(I) इन िनयम1 म< जब तक �क संदभ@ से अ�यथा अपेिFत न हो,-
(1) “अिधिनयम” से आयुध अिधिनयम 1959 (1959 का 54) अिभ-ेत ह ै;
(2) “वायु शL” से ऐसी युि0 अिभ-ेत ह ैजो संपीिड़त वायु या अ�य गैस के दबाव के अधीन �कसी नाल से -FेNय �कया जाता है Oकतु िजसके अंतग@त ऐसा करने के िलए कोई िवPफोटक -योग नहS �कया जाता है ;
(3) “पुरातTव लघु आयुध” से 1899 से पूव@ िविनVमत अWायुध अिभ-ेत ह ै;
(4) “अपील -ािधकरण” से िनयम 105 म< िनXदY अपीलीय -ािधकरण अिभ-ेत ह ै;
(5) “-ािधकारी” या “अिधकारी” से जहां इन िनयम1 म< अ�यथा िविनXदY उपबंध है, के िसवाय िजला मिजPZेट या ऐसा अ�य अिधकारी िजसे के��ीय सरकार ,ारा समय-समय पर राजपH म< अिधसूचना ,ारा अिधसूिचत �कया जाता ह ै;
(6) “Pवचािलत” से कोई लघु आयुध या ह�के शL अिभ-ेत ह ै जो �क -Tयेक -Fेपण के प\ात् पुनः ऐसा शL सभी आव^यक -9म1 को Pवतः �9या करके पुनः गोलाबारी के िलए तैयार हो जाता ह ै; और गोलाबारी तबतक के िलए 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] जारी रहता है तब तक �क "Zगर (या अ�य स�9यकरण युि0) अवनत बना रहती ह ै(माना जाता है �क गोला बा_द शेष रहता ह ैऔर उसके जाम होने क� घटना ही नहS होती ह)ै तथा कोई Pवचािलत आयुध फायर चaबर से खाली कारतूस को िनकालने और फायर कारतूस1 से ऊजा@ के �कसी भाग के उपयोग के िलए और उसको आयुध से िनकालने, फायर �9यािविध को पुनः काकन करने और फायर चaबर म< पुनः भरणयु0 या मेगजीन से गोलाबा_द के नए राउंद को भरण करने तथा य�द "Zगर या अ�य सं�9यित युि0 अवनिमत है, फायर िपन Pवतः नए फायर च9 के -ारंभ को िनमु@0 कर दगेी ;
(7) “फोका कारतूस” से �कसी गोली या कोई अ�य -FेNय के िबना कारतूस अिभ-ेत है ;
(8) “फोका फायर अWायुध” से �कसी फोका कारतूस को फायर करने के िलए सFम अWायुध अिभ-ेत ह ै;
(9) “गोली” से कारतूस का शंकु शीष@ अिभ-ेत ह ैजो सामा�यतः शीशे या तांबे का बना होता है, वह िवPफोटक -भार या संपीिड़त वायु या अ�य गैस के माcयम से नाल या िसल<डर से बाहर िनकालता ह ै;
(10) “अंशाकन” से इंच या िमलीमीटर या भूमै"Zक प"रिध म< नाप क� गई �कसी अWायुध के नाल क� नली के आतं"रक eास या नालिछ� अिभ-ेत है ;
(11) “वहन करना” से लघु आयुध िजसम< �कसी एक eि0 क� सामीNय पर या उसके बारे म< या उसको रखना अिभ-ेत है ;
(12) “कारतूस” से �कसी कारतूस खोल -ाइमर, -णोदी, गोली या कोई एकल या बा4�य -FेNय से बनी एक पूण@ वPतु अिभ-ेत है ;
(13) “चाट@ड@ अकाउंट<ट” से चाट@ड@ अकाउंट<ट अिधिनयम, 1949 (1949 का 38) क� धारा 2 क� उपधारा (1) के खंड (ख) म< यथा प"रभािषत चाट@ड@ अकाउंट<ट अिभ-ेत ह ैजो उ0 अिधिनयम क� धारा 6 क� उपधारा (1) के अधीन eवसाय के िलए िविधमा�य -माणपH रखता ह ै;
(14) “कंपनी” का वही अथ@ होगा जो अिधिनयम क� धारा 33 के अधीन PपYीकरण म< ह ै;
(15) अWायुध का “संप"रवत@न” से �कसी अWायुध के अंशाकन या नालिछ� म< Pथायी प"रवत@न से संदभ@ ह ैऔर िजसके अंतग@त �कसी नाल को हटाने या पुनः संरेखण करना या पुनः भेदन करना जो �कसी चaबर को समg या पृथक _प रखता ह,ै िसल<डर के प"रवत@न और/या नली या उससे संबंिधत भाग तथा कार@वाई के िव�यास म< प"रवत@न या �कसी अWायुध क� �9यािविध म< प"रवत@न Oकतु इसके अंतग@त �कसी अनुhेय -वग@ के अWायुध को िनिषi -वग@ के अWायुध म< प"रवत@न नहS ह ै;
(16) “सैिनक उपयोग के िलए” रFा मंHालय के रFा उTपादन िवभाग ,ारा िनयत िविनदjश के अनुसार िविनVमत या सं_पण से �कसी अWायुध या गोला बा_द (लघु आयुध और ह�के हिथयार से िभk) अिभ-ेत ह ै;
(17) “दलु@भ वPतु” से वत@मान तारीख से कम से कम पचास वष@ पूव@ िविनVमत या �कसी सरकारी िविनयिमत संgहालय के �कसी संgहालयाcयF ,ारा -मािणत लघु आयुघ अिभ-ेत हa या उ0 युि0 क� कम से कम उसक� धनीय मू�य का कम से कम आधा ह ैतlय यह ह ै�क यह एक िवलFण या दलु@भ, अनोखा या �कसी ऐितहािसक eि0, अविध या घटना से सहबi ह ैया िजसके अंतग@त कोई पुरातTव लघु आयुध भी ह ै;
(18) “िनिm9यकरण” से �कसी िवPफोटक कार@वाई ,ारा �कसी गोला, गोली, िमसाइल या कोई अ�य -FेNय को बाहर फ< कने या उसे छोड़ने म< सFम �कसी लघु आयुध या ह�के शL को -Pतुत करना अिभ-ेत ह ैऔर िजसे तTकाल अपनी मूल Fमता म< प"रवVतत नहS �कया जा सकता तथा वह उसे �कसी -Tयाियत गन बनाने वाले या �कसी सFम राnय -ािधकारी ,ारा िनिm9य के _प म< -मािणत या िचिoनत �कया गया है ;
PपYीकरण – िनिm9यकरण से अपेिFत है �क लघु आयुध या ह�के अWायुध के सभी दाब रखने वाले सभी अवयव इस तरह से Pथायी _प से प"रवVतत कर �दए जाए �क अWायुध उपयोग करने योpय न रह ेऔर िजसके अंतग@त नाल, काबला, िसल<डर, संप@क फायqरग िपन और अिभgाही या rेम का उपांतरण भी है ।
(19) “eवहारी” से कोई eि0 अिभ-ेत है जो eापार या कारबार, 9य, िव9य, परीFण (पूण@ परीFण से िभk), िनया@त, आयात या अंतरण या िव9य के िलए रखने या आयुध या गोला बा_द परीFण (पूण@ परीFण से िभk) के ¹Hkkx IIµ[k.M 3(i)º Hkkjr dk jkti=k % vlk/kj.k 3 ,ारा लगा ह ैऔर िजसके अंतग@त भारतीय खेल -ािधकरण (भा.खे.-ा.), नेशनल राईफल एसोिसएशन आफ इंिडया (ने.रा.ए.इ.) और ने.रा.ए.इ. से सहबi Pटेट राईफल एसोिसएशन या ने.रा.ए.इ. क� सहबi इकाईयां भी हa ;
(20) “समVपत खेल eि0” से ऐसा कोई eि0 अिभ-ेत है जो स�9य _प से खेल िनशानेबाजी म< भाग लेता ह ैऔर जो �कसी िनशानेबाजी -Tयाियत खेल िनशानेबाजी संगठन का सदPय ह ै;
(21) “इलैtZािनक िनयupयता कारक युि0” से संपीिड़त गैस ,ारा -णोदी इलैtZोड -Fेपी फायर करने के िलए कोई सFम इलैtZािनक युि0 अिभ-ेत ह ैजो मुvय इकाई से या �कसी सुचालक तार ,ारा युि0 से जुड़ा रहता है और लwय को अPथायी _प से तंिHका पेशी को असमथ@ का"रत करता है ;
(22) “सरकारी आयुध” से कोई अWायुध या कोई अ�य हिथयार अिभ-ेत है जो सरकार क� संपि. ह ै; और “सरकारी गोला बा_द” से ऐसे �कसी सरकारी कारखाने म< िविनVमत या नाग"रक उपयोग के िलए सरकार ,ारा िनमु@0 ऐसा गोला बा_द से िभk सरकार के िलेऐ तैयार और उसे -दाय गोला बा_द अिभ-ेत ह ै;
(23) “बंदकू बनाने वाला” से कोई eि0 अिभ-ेत ह ैजो अWायुध क� छोटी या बड़ी मरxमत के काय@ को करता ह ैऔर अनुhिG -ािधकारी क� पूव@ अनुhा के अधीन �कसी अWायुध के अंशाकन या नली क� लंबाई म< प"रवत@न कर सकेगा या ऐसे अ�य कायy को कर सकेगा जो अनुhिG -ािधकारी ,ारा िविनXदY �कए जाए ;
(24) “हPत बंदकू” से ऐसा छोटा ढांचा अिभ-ेत है िजसका कोण और लघु हTथे के साथ नली क� पंि0 से नीचे िवPता"रत है �क िजसे एक हाथ से पकड़ने के िलए और फायर करने के िलए िडजाइन �कया गया है तथा िजसके अंतग@त िपPटल और "रवा�वर भी ह ै;
(25) “अिभवहन म<” से अWायुध या गोला बा_द जो आयाितत ह,ै के �कसी अ�य दशे को भारत के माcयम से -वहण अिभ-ेत है ;
(26) “अWायुध” -ितकृित” से कोई वPतु �कसी अWायुध क� सदृ̂ य िडजाइन क� 4ई कोई वPतु अिभ-ेत है िजससे �क सभी -ायोिगक -योजन1 के िलए यह -तीत हो �क वह वाPतिवक है और िजसे िनिm9य बना �दया गया ह;ै
(27) “-_प” से इन िनयम1 क� अनुसूची 3 म< �दया गया कोई -_प अिभ-ेत ह ै;
(28) “ह�के हिथयार” से �कसी कमzदल के _प म< सेवारत दो या तीन eि0य1 ,ारा उपयोग के िलेए िडजाइन �कया गया मनुmय1 ,ारा वहनीय हिथयार अिभ-ेत है (य{िप उसे एक eि0 ,ारा भी वहन या उपयोग �कया जा सकता ह)ै �क वह िनmकािसत या छोड़ा जाता है, िनmकािसत या छोड़े जाने के िलए िडजाइन �कया गया ह ैया �कसी िवPफोटक �9या ,ारा �कसी गोले, गोली या -FेNय को िनmकािसत करने या छोड़ने को Tव"रत _प से प"रवVतत �कया जा सकेगा िजसके साथ-साथ भारी मशीनगन, नली के अधीन हाथ म< पकड़ने वाली और आ_ढ़ gेनेड -मो�दत, वहनीय, िवमान मेदी तोप Pक�म, -ितFेप रिहत राइफल, टैकंरोधी िमसाइल और राकेट -मो�दत वहनीय -णाली, िवमान मेदी तोप िमसाइल वहनीय -मो�दत -णाली, सौ िमलीमीटर से कम �कसी अंशाकन के मोटा@र के साथ-साथ उनके पुजj, घटक और गोला बा_द भी है ;
(29) “मुvय अWायुध घटक” से �कसी अWायुध क� नली, rेम, Pलाईड, वो�ट या ~ीच �लाक अिभ-ेत है ;
(30) “िविनमा@ता” से कोई eि0 अिभ-ेत ह ै जो अWायुध के िविनमा@ण, िव9य, परीFण (-माण परीFण से िभk), िनया@त, आयात या अंतरण या िव9य के िलए रखने या अWायुध उनके पुजy, घटक1 या या गोला बा_द या अWायुध से िभk कोई आयुध के परीFण (-माण परीFण से िभk) म< लगा ह ै;
(31) “िविनमा@ण” से िनBिलिखत का िनमा@ण करना, उTपादन करना या संयोिजत करना अिभ-ेत ह ै:-
(i) कोई पूण@ अWायुध ;
(ii) �कसी अWायुध के दबाव धारण करने वाले भाग या अवयव (उदाहरणाथ@ नली, Pलाईड, िसल<डर, बो�ट, बीचलॅाक, फायर िपन, आ�द) ;
(iii) अWायुध के िलए गोला बा_द ;
4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]
(iv) �कसी अWायुध से िभk कोई आयुध, िजसके अंतग@त िनBिलिखत ह-ै
(i) �कसी िनिm9य अWायुध को पुनः स�9य करना ; और
(ii) �कसी अWायुध के -Tयय1 को सारतः उपांत"रत करना (जैसे पूण@ Pवचािलत म< संप"रवत@न) Oकतु िजसके अंतग@त िनBिलिखत नहS ह ै–
(i) �कसी अWायुध क� मरxमत, पुनPथा@पन, अनुरFण या कोPमे"टक प"रवध@न या उपांतरण ; या
(ii) �कसी गोला बा�द का वािणिnयक पुनः लदाई ;
(32) “िचoनाकंन” से अWायुध1, गोला बा_द और गोला बा_द क� पैOकग पर Pथायी उTक�ण@ अिभ-ेत है िजससे उनक� पहचान अनुhात हो सक< ;
(33) “नाल मुख ऊजा@” से �कसी -Fेिपत क� गितज ऊजा@ अिभ-ेत ह ैजैसे यह �कसी अWायुध क� नली से बाहर िनकलती है और इसे जू�स या फुट-पाउंड म< अिभeि0 �कया जाता ह ै;
(34) “एनडीएएल” से शL अनुhिGय1 का रा�ीय डाटा बेस अिभ-ेत है;
(35) “प<ट बाल” से ऐसा -FेिपH (गोलाकार िजले"टन कैNसूल) अिभ-ेत ह ैजो मुvयतः जल म< घुलनशील अिवषैले पदाथy से और रंजक से िमलकर बना ह ैिजसे �कसी eि0 या वPतु को िचoनाOकत करने के िलए िडजाइन �कया गया ह ै;
(36) “प<ट-बाल िचoनक या प<ट-बाल बंदकू” से ऐसी युि0 अिभ-ेत है जो प<ट बाल1 को गैस के फैलने या वायु के संपीड़न के माcयम से दागने म< सFम ह ैचाह ेउसे यांिHक _प से या वै{ुत-�यूमै"टकली _प से -चािलत �कया जाए ;
(37) “िहPसे और संघटक” से ऐसा कोई तTव या -ितPथापन तTव अिभ-ेत है िजसे िविनXदY _प से �कसी अWायुध के िलए िडजाइन �कया गया ह ैऔर वह उसके -चालन के िलए अिनवाय@ ह ैतथा इसके अंतग@त कोई नाल, rेम या "रसीवर, Pलाईड या िसल<डर, बो�ट या ~ीच �लॅाक और कोई युि0 िजसे दागने के ,ारा का"रत �कसी cविन के सम_प होने के िलए या उसे कम करने के िलए िडजाइन �कया गया ह,ै सिxमिलत है ;
(38) “िपPटल” से उसके अिभk भाग के _प म< चaबर सिहत या नली के सम_प Pथायी _प से उसके भाग सिहत कोई हPतगन अिभ-ेत है ;
(39) “प.न” के अतंग@त कोई समु�ी प.न, कोई िवमानप.न और कोई भूिम प.न सिxमिलत है ;
(40) “"रम रिहत” से कोई कारतूस अिभ-ेत ह ै जहां "रम का वही �यास है जो उसके केस का है तथा िजसका उपयोग अWायुध म< �कसी बाtस मैगजीन से फ�ड के _प म< �कया जाता ह;ै
(41) “"रम यु0 कारतूस” से ऐसा "रम यु0 कारतूस अिभ-ेत ह ैजहां "रम का eास महTवपूण@ _प से कारतूस के आधार से अिधक ह ैऔर "रम चaबर म< समुिचत गहराई पर कारतूस को धारण करने म< इPतेमाल �कया जाता ह ै;
(42) “"रवा�वर” से ~ीच लो�डग, चaबर यु0 िसल<डर के साथ कोई हPतगन अिभ-ेत है िजनका इस -कार -बंध �कया जाता है �क हथौड़ा मारने या "Zगर को दबाने से िसल<डर घूमता है और अगले कारतूस को दpध करने के िलए नाल क� सीध म< ले आता है ;
(43) “मरxमत” से अWायुध क� गौण या -मुख मरxमत अिभ-ेत है – ‘लघु मरxमत’ के अंतग@त िनBिलिखत है-
(i) सफाई और पुनः �फिन�शग करना, िस�गंस �फtस करना, "र�ाइलपैड, पूव@ फै~ीकृत Pटॅाक का -ितPथापन, साधारण उपसाधन, प"ररFक पैके�जग करना और अWायुध और उसके संघटक1 से सही या सुरिFत काय@करण का सुिनि\य करना ;
¹Hkkx IIµ[k.M 3(i)º Hkkjr dk jkti=k % vlk/kj.k 5
(ii) अनुरFण और सुरिFत काय@करण के -योजन के िलए �कसी अWायुध (िजसके अंतग@त नाल या "रसीवर या rेम या ~ीच बॅाडी या बो�ट नहS है) के पुराने FितgPत, टूटे-फूटे, खराब 4ए या छोड़ े गए भाग क� फै~ीकेशन या -ितPथापन ;
(iii) Pटाॅक, िgप (ब� Pटॅाक) और अ�य भाग1 का िचoनाकंन तथा -ितPथापन ;
(iv) पूण@ क� गई नाल कार@वाई, फै~ीकेशन, �फqटग या आिNटक का समायोजन, साइट और अ�य संघटक आ�द के काय@ को करने के माcयम से अWायुध क� सटीक कार@वाई या सुरिFत काय@करण का सुिन\य करना िजसके अंतग@त परीFण फायqरग भी ह ै;
(v) उप साधन1 का िनमा@ण और -ितPथापन तथा फै~ीकेटेड भाग1 को �ून करना । ‘-मुख मरxमत’ ,ारा महTवपूण@ भाग1 के -चालन1 क� -मुख और गौण गहन मशीनीकरण क� अपेFा ह ैऔर इसके अंतग@त िनBिलिखत ह-ै
(i) मरxमत या संप"रवत@न के -योजन के िलए महTवपूण@ भाग1 पर काय@ करना िजसके अंतग@त नाल और एtशन (नाल का पुनः बोqरग करना या पुनः चaबqरग करना या पुनः -ितPथापन करना या नाल को पुनः बनाना, "रसीवर1 या rेम1, बो�ट, Pलाईड, िसल<डर, ~ीच आ�द और अ�य संघटक1 क� पुनः मशी�नग करना) शािमल है ;
(ii) "Zगर1, से�टी का लघुकरण, संप"रवत@न और उन पर काय@ करना तथा अWायुध1 क� साधारण सुरFा जांच िजसके अंतग@त मरxमत �कए गए या संप"रवVतत �कए गए अWायुध1 को दागना या उनक� जांच करना सिxमिलत ह ै।
44. “उ.रदायी eि0” से �कसी कंपनी क� दशा म< कंपनी ,ारा आयुध1 क� अनुhिG के आवेदन म< नामिनXदY eि0 अिभ-ेत ह ै;
45. “राइफल” से लघु शL अिभ-ेत है िजसे �कसी िवPफोटक कार@वाई के माcयम से राइफल के नाल से कंधे का सहारा लेते 4ए और दोन1 हाथ1 से पकड़ कर एकल -FेिपH छोड़ने के िलए िडजाइन �कया गया ह ै;
46. “अनुसूची” से इन िनयम1 से उपाबi अनुसूची अिभ-ेत ह ै;
47. “चयिनत फायर” से �कसी छोटे शL या ह�के आयुध क� Fमता अिभ-ेत ह ैिजसे िनBिलिखत माcयम से दो या अिधक तरीके से फायर करने के िलए समायोिजत �कया जा सकता ह ै:
(i) अध@ Pवचािलत (अथा@त् एक बार "Zगर दबाने पर एक शॅाट) ;
(ii) ब4 शॅाट बPट@ (अथा@त् एक बार "Zगर दबाने पर िनि\त संvया म< शॅाट) ; या
(iii) Pवचािलत (अथा@त् "Zगर को दबाए रखने पर लगातार फायर) ।
(48) “Pवतः भरण” से अध@Pवचािलत अिभ-ेत है ;
(49) “अध@ Pवचािलत” से ऐसा छोटा शL या लघु आयुध अिभ-ेत है जो एक बार चलाने पर Pवतः आयुध को दोबारा चलाने के िलए सभी आव^यक -Pतर1 को पूरा करता है Oकतु िजसे गोला बा_द के -Tयेक राउंड को चलाने के िलए "Zगर को पृथक् _प से दबाने क� आव^यकता होती ह ै;
(50) “शॅाटगन” से छोटा शL अिभ-ेत ह ै िजसे िवPफोट के माcयम से सपाट बोड@ नाल के माcयम से कंधे क� सहायता से दोन1 हाथ1 से पकड़ कर शॅाट या एकल -FेिपH छोड़ने के िलए िडजाइन �कया गया ह ै;
(51) “लघु शL” से मानव-सुवा� आयुध अिभ-ेत ह ै िजसे eिYक उपयोग (12.7िमलीमीटर कैलीबर तक) के िलए िडजाइन �कया गया ह ैजो गोली छोड़ता ह ैया दागता है और उसे छोड़ने या दागने के िलए िडजाइन �कया गया ह ैया िजसे तैयार _प से �कसी शॅाट, गोली या -FेिपH को �कसी िवPफोटक कार@वाई के माcयम से छोड़ने या दागने के िलए संप"रवVतत �कया जा सकता ह ैऔर इसके अंतग@त अ�य के साथ "रवा�वर और से�फ लो�डग िपPटल, राइफल और काबा@इन, सब-मशीनगन, असा�ट राइफल और ह�क� मशीनगन1 के 6 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] साथ उनके िहPसे, संघटक और गोला बा_द शािमल ह ैOकतु इसके अंतग@त पुरातन लघु आयुध और अWायुध क� -ितकृित शमिलत नहS ह ै। "टNपण:
शॅाटगन, 9�डा राइफल< और नालमुख लो�डग �लैच पाउडर अWायुध तथािप 12.7 िमलीमीटर कैलीबर के अिधक के ह1, भी लघु आयुध1 के अधीन आते हa ;
(52) “9�डा के िलए िनशानेबाजी” से -ितPपधz और मनोरंजन 9�डाएं अिभ-ेत ह ैिजसम< अWायुध1, गोलाबा_द और लwय1 के अनुhेय -वग@ का इPतेमाल करते 4ए दFता जांच (सटीकता और गित) अंतव@िलत ह ै;
(53) “धारा” से अिधिनयम क� धारा अिभ-ेत ह ै;
(54) “eापार अंतरण” से �कसी िविनमा@ता और �कसी eौहारी के बीच या �कसी eौहारी और अ�य eौहारी के बीच कारबार के सामा�य -9म म< आयुध1 या गोला बा_द का िव9य या अंतरण अिभ-ेत ह ैऔर इसके अंतग@त �कसी पारेषण के आधार पर िव9य या अंतरण भी ह ै;
(55) “उतारना” से कोई नोदक, -FेिपH या कारतूस अिभ-ेत है िजसे �कसी अpkायुध से चलाया जा सकता ह ैजो �कसी अpkायुध के ~ीच या फायqरग चaबर म< और न ही �कसी अpkायुध से संबi कारतूस, मैगजीन या िसल<डर म< अंतVवY ह ैया �कसी अpkायुध म< अंतःPथािपत ह ै;
(56) “अpkायुध का उपयोग” के अंतग@त -दश@न करना, िनशाना लगाना के साथ-साथ �कसी अpkायुध के काय@शील भाग1 से छेड़छाड़ सिxमिलत ह ैOकतु इसके अंतग@त साफ करना या अनुरFण करना नहS है ;
(57) “िव.पं.स.” से इन िनयम1 के अधीन �कसी अनुhिG के िलए एनडीएएल ,ारा सृिजत िविशY पहचान संvया अिभ-ेत है ;
(II) श�द और पद जो इन िनयम1 म< -यु0 है Oकतु प"रभािषत नहS ह ैका 9मशः वहS अथ@ होगा जो उनका अिधिनयम म< ह ै।