणना इसको िारी करने की तारीख से की िाएगी।”;
(र्) मि (i) में, उप-िीर्यक “I. उधार” में “ङ. गैर-चालू िेर्ताओं”, िीर्यक के अंतगयत उप-मि (च) को लोप दकर्ा िाएगा;
(ङ) “च. चाल ूिेर्ताए”ं िीर्यक के अंतगयत,-
(i) मि (iv) के पश्चात ्“झ. उधार” उप-िीर्यक में जनम्नजलजखत मि को अतंःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत् :- “(v) िीर्य काजलक उधार की चालू पटरपक्व राजिर्ों को अलग से प्रकट दकर्ा िाएगा”
(ii) “II. अन्र् जवत्तीर् िेर्ताएं” उप-िीर्यक के अंतगयत मि (क) और मि (ख) को लोप दकर्ा िाएगा।”;
[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 19 (च) “चक. व्यापार िेर्ताएं”, िीर्यक और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के बाि जनम्नजलजखत को अंतःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत ्:- “चख. भुगतान के जलए व्यापार संिेर् के जलए जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची को दिर्ा िाएगा:
व्यापाटरक िेर्ता अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) जवजिजिर्ां भुगतान की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा# 1 वर्य से कम 1 से 2 वर्य तक 2 से 3 वर्य तक 3 वर्य से अजधक कुल
(i)एमएसएमई
(ii)अन्र्
(iii)जववादित िेर्- एमएसएमई
(iv) जववादित िेर्- अन्र् # ऐसी ही सूचना वहां िी िाएगी िहां भुगतान की कोई िेर् तारीख नहीं ह ैउस मामल ेमें प्रकटीकरण संव्यवहार की तारीख से होगा। जबल से इतर िेर् परृ्क रूप से प्रकट दकर्ा िाएगा”;
(छ) “ञ” िीर्यक और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के पश्चात,् जनम्नजलजखत अतंःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत ्:- “ञक. िहां कंपनी न ेबैंकों और जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं से ली गई उधारी को उस जवजनर्ियि प्रर्ोिन के जलए उपर्ोग नहीं दकर्ा ह,ै जिसके जलए वह तलुन-पत्र की तारीख को ली गई र्ी, कंपनी को वह ब्र्ौरा प्रकट करना होगा िहां वह उपर्ोग की गई ह”ै;
(ि) िीर्यक ट और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों का लोप दकर्ा िाएगा;
(i) िीर्यक ट और इससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के पश्चात्, जनम्नजलजखत अतंःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत् :- “(ठ) अजतटरि जवजनर्ामक सचूना
(i) स्ट्र्ावर संपजत्तर्ों के स्ट्वाजमत्व जवलेखों को कंपनी के नाम पर नहीं रखा गर्ा र्ा कंपनी सभी स्ट्र्ावर संपजत्तर्ों (उन संपजत्तर्ों के अलावा िहां कंपनी पटे्टिार ह ैऔर पट्टा करार पटे्टिार के पक्ष में सम्र्क रूप से जनष्पादित दकए गए हैं) का ब्र्ौरा प्रिान दकर्ा िाएगा जिनके स्ट्वाजमत्व जवलखे कंपनी के नाम से नहीं हैं जनम्नजलजखत प्रपत्र में और िहां ऐसी स्ट्र्ावर संपजत्त संर्ुि रूप से अन्र् के सार् धाटरत ह,ै ब्र्ौरा कंपनी के िेर्र की सीमा तक प्रिान दकर्ा िाना अपेजक्षत ह।ै तुलन-पत्र में सुसंगत मि संपजत्त की मि का जववरण सकल वाहक मूल्र् स्ट्वाजमत्व जवलेख धारक का नाम क्र्ा स्ट्वाजमत्व जवलेख धारक एक संवधयक, जनिेिक, अर्वा संवधयक* जनिेिक का जिस तारीख संपजत्त धाटरत ह ै कंपनी** के नाम से धाटरत न होने के कारण 20 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] टरश्तेिार# / अर्वा प्रार्ोिक / जनिेिक का कमयचारी ह ै पीपीई - जनवेि संपजत्त - जबक्री के जलए धाटरत गैर-चालू आजस्ट्त - अन्र् भूजम भवन भूजम भवन भूजम भवन - - - - **भी जनर्ियि करें र्दि जववादित ह े #टरश्तेिार का र्हां अजभप्रेत िो कंपनी अजधजनर्म, 2013 में र्र्ा-पटरभाजर्त नातेिार ह।ै * संप्रवतयक र्हां अजभप्रेत ह ैिो कंपनी अजधजनर्म, 2013 में र्र्ा-पटरभाजर्त ह।ै
(ii) कंपनी र्ह प्रकट करेगी दक क्र्ा जनवेि संपजत्त का उजचत मलू्र् (जवत्तीर् जववरजणर्ों में प्रकटीकरण के प्रर्ोिनों के जलए र्र्ा-माजपत) कंपनी (रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक और मलू्र्ांकन) जनर्म, 2017 के जनर्म 2 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त एक रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक द्वारा दकए गए मलू्र्ांकन पर आधाटरत ह।ै
(iii) क्र्ा िहां कंपनी ने अपनी संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण (आजस्ट्तर्ों के उपर्ोग के अजधकार सजहत) का पुनमूयल्र्ांकन दकर्ा ह,ै कंपनी (रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक और मूल्र्ांकन) जनर्म, 2017 के जनर्म 2 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त एक रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक द्वारा दकए गए मूल्र्ांकन पर आधाटरत ह,ै का प्रकटीकरण दकर्ा ह।ै
(iv) क्र्ा िहां कंपनी ने अपनी अमूतय आजस्ट्तर्ों का पुनमूयल्र्ांकन दकर्ा ह,ै वहां कंपनी (रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक और मूल्र्ांकन) जनर्म, 2017 की जनर्म 2 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त एक रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक द्वारा मूल्र्ांकन पर आधाटरत ह,ै का प्रकटीकरण दकर्ा ह।ै [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 21
(v) जनम्नजलजखत प्रकटीकरण वहां दकए िाएंग ेिहां उधार अर्वा उधारों के स्ट्वरूप में अजग्रम सप्रवतयकों, जनिेिकों, केएमपी और संबंजधत पक्षों (कंपनी अजधजनर्म, 2013 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त) के जलए स्ट्वीकृत हैं, परृ्क रूप से अर्वा दकसी अन्र् व्यजि के सार् संर्ुि रूप से, िो :
(क) मांग पर प्रजतिेर्; अर्वा (ख) दकन्हीं ितों अर्वा प्रजतसंिार् की अवजध को जवजनर्ियि दकए जबना, उधार लेने वाले का प्रकार बकार्ा उधार के रूप में ऋण अर्वा अजग्रम की रकम कुल उधाटरर्ों और अजग्रमों की प्रजतितता संप्रवतयक जनिेिक केएमपी संबंजधत पक्ष
(vi) चाल ूपूिंीगत कार्य (क) चाल ूपूिंीगत कार्य के जलए जनम्नजलजखत अवजध अनसुचूी िी िाएगी :
सीडब्ल्र्आूईपी अवजध अनसुचूी (रकम रुपर्े में) सीडब्ल्र्ूआईपी पूणय होन े के जलए पटरकजल्पत अजधकतम अवजध की अवजध के जलए सीिब्ल्र्ूआईपी में राजि कुल* 1 वर्य से कम 1 से 2 वर्य तक 2 से 3 वर्य तक 3 वर्य से अजधक चालू पटरर्ोिनाएं अस्ट्र्ाई रूप से स्ट्र्जगत पटरर्ोिए ं *र्ोग का तुलन-पत्र में सीडब्ल्र्आूईपी रकम से जमलान दकर्ा िाएगा। (ख) चालू पूंिीगत कार्य के जलए, जिसका पूणय होना अजतिेर् ह ैअर्वा अपनी मलू र्ोिना की तलुना में इसकी लागत अजधक हो गई ह,ै जनम्नजलजखत सीडब्ल्र्आूईपी पणूयता अनसुचूी िी िाएगी** :
22 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (रकम रुपर्े में) सीडब्ल्र्ूआईपी अवजध में पूणय होना 1 वर्य से कम 1 से 2 वर्य तक 2 से 3 वर्य तक 3 वर्य से अजधक पटरर्ोिना 1 पटरर्ोिना 2” ** पटरर्ोिनाओं का ब्र्ौरा िहां कार्यकलाप स्ट्र्जगत कर दिए गए हैं, को पृर्क रूप से दिर्ा िाएगा।
(vii) चाल ूअमतूय आजस्ट्तर्ा ं (क) चालू अमतूय आजस्ट्तर्ों के जलए, जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची िी िाएगी :
चाल ूअवजध अनसुचूी के अधीन अमतूय आजस्ट्तर्ा ं (रकम रुपर्े में) चालू अमतूय आजस्ट्तर्ां की अवजध के जलए सीडब्ल्र्आूईपी में राजि कुल* 1 वर्य से कम 1 से 2 वर्य तक 2 से 3 वर्य तक 3 वर्य से अजधक चालू पटरर्ोिनाएं अस्ट्र्ार्ी रूप से स्ट्र्जगत पटरर्ोिनाएँ *र्ोग का तुलन-पत्र में जवकास के अधीन अमतूय आजस्ट्तर्ों की धनराजि से जमलान दकर्ा िाएगा। (ख) चालू पूंिीगत कार्य के जलए, जिसका पूणय होना अजत िेर् ह ैअर्वा अपनी मूल र्ोिना की तुलना में इसकी लागत अजधक हो गई ह,ै जनम्नजलजखत चाल ूअमतूय आजस्ट्तर्ों की पणूयतः अनसुचूी िी िाएगी**:
(रकम रुपर्े में) चालू अमतूय आजस्ट्तर्ों जिस अवजध में पणूय की िाएगी 1 वर्य से कम 1 से 2 वर्य तक 2 से 3 वर्य तक 3 वर्य से अजधक पटरर्ोिना 1 पटरर्ोिना 2 ** पटरर्ोिनाओं का ब्र्ौरा िहां कार्यकलाप स्ट्र्जगत कर दिए गए हैं, को पृर्क रूप से दिर्ा िाएगा।
(viii) धाटरत बनेामी सपंजत्त का ब्र्ौरा िहां बेनामी संव्यवहार (प्रजतर्ेध) अजधजनर्म, 1988 (1988 का 45) और इसके अंतगयत बन ेजनर्मों के अधीन दकसी बेनामी संपजत्त को धाटरत करने के जलए कंपनी के जवरुद्ध कोई कार्यवाही आरंभ की गई ह ैअर्वा लंजबत ह,ै कंपनी जनम्नजलजखत प्रकटीकरण करेगी, अर्ायत् :- [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 23 (क) ऐसी संपजत्त का ब्र्ौरा, (ख) उसकी धनराजि, (ग) फार्िाप्रिों का ब्र्ौरा, (र्) र्दि संपजत्त बजहर्ों में ह,ै उस जस्ट्र्जत में तलुन-पत्र में मि का संिभय, (ङ) र्दि संपजत्त बजहर्ों में नहीं ह,ै उस जस्ट्र्जत में तलुन-पत्र का संिभय, (च) िहां कंपनी के जवरुद्ध इस जवजध के अंतगयत संव्यवहार के अवप्रेरक अर्वा अंतरणकताय के रूप में कार्यवाजहर्ां चल रही हैं, उस जस्ट्र्जत में ब्र्ौरा प्रिान दकर्ा िाएगा, (छ) कार्यवाजहर्ों का स्ट्वरूप, उसकी जस्ट्र्जत और उस पर कंपनी का जवचार।
(ix) िहां कंपनी न े चाल ू आजस्ट्तर्ों की प्रजतभूजत के आधार पर बैंकों अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं से ऋण जलए हैं, उसे जनम्नजलजखत प्रकट करना होगा, अर्ायत् :- (क) क्र्ा बैंकों अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं के समक्ष कंपनी द्वारा फाइल की गई मौिूिा आजस्ट्तर्ों की जतमाही जववरजणर्ां अर्वा जववरण लेखों के अनुरूप हैं;
(ख) र्दि नहीं, जमलान का सारांि और महत्वपणूय जवसंगजतर्ों के कारण, र्दि कोई हो, को समुजचत रूप से प्रकट दकर्ा िाए।
(x) िरुाग्राही चकूकताय* िहां दकसी कंपनी को दकसी बैंक अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ा र्ा अन्र् िेनिार द्वारा एक िरुाग्रही चूककताय र्ोजर्त कर िी गई ह,ै द्वारा जनम्नजलजखत ब्र्ौरा प्रिान दकर्ा िाएगा:
(क) िरुाग्रही चूककताय के रूप में र्ोर्णा की तारीख, (ख) चूकों का ब्र्ौरा (चूकों की रकम और स्ट्वरूप) * “िरुाग्रही चूककताय” र्हां अजभप्रेत ह ै ऐसा व्यजि अर्वा िारीकताय िो अर्वा जिसे भारतीर् टरिवय बैंक द्वारा िारी िरुाग्रही चूककतायओं से संबंजधत दििा-जनिेिों के अनुसार, दकसी बैंक अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ा (कंपनी अजधजनर्म, 2013 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त) र्ा उसके संर् द्वारा एक िरुाग्रही चूककताय के रूप में प्रवगीकृत दकर्ा गर्ा ह।ै
(xi) बिं कंपजनर्ों के सार् नातिेारी िहां कंपनी ने कंपनी अजधजनर्म, 2013 की धारा 248 र्ा कंपनी अजधजनर्म, 1956 की धारा 560 के अधीन बंि कंपजनर्ों के सार् कोई संव्यवहार दकर्ा ह,ै कंपनी जनम्नजलजखत ब्र्ौरा प्रकट करेगी, अर्ायत ्:- बंि कंपनी का नाम बंि कंपनी के सार् संव्यवहारों का स्ट्वरूप िेर् बकार्ा बंि कंपनी के सार् संबंध, र्दि कोई हो, प्रकट करें प्रजतभूजतर्ों में जवजनधान प्राप्र् राजिर्ां िेर् राजिर्ां बंि कंपनी द्वारा धाटरत िेर्र अन्र् बकार्ा िेर् (जनर्ियि करें)
(xii) कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) के समक्ष प्रभारों अर्वा ऋणमजुि का रजिस्ट्रीकरण िहां कोई प्रभार अर्वा ऋणमुजि कानूनी अवजध से आग ेआरओसी के समक्ष अभी रजिस्ट्रीकृत की िानी ह,ै उसका ब्र्ौरा और उसके कारण प्रकट दकए िाएंगे। 24 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(xiii) कंपजनर्ों के स्ट्तरों की सखं्र्ा का अनपुालन िहां कंपनी ने कंपनी (स्ट्तरों की संख्र्ा पर जनबिंधन) जनर्म, 2017 के सार् पटठत इस अजधजनर्म की धारा 2 के खंड (87) जवजहत स्ट्तरों की संख्र्ा का अनुपालन नहीं दकर्ा ह,ै जनधायटरत स्ट्तरों से आगे कंपजनर्ों का नाम और सीआईएन तर्ा ऐसी अधःप्रवाह कंपजनर्ों के सार् संबंध अर्वा धाटरता की सीमा प्रकट की िाएगी।
(xiv) जनम्नजलजखत अनपुात प्रकट दकए िाएंग े:- (क) चालू अनुपात, (ख) ऋण-साम्र्ा अनुपात, (ग) ऋण-सेवा कवरेि अनुपात, (र्) साम्र्ा अनुपात संबंधी टरटनय, (ङ) माल सूची व्यापार अनपुात, (च) व्यापार प्राप्र् रकम व्यापार अनुपात, (छ) व्यापार िेर् रकम व्यापार अनुपात, (ि) जनवल पूंिी व्यापार अनुपात, (झ) जनवल लाभ अनुपात, (ञ) जनर्ोजित पूंिी संबंधी टरटनय, (ट) जवजनधान संबंधी टरटनय। कंपनी उि अनुपातों की गणना करन ेके जलए गणक और भािक में िाजमल मिों को स्ट्पि करेगी। पूवयवती वर्य की तुलना में 25% से अजधक अनुपात के पटरवतयन के जलए और आगे स्ट्पिीकरण प्रिान दकर्ा िाएगा।
(xv) व्यवस्ट्र्ाओं की अनमुोदित र्ोिना(ओं) का अनपुालन िहां व्यवस्ट्र्ाओं की स्ट्कीम को कंपनी अजधजनर्म, 2013 की धारा 230 से 237 के अनुसार सक्षम प्राजधकारी द्वारा अनुमोदित कर दिर्ा गर्ा ह,ै कंपनी र्ह प्रकट करेगी दक व्यवस्ट्र्ाओं की ऐसी र्ोिना का आिर् ‘र्ोिना के अनुसार’ और ‘लेखांकन मानकों के अनुसार’ कंपनी के खातों में ििय दकर्ा गर्ा ह ैऔर इस संबंध में दकसी अंतर को स्ट्पि दकर्ा िाएगा।
(xvi) उधार ली गई जनजधर्ों का उपर्ोग और जनगयम प्रीजमर्म :
(क) िहां कंपनी ने दकसी अन्र् व्यजि(र्ों), कंपनी(र्ों), जविेिी कंपजनर्ों (“मध्र्स्ट्र्ों”) सजहत को इस समझबूझ के सार् (चाह ेजलजखत में ििय अर्वा अन्र्) दक अजग्रम र्ा ऋण अर्वा जनवेि की गई जनजधर्ां (उधार ली गई जनजधर्ां अर्वा जनगयम प्रीजमर्म र्ा दकन्हीं अन्र् स्रोतों अर्वा जनजधर्ों के प्रकार से) िी गई हैं दक मध्र्स्ट्र् कंपनी
(i) प्रत्र्क्ष रूप से अर्वा अप्रत्र्क्ष रूप से दकसी भी रीजत से अन्र् व्यजिर्ों अर्वा जचजननत कंपजनर्ों को उधार में अर्वा जनवेि र्ा कंपनी की ओर से (“अंजतम फार्िाग्राजहर्ों”) र्ा
(ii) कोई गारंटी, प्रजतभूजत अर्वा इसी प्रकार अंजतम फार्िाग्राजहर्ों की ओर प्रिान की गई ह,ै कंपनी जनम्नजलजखत का प्रकटीकरण करेगी :- (I) प्रत्र्ेक मध्र्स्ट्र् कंपनी के पूणय ब्र्ौरे के सार् मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों को अजग्रम अर्वा उधार िी गई र्ा जनवेि की गई जनजधर्ों की तारीख और रकम। [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 25 (II) अंजतम लाभार्र्यर्ों के पणूय ब्र्ौरे के सार्-सार् अन्र् मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों अर्वा अंजतम लाभार्र्यर्ों के जलए ऐसी मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों द्वारा आग े अजग्रम अर्वा ऋण र्ा जनवेि की गई जनजध की तारीख और रकम। (III) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों को अर्वा उनकी ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार प्रिान करन ेकी राजि और तारीख। (IV) र्ह र्ोर्णा दक जविेिी जवजनमर् प्रबंधन अजधजनर्म, 1999 (1999 का 42) और कंपनी अजधजनर्म के संगत उपाबंधों का ऐसे संव्यवहारों के जलए पालन दकर्ा गर्ा ह ै और र्े संव्यवहार धनिोधन जनवारण (संिोधन) अजधजनर्म, 2002 (2003 का 15) का उल्लंर्न नहीं करते हैं। (ख) िहां कंपनी न े दकसी अन्र् व्यजि(र्ों), कंपनी(र्ों), जविेिी कंपजनर्ों (“जवत्तपोर्क पक्ष”) सजहत से इस समझबूझ के सार् (चाह ेजलजखत में ििय अर्वा अन्र्) कोई जनजध प्राप्त की ह ैदक कंपनी
(i) प्रत्र्क्ष रूप से अर्वा अप्रत्र्क्ष रूप से दकसी भी रीजत से अन्र् व्यजिर्ों अर्वा जचजननत कंपजनर्ों को उधार अर्वा में जनवेि र्ा जवत्तपोर्क पक्ष की ओर से (“अंजतम फार्िाग्राजहर्ों”) र्ा
(ii)कोई गारंटी, प्रजतभूजत अर्वा इसी प्रकार अंजतम जहतधारकों की ओर प्रिान की गई ह,ै कंपनी जनम्नजलजखत का प्रकटीकरण करेगी :- (I) प्रत्र्ेक जवत्तपोर्क पक्ष के पूणय ब्र्ौरे के सार् जवत्तपोर्क पक्षों को अजग्रम अर्वा उधार िी गई र्ा जनवेि की गई जनजधर्ों की तारीख और रकम। (II) अंजतम जहतधारकों के पणूय ब्र्ौरे के सार्-सार् अन्र् मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों अर्वा अंजतम जहतधारकों के जलए ऐसी मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों द्वारा आग े अजग्रम अर्वा ऋण र्ा जनवेि की गई जनजध की तारीख और रकम। (III) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों को अर्वा उनकी ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार प्रिान करन ेकी राजि और तारीख। (IV) र्ह र्ोर्णा दक जविेिी जवजनमर् प्रबंधन अजधजनर्म, 1999 (1999 का 42) और कंपनी अजधजनर्म के संगत उपाबंध का ऐसे संव्यवहारों के जलए पालन दकर्ा गर्ा ह ैऔर र् ेसंव्यवहार धनिोधन जनवारण (संिोधन) अजधजनर्म, 2002 (2003 का 15) का उल्लरं्न नहीं करते हैं।”;
(iii) “लाभ और हाजन जववरणी की तैर्ारी के जलए सामान्र् अनिुेि” िीर्यक के अंतगयत भाग-II में लाभ और हाजन का कर्न,- (क) पैरा 3 में, मि (ख) में “और” िब्ि को लोप दकर्ा िाएगा और मि (ख) के पश्चात,् जनम्नजलजखत अतंःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत ्:- “(खक) प्राप्त अनुिान र्ा िान (केवल कंपजनर्ों की धारा 8 के मामले में सुसंगत)”;
(ख) पैरा “7. अजतटरि सूचना” में, मि (ट) और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के पश्चात्, जनम्नजलजखत मिें अतंःस्ट्र्ाजपत की िाएंगी, अर्ायत ्:- “(ठ) अप्रकटीकृत आर् कंपनी लेखा-बजहर्ों में ििय नहीं दकए गए हैं संव्यवहार का ब्र्ौरा िगेी िो आर् कर अजधजनर्म, 1961 (िैसे दक, अनुसंधान अर्वा सवेक्षण र्ा आर् कर अजधजनर्म, 1961 के दकन्हीं अन्र् सुसंगत उपाबंधों) के अतंगयत कर मूल्र्ांकनों में उस वर्य के िौरान अभ्र्र्पयत अर्वा आर् के रूप में अप्रकटीकृत रकम बिते दक दकसी र्ोिना के 26 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] अंतगयत प्रकटीकरण के संबंध में उन्मुजि ह ैऔर र्ह भी उल्लखे करेगी दक पूवय में ििय नहीं की गई अजलदकत आर् और संबंजधत आजस्ट्तर्ों को वर्य के िौरान लेखा-बजहर्ों में समुजचत रूप से ििय कर जलर्ा गर्ा ह।ै (ड) कारपोरेट सामाजिक िाजर्त्व (सीएसआर) िहां कंपनी धारा 135 के अतंगयत कवर की गई ह,ै द्वारा सीएसआर कार्यकलापों के संबंध में जनम्नजलजखत प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा :-
(i) वर्य के िौरान कंपनी द्वारा खचय की िाने वाली अपेजक्षत रकम,
(ii) खचय दकए गए व्यर् की रकम,
(iii) वर्य के अतं में कमी,
(iv) पूवयवती वर्ों की कुल कमी,
(v) कमी के कारण,
(vi) सीएसआर कार्यकलापों का स्ट्वरूप,
(vii) संबंजधत पक्ष संव्यवहारों का ब्र्ौरा अर्ायत् सुसंगत लेखांकन मानक के अनुसार सीएसआर व्यर् के संबंध में कंपनी द्वारा जनर्ंजत्रत न्र्ास को अंििान,
(viii) िहां दकसी संजविात्मक बाध्र्ता पूरी करके व्यर् दकए गए दकसी िाजर्त्व के संबंध में कोई उपाबंध दकर्ा गर्ा ह,ै उपाबंध में वर्य के िौरान की गई गजतजवजधर्ां परृ्क रूप से ििायर्ी िाएगंी। (ढ) दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी का ब्र्ौरा िहां कंपनी न ेजवत्तीर् वर्य के िौरान दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी में व्यापार अर्वा जनवेि दकर्ा ह,ै जनम्नजलजखत प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा :-
(i) दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी में िाजमल संव्यवहारों पर लाभ अर्वा हाजन,
(ii) टरपोर्टिंग तारीख को धाटरत करेंसी की रकम,
(iii) दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी में िमाए ंअर्वा व्यापार अर्वा जनवेि के प्रर्ोिन के जलए दकसी व्यजि को अजग्रम धनराजि।” [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 27 (ग) भाग III में,-
(i) भाग-I में- तलुन-पत्र,- (क) “साम्र्ा में पटरवयतनों का कर्न” और इसे संबंजधत प्रजवजिर्ां िीर्यक के स्ट्र्ान पर, जनम्नजलजखत रखा िाएगा, अर्ायत्:
“साम्र्ा में पटरवतयनों का जववरण कंपनी का नाम...................
क. साम्र्ा िेर्र पूंिी
(1) चालू प्रजतवेिन अवजध चालू प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ में िेर् पूवयवती अवजध की तु्रटटर्ों के कारण साम्र्ा िेर्र पूंिी पटरवतयन चालू प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ में िोहरार्ी गई िेर् राजि चालू अवजध के िौरान साम्र्ा िेर्र पूंिी में पटरवतयन चालू प्रजतवेिन अवजध के अतं में िेर्
(2) पूवयवती प्रजतवेिन अवजध पूवयवती प्रजतविेन अवजध के प्रारंभ में िेर् पूवयवती अवजध की त्रुटटर्ों के कारण साम्र्ा िेर्र पूिंी पटरवतयन पूवयवती प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ में िोहरार्ी गई िेर् राजि पूवयवती अवजध के िौरान साम्र्ा िेर्र पूिंी में पटरवतयन पूवयवती प्रजतवेिन अवजध के अतं में िेर् ख. अन्र् साम्र्ा
(1) चालू प्रजतवेिन अवजध लजंबत आबटंन के जलए िरे्र आविेन धनराजि जमजित जवत्तीर् जलखतों का साम्र्ा र्टक आरजक्षत और अजतरेक िरे्र अनजु्ञा पत्र के जवरूद्ध प्राप्त धनराजि र्ोग पूंिी आरजक्षत प्रजतभूजत प्रीजमर्म अन्र् आरजक्षत (स्ट्वरूप जवजनर्ियि करें) प्रजतधाटरत आर् अन्र् समग्र आर् के माध्र्म से ऋण जलखत अन्र् समग्र आर् के माध्र्म से साम्र्ा जलखत नकिी प्रवाह र्ेरा का प्रभावी अंि पुनयमूल्र्ांकन अजतरेक दकसी जविेिी प्रचालन की जवत्तीर् जववरजणर्ों के अनुवाि पर जवजनमर् अंतर अन्र् समग्र आर् की अन्र् मिें (स्ट्वरूप जवजनर्ियि करें) 28 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] चालू प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ में िेर् लेखांकन नीजत /पूवयवती अवजध की तु्रटटर्ों में पटरवतयन चालू प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ में िोहरार्ी गई िेर् राजि चालू वर्य के जलए कुल समग्र राजि लाभांि प्रजतधाटरत आर् में अंतरण कोई अन्र् पटरवतयन (जवजनर्ियि दकर्ा िाए) [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 29 चालू प्रजतवेिन अवजध के अंत में िेर्
(2) पूवयवती प्रजतवेिन अवजध आरजक्षत और अजतरेक िरे्र अनजु्ञा पत्र के जवरूद्ध प्राप्त धनराजि र्ोग लजंबत आबटंन के जलए िरे्र आविेन धनराजि जमजित जवत्तीर् जलखतों का साम्र्ा र्टक पूंिी आरजक्षत प्रजतभूजत प्रीजमर्म अन्र् आरजक्षत (स्ट्वरूप जवजनर्ियि करें) प्रजतधाटरत आर् अन्र् समग्र आर् के माध्र्म से ऋण जलखत अन्र् समग्र आर् के माध्र्म से साम्र्ा जलखत नकिी प्रवाह र्ेरा का प्रभावी अंि पुनयमलू्र्ांकन अजतरेक दकसी जविेिी प्रचालन की जवत्तीर् जववरजणर्ों के अनुवाि पर जवजनमर् अंतर अन्र् समग्र आर् की अन्र् मिें (स्ट्वरूप जवजनर्ियि करें) पूवयवती प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ में िेर् लेखांकन नीजत /पूवयवती अवजध की तु्रटटर्ों में पटरवतयन पूवयवती प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ में 30 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] िोहरार्ी गई िेर् राजि पूवयवती वर्य के जलए समग्र राजि लाभांि प्रजतधाटरत आर् में अंतरण कोई अन्र् पटरवतयन (जवजनर्ियि दकर्ा िाए) पूवयवती प्रजतवेिन अवजध के अंत में िेर् टटप्पण: लाभ अर्वा हाजन के िटरए उजचत मलू्र् पर जनधायटरत जवत्तीर् िेर्ताओं के बारे में ऋण संबंधी िोजखम की बाबत पटरभाजर्त लाभ र्ोिनाओं और उजचत मलू्र् पटरवतयनों के पनु:
मापन को संबंजधत टटप्पण में प्रासंजगक धन राजि के सार् ऐसी मिों से िुडे़ पृर्क प्रकटन सजहत धाटरत उपाियन के एक भाग के रूप में मान्र्ता िी िाएगी र्ा आरजक्षत और अजधिेर् के तहत परृ्क कॉलम में ििायर्ा िाएगा। [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 31 (ख) “टटप्पणों” में, “तुलन-पत्र की तैर्ारी के जलए साधारण अनुिेि” िीर्यक के अतंगयत,- (I) “(ग) प्राप्र् राजिर्ां” िीर्यक के अंतगयत, मि (iii) के पश्चात,् जनम्नजलजखत अतंःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत ्:- “(iv) व्यापार बकार्ा प्राप्र् राजिर्ां के जलए, जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची िी िाएगी:
व्यापार प्राप्र् राजि अवजध अनसुचूी (राजि रुपर् ेमें) जवजिजिर्ां भुगतान# की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा 6 माह से कम 6 माह-1 वर्य 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक कुल
(i)अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -सही माना गर्ा
(ii)अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां -जिनमें के्रजडट िोजखम में महत्वपूणय वृजद्ध हुई ह।ै
(iii)अजववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां - क्षीण के्रजडट हुई
(iv)जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां - सही माना गर्ा
(v)जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां - जिनमें के्रजडट िोजखम में महत्वपूणय वृजद्ध हुई ह।ै
(vi)जववादित व्यापाटरक प्राप्र् राजिर्ां – क्षीण के्रजडट # समान सूचना िी िाएगी िहां भुगतान की कोई िेर् जतजर् जवजनर्ियि नहीं ह,ै उस मामले में प्रकटीकरण संव्यवहार की तारीख से होगा। 32 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] जबल से इतर िेर् का परृ्क रूप से प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा”;
(II) “(ि) संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण” िीर्यक के अंतगयत, मि (iii) के स्ट्र्ान पर, जनम्नजलजखत रखा िाएगा, अर्ायत्:- “(iii) व्यवसार् संर्ोिनों के माध्र्म से अनुवृजद्ध, जवक्रर्, अजधग्रहण ििायत ेहुए प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ और अंत में आजस्ट्तर्ों के प्रत्र्ेक वगय की कुल और जनवल धनराजिर्ों का जमलान, पुनमूयल्र्ांकन के जलए िेर् पटरवतयन की धनराजि (र्दि संपजत्त, संर्ंत्र और उपकरण के प्रत्र्ेक वगय के जनवल मूल्र् में 10% र्ा अजधक पटरवतयन ह)ै और अन्र् समार्ोिन तर्ा संबंजधत ह्रास और असमर्यता हाजनर्ों अर्वा वु्यत्क्रमणों का पृर्क रूप से प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा।”;
(III) “(ञ) अन्र् अमूतय आजस्ट्तर्ां” िीर्यक के अतंगयत, मि (ii) के जलए, जनम्नजलजखत मि रखी िाएगी, अर्ायत् :- “(ii) व्यवसार् संर्ोिनों के माध्र्म से अनुवृजद्ध, जवक्रर्, अजधग्रहण ििायते हुए प्रजतवेिन अवजध के प्रारंभ और अतं में आजस्ट्तर्ों के प्रत्र्ेक वगय की कुल और जनवल धनराजिर्ों का जमलान, पुनमूयल्र्ांकन के जलए िेर् पटरवतयन की धनराजि (र्दि अमूतय आजस्ट्तर्ों के प्रत्र्ेक वगय के जनवल मलू्र् में 10% र्ा अजधक पटरवतयन ह)ै और अन्र् समार्ोिन तर्ा संबंजधत ऋणमुजि और असमर्यता हाजनर्ों अर्वा वु्यत्क्रमणों का पृर्क रूप से प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा।” (IV) “िीर्यक (ट) और इससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के पश्चात्, जनम्नजलजखत अंतःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत ्:- “(टक) भुगतान के जलए िेर् व्यापार भुगतान र्ोग्र् राजिर्ों के जलए, जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची िी िाएगी :
व्यापार भगुतान र्ोग्र् अनसुचूी (राजि रुपर्े में) जवजिजिर्ां भुगतान की िेर् तारीख से जनम्नजलजखत अवजधर्ों के जलए बकार्ा राजि 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक कुल
(i)एमएसएमई
(ii)अन्र्
(iii)जववादित िेर्- एमएसएमई
(iv) जववादित िेर्- अन्र् # समान सूचना िी िाएगी िहां भुगतान की कोई िेर् जतजर् जवजनर्ियि नहीं ह,ै उस मामल ेमें प्रकटीकरण संव्यवहार की तारीख से होगा। जबल से इतर िेर् का परृ्क रूप से प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा”;
(V) “(ध) साम्र्ा िेर्र पूंिी” िीर्यक के अतंगयत, मि (ड) के पश्चात्, जनम्नजलजखत अंतःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत् :- “(ढ) कोई कंपनी संप्रवतयकों* की िेर्रधाटरता का प्रकटीकरण जनम्नानुसार करेगी :
वर्य के अतं में संप्रवतयकों द्वारा धाटरत िेर्र वर्य*** के िौरान % पटरवतयन क्र.सं. संप्रवतयक का नाम िेर्रों की संख्र्ा** कुल िेर्रों का [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 33 प्रजतित** कुल *संप्रवतयक से र्हां अजभप्रेत कंपनी अजधजनर्म, 2013 में र्र्ा-पटरभाजर्त प्रार्ोिक ह।ै **िेर्रों की प्रत्र्के िणेी के जलए ब्र्ौरा परृ्क रूप से दिर्ा िाएगा। ***प्रजतित पटरवतयन वर्य के प्रारंभ में संख्र्ा के संबंध में पटरगजणत दकर्ा िाएगा अर्वा र्दि पहली बार वर्य के िौरान िारी दकर्ा गर्ा ह ैतो जनगयम की तारीख के संबंध में।” (VI) िीर्यक “ब” के पश्चात्, जनम्नजलजखत अतंःस्ट्र्ाजपत दकर्ा िाएगा, अर्ायत ्:- “(बक) िहां कंपनी ने जवजिि प्रर्ोिन के जलए बैंकों और जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं से ली गई उधारी का उपर्ोग नहीं दकर्ा ह ै जिसके जलए तलुन-पत्र की तारीख को वह जलर्ा गर्ा र्ा, कंपनी को िहां वे उपर्ोग दकए गए हैं, ब्र्ौरे का प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा।;
(बक) अजतटरि जवजनर्मन सचूना
(i) कंपनी के नाम स ेधाटरत नहीं स्ट्र्ावर सपंजत्तर्ों के स्ट्वाजमत्व जवलखे कंपनी सभी स्ट्र्ावर संपजत्त (उन संपजत्तर्ों के अलावा िहां कंपनी पटे्टिार ह ैऔर पट्टा करार पटे्टिार के पक्ष में सम्र्क् रूप से जनष्पादित दकए गए हैं) का ब्र्ौरा जनम्नजलजखत प्ररूप में प्रिान करेगी जिनके स्ट्वाजमत्व जवलेख कंपनी के नाम में धाटरत नहीं हैं और िहां ऐसी अचल संपजत्त संर्िु रूप से अन्र् के सार् धाटरत ह,ै ब्र्ौरा कंपनी के िेर्र की सीमा तक दिर्ा िाना अपेजक्षत ह।ै तुलन-पत्र में संगत पंजि मि संपजत्त की मि का वणयन सकल वाहक मूल्र् के नाम से धाटरत स्ट्वाजमत्व जवलेख क्र्ा स्ट्वाजमत्व जवलेख धारक संप्रवतयक, जनिेिक अर्वा संप्रवतयक/जनिेिक का नातेिार# अर्वा संप्रवतयक जनिेिक का कमयचारी ह ै संपजत्त दकस तारीख से धाटरत ह ै कंपनी के नाम से धाटरत नहीं होने संबंधी कारण** पीपीई - जवजनधान संपजत्त - जबक्री के जलए धाटरत गैर- चालू आजस्ट्त भूजम भवन भूजम भवन भूजम - - - - **भी जवजनर्ियि करें र्दि जववादित ह ै 34 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] - अन्र् भवन #नातेिार से र्हाँ अजभप्रेत ह ैिो कंपनी अजधजनर्म, 2013 में र्र्ा-पटरभाजर्त नातेिार ह।ै *संप्रवतयक से र्हां अजभप्रेत ह ैिो कंपनी अजधजनर्म, 2013 में र्र्ा-पटरभाजर्त संप्रवतयक ह”ै।
(ii) कंपनी र्ह प्रकट करेगी दक क्र्ा जवजनधान संपजत्त का उजचत मलू्र् (जवत्तीर् जववरजणर्ों में प्रकटीकरण के प्रर्ोिनों के जलए र्र्ा-माजपत ह)ै कंपनी (रजिस्ट्रीकृत मलू्र्ांकक और मूल्र्ांकन) जनर्म, 2017 की जनर्म 2 के अधीन र्र्ा- पटरभाजर्त एक रजिस्ट्रीकृत मलू्र्ांकक द्वारा मूल्र्ांकन पर आधाटरत ह।ै
(iii) िहां कंपनी ने अपनी सपंजत्त, सरं्ंत्र और उपकरण (आजस्ट्तर्ों के उपर्ोग के अजधकार सजहत) का पनुमूयल्र्ांकन दकर्ा ह,ै वहां कंपनी (रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक और मलू्र्ांकन) जनर्म, 2017 की जनर्म 2 के अधीन र्र्ा- पटरभाजर्त एक रजिस्ट्रीकृत मलू्र्ांकक द्वारा मूल्र्ांकन पर आधाटरत ह,ै प्रकट करेगी।
(iv) िहां कंपनी न े अपनी अमूतय आजस्ट्तर्ों का पुनमूयल्र्ांकन दकर्ा ह,ै वहां कंपनी (रजिस्ट्रीकृत मूल्र्ांकक और मूल्र्ांकन) जनर्म, 2017 की जनर्म 2 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त एक रजिस्ट्रीकृत मलू्र्ांकक द्वारा मलू्र्ांकन पर आधाटरत ह,ै प्रकट करेगी।
(v) जनम्नजलजखत प्रकटीकरण वहां दकए िाएंग े िहां ऋणों अर्वा ऋणों के स्ट्वरूप में अजग्रम संप्रवतयकों, जनििेकों, केएमपी और संबंजधत पक्षकारों (कंपनी अजधजनर्म, 2013 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त) के जलए स्ट्वीकृत हैं पृर्क रूप से अर्वा दकसी अन्र् व्यजि के सार् संर्ुि रूप से, िो:
(क) मांग पर प्रजतिेर् र्ोग्र्; अर्वा (ख) दकन्हीं ितों अर्वा प्रजतसंिार् की अवजध को जवजवजनर्ियि दकए जबना उधार वाल ेका प्रकार ऋण की रकम अर्वा बकार्ा ऋण के रूप में अजग्रम कुल ऋणों और ऋणों के स्ट्वरूप में अजग्रमों का प्रजतितता संप्रवतयक जनिेिक केएमपी संबंजधत के पक्षकार
(vi) पूिंी-कार्य प्रगजत पर (क) पूिंी-कार्य प्रगजत पर के जलए, जनम्नजलजखत अवजध अनसुचूी िी िाएगी :
सीडब्ल्र्आूईपी अवजध अनसुचूी (राजि रुपर्े में) सीडब्ल्र्ूआईपी की अवजध के जलए सीडब्ल्र्आूईपी में राजि कुल* 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक प्रगजतिील पटरर्ोिनाएं [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 35 अस्ट्र्ार्ी स्ट्र्जगत पटरर्ोिनाएँ *र्ोग का तुलन-पत्र में सीडब्ल्र्आूईपी धनराजि से जमलान दकर्ा िाएगा। (ख) पूंिी-कार्य प्रगजत पर ह,ै के जलए, जिसका पूणय होना अजत िेर् ह ैअर्वा अपनी मूल र्ोिना की तुलना में इसकी लागत अजधक हो गई ह,ै जनम्नजलजखत सीडब्ल्र्आूईपी पणूयता अनसुचूी िी िाएगी** :
(राजि रुपर्े में) सीडब्ल्र्ूआईपी अवजध में पूणय होना 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक पटरर्ोिना 1 पटरर्ोिना 2 ** पटरर्ोिनाओं का ब्र्ौरा िहां कार्यकलाप स्ट्र्जगत कर दिए गए हैं, को पृर्क रूप से दिर्ा िाएगा।
(vii) जवकास के अधीन अमतूय आजस्ट्तर्ां:
(क) जवकास के अधीन अमूतय आजस्ट्तर्ों के जलए, जनम्नजलजखत अवजध अनुसूची िी िाएगी :
जवकास अवजध अनसुचूी के अधीन अमतूय आजस्ट्तर्ा ं (राजि रुपर्े में) जवकास के अधीन अमूतय आजस्ट्तर्ां पूणय होन े के जलए पटरकजल्पत अजधकतम अवजध की अवजध के जलए सीडब्ल्र्आूईपी में राजि कुल* 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक प्रगजतिील पटरर्ोिनाएं अस्ट्र्ार्ी रूप से स्ट्र्जगत पटरर्ोिनाएँ *र्ोग का तुलन-पत्र में जवकास के अधीन अमतूय आजस्ट्तर्ों की धनराजि से जमलान दकर्ा िाएगा। (ख) पूंिी-कार्य प्रगजत पर ह,ै के जलए, जिसका पूणय होना अजत िेर् ह ैअर्वा अपनी मलू र्ोिना की तुलना में इसकी लागत अजधक हो गई ह,ै जनम्नजलजखत जवकास के अधीन अमतूय आजस्ट्तर्ों की पणूयता अनसुचूी िी िाएगी**:
36 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (राजि रुपर्े में) जवकास के अधीन अमूतय आजस्ट्तर्ों अवजध में पूणय होना 1 वर्य से कम 1-2 वर्य 2-3 वर्य 3 वर्य से अजधक पटरर्ोिना 1 पटरर्ोिना 2 ** पटरर्ोिनाओं का ब्र्ौरा िहां कार्यकलाप स्ट्र्जगत कर दिए गए हैं, को पृर्क रूप से दिर्ा िाएगा।
(viii) धाटरत बनेामी सपंजत्त का ब्र्ौरा िहां बेनामी संव्यवहार (प्रजतर्ेध) अजधजनर्म, 1988 (1988 का 45) और इसके अंतगयत बन ेजनर्मों के अधीन दकसी बेनामी संपजत्त को धाटरत करने के जलए कंपनी के जवरुद्ध कोई कार्यवाही आरंभ की गई ह ैअर्वा लंजबत ह,ै कंपनी जनम्नजलजखत प्रकटीकरण करेगी:- (क) ऐसी संपजत्त का ब्र्ौरा, (ख) उसकी राजि, (ग) जहताजधकारी का ब्र्ौरा, (र्) र्दि संपजत्त बजहर्ों में ह,ै उस जस्ट्र्जत में तलुन-पत्र में मि का संिभय, (ङ) र्दि संपजत्त बजहर्ों में नहीं ह,ै उस जस्ट्र्जत में तलुन-पत्र का संिभय, (च) िहां कंपनी के जवरुद्ध इस जवजध के अंतगयत संव्यवहार के अवप्रेरक अर्वा अंतरणकताय के रूप में कार्यवाजहर्ां चल रही हैं, उस जस्ट्र्जत में ब्र्ौरा प्रिान दकर्ा िाएगा, (छ) कार्यवाजहर्ों का स्ट्वरूप, उसकी जस्ट्र्जत और उस पर कंपनी का जवचार।
(ix) िहां कंपनी न े चाल ू आजस्ट्तर्ों की प्रजतभूजत के आधार पर बैंकों अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं से ऋण जलए हैं, उसे जनम्नजलजखत प्रकट करेगा:- (क) क्र्ा बैंकों अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ाओं ने कंपनी द्वारा फाइल की गई मौिूिा आजस्ट्तर्ों की जतमाही जववरजणर्ां अर्वा जववरण लेखों के अनुरूप हैं, (ख) र्दि नहीं, जमलान का सारांि और महत्वपूणय जवसंगजतर्ों के कारण, र्दि कोई हो, को पर्ायप्त रूप से प्रकट दकर्ा िाए।
(x) िरुाग्रही चकूकताय* िहां कोई कंपनी दकसी बैंक अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ा र्ा अन्र् िेनिार द्वारा एक िरुाग्रही चूककताय र्ोजर्त कर िी गई ह,ै जनम्नजलजखत ब्र्ौरा प्रिान दकर्ा िाएगा, अर्ायत:्- (क) िरुाग्रही चूककताय के रूप में र्ोर्णा की तारीख, (ख) चूकों का ब्र्ौरा (चूकों की धनराजि और स्ट्वरूप)। * “िरुाग्रही चूककताय” का र्हां अजभप्रेत ऐसा व्यजि अर्वा िारीकताय ह ैिो अर्वा जिसे भारतीर् टरिवय बैंक द्वारा िारी िरुाग्रही चूककतायओं पर दििा-जनिेिों के अनुसार, दकसी बैंक अर्वा जवत्तीर् संस्ट्र्ा (कंपनी अजधजनर्म, 2013 के अधीन र्र्ा-पटरभाजर्त) र्ा उसके संर् द्वारा एक िरुाग्रही चूककताय के रूप में प्रवगीकृत दकर्ा गर्ा ह।ै [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 37
(xi) बिं कंपजनर्ों के सार् सबंधं िहां कंपनी ने कंपनी अजधजनर्म, 2013 की धारा 248 र्ा कंपनी अजधजनर्म, 1956 की धारा 560 के अधीन बंि कंपजनर्ों के सार् कोई संव्यवहार दकर्ा ह,ै कंपनी जनम्नजलजखत ब्र्ौरा प्रकट करेगी, अर्ायत ्:- बंि कंपनी का नाम बंि कंपनी के सार् संव्यवहारों का स्ट्वरूप िेर् बकार्ा बंि कंपनी के सार् संबंध, र्दि कोई हो, प्रकट करें प्रजतभूजतर्ों में जवजनधान प्राप्र् राजिर्ां िेर् राजिर्ां बंि कंपनी द्वारा धाटरत िेर्र अन्र् बकार्ा िेर् (जवजनर्ियि करें)
(xii) कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) के समक्ष प्रभारों अर्वा ऋणमजुि का रजिस्ट्रीकरण िहां कोई प्रभार अर्वा ऋणमुजि कानूनी अवजध से आग ेआरओसी के समक्ष अभी रजिस्ट्रीकृत की िानी ह,ै उसका ब्र्ौरा और उसके कारण प्रकट दकए िाएंगे।
(xiii) कंपजनर्ों के स्ट्तरों की सखं्र्ा पर जनबिंधन का अनपुालन िहां कंपनी ने कंपनी (स्ट्तरों की संख्र्ा पर जनबिंधन) जनर्म, 2017 के सार् पटठत इस अजधजनर्म की धारा 2 के खंड (87) जनधायटरत स्ट्तरों की संख्र्ा का अनुपालन नहीं दकर्ा ह,ै जनधायटरत स्ट्तरों से आगे कंपजनर्ों का नाम और सीआईएन तर्ा ऐसी अधःप्रवाह कंपजनर्ों के सार् संबंध अर्वा धाटरता की सीमा प्रकट की िाएगी।
(xiv) जनम्नजलजखत अनपुात प्रकट दकए िाएंग।े (क) िोजखम भाटरत आजस्ट्त अनुपात के जलए पूंिी (सीआरएआर) (ख) टार्र I सीआरएआर (ग) टार्र II सीआरएआर (र्) तरलता कवरेि अनपुात
(xv) व्यवस्ट्र्ाओं की अनमुोदित र्ोिना(ओं) का अनपुालन िहां व्यवस्ट्र्ाओं की र्ोिना को कंपनी अजधजनर्म, 2013 की धारा 230 से 237 के अनुसार सक्षम प्राजधकारी द्वारा अनुमोदित कर दिर्ा गर्ा ह,ै कंपनी र्ह प्रकट करेगी दक व्यवस्ट्र्ाओं की ऐसी र्ोिना का आिर् ‘र्ोिना के अनुसार’ और ‘लेखांकन मानकों के अनुसार’ कंपनी के खातों में जलखा गर्ा ह।ै इस संबंध में दकसी अंतर को स्ट्पि दकर्ा िाएगा।
(xvi) उधार ली गई जनजधर्ों का उपर्ोग और जनगयम प्रीजमर्म :
(क) िहां कंपनी ने दकसी अन्र् व्यजि(र्ों), कंपनी(र्ों), जविेिी कंपजनर्ों (“मध्र्स्ट्र्ों”) सजहत को इस समझबूझ के सार् (चाह ेजलजखत में ििय अर्वा अन्र्) दक अजग्रम र्ा ऋण अर्वा जनवेि की गई जनजधर्ां (उधार ली गई जनजधर्ां अर्वा जनगयम प्रीजमर्म र्ा दकन्हीं अन्र् स्रोतों अर्वा जनजधर्ों के प्रकार से) िी हैं दक
(i) मध्र्स्ट्र् कंपनी प्रत्र्क्ष रूप से अर्वा अप्रत्र्क्ष रूप से दकसी भी रीजत से अन्र् व्यजिर्ों अर्वा जचजननत कंपजनर्ों को उधार अर्वा में जनवेि र्ा कंपनी की ओर से (“अंजतम लाभार्र्यर्ों”) र्ा 38 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(ii) कोई गारंटी, प्रजतभूजत प्रिान करना अर्वा इसी प्रकार अंजतम लाभार्र्यर्ों की ओर से, कंपनी जनम्नजलजखत का प्रकटीकरण करेगी:- (I) प्रत्र्ेक मध्र्स्ट्र् कंपनी के पूणय ब्र्ौरे के सार् मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों को अजग्रम अर्वा उधार िी गई र्ा जनवेि की गई जनजधर्ों की तारीख और धनराजि। (II) अंजतम लाभार्र्यर्ों के पणूय ब्र्ौरे के सार्-सार् अन्र् मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों अर्वा अंजतम जहतधारकों के जलए ऐसी मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों द्वारा आग े अजग्रम अर्वा ऋण र्ा जनवेि की गई जनजध की तारीख और धनराजि। (III) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों को अर्वा उनकी ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार प्रिान करन ेकी राजि और तारीख। (IV) र्ह र्ोर्णा दक जविेिी जवजनमर् प्रबंधन अजधजनर्म, 1999 (1999 का 42) (र्दि लागू हो) और कंपनी अजधजनर्म के संगत उपाबंधों का ऐसे संव्यवहारों के जलए पालन दकर्ा गर्ा ह ैऔर र्े संव्यवहार धनिोधन जनवारण (संिोधन) अजधजनर्म, 2002 (2003 का 15) का उल्लंर्न नहीं करत ेहैं। (ख) िहां कंपनी ने दकसी अन्र् व्यजि (र्ों), कंपनी (र्ों), जविेिी कंपजनर्ों (“जवत्तपोर्क पक्ष”) सजहत को इस समझबूझ के सार् (चाह े जलजखत में ििय अर्वा अन्र्) दक अजग्रम र्ा ऋण अर्वा जनवेि की गई जनजधर्ां (उधार ली गई जनजधर्ां अर्वा जनगयम प्रीजमर्म र्ा दकन्हीं अन्र् स्रोतों अर्वा जनजधर्ों के प्रकार से) ली ह ै दक
(i) मध्र्स्ट्र् कंपनी प्रत्र्क्ष रूप से अर्वा अप्रत्र्क्ष रूप से दकसी भी रीजत से अन्र् व्यजिर्ों अर्वा जचजननत कंपजनर्ों को उधार अर्वा में जनवेि र्ा जवत्तपोर्क पक्ष की ओर से (“अंजतम जहतधारकों”) र्ा
(ii) कोई गारंटी, प्रजतभूजत प्रिान करना अर्वा इसी प्रकार अंजतम जहतधारकों की ओर से, कंपनी जनम्नजलजखत का प्रकटीकरण करेगी:- (I) प्रत्र्ेक जवत्तपोर्क पक्ष के पूणय ब्र्ौरे के सार् जवत्तपोर्क पक्षों से अजग्रम अर्वा उधार ली गई र्ा जनवेि की गई जनजधर्ों की तारीख और धनराजि। (II) अंजतम जहतधारकों के पणूय ब्र्ौरे के सार्-सार् अन्र् मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों अर्वा अंजतम जहतधारकों के जलए ऐसी मध्र्स्ट्र् कंपजनर्ों द्वारा आगे अजग्रम अर्वा ऋण र्ा जवजनधान की गई जनजध की तारीख और धनराजि। (III) अंजतम फार्िाग्राजहर्ों की ओर से कोई गारंटी, सुरक्षा अर्वा ऐसा ही कोई अन्र् आधार प्रिान करने की राजि और तारीख। (IV) र्ह र्ोर्णा दक जविेिी जवजनमर् प्रबंधन अजधजनर्म, 1999 (1999 का 42) और कंपनी अजधजनर्म के सुसंगत उपाबंधों (र्दि लागू हो) का ऐसे संव्यवहारों के जलए पालन दकर्ा गर्ा ह ै और र्े संव्यवहार धनिोधन जनवारण (संिोधन) अजधजनर्म, 2002 (2003 का 15) का उल्लरं्न नहीं करते हैं।”;
(ii) “लाभ और हाजन जववरणी की तैर्ारी के जलए साधारण अनुिेि” िीर्यक के अतंगयत भाग-II-लाभ और हाजन कर्न में, “पैरा 11. अजतटरि सूचना”, में मि “iv.”, और उससे संबंजधत प्रजवजिर्ों के पश्चात्, जनम्नजलजखत मिें अतंःस्ट्र्ाजपत की िाएंगी, अर्ायत ्:- “v. अप्रकटीकृत आर् कंपनी, लेखा-बजहर्ों में ििय नहीं दकए गए संव्यवहार का ब्र्ौरा िगेी िो आर् कर अजधजनर्म, 1961 (िैसे दक, अनुसंधान अर्वा सवेक्षण र्ा आर् कर अजधजनर्म, 1961 के दकन्हीं अन्र् सुसंगत उपाबंध) के अंतगयत कर [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 39 मूल्र्ांकनों में उस वर्य के िौरान अभ्र्र्पयत अर्वा आर् के रूप में अप्रकटीकृत धनराजि बिते दक दकसी स्ट्कीम के अंतगयत प्रकटीकरण के संबंध में उन्मुजि ह ैऔर र्ह भी उल्लखे करेगी दक पूवय में ििय नहीं की गई अजलदकत आर् और संबंजधत आजस्ट्तर्ों को वर्य के िौरान लेखा-बजहर्ों में समुजचत रूप से ििय कर जलर्ा गर्ा ह।ै vi कारपोरेट सामाजिक िाजर्त्व (सीएसआर) िहां कंपनी, कंपनी की धारा 135 के अंतगयत िाजमल की गई ह,ै सीएसआर कार्यकलापों के संबंध में जनम्नजलजखत प्रकटीकरण दकर्ा िाएगा :- (क) वर्य के िौरान कंपनी द्वारा खचय की िाने वाली अपेजक्षत धनराजि, (ख) खचय दकए गए व्यर् की धनराजि, (ग) वर्य के अतं में कमी, (र्) पूवयवती वर्ों की कुल कमी, (ङ) कमी संबंधी कारण, (च) सीएसआर कार्यकलापों का स्ट्वरूप, (छ) संबंजधत पक्ष संव्यवहारों का ब्र्ौरा अर्ायत् संगत लेखांकन मानक के अनुसार सीएसआर व्यर् के संबंध में कंपनी द्वारा जनर्ंजत्रत दकसी न्र्ास को अंििान, (ि) िहां दकसी संजविात्मक िाजर्त्व संपन्न करन े के द्वारा व्यर् दकए गए दकसी िाजर्त्व के संबंध में कोई उपाबंध दकर्ा गर्ा ह,ै वर्य के िौरान प्रावधान में गजतजवजधर्ां पृर्क रूप से ििायर्ी िाएंगी। vii. दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी का ब्र्ौरा िहां कंपनी न ेजवत्तीर् वर्य के िौरान दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी में व्यापार अर्वा जनवेि दकर्ा ह,ै जनम्नजलजखत प्रकटीकरण दकर्ा िाएंग े:- (क) दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी में िाजमल संव्यवहारों पर लाभ अर्वा हाजन, (ख) टरपोर्टिंग तारीख को धाटरत करेंसी की धनराजि, (ग) दक्रप्टो करेंसी अर्वा वचुयअल करेंसी में व्यापार अर्वा जनवेि के प्रर्ोिन के जलए दकसी व्यजि से िमा र्ा अजग्रम।” [फा.सं. 17/62/2015-सीएल-V खंड-I] के.वी.आर. मूर्तय, संर्ुि सजचव टटप्पण : अजधसूचना संख्र्ा का.आ. 902(अ) तारीख 26 माचय, 2014 द्वारा कंपनी अजधजनर्म, 2013 की अऩुसूची-III 01 अप्रलै, 2014 से प्रवृत हुई और अजधसूचना संख्र्ा सा.का.जन. संख्र्ा 679(अ) तारीख 04 जसतंबर, 2015, अजधसूचना संख्र्ा सा.का.जन. 404(अ) तारीख 06 अप्रैल, 2016 और अजधसूचना संख्र्ा सा.का.जन. 1022(अ) तारीख 11 अिूबर, 2018 द्वारा इसमें पश्चातवती संिोधन दकए गए। 40 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS NOTIFICATION New Delhi, the 24th March, 2021 G.S.R. 207(E).—In exercise of the powers conferred by sub-section (1) of section 467 of the Companies Act, 2013 (18 of 2013), the Central Government hereby makes the following further amendments in Schedule III to the said Act with effect from 1st day of April, 2021, namely:- In the said Schedule,-
(a) in Division I,-
(i) under the heading ―General instructions for preparation of Balance Sheet and statement of Profit and Loss of a company‖, under sub-heading ―General instructions‖, in paragraph 4, in clause (i), for the word ―may‖ the word ―shall‖ and for the word ―Turnover‖, at both the places where it occurs, the words ―Total Income‖ shall be substituted;
(ii) in Part I- Balance Sheet,- (A) under the heading ―II Assets‖, under sub-heading ―Non-current assets‖, after the words ―Property, Plant and Equipment‖, the words ―and Intangible assets‖ shall be inserted and for the words ―Tangible Assets‖, the words ―Property, Plant and Equipment‖ shall be substituted;
(B) in the ―Notes‖, under the heading ―General Instructions for Preparation of Balance Sheet‖, in paragraph 6,- (I) under the heading ―A. Share Capital‖, after item (l) and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:
―(m) A company shall disclose Shareholding of Promoters* as below:
Shares held by promoters at the end of the year % Change during the year*** S. No Promoter name No. of Shares** %of total shares** Total *Promoter here means promoter as defined in the Companies Act, 2013.
** Details shall be given separately for each class of shares *** percentage change shall be computed with respect to the number at the beginning of the year or if issued during the year for the first time then with respect to the date of issue. ‖ (II) under the heading ―F. Short-term borrowings‖, after item (iv) and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:
―(v) current maturities of Long term borrowings shall be disclosed separately.‖ ;
(III) after the heading ―FA. Trade Payables‖ and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:
―FB. Trade payables due for payment The following ageing schedule shall be given for Trade payables due for payment:- Trade Payables ageing schedule (Amount in Rs.)
Particulars Outstanding for following periods from due date of payment# Less than 1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Total
(i)MSME
(ii)Others
(iii) Disputed dues – [भाग II—खण्ड 3(i)] भारतकाराजपत्र:असाधारण 41 MSME
(iv) Disputed dues - Others # similar information shall be given where no due date of payment is specified in that case disclosure shall be from the date of the transaction.
Unbilled dues shall be disclosed separately;
(IV) under the heading ―G. Other current liabilities‖, item (a) shall be omitted;
(V) Under the heading ―I. Tangible Assets‖,-
(a) for the words ―Tangible Assets‖, the words ―Property, Plant and Equipment‖ shall be substituted;
(b) for item (iii), the following shall be substituted, namely:- ―(iii) A reconciliation of the gross and net carrying amounts of each class of assets at the beginning and end of the reporting period showing additions, disposals, acquisitions through business combinations, amount of change due to revaluation (if change is 10% or more in the aggregate of the net carrying value of each class of Property, Plant and Equipment) and other adjustments and the related depreciation and impairment losses/reversals shall be disclosed separately.‖;
(VI) Under the heading ―J. Intangible assets‖, for item (ii), the following shall be substituted, namely:- ―(ii) A reconciliation of the gross and net carrying amounts of each class of assets at the beginning and end of the reporting period showing additions, disposals, acquisitions through business combinations, amount of change due to revaluation (if change is 10% or more in the aggregate of the net carrying value of each class of intangible assets) and other adjustments and the related depreciation and impairment losses or reversals shall be disclosed separately.‖;
(VII) Under the heading ―L. Long-term loans and advances‖, in item (i), sub-item (b) shall be omitted;
(VIII) Under the heading ―M. Other non-current assets‖,-
(a) after item (i), the following shall be inserted, namely:
―(ia) Security Deposits‖
(b) after item (iii), the following shall be inserted, namely:
―(iv) For trade receivables outstanding, following ageing schedule shall be given:
Trade Receivables ageing schedule (Amount in Rs.)
Particulars Outstanding for following periods from due date of payment# Less than 6 months 6 months -1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Total
(i) Undisputed Trade receivables – considered good
(ii) Undisputed Trade Receivables – considered doubtful
(iii) Disputed Trade Receivables considered good
(iv) Disputed Trade Receivables considered doubtful # similar information shall be given where no due date of payment is specified, in that case disclosure shall be from the date of the transaction.
42 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] Unbilled dues shall be disclosed separately.‖;
(IX) Under the heading ―P. Trade Receivables‖, for item (i), the following item shall be substituted, namely:- ― (i) For trade receivables outstanding, the following ageing schedules shall be given:
Trade Receivables ageing schedule (Amount in Rs.)
Particulars Outstanding for following periods from due date of payment# Less than 6 months 6 months - 1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Total
(i) Undisputed Trade receivables – considered good
(ii) Undisputed Trade Receivables – considered doubtful
(iii) Disputed Trade Receivables considered good
(iv) Disputed Trade Receivables considered doubtful # similar information shall be given where no due date of payment is specified in that case disclosure shall be from the date of the transaction.
Unbilled dues shall be disclosed separately.‖;
(X) After heading ―V.‖, following shall be inserted, namely:- ―VA. Where the company has not used the borrowings from banks and financial institutions for the specific purpose for which it was taken at the balance sheet date, the company shall disclose the details of where they have been used.‖;
(XI) in heading ―W.‖, after the words ―Property, Plant and Equipment‖, the words ―,Intangible assets‖ shall be inserted;
(XII) heading ―X.‖ shall be omitted;
(XIII) after heading ―X.‖, the following shall be inserted, namely:
“Y. Additional Regulatory Information
(i) Title deeds of Immovable Property not held in name of the Company The company shall provide the details of all the immovable property (other than properties where the Company is the lessee and the lease agreements are duly executed in favour of the lessee) whose title deeds are not held in the name of the company in format given below and where such immovable property is jointly held with others, details are required to be given to the extent of the company‘s share.
Relevant line item in the Balance sheet Description of item of property Gross carryin g value Title deeds held in the name of Whether title deed holder is a promoter, director or relative# of promoter*/directo r or employee of promoter/director Property held since which date Reason for not being held in the name of the company** PPE - Land Building - - - - **also indicate if in dispute [भाग II—खण्ड 3(i)] भारतकाराजपत्र:असाधारण 43 Investment property - PPE retired from active use and held for disposal - others Land Building Land Building #Relative here means relative as defined in the Companies Act, 2013.
*Promoter here means promoter as defined in the Companies Act, 2013.
(ii) Where the Company has revalued its Property, Plant and Equipment, the company shall disclose as to whether the revaluation is based on the valuation by a registered valuer as defined under rule 2 of the Companies (Registered Valuers and Valuation) Rules, 2017.
(iii) Following disclosures shall be made where Loans or Advances in the nature of loans are granted to promoters, directors, KMPs and the related parties (as defined under Companies Act, 2013,) either severally or jointly with any other person, that are:
(a) repayable on demand or
(b) without specifying any terms or period of repayment Type of Borrower Amount of loan or advance in the nature of loan outstanding Percentage to the total Loans and Advances in the nature of loans Promoters Directors KMPs Related Parties ‖;
(iv) Capital-Work-in Progress (CWIP)
(a) For Capital-work-in progress, following ageing schedule shall be given:
CWIP aging schedule (Amount in Rs.)
CWIP Amount in CWIP for a period of Total* Less than 1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Projects in progress Projects temporarily suspended *Total shall tally with CWIP amount in the balance sheet.
(b) For capital-work-in progress, whose completion is overdue or has exceeded its cost compared to its original plan, following CWIP completion schedule shall be given**:
44 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (Amount in Rs.)
CWIP To be completed in Less than1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Project 1 Project 2‖ **Details of projects where activity has been suspended shall be given separately.
(v) Intangible assets under development:
(a) For Intangible assets under development, following ageing schedule shall be given:
Intangible assets under development aging schedule (Amount in Rs.)
Intangible assets under development Amount in CWIP for a period of Total* Less than 1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Projects in progress Projects temporarily suspended * Total shall tally with the amount of Intangible assets under development in the balance sheet.
(b) For Intangible assets under development, whose completion is overdue or has exceeded its cost compared to its original plan, following Intangible assets under development completion schedule shall be given**:
(Amount in Rs.)
Intangible assets under development To be completed in Less than 1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Project 1 Project 2 **Details of projects where activity has been suspended shall be given separately.
(vi) Details of Benami Property held Where any proceedings have been initiated or pending against the company for holding any benami property under the Benami Transactions (Prohibition) Act, 1988 (45 of 1988) and the rules made thereunder, the company shall disclose the following:-
(a) Details of such property, including year of acquisition,
(b) Amount thereof,
(c) Details of Beneficiaries,
(d) If property is in the books, then reference to the item in the Balance Sheet, [भाग II—खण्ड 3(i)] भारतकाराजपत्र:असाधारण 45
(e) If property is not in the books, then the fact shall be stated with reasons,
(f) Where there are proceedings against the company under this law as an abetter of the transaction or as the transferor then the details shall be provided,
(g) Nature of proceedings, status of same and company‘s view on same.
(vii) Where the Company has borrowings from banks or financial institutions on the basis of security of current assets, it shall disclose the following:-
(a) whether quarterly returns or statements of current assets filed by the Company with banks or financial institutions are in agreement with the books of accounts.
(b) if not, summary of reconciliation and reasons of material discrepancies, if any to be adequately disclosed.
(viii) Wilful Defaulter* Where a company is a declared wilful defaulter by any bank or financial Institution or other lender, following details shall be given:
(a) Date of declaration as wilful defaulter,
(b) Details of defaults (amount and nature of defaults), * ―wilful defaulter‖ here means a person or an issuer who or which is categorized as a wilful defaulter by any bank or financial institution (as defined under the Act) or consortium thereof, in accordance with the guidelines on wilful defaulters issued by the Reserve Bank of India.
(ix) Relationship with Struck off Companies Where the company has any transactions with companies struck off under section 248 of the Companies Act, 2013 or section 560 of Companies Act, 1956, the Company shall disclose the following details:- Name of struck off Company Nature of transactions with struckoff Company Balance outstanding Relationship with the Struck off company, if any, to be disclosed Investments in securities Receivables Payables Shares held by stuck off company Other outstanding balances (to be specified)
(x) Registration of charges or satisfaction with Registrar of Companies Where any charges or satisfaction yet to be registered with Registrar of Companies beyond the statutory period, details and reasons thereof shall be disclosed.
(xi) Compliance with number of layers of companies Where the company has not complied with the number of layers prescribed under clause (87) of section 2 of the Act read with Companies (Restriction on number of Layers) Rules, 2017, the name and CIN of the companies beyond the specified layers and the relationship/extent of holding of the company in such downstream companies shall be disclosed.
(xii) Following Ratios to be disclosed:-
(a) Current Ratio,
(b) Debt-Equity Ratio,
(c) Debt Service Coverage Ratio,
(d) Return on Equity Ratio,
(e) Inventory turnover ratio, 46 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(f) Trade Receivables turnover ratio,
(g) Trade payables turnover ratio,
(h) Net capital turnover ratio,
(i) Net profit ratio,
(j) Return on Capital employed,
(k) Return on investment.
The company shall explain the items included in numerator and denominator for computing the above ratios.
Further explanation shall be provided for any change in the ratio by more than 25% as compared to the preceding year.
(xiii) Compliance with approved Scheme(s) of Arrangements Where any Scheme of Arrangements has been approved by the Competent Authority in terms of sections 230 to 237 of the Companies Act, 2013, the Company shall disclose that the effect of such Scheme of Arrangements have been accounted for in the books of account of the Company ‗in accordance with the Scheme‘ and ‗in accordance with accounting standards‘ and deviation in this regard shall be explained.
(xiv) Utilisation of Borrowed funds and share premium:
(A) Where company has advanced or loaned or invested funds (either borrowed funds or share premium or any other sources or kind of funds) to any other person(s) or entity(ies), including foreign entities (Intermediaries) with the understanding (whether recorded in writing or otherwise) that the Intermediary shall
(i) directly or indirectly lend or invest in other persons or entities identified in any manner whatsoever by or on behalf of the company (Ultimate Beneficiaries) or
(ii) provide any guarantee, security or the like to or on behalf of the Ultimate Beneficiaries;
the company shall disclose the following:- (I) date and amount of fund advanced or loaned or invested in Intermediaries with complete details of each Intermediary.
(II) date and amount of fund further advanced or loaned or invested by such Intermediaries to other intermediaries or Ultimate Beneficiaries alongwith complete details of the ultimate beneficiaries.
(III) date and amount of guarantee, security or the like provided to or on behalf of the Ultimate Beneficiaries (IV) declaration that relevant provisions of the Foreign Exchange Management Act, 1999 (42 of 1999) and Companies Act has been complied with for such transactions and the transactions are not violative of the Prevention of Money-Laundering act, 2002 (15 of 2003).;
(B) Where a company has received any fund from any person(s) or entity(ies), including foreign entities (Funding Party) with the understanding (whether recorded in writing or otherwise) that the company shall
(i) directly or indirectly lend or invest in other persons or entities identified in any manner whatsoever by or on behalf of the Funding Party (Ultimate Beneficiaries) or
(ii) provide any guarantee, security or the like on behalf of the Ultimate Beneficiaries, the company shall disclose the following:- (I) date and amount of fund received from Funding parties with complete details of each Funding party.
(II) date and amount of fund further advanced or loaned or invested other intermediaries or Ultimate Beneficiaries alongwith complete details of the other intermediaries‘ or ultimate beneficiaries.
(III) date and amount of guarantee, security or the like provided to or on behalf of the Ultimate Beneficiaries (IV) declaration that relevant provisions of the Foreign Exchange Management Act, 1999 (42 of 1999) and Companies Act has been complied with for such transactions and the transactions are not violative of the Prevention of Money-Laundering act, 2002 (15 of 2003).;
(iii) in Part II- Statement of Profit and Loss,- (A) under the heading ―III. Total Revenue (I +II)‖, for the word ―Revenue‖, the word ―Income‖ shall be substituted;
[भाग II—खण्ड 3(i)] भारतकाराजपत्र:असाधारण 47 (B) under the heading ―General Instructions for Preparation of Statement of Profit and Loss‖,- (I) in paragraph 2, in item (A), after sub-item (b), the following shall be inserted, namely:- ―(ba) Grants or donations received (relevant in case of section 8 companies only)‖;
(II) in paragraph ―5. Additional information‖, after item (viii) and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:- ―(ix) Undisclosed income The Company shall give details of any transaction not recorded in the books of accounts that has been surrendered or disclosed as income during the year in the tax assessments under the Income Tax Act, 1961 (such as, search or survey or any other relevant provisions of the Income Tax Act, 1961), unless there is immunity for disclosure under any scheme and also shall state whether the previously unrecorded income and related assets have been properly recorded in the books of account during the year.;
(x) Corporate Social Responsibility (CSR) Where the company covered under section 135 of the companies act, the following shall be disclosed with regard to CSR activities:-
(a) amount required to be spent by the company during the year,
(b) amount of expenditure incurred,
(c) shortfall at the end of the year,
(d) total of previous years shortfall,
(e) reason for shortfall,
(f) nature of CSR activities,
(g) details of related party transactions, e.g., contribution to a trust controlled by the company in relation to CSR expenditure as per relevant Accounting Standard,
(h) where a provision is made with respect to a liability incurred by entering into a contractual obligation, the movements in the provision during the year should be shown separately.
(xi) Details of Crypto Currency or Virtual Currency Where the Company has traded or invested in Crypto currency or Virtual Currency during the financial year, the following shall be disclosed:-
(a) profit or loss on transactions involving Crypto currency or Virtual Currency
(b) amount of currency held as at the reporting date,
(c) deposits or advances from any person for the purpose of trading or investing in Crypto Currency/ virtual currency.‖;
(b) in Division II,
(i) under the heading ―General instructions for preparation of Financial Statements of a company required to comply with Ind AS‖, in paragraph 5, for the word ―Turnover‖, at both the places where it occurs, the words ―Total Income‖ shall be substituted;
(ii) in Part I- Balance Sheet,- (A) under the heading ―Equity and Liabilities‖, in sub-heading ―Liabilities‖,- (I) in item ―(1) Non-current liabilities‖, in sub-item ―(a) Financial Liabilities‖, after (i), the following shall be inserted, namely:- ―(ia) Lease liabilities‖ (II) in item ―(2) Current Liabilities‖, in sub-item ―(a) Financial Liabilities‖, after (i), the following shall be inserted, namely:- ―(ia) Lease liabilities‖ 48 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (B) for the heading ―Statement of Changes in Equity‖ and the entries relating thereto, the following shall be substituted, namely:
“STATEMENT OF CHANGES IN EQUITY Name of the Company..............
A. Equity Share Capital
(1) Current reporting period Balance at the beginning of the current reporting period Changes in Equity Share Capital due to prior period errors Restated balance at the beginning of the current reporting period Changes in equity share capital during the current year Balance at the end of the current reporting period
(2) Previous reporting period Balance at the beginning of the previous reporting period Changes in Equity Share Capital due to prior period errors Restated balance at the beginning of the previous reporting period Changes in equity share capital during the previous year Balance at the end of the previous reporting period B. Other Equity
(1) Current reporting period Share application money pending allotment Equity component of compound financial instrument s Reserves and Surplus Money received against share warrants Total Capital Reserve Securities Premium Other Reserves (specify nature) Retained Earnings Debt instruments through Other Comprehensive Income Equity Instruments through Other Comprehensive Income Effective portion of Cash Flow Hedges Revaluation Surplus Exchange differences on translating the financial statements of a foreign operation Other items of Other Comprehensive Income (specify nature) Balance at the beginning of the current reporting period Changes in accounting policy or prior period errors [भाग II—खण्ड 3(i)] भारतकाराजपत्र:असाधारण 49 Restated balance at the beginning of the current reporting period Total Comprehensive Income for the current year Dividends Transfer to retained earnings Any other change (to be specified) Balance at the end of the current reporting period
(2) Previous reporting period Share application money pending allotment Equity component of compound financial instrument s Reserves and Surplus Money received against share warrants Total Capital Reserve Securities Premium Other Reserves (specify nature) Retained Earnings Debt instruments through Other Comprehensive Income Equity Instruments through Other Comprehensive Income Effective portion of Cash Flow Hedges Revaluation Surplus Exchange differences on translating the financial statements of a foreign operation Other items of Other Comprehensive Income (specify nature) Balance at the 50 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] beginning of the previous reporting period Changes in accounting policy/prior period errors Restated balance at the beginning of the previous reporting period Total Comprehensive Income for the previous year Dividends Transfer to retained earnings Any other change (to be specified) Balance at the end of the previous reporting period Note: Remeasurment of defined benefit plans and fair value changes relating to own credit risk of financial liabilities designated at fair value through profit or loss shall be recognised as a part of retained earnings with separate disclosure of such items alongwith the relevant amounts in the Notes or shall be shown as a separate column under Reserves and Surplus ‖ [भाग II—खण्ड 3(i)] भारतकाराजपत्र:असाधारण 51 (C) in the ―Notes‖, under the heading ―General Instructions For Preparation of Balance Sheet‖,- (I) In paragraph 6,-
(a) under the heading ―A. Non-Current Assets‖,-
(i) under the sub-heading ―I. Property, Plant and Equipment‖, for item (iii), the following item shall be substituted, namely:- ―(iii) A reconciliation of the gross and net carrying amounts of each class of assets at the beginning and end of the reporting period showing additions, disposals, acquisitions through business combinations, amount of change due to revaluation (if change is 10% or more in the aggregate of the net carrying value of each class of Property, Plant and Equipment) and other adjustments and the related depreciation and impairment losses or reversals shall be disclosed separately.‖;
(ii) under the sub-heading ―IV. Other Intangible assets‖, for item (ii), the following item shall be substituted, namely:- ―(ii) A reconciliation of the gross and net carrying amounts of each class of assets at the beginning and end of the reporting period showing additions, disposals, acquisitions through business combinations, amount of change due to revaluation (if change is 10% or more in the aggregate of the net carrying value of each class of intangible assets) and other adjustments and the related amortization and impairment losses or reversals shall be disclosed separately. ―
(iii) under the sub-heading ―VII. Trade Receivables‖, after item (iii), the following item shall be inserted, namely:- ―(iv) For trade receivables outstanding, following ageing schedule shall be given:
Trade Receivables ageing schedule (Amount in Rs.)
Particulars Outstanding for following periods from due date of payment# Less than 6 months 6 months -1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Total
(i) Undisputed Trade receivables – considered good
(ii) Undisputed Trade Receivables – which have significant increase in credit risk
(iii) Undisputed Trade Receivables – credit impaired
(iv) Disputed Trade Receivables–considered good
(v) Disputed Trade Receivables – which have significant increase in credit risk
(vi) Disputed Trade Receivables – credit impaired # similar information shall be given where no due date of payment is specified in that case disclosure shall be from the date of the transaction.
Unbilled dues shall be disclosed separately‖;
52 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(iv) Under the sub- heading ―VIII. Loans‖, in sub item (i), sub-item (a) shall be omitted;
(v) For sub-heading ―IX‖ and the entries relating thereto, the following shall be substituted, namely:- ―IX. Other financial assets
(i) Security Deposits
(ii) Bank deposits with more than 12 months maturity
(iii) others(to be specified)‖ ;
(b) under the heading ―B. Current Assets‖,-
(i) in the sub-heading ―III. Trade Receivables‖, after item (iii) and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:- ― (iv) For trade receivables outstanding, following ageing schedule shall be given:
Trade Receivables ageing schedule (Amount in Rs.)
Particulars Outstanding for following periods from due date of payment# Less than 6 months 6 months -1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Total
(i) Undisputed Trade receivables – considered good
(ii) Undisputed Trade Receivables – which have significant increase in credit risk
(iii) Undisputed Trade Receivables – credit impaired
(iv) Disputed Trade Receivables–considered good
(v) Disputed Trade Receivables – which have significant increase in credit risk
(vi) Disputed Trade Receivables – credit impaired # similar information shall be given where no due date of payment is specified in that case disclosure shall be from the date of the transaction.
Unbilled dues shall be disclosed separately‖;
(ii) under the sub-heading ―V. Loans‖, in item (i), sub-item (a) shall be omitted;
(iii) after the sub-heading ―V. Loans‖ and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:- ―VA. Other Financial Assets: This is an all-inclusive heading, which incorporates financial assets that do not fit into any other financial asset categories, such as, Security Deposits.‖
(c) under the heading ―D. Equity‖, in sub-heading ―I. Equity Share Capital‖, after item (l), the following item shall be inserted, namely:- ―(m) A company shall disclose Shareholding of Promoters* as under:
[भाग II—खण्ड 3(i)] भारतकाराजपत्र:असाधारण 53 Shares held by promoters at the end of the year % Change during the year*** S. No Promoter name No. of Shares** %of total shares Total *Promoter here means promoter as defined in the Companies Act, 2013.
** Details shall be given separately for each class of shares *** percentage change shall be computed with respect to the number at the beginning of the year or if issued during the year for the first time then with respect to the date of issue.‖;
(d) under the heading ―E. Non-Current Liabilities‖, in sub-heading ―I. Borrowings‖, in item (i), sub- item (f) shall be omitted;
(e) under the heading ―F. Current Liabilities‖,-
(i) in sub- heading ―I. Borrowings‖, after item (iv), the following item shall be inserted, namely:- ―(v) Current maturities of Long term borrowings shall be disclosed separately‖.;
(ii) under the sub- heading ―II. Other Financial Liabilities‖, items (a) and (b) shall be omitted;
(f) after the heading ―FA. Trade Payables‖, and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:- ―FB. For trade payables due for payment, following ageing schedule shall be given:
Trade Payables aging schedule (Amount in Rs.)
Particulars Outstanding for following periods from due date of payment# Less than 1 year 1-2 years 2-3 years More than 3 years Total
(i) MSME
(ii) Others
(iii) Disputed dues – MSME
(iv)Disputed dues - Others # similar information shall be given where no due date of payment is specified in that case disclosure shall be from the date of the transaction.
Unbilled dues shall be disclosed separately‖;
(g) after heading ―J‖ and the entries relating thereto, the following shall be inserted, namely:- ―JA. Where the company has not used the borrowings from banks and financial institutions for the specific purpose for which it was taken at the balance sheet date, the company shall disclose the details of where they have been used.‖;
(h) heading K and the entries relating thereto, shall be omitted;
(i) after heading K and the entries relating thereto, the follo