1 और प्ररूप िी.एस.टी.अर.-3बी के ईद्धरणों की प्रजतयां और, िहां कहीं भी लाग ूहो, इ-वे जबल की प्रजत:
परन्त ुआस जवजनयम के ईपबंध ईन लनेदारों को, जिनके जलए रजिस्ट्रीकरण की ऄपेक्षा नहीं ह ैऔर ईन माल और सेवाओं को, िो माल और सेवा-कर से संबंजधत दकसी जवजध के ऄंतगडत नहीं अती हैं, लाग ूनहीं होंगे ।”
5. मूल जवजनयमों के जवजनयम 35 के ईप-जवजनयम (1) में, खंड (ख) के स्ट्थान पर, जनम्नजलजखत खंड रखा िाएगा, ऄथाडत:्— “(ख) यदद दकसी अजस्ट्त वगड में दकसी मूल्य के दो प्राक्कलन महत्वपूणड रूप से जभन्न हैं या लनेदारों की सजमजत की ओर से तीसरा रजिस्ट्रीकृत मलू्यांकक जनयुि करने का प्रस्ट्ताव प्राप्त होने पर, समाधान व्यावसाजयक, खंड (क) में ईपबंजधत रीजत में संगजणत मलू्य का प्राक्कलन प्रस्ट्तुत करन े के जलए दकसी अजस्ट्त वगड के जलए तीसरा रजिस्ट्रीकृत मूल्यांकक जनयुि कर सकेगा । [भाग III—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : ऄसाधारण 3 स्ट्पष्टीकरण: खंड (ख) के प्रयोिनाथड,
(i) “अजस्ट्त वगड” से कंपनी (रजिस्ट्रीकृत मूल्यांकक और मलू्यांकन) जनयम, 2017 के ऄधीन ईपबंजधत पठरभाषा ऄजभप्रेत ह;ै
(ii) “महत्वपूणड रूप से जभन्न” से, दकसी अजस्ट्त वगड के ऄधीन पठरसमापन मूल्य में पच्चीस प्रजतित का ऄतंर ऄजभप्रेत ह ैऔर ईसकी संगणना (एल.1 – एल.2)/एल.-1 के रूप में की िाएगी, िहां, एल.-1 = पठरसमापन मलू्य का ईच्चतर मूल्यांकन एल.-2 = पठरसमापन मलू्य का जनम्नतर मूल्यांकन ।”
6. मूल जवजनयमों के जवजनयम 35क में, ईप-जवजनयम (3) के पश्चात,् जनम्नजलजखत ईप-जवजनयम ऄंतःस्ट्थाजपत दकया िाएगा, ऄथाडत:्— “(4) लेनदार, समाधान व्यावसाजयक को, ऐसी कोइ िानकारी प्रदान करेगा, िो लनेदारों द्वारा की गईं कारपोरेट ऋणी की लेखा-परीक्षाओं, िैसे स्ट्टॉक लेखापरीक्षा, संव्यवहार लेखापरीक्षा, न्यायालजयक लेखापरीक्षा, अदद से ईपलब्ध हो सकेगी ।”
7. मूल जवजनयमों के जवजनयम 36 में, ईप-जवजनयम (3) के पश्चात,् जनम्नजलजखत ईप-जवजनयम ऄतंःस्ट्थाजपत दकया िाएगा, ऄथाडत:्— “(3क) लनेदार, समाधान व्यावसाजयक को, ईनके पास ईपलब्ध कारपोरेट ऋणी की ऄद्यतन जवत्तीय जववरजणयां और ऄन्य सुसंगत जवत्तीय िानकारी प्रदान करेंगे।”
8. मूल जवजनयमों के जवजनयम 38 में, ईप-जवजनयम (2) में, खंड (ग) के पश्चात,् जनम्नजलजखत खंड ऄंतःस्ट्थाजपत दकया िाएगा, ऄथाडत:्— “(घ) ईस रीजत के जलए, जिसमें संजहता के भाग 2 के ऄध्याय 3 के ऄधीन ऄपठरविडनीय संव्यवहारों, यदद कोइ हैं या ऄध्याय 6 के ऄधीन कपटपूणड या सदोष व्यापार की बाबत कायडवाजहयों का समाधान योिना के ऄनुमोदन के पश्चात ्पठरिीलन दकया िाएगा और ईस रीजत के जलए, जिसमें ऐसी कायडवाजहयों से हुए अगमों को, यदद कोइ हैं, जवतठरत दकया िाएगा, ईपबंध:
परन्त ु यह खंड ऐसी दकसी समाधान योिना को लाग ू नहीं होगा, िो धारा 30 की ईपधारा (6) के ऄधीन न्यायजनणाडयक प्राजधकारी को भारतीय ददवाला और िोधन ऄक्षमता बोडड (कारपोरेट व्यजियों के जलए ददवाला समाधान प्रदिया) (दसूरा संिोधन) जवजनयम, 2022 के प्रारंभ की तारीख को या ईसके पूवड प्रस्ट्तुत की गइ ह।ै” रजव जमत्तल, ऄध् यक्ष, [जवज्ञापन III/4/ऄसा./121/2022-23] ठटप्पण: भारतीय ददवाला और िोधन ऄक्षमता बोडड (कारपोरेट व्यजियों के जलए ददवाला समाधान प्रदिया) जवजनयमन, 2016, भारत के रािपत्र, ऄसाधारण, भाग III—खण् ड IV सं. 432, तारीख 30 नवम्बर, 2016 में ऄजधसूचना सं. अइ.बी.बी.अइ./2016-17/िी.एन./अर.इ.िी.004, तारीख 30 नवम्बर, 2016 द्वारा प्रकाजित दकए गए थ े और ईनमें ऄजंतम संिोधन भारत के रािपत्र, ऄसाधारण, भाग III, खंड 4, सं. 82, तारीख 9 फरवरी, 2022 में, ऄजधसूचना सं. अइ.बी.बी.अइ./2021-22/िी.एन./अर.इ.िी.080, तारीख 9 फरवरी, 2022 द्वारा प्रकाजित भारतीय ददवाला और िोधन ऄक्षमता बोडड (कारपोरेट व्यजियों के जलए ददवाला समाधान प्रदिया) (संिोधन) जवजनयम, 2022 द्वारा दकया गया था । 4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART III—SEC.4] INSOLVENCY AND BANKRUPTCY BOARD OF INDIA NOTIFICATION New Delhi, the 14th June, 2022 Insolvency and Bankruptcy Board of India (Insolvency Resolution Process for Corporate Persons) (Second Amendment) Regulations, 2022 No. IBBI/2022-23/GN/REG084.— In exercise of the powers conferred by clause (t) of sub- section (1) of section 196 read with sections 7, 9 and 240 of the Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (31 of 2016), the Insolvency and Bankruptcy Board of India hereby makes the following regulations further to amend the Insolvency and Bankruptcy Board of India (Insolvency Resolution Process for Corporate Persons) Regulations, 2016, namely:—
1. (1) These regulations may be called the Insolvency and Bankruptcy Board of India (Insolvency Resolution Process for Corporate Persons) (Second Amendment) Regulations, 2022.
(2) They shall come into force on the date of their publication in the Official Gazette.
2. In the Insolvency and Bankruptcy Board of India (Insolvency Resolution Process for Corporate Persons) Regulations, 2016 (hereinafter referred to as „the principal regulations‟), after regulation 2A, the following regulations shall be inserted, namely:— “2B. Record or evidence of transaction, debt and default by operational creditor.
The operational creditor shall, alongwith application under section 9, furnish copies of relevant extracts of Form GSTR-1 and Form GSTR-3B filed under the provisions of the relevant laws relating to Goods and Services Tax and the copy of e-way bill wherever applicable:
Provided that provisions of this regulation shall not apply to those operational creditors who do not require registration and to those goods and services which are not covered under any law relating to Goods and Services Tax.
2C. Submission of information along with application.
The financial creditor or operational creditor shall, while filing application under section 7 or 9, as the case may be, also furnish details of his/ its—
(a) Permanent Account Number; and
(b) Email-ID.”