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Van (Sanrakshan Evam Samvardhan) Rules 2023

Central Rules · 198096,151 characters of text

The enactment

TypeRules
Year1980
JurisdictionCentral
MinistryMinistry of Environment, Forest and Climate Change
StatusIn force as published by the source
TextPublished as one document, as the source published it
Subjectsenvironment

Full text

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7394 GI/2023 (1) रजिस्ट्री स.ं डी.एल.- 33004/99 REGD. No. D. L.-33004/99 xxxGIDHxxx xxxGIDExxx असाधारण EXTRAORDINARY भाग II—खण् ड 3—उप-खण् ड (i)

PART II—Section 3—Sub-section (i) प्राजधकार स ेप्रकाजित PUBLISHED BY AUTHORITY पर्ाावरण, वन और िलवार् ुपररवतान मतं्रालर् अजधसचूना नई दिल्ली, 29 नवम् बर, 2023 सा.का.जन.869(अ)—केन्द रीर् सरकार, वन (संरक्षण एवं संवधान) अजधजनर्म 1980 (1980 का 69) की धारा 4 की उप-धारा (1) द्वारा प्रित् त िजतियर् का प्रर्गग करते ुए, और वन (संरक्षण) जनर्म, 2022, कग, उन बात के जसवार् जिन्द हें से अजधमण मण से पूवा दकर्ा गर्ा हा र्ा करने का लगप दकर्ा गर्ा हा, अजधमण ांत करत ेुए, जनम् नजलजखत जनर्म बनाती हा, अर्ाात:्-

1. सजंक्षप् त नाम, जवस्ट् तार और प्रारंभ (1) इन जनर्म का संजक्षप् त नाम वन (संरक्षण एवं संवधान) जनर्म, 2023 हा।

(2) र् े1 दिसम्बर, 2023 से प्रवृत् त ह गे।

2. पररभाषाएं- (1) इन जनर्म में, िब तक संिभा से अन्द र्र्ा अपेजक्षत न ह ,- (क) ‘’प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण’’ से अजधजनर्म की धारा 2 की उप-धारा (1) के अधीन पूवा अनुमगिन प्राप् त करने के जलए प्रर्गग की िान ेवाली सदमण र् वनीकरण की एक प्रणाली अजभप्रेत हा;

(ख) ‘‘अजधजनर्म’’ से वन (संरक्षण एवं संवधान) अजधजनर्म,1980 (1980 का 69) अजभप्रेत हा;

(ग) ‘‘परामिािात्री सजमजत’’ से अजधजनर्म की धारा 3 के अधीन गरित परामिािात्री सजमजत अजभप्रेत हा;

(घ ) ‘’प्रजतपूरक वनीकरण’’ से अजधजनर्म के अधीन वनेतर प्रर्गिन के जलए वन भूजम के अपवतान की एवि में दकर्ा गर्ा वनीकरण अजभप्रेत हा;

स.ं 686] नई दिल्ली, बुधवार, नवम् बर 29, 2023/अग्रहार्ण 8, 1945 No. 686] NEW DELHI, WEDNESDAY, NOVEMBER 29, 2023/AGRAHAYANA 8, 1945 सी.जी.-डी.एल.-अ.-30112023-250333 CG-DL-E-30112023-250333 2 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (ड़ ) ‘‘प्रजतपूरक उद्ग्रहण’’ में प्रजतपूरक वनीकरण जनजध अजधजनर्म, 2016 (2016 का 38) की धारा 4 की उप-धारा 3 के खंड (iii) और खंड (iv) में जवजनर्िाष्ट सभी धनराजिर्ां और जनजधर्ां सजम्मजलत हैं;

(च ) ‘‘वन संरक्षक’’ से वन संरक्षक, मुख् र् वन संरक्षक, क्षेत्रीर् मुख् र् वन संरक्षक र्ा वन भूजम पर अजधकाररकता, जिसके जलए केन्द रीर् सरकार का पूवा अनुमगिन अपेजक्षत हा, रखने वाले अजधकारी द्वारा वन सकाल का कार्ाभार ग्रहण करन े के जलए राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षेत्र प्रक्षािन द्वारा जनर्ु् त वन संरक्षक के समकक्ष अजधकारी अजभप्रेत हा;

(छ) ‘’उप-वन महाजनिेिक (केन्द रीर्)’’ से केन्दरीर् सरकार द्वारा जनर्ु् त क्षेत्रीर् कार्ाालर् का प्रमुख अजभप्रेत हा। (ि) ‘‘अनारक्षण’’ से वन के रूप में कानूनी रूप से र्ा अन्द र्र्ा मान्द र्ताप्रा्त की गई भूजम की जवजधक प्राजस्ट्र्जत कग भूजम के दकसी अन्द र् प्रवगा में पररव्तात करने के जलए राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन और उसके दकसी प्राजधकरण द्वारा िारी दकर्ा गर्ा कगई आिेि अजभप्रते हा;

(झ) ‘‘अपर्गिन’’ से दकसी वन भूजम के उपर्गग कग वनतेर प्रर्गिन र्ा दकसी वन भूजम के पटे्ट कग वनेतर प्रर्गिन हते ु समनुिेिन के जलए राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन र्ा उसके दकसी भी प्राजधकरण द्वारा िारी दकर्ा गर्ा कगई आिेि अजभप्रेत हा;

(ञ) ‘‘जिला कले् टर’’ उस वन भूजम, जिसके जलए अजधजनर्म के अधीन केन्द रीर् सरकार का पूवा अनुमगिन अपेजक्षत हा, पर अजधकाररकता रखने वाल ेरािस्ट् व जिले के प्रिासन का प्रभार धारण करन ेके जलए उप-आर्ु् त सजम्मजलत हैं। (ट) ‘‘प्रभागीर् वन अजधकारी’’ से राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन द्वारा जनर्ु् त प्रभागीर् वन अजधकारी, उप- वन संरक्षक र्ा प्रभागीर् वन अजधकारी र्ा उप-वन संरक्षक के समकक्ष कगई अजधकारी अजभप्रेत हा, जिसे उस वन भूजम, जिसके जलए अजधजनर्म के अधीन केन्द रीर् सरकार का पूवा अनुमगिन अपेजक्षत हा, पर अजधकाररकता रखन े वाले वन प्रभाग का प्रभार धारण करने के जलए जनर्ु् त दकर्ा गर्ा हा;

(ि) ‘’भूजम बैंक’’ से अजधजनर्म के अधीन अपर्गिन के जलए प्रस्ट् ताजवत र्ा अपर्गजित वन भूजम की एवि में प्रजतपरूक वनीकरण दकए िाने के जलए राज् र् सरकार और संघ राज्र्क्षते्र प्रिासन द्वारा र्र्ाजस्ट्र्जत भूजम कग अजभज्ञात र्ा जचजन्दहत करना अजभप्रेत हा;

(ड) ‘‘संरेखीर् पररर्गिना’’ से सी पररर्गिनाएं अजभप्रेत हैं जिनमें सड़क , पाइप लाइन , रेलवे, पारेषण लाइन , गारे की पाइपलाइन, प्रहवणी बेल्ट आदि के प्रर्गिन के जलए वन भूजम का संरेखीर् अपर्गिन सजम्मजलत हा;

(ढ) ‘’राष्ट रीर् कार्ा-र्गिना कगड’’ से कार्ा र्गिनाएं तार्ार करन ेके जलए केन्द रीर् सरकार द्वारा तार्ार दकर्ा गर्ा कगड अजभप्रेत हा;

(ण) ‘‘नगडल अजधकारी’’ से इस अजधजनर्म और उसके अधीन बनाए गए जनर्म कग दमण र्ाजन्दवत करन ेऔर वन संरक्षण के मामल पर कारावाई करने वाला और केन्द रीर् सरकार से इस मामले में पत्राचार करन ेके प्रर्गिन के जलए, र्दि जवभाग में मखु् र् वन संरक्षक र्ा उससे पपर का पि नह हग र्र्ाजस्ट्र्जत राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन द्वारा प्राजधकृत सा अजधकारी अजभप्रेत हा, िग मखु् र् वन संरक्षक से नीचे के पि का न हग, र्ा संबंजधत संघ राज्र्क्षेत्र के वन जवभाग में ज् र्ेष्ट ितम अजधकारी हग;

(त) ‘‘पररर्गिना िांच सजमजत’’ से जनर्म 8 के अधीन गरित पररर्गिना िांच सजमजत अजभप्रते हा;

‘क्षेत्रीर् सि् त सजमजत’’ से जनर्म 6 के उप जनर्म (1) के अधीन गरित की गई क्षेत्रीर् सि् त सजमजत अजभप्रेत हा;

(र्) ‘‘क्षेत्रीर् कार्ाालर्’’ से केन्द रीर् सरकार द्वारा स्ट् र्ाजपत, और जनर्ंजत्रत क्षेत्रीर् कार्ाालर् अजभप्रेत हा;

(ि) ‘‘सवेक्षण’’ से दकसी पररर्गिना के आरंभ से पूवा दकर्ा गर्ा कगई कार्ाकालाप र्ा वन भूजम में वास्ट्तजवक खनन कार्ा करने से पूवा खजनि भंडार दक खगि, अवजस्ट्र्जत र्ा भंडार जिसके अतंगात कगर्ला, पेरगजलर्म तर्ा प्राकृजतक गास भी हा कग साजबत करने के संर्गिन के जलए दकर्े गए कार्ाकालाप जिसके अतंगात सवेक्षण, अन्दवेषण, पूवेक्षण सजहत जिल करना भी िाजमल हा, अजभप्रेत हा;

(ध) “प्रौद्यगजगक उपकरण” से अजधजनर्म के अधीन पूवा स्ट् वीकृजत की आव र्कता वाले प्रस्ट् ताव के संबंध में जनणार् लेन ेकग सुगम बनाने के जलए ‘जनणार् समर्ान तंत्र’ (डीएसएस) िासे भगौलीक सूचना प्रणाली आधाररत जडजिटल उपकरण से अजभप्रेत हा। [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 3 (न) ‘‘प्रर्ग् ता अजधकरण’’ से अजभप्रार् अजधजनर्म की धारा 1 के अधीन प्रस्ट् ताव प्रस्ट् तुत करन ेवाले दकसी र्जतिय, संगिन र्ा कानूनी इकाई र्ा कंपनी र्ा केन्द रीर् र्ा राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन के जवभाग हा;

(प) “कार्ा की अनुमजत” से ब् लाक टिंपंग, कंमण ीट जबछाने, रेलवे राक जबछाने, रांसजमिन लाइन कग चािा करने आदि के अजतररतिय प्रारंजभक पररर्गिना कार्ा आरंभ करन ेके जलए संसाधन िुटान ेहते ुअंजतम अनुमगिन िेन ेके पूवा राजखक पररर्गिनाओं कग िी गई र्ा ‘साधांजतक’ अनुमगिन में र्र्ा-जनर्िाष्ट ट अनुमजत से अजभप्रेत हा;

(फ) ‘‘कार्ा र्गिना’’ से समर्-समर् पर केन्द रीर् सरकार द्वारा प्रकाजित की गई राष्ट रीर् कार्ा र्गिना कगड के उपबंध के अनुसार तार्ार दकर्ा गर्ा िस्ट् तावेि और जिसमें दकसी जवजनर्िाष्ट अवजध के जलए जवजिष्ट ट वन प्रभाग के वन के वाज्ञाजनक प्रबंधन करने के जलए जनधााररत जनििे सजम्मजलत हैं, अजभप्रेत हा।

(2) इसमें प्रर्ु् त िब् ि और अजभ र्जतियर् और जिन्द हें इन जनर्म में पररभाजषत नह दकर्ा गर्ा हा तकंत ुअजधजनर्म में पररभाजषत दकर्ा गर्ा हा, का वही अर्ा हगगा िासा दक अजधजनर्म में मण मि: उन्द हें दिर्ा गर्ा हा।

3. परामिािात्री सजमजत का गिन—(1) केन्द रीर् सरकार, आिेि द्वारा, जनर्म 10 के उपजनर्म (5) के उप खंड (ख) के अधीन जनर्िाष्ट प्रस्ट् ताव के संबंध में धारा 2 की उप-धारा (1) के अधीन अनुमगिन प्रिान करने के जलए और वन के संरक्षण से संबंजधत कगई मामला जिसे केन्द रीर् सरकार द्वारा परामिािात्री सजमजत कग जनर्िाष्ट दकर्ा गर्ा हा, के संबंध में केन्द रीर् सरकार कग परामिा िनेे के जलए एक परामिािात्री सजमजत का गिन कर सकती हा:-

(2) परामिािात्री सजमजत में जनम् नजलजखत सिस्ट् र् सजम्मजलत ह गे, अर्ाात :- (क) वन महाजनिेिक, पर्ाावरण, वन और िलवार्ु पररवतान मंत्रालर् - अध् र्क्ष;

(ख) अपर वन महाजनिेिक, िग पर्ाावरण, वन और िलवार्ु पररवतान मंत्रालर् में वन संरक्षण से संबंजधत कार्ा िेख रह ेहैं - सिस्ट् र्;

(ग) अपर वन महाजनिेिक, िग पर्ाावरण, वन और िलवार्ु पररवतान मंत्रालर् में वन्द र्िीव से संबंजधत कार्ा िेख रह ेहैं - सिस्ट् र्;

(घ) अपर आर्ु् त (मृिा संरक्षण), कृजष एवं दकसान कल् र्ाण मंत्रालर् - सिस्ट् र्;

(ङ) पाररजस्ट्र्जतकी, इंिीजनर्ररंग और आ्र्ाक जवकास अर्ािास्त्र क्षेत्र से प्रत् र्ेक का प्रजतजनजधत् व करने वाल े केन्द रीर् सरकार द्वारा नामजनर्िाष्ट दकए िान ेवाले तीन गार िासकीर् जविेषज्ञ - गार-सरकारी सिस्ट् र्;

(च) वन संरक्षण और उसके अजधजनर्म के संबंध में कारावाई कर रह ेवन महाजनरीक्षक - सिस्ट् र्-सजचव

(3) अध् र्क्ष, परामिािात्री सजमजत की बािक में दकसी भी डगमेन जविेषज्ञ कग जविेष आमंजत्रत र्जतिय के रूप में सहर्गजित कर सकते हैं।

(4) अध् र्क्ष, परामिािात्री सजमजत की बािक की अध् र्क्षता करेंगे और उनकी अनपुजस्ट्र्जत में अपर वन महाजनिेिक, िग पर्ाावरण, वन और िलवार्ु पररवतान मंत्रालर् में वन संरक्षण से संबंजधत कार्ा िेख रह ेबािक की अध् र्क्षता करेंगे।

4. परामिािात्री सजमजत के गार िासकीर् सिस्ट् र् के जलए जनबधंन और ित: :—

(1) गार-िासकीर् सिस्ट् र् के अपने कार्ाकाल की अवजध अपने नामजनिेिन की तारीख से िग वषा तक हगगी र्ा िासी केन्द रीर् सरकार द्वारा जनर्िाष्ट ट की गई हा;

(2) एक गार- िासकीर् सिस्ट् र् का र्दि जवकृत जचत् त र्ा दिवाजलर्ा र्ा दकसी अपराध, जिसमें नाजतक अधमता अन्दतवाजलत हा, में िगष जसद्ध हगने की ििा में उसकी सिस्ट् र्ता समाप् त हग िाएगी;

(3) र्दि कगई गार-िासकीर् सिस्ट् र् जबना पर्ााप् त कारण से परामिािात्री सजमजत की लगातार तीन बािक में उपजस्ट्र्त हगने में असफल राहत हा ता तग उसकी सिस्ट् र्ता समाप् त हग िाएगी;

(4) खंड (2) और (3) में बताए गए कारण के द्वारा र्दि कगई ररजतिय हगती हा तग उसे केन्द रीर् सरकार द्वारा िग वषा की िेष अवजध के जलए भर जलर्ा िाएगा;

(5) परामिािात्री सजमजत के गार-िासकीर् सिस्ट् र् उस र्ात्रा भ्ा और िाजनक भ्ा के हकिार हगगा िग समूह ‘क’ के पि धारण करन ेवाले भारत सरकार के दकसी अजधकारी कग ग्राहर् हगगा ;

4 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(6) परंत ुिहां संसि के सिस्ट् र् र्ा राज् र् जवधान सभा के सिस्ट् र् कग परामिािात्री सजमजत के सिस्ट् र् के रूप में जनर्ु् त दकर्ा गर्ा हा, वहां वह र्र्ाजस्ट्र्जत संसि सिस्ट् र् के वेतन, भत् ते और पेंिन अजधजनर्म 1954 (1954 का 30) र्ा संबंजधत राज् र् जवधान सभा के सिस्ट् र् से संबंजधत जवजध के संबंजधत उपबंध के अनुसार, र्ात्रा भत् ता और िाजनक भत् त के जलए हकिार हगगा।

5. परामिािात्री सजमजत के कार्ों का सचंालन:—

(1) परामिािात्री सजमजत का अध् र्क्ष िब कभी आव र्क समझे, परामिािात्री सजमजत की बािक माह में कम से कम एक बार बुला सकता हा।

(2) परामिािात्री सजमजत की बािक सामान्द र्ता नई दिल् ली में हगगी जसवार् इसके दक िब अध् र्क्ष प्रस्ट् ताजवत भूजम का जनरीक्षण करना आव र्क समझे तग वह उस स्ट् र्ान पर बािक आर्गजित करन े का जनिेि िे सकता हा िहां से प्रस्ट् ताव का जनरीक्षण दकर्ा िा सकता हा।

(3) परामिािात्री सजमजत की बािक की गणपू्ता (कगरम) अध् र्क्ष सजहत पांच हगगी।

(4) सिस्ट् र् सजचव बािक की कार्ा-सूची तार्ार करेंग ेऔर केन्दरीर् सरकार द्वारा परामिािात्री सजमजत कग जनर्िाष्ट प्रस्ट् ताव और जवषर् कग प्रस्ट् तुत करेंगे।

(5) परामिािात्री सजमजत अपनी बािक में प्रस्ट् ताव र्ा जवषर् की िांच करेगी और, तत् काल मामल में, अध् र्क्ष उस प्रस्ट् ताव र्ा जवषर् कग सिस्ट् र् कग उनके जवचारार्ा प्रेजषत करने का जनिेि िे सकता हा, िग जनधााररत समर् के भीतर सजमजत कग उपलब् ध करार्ा िाएगा।

(6) प्रर्ग् ता अजधकरण कग सी अवजध के जलए परामिािात्री सजमजत की बािक में उपजस्ट्र्त हगने के जलए अनजु्ञात दकर्ा िा सकता हा िग उनस ेसंबंजधत दकसी सूचना कग प्रिान करन ेर्ा दकसी मदेु्द कग स्ट्पष्ट करन ेके जलए आव र्क हग।

(7) प्रस्ट् ताव र्ा जवषर् की िांच के प चात,् परामिािात्री सजमजत केन्द रीर् सरकार कग अपनी जसफाररि/परामिा िगेी।

6. क्षते्रीर् सि् त सजमजत का गिन - (1) केन्द रीर् सरकार, जनर्म 10 के उपजनर्म (3) के खंड (ख) के अधीन जनर्िाष्ट प्रस्ट् ताव की िांच करने तर्ा धारा 2 की उप-धारा (1) के अधीन प्रस्ट् ताव कग अनुमगिन प्रिान करने र्ा अस्ट् वीकार करन ेके जलए प्रत् र्ेक क्षेत्रीर् कार्ाालर् में आििे द्वारा एक क्षेत्रीर् सि् त सजमजत का गिन कर सकेगी।

(2) प्रत्र्ेक क्षेत्रीर् कार्ाालर् में क्षेत्रीर् सि् त सजमजत में जन्नलजलजखत ्यकजतिय सजम्मजलत ह ग,े अर्ाात ्:- (क) उप वन महाजनिेिक (केन्दरीर्) र्ा केन्द रीर् सरकार द्वारा नामजनर्िाष्ट कगई अजधकारी - अध् र्क्ष;

(ख) ख् र्ाजत प्राप् त र्जतियर् में से, िग वाजनकी और सहार्क जवषर् के क्षेत्र में जविेषज्ञ हा, तीन गार- िासकीर् सिस्ट् र् - सिस्ट् र्;

(ग) क्षेत्रीर् कार्ाालर् में वन संरक्षक और उप वन संरक्षक रैंक के अजधकाररर् में से ज् र्षे्ट ितम अजधकारी - सिस्ट् र् सजचव

(3) क्षेत्रीर् सि् त सजमजत का अध्र्क्ष बािक के जलए जविेष आमंजत्रत के रूप में डगमेन जविेषज्ञ कग सहर्गजित कर सकता हा

(4) राज् र् र्ा संघ राज् र्क्षेत्र प्रिासन के वन जवभाग और रािस्ट्व जवभाग से एक-एक प्रजतजनजध, िग भारत सरकार के जनिेिक के पि से नीचे का न हग, कग क्षेत्रीर् सि् त सजमजत द्वारा प्रस्ट्ताव की िांच के जलए जविेष आमंजत्रत के रूप में बािक में भाग लेन ेके जलए आमंजत्रत दकर्ा िाएगा।

(5) क्षते्रीर् सि् त सजमजत के गार-िासकीर् सिस्ट्र् के जनबधंन और ित: :—

(1) एक गार-िासकीर् सिस्ट् र् उसके नामजनिेिन की तारीख से िग वषा की अवजध के जलए पि धारण करेगा

(2) एक गार-िासकीर् सिस्ट् र् कग र्दि जवकृत जचत् त, दिवाजलर्ा र्ा एक से अपराध के जलए िगषी पार्ा गर्ा हग, जिसमें नाजतक अधमता अंत्वाजलत हा, की जस्ट्र्जत में उसकी सिस्ट् र्ता समाप् त हग िाएगी;

(3) र्दि कगई गार- िासकीर् सिस्ट् र् जबना पर्ााप् त कारण से सजमजत की लगातार तीन बािक में उपजस्ट्र्त हगने में असफल राहत हा तग उसकी सिस्ट् र्ता समाप् त हग िाएगी;

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 5

(4) उप जनर्म (2) और (3) में व्णात दकसी कारण के फलस्ट् वरूप र्दि क्षेत्रीर् सितिय सजमजत में सिस्ट् र् की कगई ररजतिय हगती हा तग उसे कें रीर् सरकार उस सिस्ट् र् की िेष अवजध के जलए भर जलर्ा िाएगा, जिसके स्ट् र्ान पर ररजतिय ुई हा

(5) क्षेत्रीर् सि् त सजमजत के गार-सरकारी सिस्ट्र् र्ात्रा भ्ा और िाजनक भ्े के हकिार ह ग ेिग समान वेतनमान वाले समूह 'क' पि धारण करन ेवाले भारत सरकार के एक अजधकारी के जलए ग्राहर् हा

(6) परंतु िहां संसि के सिस्ट् र् र्ा राज् र् जवधान सभा के सिस्ट् र् क्षेत्रीर् सि् त सजमजत के सिस्ट् र् के रूप में जनर्ु् त दकर्ा गर्ा हा, वहां वह र्र्ाजस्ट्र्जत संसि सिस्ट् र् के वेतन, भत् ते और पेंिन अजधजनर्म 1954 (1954 का 30) र्ा संबंजधत राज् र् जवधान सभा के सिस्ट् र् से संबंजधत जवजध के संबंजधत उपबंध के अनुसार, र्ात्रा भत् ता और िाजनक भत् त के जलए हकिार हगगा।

7. क्षते्रीर् सि् त सजमजत के कार्ों का सचंालन:—सलाहकार सजमजत अपना कार्ा जन्नलानुसार संचाजलत करेगी, अर्ाात:्-

(1) क्षेत्रीर् सि् त सजमजत का अध् र्क्ष िब कभी आव र्क समझे, सजमजत की बािक आर्गजित कर सकता हैं, िग माह में एक बार से कम नह हग;

(2) क्षेत्रीर् सि् त सजमजत की बािक क्षेत्रीर् कार्ाालर् के मुख्र्ालर् में आर्गजित की िाएगी:

परंतु क्षेत्रीर् सि् त सजमजत के अध् र्क्ष िहां इस बात से संतुष्ट ट हग दक सी वन भूजम के स्ट् र्ान का जिनका वनेत् तर प्रर्गिन के जलए प्रर्गग दकर्ा प्रस्ट्ताजवत हा, का जनरीक्षण आव र्क र्ा जनर्िाष्ट प्रस्ट् ताव के संबंध में जवचार िीरताता से दकर्ा िाना आव र्क र्ा समीचीन हा तग स्ट्र्ल के से जनरीक्षण के जलए र्ह क्षेत्रीर् सि् त सजमजत की बािक क्षेत्रीर् कार्ाालर् के मुख्र्ालर् में न करके अन्दर् स्ट् र्ान पर करन ेके जनिेि ि ेसकते हैं;

(3) अध् र्क्ष क्षेत्रीर् सि् त सजमजत की बािक की अध् र्क्षता करेगा और उसकी अनुपजस्ट्र्जत में, अन्द र् क्षेत्रीर् कार्ाालर् का प्रभार संभालन े वाला उप वन महाजनिेिक र्ा अजधजनर्म से संबंजधत मामल पर कार्ा करने वाला वन महाजनरीक्षक, िासा दक केन्द रीर् सरकार द्वारा प्राजधकृत दकर्ा िाए, क्षेत्रीर् सि् त सजमजत की बािक की अध् र्क्षता कर सकता हा।

(4) क्षेत्रीर् सि् त सजमजत कग सलाह र्ा जवजन चर् के जलए जनर्िाष्ट प्रत् र्ेक प्रस्ट् ताव पर क्षेत्रीर् सि् त सजमजत की बािक में जवचार दकर्ा िाएगा। परंतु िीरताता वाले मामल में, क्षेत्रीर् सि् त सजमजत का अध् र्क्ष जनिेि िे सकेगा दक िस्ट्तावेि कग पररचाजलत दकर्ा िाए और क्षेत्रीर् सि् त सजमजत के सिस्ट् र् कग अनुबद्ध समर् के भीतर उनकी रार् के जलए भेिा िाए।

(5) क्षेत्रीर् सि् त सजमजत की बािक में गणपू्ता (कगरम) तीन हगगी;

(6) प्रर्ग् ता अजभकरण कग बािक के िौरान सी अवजध के जलए उपजस्ट्र्त रहन ेके जलए अनजु्ञात दकर्ा िा सकेगा िग इससे संबंजधत दकसी सूचना कग प्रिान करन ेर्ा दकसी मुदे्द कग स्ट् पष्ट ट करन ेके जलए आव र्क हग।

(7) सिस्ट् र् सजचव बािक की कार्ासूची तार्ार करेंगे और अजधजनर्म से िुड़े प्रस्ट् ताव और जवषर् कग सजमजत के समक्ष प्रस्ट् तुत करेंगे तत्पचातात उजचत जसफाररिें तर्ा जनणार् जलए िा सकें ।

8. पररर्गिना िाचं सजमजत का गिन:—(1) राज्र् सरकार और संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन, एक आिेि द्वारा, अजधजनर्म की धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (i), खंड (ii) र्ा खंड (iii) के अधीन प्रस्ट्तुत प्रस्ट्ताव की पूणाता की िांच करन ेके जलए एक पररर्गिना िांच सजमजत का गिन कर सकते हैं।

(2) पररर्गिना िांच सजमजत में जन्नलजलजखत ्यकजतिय सजम्मजलत ह गे, अर्ाात:् - (क) नगडल अजधकारी- अध् र्क्ष;

(ख) संबंजधत मुख् र् वन संरक्षक/वनसंरक्षक - सिस्ट् र्;

(ग) संबंजधत प्रभागीर् वन अजधकारी - सिस्ट् र्;

(घ) संबंजधत जिला ् ले् टर और उनके प्रजतजनजध, (जडप्टी कले्टर के पि से नीचे का नह ) - सिस्ट् र्;

(ङ) नगडल अजधकारी के कार्ाालर् में प्रभागीर् वन अजधकारी - सिस्ट् र् - सजचव https://www.shabdkosh.com/dictionary/hindi-english/उप-खंड/उप-खंड-meaning-in-english https://www.shabdkosh.com/dictionary/hindi-english/उप-खंड/उप-खंड-meaning-in-english 6 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(3) पररर्गिना िांच सजमजत की बािक प्रत् र्के मास में कम से कम िग बार हगगी, और पररर्गिना िांच सजमजत की बािक की गणपू्ता तीन हगगी।

(4) पररर्गिना िांच सजमजत, प्रस्ट्ताव की िांच के प चात, र्र्ाजस्ट्र्जत राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन कग जसफाररि करेगी।

9. केन्दरीर् सरकार के पवूा अनमुगिन के जलर् ेप्रस्ट्ताव:—(1) केन्दरीर् सरकार अपना अनुमगिन िग चरण में दिर्ा करेगी, अर्ाात (i) ‘साद्धांजतक’ अनुमगिन; और (ii) ‘अंजतम’ अनुमगिन।

(2) प्रर्गतिया अजभकरण राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन कग अजधजनर्म की धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन वन भूजम के अनारक्षण, वनेतर प्रर्गिन के जलए वन भूजम के उपर्गग र्ा पटे्ट के जलए केन्द रीर् सरकार के वेब पगटाल के माध् र्म से ननलाइन समनुििेन केन्द रीर् सरकार के अनुमगिन हते ुआवेिन प्रस्ट् तुत करेगी।

(3) प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा प्रस्ट्तुत दकर् ेिान ेवाल ेप्रस्ट्ताव के जलए एक प्रस्ट्ताव पहचान संख्र्ा कग ननलाइन ‘िेनरेट’ दकर्ा िाएगा और उतिय पहचान संख्र्ा का उपर्गग भजवष्टर् के सभी संिभों के जलए दकर्ा िाएगा।

(4) प्रस्ट् ताव की एक प्रजत, राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन के संबंजधत वनमंडल अजधकारी, जिला कले् टर, वन संरक्षक, मुख् र् वन संरक्षक और नगडल अजधकारी कग भी सार्-सार् अग्रेजषत की िाएगी और उनमें से प्रत् र्के प्रस्ट् ताव के प्रलेखन की पूणाता की प्रारंजभक िांच स्ट् वतंत्र रूप से करेगा।

(5) पररर्गिना िांच सजमजत राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन से प्रा्त पांच ह्ेटेर्र र्ा उससे कम की वन भूजम वाले प्रस्ट्ताव के जसवार्, िांच करेगी दक प्रस्ट्ताव सभी तरह से पणूा हा और प्रस्ट्ताजवत कार्ाकलाप दकसी प्रजतबंजधत क्षेत्र र्ा प्रवगा में नह हा।

(6) पररर्गिना िांच सजमजत, स्ट्पष्टीकरण र्ा अजतररतिय िस्ट्तावेि, र्दि कगई हग, के जलए प्रर्गतिया अजभकरण कग बुला सकती हा।

(7) पररर्गिना िांच सजमजत प्रस्ट्ताव की पणूाता और िुद्धता के जलए िांच करेगी और र्ह सुजनजचातत करेगी दक प्रस्ट्ताव में कजमर्ां, र्दि कगई ह , तग उसकी पहचान की िाए और सिस्ट्र्-सजचव इस संबंध में प्रर्गतिया अजभकरण कग सूजचत करेगा।

(8) प्रर्गतिया अजभकरण कग लौटाए गए प्रस्ट्ताव कग नब्बे दिन की अवजध के भीतर उपरगतिय उप जनर्म (7) के अधीन अजभज्ञात कमी कग िरू करन ेके पचातात दफर से प्रस्ट्ततु दकर्ा िा सकेगा, सा न हग पान ेपर प्रस्ट्ताव कग सूची से हटा दिर्ा िाएगा।

(9) र्दि प्रर्गतिया अजभकरण दिए गए समर् के भीतर िानकारी प्रस्ट्ततु करती हा, तग पररर्गिना िांच सजमजत द्वारा प्रस्ट्ताव की दफर से िांच की िाएगी और र्दि प्रस्ट्ताव सभी िजृष्ट से पूरा नह पार्ा िाता हा, तग कारणग कग लेखबद्ध कर उसे सूची से हटा दिर्ा िाएगा:

परंतु र्ह दक पररर्गिना िांच सजमजत द्वारा प्रस्ट्ताव कग सूची से हटाने के पचातात, प्रर्गतिया अजभकरण, कजमर् कग संबगजधत करने के बाि, उपरगतिय उपजनर्म (2) के अधीन उत्पन्न उसी प्रस्ट्ताव पहचान संख्र्ा का उपर्गग करके केवल एक बार प्रस्ट्ताव कग दफर से सूचीबद्ध कर सकती हा, िग दफर उपरगतिय उपजनर्म (5) से (2) में िी गई प्रदमण र्ा के अनुसार पररर्गिना िांच सजमजत द्वारा िांच की िाएगी और र्दि प्रस्ट्ताव अभी भी अपूणा पार्ा िाता हा, तग इसे अस्ट् वीकार दकर्ा िाएगा और इसका पगटाल से स्ट्र्ार्ी रूप से लगप दकर्ा िाएगा।

(10) पररर्गिना पहचान संख्र्ा के सार् पूणा प्रस्ट्ताव संबंजधत प्रभागीर् वन अजधकाररर् , जिला कले्टर , वन संरक्षक र्ा मुख्र् वन संरक्षक कग क्षेत्र सत्र्ापन के जलए अग्रेजषत दकर्ा िाएगा।

(11) िहां प्रस्ट्ताव में सजम्मजलत वन भूजम र्ा उसका कगई भाग वन जवभाग के प्रबंधन जनर्ंत्रण के अधीन नह हा, वहां जिला कले्टर रािस्ट्व जवभाग और वन जवभाग के अजधकाररर् द्वारा संर्ुतिय सत्र्ापन के माध्र्म से ननलाइन प्रमाणीकृत प्रस्ट्ताव में प्रमाजणत सजम्मजलत वन भूजम की भूजम अनुसूची और न्िा प्रा्त करेंगे।

(12) इसके अजतरर् त, संबंजधत प्रभागीर् वन अजधकारी द्वारा क्षेत्र में सत् र्ाजपत प्रत्र्ेक प्रस्ट्ताव, जिसमें 40 ह्ेटेर्र से अजधक वन भूजम सजम्मजलत हा तग उसे संबंजधत वन संरक्षक द्वारा और र्दि प्रस्ट् ताव में सौ ह्ेटेर्र से अजधक वन भूजम; सजम्मजलत हा तग नगडल अजधकारी द्वारा क्षेत्रीर् जनरीक्षण दकर्ा िाएगा। [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 7

(13) पांच ह्ेटेर्र र्ा उससे कम की वन भूजम वाले प्रस्ट्ताव के जसवार्, उप जनर्म (8) र्ा (9) के अधीन पणूा प्रस्ट्ताव प्रस्ट्तुत करन ेसे, इन जनर्म से संलग्न अनुसूची-1 में जवजनर्िाष्ट अवजध के भीतर पररर्गिना िांच सजमजत के जवचार के जलए प्रस्ट् ततु दकर्ा िाएगा और पररर्गिना िांच सजमजत प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा अगंीकृत दकए िाने वाल े उपिमन उपार् के सार् राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन कग इसकी जसफाररि करन े के प्रर्गिन से प्रस्ट्ताव की ्यकवहार्ाता की िांच करेगी:

परंत,ु पररर्गिना िांच सजमजत, वन भूजम की आवर्कता कग कम करन े र्ा वन और वन्दर्िीव , पर प्रजतकूल प्रभाव कग कम करन,े प्रस्ट्ताजवत प्रजतपूरक वनीकरण भूजम में पररवतान र्ा पररर्गिना के प्रजतकूल प्रभाव कग कम करने के जलए प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा अंगीकार दकए गए िाने वाले प्रस्ट्ताजवत उपार् में पररवतान, िासे कारण से अपर्गिन के जलए प्रस्ट्ताजवत वन भूजम में पररवतान के संिभा में प्रर्गतिया अजभकरण से कगई स्ट्पष्टीकरण, अजतररतिय जववरण र्ा उपांतरण की मांग कर सकती हा, और इस प्रर्गिन जलए र्ह प्रर्गतिया अजभकरण कग एक प्रस्ट्तुजत िेने के जलए कह सकती हा:

परंतु र्ह और दक प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा समर् पर परूी िानकारी और स्ट्पष्टीकरण तर्ा अजतररतिय जववरण ननलाइन प्रस्ट्ततु करन ेकी जस्ट्र्जत में पररर्गिना संचालन सजमजत द्वारा प्रस्ट्ताव पर पनु्वाचार दकर्ा िाएगा और र्दि प्रर्गतिया अजभकरण मलू प्रस्ट्ताव कग पर्ाा्त रूप से संिगजधत करती हा और वन भूजम र्ा भूजम उपर्गग र्गिना में पररवतान िासे बड़े बिलाव करती हा, तग पररर्गिना संचालन सजमजत उप जनर्म (7) से उपजनर्म (11) में दिए गए चरण कग पूरा करन ेके जलए प्रस्ट्ताव कग वापस कर सकती हा और इसजलए से मामल में इस उप जनर्म के चरण कग भी िगहरार्ा िाएगा।

(14) िहां प्रर्गतिया अजभकरण र्र्ाजनर्िाष्ट अवजध के भीतर सही सूचना, अजतररतिय जववरण र्ा उपांतररत प्रस्ट्ताव प्रस्ट्तुत करने में असफल रहती हा, प्रस्ट्ताव अस्ट्वीकृत माना िाएगा:

परंत ुर्दि प्रर्गतिया अजभकरण पररर्गिना िांच सजमजत कग संतुष्ट करती हा दक िेरी का कारण उसके जनर्ंत्रण से बाहर र्ा, तग पररर्गिना िांच सजमजत लेखबद्ध कारण के प चात उस प्रस्ट्ताव पर पनुव जवचार कर सकती हा और र्र्ाजस्ट्र्जत राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन कग इसकी जसफाररि कर सकती हा;

(15) पांच ह्ेटेर्र तक की वन भूजम वाले प्रस्ट्ताव कग प्रभागीर् वन अजधकारी के स्ट्तर पर उसकी िांच के प चात उसके द्वारा सीधे नगडल अजधकारी कग अग्रेजषत दकर्ा िाएगा और नगडल अजधकारी से प्रस्ट्ताव कग अपनी जसफाररि के सार् राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन कग अग्रेजषत करेगा:

बिते दक प्रभागीर् वन अजधकारी, प्रर्गतिया अजभकरण से प्रस्ट्ताव प्रा्त करने के प चात, उनकी पूणाता का आकलन करेगा और अपूणा प्रस्ट्ताव कग पणूा रूप से पुनव प्रस्ट्ततु करन ेके जलए प्रर्गतिया अजभकरण कग वाजपस दकर्ा िाएगा।

(16) पांच ह्ेटेर्र र्ा उससे अजधक की वन भूजम वाल ेप्रस्ट्ताव कग नगडल अजधकारी द्वारा प्रधान मुख्र् वन संरक्षक के अनुमगिन से राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन कग पररर्गिना िांच सजमजत की जसफाररि के सार् अग्रेजषत दकर्ा िाएगा और उसकी एक प्रजत क्षेत्रीर् कार्ाालर् कग भेिी िाएगी;

(17) िहां र्र्ाजस्ट्र्जत राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन गार-वन उदे्दर् के जलए वन भूजम कग अनारजक्षत, अपर्गिन र्ा प्रस्ट्ताव में उपि्िात अनुसार वन भूजम कग पटे्ट पर न िेने का जनणार् लतेे हैं, तग इसकी सूचना प्रर्गतिया अजभकरण कग नगडल अजधकारी द्वारा िी िाएगी ।

(18) िहां राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन, वन भूजम कग अनारजक्षत करन ेके जलए, गार-वन प्रर्गिन के जलए अपर्गिन र्ा पटे्ट पर वन भूजम आवंरटत करन ेके जलए िासा दक प्रस्ट्ताव में उपि्िात हा, साद्धांजतक रूप से सहमत हगने पर अपनी जसफाररि केन्द रीर् सरकार कग अग्रेजषत करेगी।

(10) प्रस्ट् ताव का साद्धाजंतक रूप अनमुगिन:—

(1) उप जनर्म (2) में जनर्िाष्ट प्रस्ट् ताव के जसवार्, जनम् नजलजखत से संबंजधत अन्दर् सभी प्रस्ट्ताव :-

(i) राजखक पररर्गिनाएं;

(ii) चालीस ह्ेटेर्र तक वन भूजम; और 8 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(iii) 25 मेगावाट से तक क्षमता की िलजवदु्यत पररर्गिनाएं, चाह ेउनकी निी बेजसन में प्रस्ट्ताजवत स्ट्र्ाजपत क्षमता कुछ भी हग, िहां निी बेजसन की वहन क्षमता का जनधाारण करन ेके जलए संचर्ी प्रभाव मूल्र्ांकन अध्र्र्न दकर्ा गर्ा हा;

(iii) 0.7 तक जवतान घनत्व वाली वन भूजम का उपर्गग, चाह ेसवेक्षण की िजृष्ट से इसका जवस्ट् तार कुछ भी हग, और जिन्द हें अजधजनर्म की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (iii) और इसके तिधीन िारी दििाजनिेि के अधीन छुट नह िी गई हग, के बारे में क्षेत्रीर् कार्ाालर् में िांच पड़ताल की िाएगी और इनका उपजनर्म (3) में जवजनर्िाष्ट रीजत से जनपटारा दकर्ा िाएगा;

(2) उप-जनर्म (1) में जनर्िाष्ट से जभन्न, सभी प्रस्ट्ताव और जनम् नजलजखत प्रस्ट्ताव , अर्ाात ्:-

(i) अनारक्षण;

(ii) खनन;

(iii) 25 मगेावाट से अजधक क्षमता की िलजवदु्यत पररर्गिनाएं, चाह ेउनकी निी बेजसन में प्रस्ट्ताजवत स्ट्र्ाजपत क्षमता कुछ भी हग, िहां निी बेजसन की वहन क्षमता का आकलन करने के जलए संचर्ी प्रभाव मूल्र्ांकन अध्र्र्न नह दकर्ा गर्ा हा र्ा दकसी निी बेजसन में पररर्गिनाओं की अनुमजत िेन ेपर कें रीर् सरकार द्वारा नीजतगत जनणार् नह जलर्ा गर्ा हा;

(iv) अजतमण मण का जनर्जमतीकरण;

(v) अजधजनर्म के उपबंध के उल्लघंन से संबंजधत कार्ो्र अनुमगिन, की िांच और जनपटारा इन जनर्म के अधीन जवजनर्िाष्ट ट रीजत से कें रीर् सरकार द्वारा दकर्ा िाएगा। परंत ुपेरगजलर्म अन्दवेषण अनुज्ञज्त र्ा पेरगजलर्म खनन पटे्ट, जिसमें वन भूजम पर भौजतक कब्िा और उसे खंजडत करना अतंवाजलत नह हा, समुनिेजित करने के जलए कगई अनुमगिन अपेजक्षत नह हा।

(3) उप जनर्म (1)के अधीन प्रा्त प्रस्ट्ताव की क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा जन्नलजलजखत रीजत में िांच की िाएगी, अर्ाात्:

(i) 5 ह्ेटेर्र तक की वन भूजम वाले सभी प्रस्ट्ताव की क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा इसकी पूणाता के संबंध में िांच की िाएगी, और िांच र्ा जनरीक्षण ररपगटा, िग भी आवर्क समझी िाए, के प चात और उप जनर्म (5) के खंड (ii) के अधीन सूचीबद्ध पक्ष पर सम्र्क ध्र्ान िेते ुए, क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा कारण कग लेखबद्ध करत े ुए ‘साद्धांजतक’ अनुमगिन प्रिान दकर्ा िाएगा।

(ii) 5 ह्ेटेर्र से अजधक वन भूजम वाल ेसभी रेखीर् प्रस्ट्ताव , 'सवेक्षण' के प्रर्गिन के जलए 0.7 तक का नगपी घनत्व वाली वन भूजम के उपर्गग के जलए सभी प्रस्ट्ताव, चाह ेउनकी सीमा कुछ भी हग और पााँच ह्ेटेर्र से अजधक और चालीस ह्ेटेर्र तक वन भूजम के उपर्गग वाले अन्दर् सभी प्रस्ट्ताव की क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा उनकी पूणाता की िांच के प चात क्षेत्रीर् सितिय सजमजत कग जनर्िाष्ट दकर्ा िाएगा।

(iii) क्षेत्रीर् सितिय सजमजत, खण् ड (ii) के अधीन इसे जनर्िाष्ट सभी प्रस्ट्ताव की िांच करेगी और आगे की िांच र्ा स्ट् र्ल का जनरीक्षण, िग भी आवर्क समझी िाए, के प चात और जनर्म (5) के खण् ड (ii) के अधीन सूचीबद्ध पक्ष पर सम्र्क ध्र्ान िेते ुए, पूवा अनुमगिन प्रिान करेगी र्ा कारण लेखबद्ध करके उसे जनरस्ट्त करेगी।

(iv) इस जनर्म के अधीन प्रत्र्ार्गजित िजतिय के अनुसार क्षते्रीर् सितिय सजमजत र्ा वन उप महाजनिेिक द्वारा दकसी प्रस्ट्ताव कग 'साद्धांजतक' मंिूरी िेने र्ा अस्ट्वीकार करने के जलए जलए गए जवजनचातर् का, िब भी आवर्क हग र्ा अपेजक्षत हग, का पुन्वालगकन दकर्ा िा सकता हा, से जवषर् में कें रीर् सरकार द्वारा जलर्ा गर्ा जनणार् अंजतम हगगा।

(4) क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा उप-जनर्म (2) में जवजनर्िाष्ट प्रस्ट्ताव के संबंध में एक स्ट्र्ल जनरीक्षण ररपगटा तार्ार की िाएगी और उसे केन्द रीर् सरकार कग परामिािात्री सजमजत द्वारा जवचार करने के जलए प्रस्ट्ततु दकर्ा िाएगा।

(5) केन्द रीर् सरकार द्वारा प्रा्त प्रस्ट्ताव की जन्नलजलजखत रीजत में िांच की िाएगी अर्ाात्:- [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 9

(i) उपजनर्म (2) के अधीन सभी प्रस्ट्ताव , कग इनकी पणूाता की िांच के प चात, उप जनर्म (5) के अधीन अपेजक्षत स्ट् र्ल जनरीक्षण ररपगटा के सार् र्ा/र्र्ा कें रीर् सरकार द्वारा पछेू िान ेपर, परामिािात्री सजमजत कग जनर्िाष्ट दकर्ा िाएगा।

(ii) परामिािात्री सजमजत, खंड (i) में जनर्िाष्ट सभी प्रस्ट्ताव कग, जन्नलजलजखत जबन्दिओुं पर अपेजक्षत ध्र्ान िेत ेुए परंतु उन्दह तक सीजमत न रहते ुए, िांच करेगी और आग ेकी िांच, िग भी आवर्क समझी िाए, के प चात केन्द रीर् सरकार कग उनके द्वारा अनुमगिन पर जवचार करने के जलए जसफाररिें करेगी:- (क) वन भूजम का प्रस्ट्ताजवत उपर्गग, दकसी गार-स्ट्र्ल जवजनर्िाष्ट प्रर्गिन िासे दक कृषीर् प्रर्गिन , कार्ाालर् र्ा आवासीर् प्रर्गिन से र्ा अपन ेआवास से जवस्ट् र्ाजपत ुए र्जतियर् के पनुवाास के जलए नह हा। (ख) राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन, र्र्ाजस्ट्र्जत, न ेप्रमाजणत कर दिर्ा हा दक उसने सभी जवकल् प पर जवचार दकर्ा हा और इन पररजस्ट्र्जतर् में कगई अन्द र् जवकल् प साध् र् नह हा और र्ह दक अपेजक्षत क्षेत्र की न्द र्नूतम आव र्कता हा। (ग) राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन, र्र्ाजस्ट्र्जत, ने अपनी जसफाररि करने से पूवा, वन भूजम के अपर्गिन के कारण वन, वन्द र्िीव और पर्ाावरण पर पड़न ेवाले प्रत् र्क्ष और अप्रत् र्क्ष प्रभाव वाले सभी मुद्द पर जवचार दकर्ा हा। (घ) राष्ट रीर् वन नीजत के अधीन संबंजधत अजधिेि;

(ड.) र्दि वनेत् तर प्रर्गिन के जलए उपर्गग दकए िाने वाली प्रस्ट् ताजवत वन भूजम, दकसी राष्ट रीर् उद्यान, वन्द र्िीव अभर्ारण् र्, बाघ ररिवा का एक जहस्ट् सा हा र्ा अजभजहत र्ा अजभज्ञात बाघ र्ा वन्द र्िीव गजलर्ारा हा र्ा वनस्ट् पजत-िात और प्राणी-िात की दकसी जवलुप् तप्रार्: र्ा संकटग्रस्ट् त प्रिाजत का पर्ाावास र्ा गंभीर रूप से अपक्षररत िलग्रहण क्षेत्र में आने वाल ेक्षेत्र का जहस्ट् सा हा तग ् र्ा राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन, र्र्ाजस्ट्र्जत, द्वारा पर्ााप् त औजचत् र् दिर्ा गर्ा हा और समुजचत उपिमन उपार् प्रस्ट् ताजवत दकए गए हैं; और (च) राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन, र्र्ाजस्ट्र्जत, प्रजतपूरक वनीकरण करन ेके प्रर्गिन से जनर्म 13 के अनुसार अपनी लागत र्ा प्रर्गतिया अजभकरण की लागत पर समुजचत भूजम के अपेजक्षत जवस्ट् तार करने का उपबंध करता हा।

(6) उप जनर्म (5) के अनुसार, जसफाररि करते समर् सजमजत, ितों र्ा जनबाधन और से उपिमन उपार् , िग उसके जवचार से प्रस्ट् ताव के अधीन वन भूजम के अपर्गिन के प्रजतकूल पर्ाावरणीर् प्रभाव कग कम करेंगे, कग भी लागू कर सकती हा।

(7) कें रीर् सरकार, परामिािात्री सजमजत की जसफाररि पर जवचार करने के प चात जनधााररत ितों कग परूा करने के अध्र्धीन, र्र्ाजस्ट्र्जत साद्धांजतक अनुमगिन प्रिान करेगी र्ा अस्ट् वीकृत करेगी और इस बारे में राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन और प्रर्गतिया अजभकरण कग संसूजचत करेगी।

(8) र्दि इसकी िांच करन ेके प चात प्रस्ट् ताव अपणूा र्ा उपलब् ध कराई गई सूचना असत् र् पाई िाती हा तग केन्द रीर् सरकार राज् र् सरकार/संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन और प्रर्गतिया अजभकरण कग एक जवजनर्िाष्ट अवजध के भीतर अपेजक्षत सूचना प्रस्ट् तुत करने के जलए सूजचत करेगी;

(9) राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षते्र प्रिासन उपजनर्म 8 के अधीन संसूचना प्राप् त हगने पर पूरी सूचना प्रस्ट् तुत कर सकती हा, जिसके प चात इन जनर्म के अधीन ‘साद्धांजतक’ अनमुगिन के जलए प्रस्ट् ताव पर जवचार दकर्ा िाएगा :

परंत,ु र्दि वांजछत सूचना, प्रर्गतिया अजभकरण से संबंजधत हा तग प्रर्गतिया अजभकरण , केन्द रीर् सरकार कग अपेजक्षत सूचना प्रत् र्क्ष रूप से प्रस्ट् ततु करेगी जिसकी एक प्रजत राज् र् सरकार/संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन कग भेिी िाएगी और प्रर्गतिया अजभकरण से सी सूचना की प्राज्त पर, केन्द रीर् सरकार, र्दि आव र्क समझे, तग प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा प्रस्ट् तुत की गई सूचना पर ‘साद्धांजतक’ अनुमगिन की मंिूरी प्रिान करने पर जवचार करने के जलए र्र्ा जस्ट्र्जत संबंजधत राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन की रटप् पजणर्ां की मांग कर सकती हा।

(10) राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षेत्र प्रिासन, र्दि सा चाह,े रेखीर् प्रस्ट् ताव का ‘जसद्धांतत:’ अनुमगिन प्राप् त करन े और प्रजतपूरक वनीकरण एवं िदु्ध वतामान मूल् र् िासे प्रजतपरूक उपग्रहण तर्ा वन्द र्िीवन प्रबंधन र्गिना एवं मृिा और आराता संरक्षण र्गिना िासी उपिमन र्गिना की लागत, र्र्ा लाग,ू अधीन, भारतीर् वन अजधजनर्म, 10 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] 1927 (1927 का 16) र्ा स्ट् र्ानीर् वन अजधजनर्म के तहत संरजक्षत वन के रूप में प्रजतपरूक वनीकरण करने हते ु अजभज्ञात भूजम की अजधसूचना तर्ा अनुसूजचत िनिाजत और अन्द र् परंपरागत वन जनवासी (वन अजधकार की मान्द र्ता) अजधजनर्म, 2006 (2007 का 2) के अनुपालन में ‘अंजतम’ अनुमगिन प्रिान करने से पूवा पररर्गिना कार्ा प्रारम्भ करन ेहते ु’कार्ा अनुमजत’ प्रिान कर सकता हा।

11. प्रस्ट् ताव का अजंतम अनमुगिन :—

(1) नगडल अजधकारी, कें रीर् सरकार से ‘साद्धांजतक’ अनुमगिन प्राप् त करन े के प चात, संबंजधत प्रभागीर् वन अजधकाररर् , जिला कले् टर और वन संरक्षक कग इसकी सूचना िे सकता हा;

(2) ‘साद्धांजतक’ अनुमगिन की एक प्रजत प्राप् त हगने पर प्रभागीर् वन अजधकारी एक मांग-पत्र तार्ार करेगा जिसमें प्रजतपूरक उिग्रहण की मि-वार रकम, िासा लागू हग,प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा भुगतान दकर्ा िाएगा और सार् ही ‘साद्धांजतक’ अनुमगिन में जनर्त ितों के अनुपालन में उनके द्वारा प्रस्ट् तुत दकए िान ेवाल ेिस्ट् तावेि , प्रमाणपत्र और वचनबंध की एक सूची के सार् प्रर्गतिया अजभकरण कग सूजचत करेगा;

(3) प्रर्गतिया अजभकरण सूचना की प्राज्त के प चात, प्रजतपरूक उिग्रहण का भुगतान करेगा और प्रजतपूरक वनीकरण के जलए जचजन्दहत भूजम कग सौंप िेगा, प्रजतपूरक उिग्रहण के भुगतान के संबंध में वचनबंध और प्रमाण-पत्र सजहत िस्ट् तावेिी साष् र् की प्रजतर् के सार् एक अनुपालन ररपगटा और प्रजतपरूक वनीकरण भूजम प्रभागीर् वन अजधकारी कग सौंप िेगा;

(4) प्रभागीर् वन अजधकारी, उप जनर्म (3) में जनर्िाष्ट अनुसार अनुपालनररपगटा प्राप् त करन े के प चात् और इसकी पूणाता की िांच करेगा और अनुपालन ररपगटा पर अपनी जसफाररि करेगा और इसे नगडल अजधकारी कग अग्रेजषत करेगा;

(5) नगडल अजधकारी अनुपालन ररपगटा प्राप् त करन े के प चात, इसकी पूणाता सुजनजचातत करन ेऔर राज् र् सरकार के प्रधान मुख् र् वन संरक्षक र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन के मामल ेमें जवभाग के प्रमुख का अनुमगिन प्राप् त करने के प चात, र्र्ाजस्ट्र्जत सी ररपगटा कग अपनी जसफाररि के सार् राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन कग, अग्रेजषत करेगा।

(6) केन्द रीर् सरकार, अनुपालन ररपगटा प्राप् त कर लनेे और इसकी पूणाता सुजनजचातत करने के प चात, अजधजनर्म की धारा 2 की उप-धारा (1) के अधीन ‘अंजतम’ अनुमगिन प्रिान करेगी और से जवजनचातर् के बारे में राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन और प्रर्गतिया अजभकरण कग सूजचत करेगी।

(7) र्र्ाजस्ट्र्जत राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन, अजधजनर्म की धारा 2 की उप-धारा (1) के अधीन केन्द रीर् सरकार का अंजतम अनुमगिन प्राप् त करन ेके प चात और अनसूुजचत िनिाजत और अन्दर् परंपरागत वन जनवासी (वन अजधकार की मान्दर्ता) अजधजनर्म, 2006 (2007 का 2) के अधीन अजधकार के बंिगबस्ट्त कग सुजनजचातत करने सजहत र्र्ा लाग,ू अन्द र् सभी अजधजनर्म और उसके अधीन बनाए गए जनर्म के उपबंध की पू्ता और अनुपालना करन े के प चात, र्र्ाजस्ट्र्जत अपर्गिन, पट्टा समनुिेजित करन ेर्ा अनारक्षण करन े के आििे िारी करेंगे।

(8) अजधजनर्म की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन अनारक्षण का अंजतम आिेि, िहां भी दिर्ा गर्ा हा, वन भूजम के अनारक्षण की सूचना र्र्ा जस्ट्र्जत राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन द्वारा, रािपत्र में प्रकाजित की िाएगी ।

(9) अनुमगिन प्राप् त करने की पूरी प्रदमण र्ा इस प्रर्गिन के जलए जवकजसत ननलाइन पगटाल में की िाएगी।

(10) िहां साद्धांजतक अनुमगिन में अजधरगजपत की गई िता का अनपुालन र्र्ा जस्ट्र्जत राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन, से िग वषों से अजधक समर् से प्रतीजक्षत हा, उनमें साद्धांजतक अनुमगिन कग अकृत और िून्द र् समझा िाएगा;

परंत,ु केन्द रीर् सरकार लेखबद्ध दकए िाने वाले कारण के जलए, से प्रस्ट् ताव जिनमें एक हिार ह्े टेर्र से अजधक की वन भूजम अंतवाजलत हा, जिनमें साद्धांजतक रूप से अनुमगिन प्राप् त कर जलर्ा गर्ा हा, सक्षम प्राजधकारी द्वारा चरणवार (अंजतम) अनुमगिन जनम् न अनुपालना के अध्र्धीन प्रिान कर सकता हा :

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 11 (क) प्रजतपूरक उिग्रहण का संिार् और प्रजतपरूक वनीकरण करने के जलए जचजन्दहत और स्ट् वीकृत भूजम की अजधसूचना क्षेत्र के भाग के अनपुात में अनुपालन के जलए प्रस्ट् तुत की गई; और (ख) अन्द र्कगई जवजनर्िाष्ट िता जिसे अनुपालन के जलए केन्द रीर् सरकार उजचत समझे के संबंध में अनपुालन की गई।

(11) उप जनर्म (7) के अधीन अंजतम अनुमगिन िारी करन ेऔर उप जनर्म (8) के अधीन रािपत्र में अजधसूचना िारी हगने के प चात, र्र्ाजस्ट्र्जत संबंजधत वन भूजम कग राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन द्वारा प्रर्गतिया अजभकरण कग सौंपा र्ा समजनिेजित दकर्ा िा सकता हा;

(12) क्षेत्रीर् कार्ाालर्,‘साद्धांजतक’ अनुमगिन प्रिान करत ेसमर् लाग ूकी गई सभी ितों के अनपुालन की मिनीटरी करेगा और राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन और प्रर्गतिया अजभकरण वषा में कम से कम एक बार, साद्धांजतक अनुमगिन के िौरान अजधरगजपत की गई ितों के अनुपालन कग मिनीटर करेगी और मिनीटरी ररपगटा कग ननलाइन पगटाल पर अपलगड करेगा।

(13) प्रस्ट् ताव पर कारावाई करने की संपूणा प्रदमण र्ा राज् र् के जवजभन्द न प्राजधकरण द्वारा इन जनर्म से संलग्न अनसुचूी -। में जवजनर्िाष्ट ट समर् सीमा के भीतर पूरी की िाएगी।

12. कार्ा र्गिना के जलए केन्द रीर् सरकार का पवूा अनमुगिन प्राप् त करन ेहते ुप्रस्ट् ताव—

(1) राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र प्रिासन का नगडल अजधकारी केन्द रीर् सरकार के पूवा अनुमगिन के जलए ननलाइन पगटाल पर राज् र् परामिािात्री सजमजत की जसफाररि के सार्-सार् राष्ट रीर् कार्ा र्गिना कगड के उपबंध के अनुसार सम् र्क रूप से तार्ार दकए गए वन प्रभाग की प्रारूप कार्ा र्गिना प्रस्ट् ततु करेगा;

(2) प्रारूप कार्ार्गिना में अन्द र् बात के सार्-सार् अपर्गजित वन भूजम तत् स्ट् र्ानी प्रजतपरूक वनीकरण भूजमर्ां और उस पर वनीकरण की प्राजस्ट्र्जत के जववरण सजम्मजलत ह गे;

(3) केन्द रीर् सरकार कग प्रस्ट् तुत की गई प्रारूप कार्ा र्गिना की राष्ट रीर् कार्ा र्गिना कगड, राष्ट रीर् वन नीजत, के सार् और वन के संरक्षण तर्ा संवधान के जलए अजधजनर्म की प्रस्ट्तावना के सार् इसकी अनुरूपता की िांच संबंजधत क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा की िाएगी। क्षेत्रीर् कार्ाालर् प्रारूप कार्ा र्गिना कग ितों के सार्-सार् र्ा जबना दकसी ितों के पूवा अनुमगिन िे सकता हा र्ा प्रारूप कार्ा र्गिना में अंत्वाष्ट उपबंध में उपांतरण के सार् उस अवजध के जलए, िासा दक उजचत समझा िाए, अनुमगिन ि ेसकता हा र्ा कारण बतात ेुए उसे अस्ट् वीकार कर सकता हा;

(4) राज् र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षते्र प्रिासन र्ा इसके अजभजहत अजधकारी कार्ा र्गिना के सभी र्ा जवजनर्िाष्ट उपबंध और उस अवजध जिसके जलए कार्ा र्गिना अनुमगदित की गई हा, के संबंध में क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा प्रिान दकए गए अनुमगिन में कार्ा र्गिना के जनिेि का कार्ाान्द वर्न करेंग;े

(5) राि् र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षते्र प्रिासन अनुमगदित कार्ाकारी र्गिना की मध् र्-अवजध पुन्वालगकन करेगा और अपनी जसफाररि के सार् समीक्षा ररपगटा क्षेत्रीर् कार्ाालर् कग प्रस्ट् तुत करेगा और क्षेत्रीर् कार्ाालर् िांच करन ेके प चात अनुमगिन की िता में उपांतरण कर सकता हा, र्ा िेष अवजध के जलए पूवा अनुमगदित कार्ा र्गिना के उपबंध में उपांतरण करत ेुए एक नर्ा पूवा अनुमगिन िारी करेगा र्ा इसके कारण लेखबद्ध करके मध् र्-अवजध पुन्वालगकन की जसफाररि कग अस्ट् वीकार करेगा; और

(6) राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षते्र प्रिासन द्वारा प्रस् तुत पात्र वा्षाक कार्ा र्गिना की ििा में क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा भी जवचार एवं अनुमगिन दकर्ा िा सकता हा।

(7) धारा 2 की उप-धारा (1) के खंड (iv) के अधीन आन ेवाले सभी प्रस्ट् ताव कग चाह ेउनका जवस्ट् तार दकतना भी हग, संबंजधत एकीकृत क्षेत्रीर् कार्ाालर् कग राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र्क्षेत्र प्रिासन द्वारा ननलाइन प्रस्ट् तुत दकए िाएंगे;

(8) उप-जनर्म (1) के अधीन प्राप् त प्रस्ट् ताव की िांच क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा की िाएगी िग िांच के प चात, अनुमगिन िे सकता हा र्ा कारण लेखबद्ध करके उसे अस्ट् वीकार कर सकता हा;

(9) से प्रस्ट् ताव जिनमें वन भूजम के संपूणा र्ा कुछ भाग, जिनमें जवतान सघनता 0.4 र्ा अजधक हैं र्ा मािान में बीस ह्े टेर्र और पहाड़ पर िस ह्े टेर्र से अजधक आकार की अ छी तरह से कटाई वाली वन भूजम के प्रस्ट् ताव, जिनकी जवतान सघनता कुछ भी हग, सजम्मजलत हैं, क्षेत्रीर् सि् त सजमजत कग अग्रेजषत दकए िाएंगे और क्षेत्रीर् सि् त सजमजत इन जनर्म के अधीन जवजनर्िाष्ट रीजत में इनसे जनपटेगी और िबदक प्रस्ट् ताव की िांच करत ेसमर्, 12 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] क्षेत्रीर् कार्ाालर् र्ह सुजनजचातत करेगी दक अंजतम जनणार् राष्ट रीर् कार्ा र्गिना कगड, राष्ट रीर् वन नीजतऔर वन के संरक्षण और संवद्धान संबंधी अजधजनर्म की प्रस्ट् तावना के अनरुूप हा;

(10) इन जनर्म के प्रर्गिन के जलए “वन भूजम से वनस्ट्पजत की समजूचत कटाई’’ का आिर् आकार में एक ह्े टेर्र र्ा उससे अजधक की वन भूजम से सभी प्राकृजतक वनस्ट् पजत कग चाह ेवह दकसी भी रूप में हग उन्द हें काटकर, उखाड़कर र्ा िलाकर हटाना हा लेदकन जवजनर्िाष्ट आकार र्ा प्रिाजतर् के वृक्ष कग जगरान ेके अन्द र् प्रकार कग जिसमें उनका चर्न द्वारा जगराना र्ा िंूि कग जगराना सजम्मजलत हा, पर “वन भूजम से वनस्ट्पजत की समूजचत कटाई’’ के रूप में जवचार नह दकर्ा िाएगा।

13. प्रजतपरूक वनीकरण का सिृन—(1) प्रर्गतिया अजभकरण सी भूजम उपलब् ध कराएगा िग न तग भारतीर् वन अजधजनर्म 1927 (1927 का 16) र्ा दकसी अन्द र् जवजध के अधीन वन के रूप में अजधसूजचत हग, न ही वन जवभाग द्वारा वन के रूप में प्रबंजधत भूजम हग और वह सी भूजम पर प्रजतपरूक वनीकरण (सीए) करने की लागत भी वहन करेगा और प्रजतपूरक वनीकरण भूजम की आव र्कता इन जनर्म के सार् उपाबद्ध अनुसूची-II के अनुसार हगगी :

परंत ुर्ह दक र्दि प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा प्रिान की गई गार-वन भूजम र्ा उसका कगई जहस्ट् सा जवजनर्िाष्ट सघनता के प्रजतपरूक वनीकरण के जलए उपर्ुक् त नह हा, तग वन जवभाग के प्रबंधन जनर्ंत्रण के अधीन सी अवमण जमत अजधसूजचत र्ा अव्गात वन भूजम पर अजतरर् त प्रजतपूरक वनीकरण दकर्ा िाएगा िग िी गई प्रजतपूरक वनीकरण भूजम में सी कमी के आकार से िगगुना हग, और प्रर्गतिया अजभकरण से लेख पर आई अजतरर् त लागत कग भी वहन करेगी:

परंत ुर्ह भी दक र्दि प्रजतपूरकवनीकरण के जलए उपलब् ध कराई िा रही गार-वन भूजम में पहले से ही 0.4 जवतान सघनता र्ा उससे अजधक की वनस्ट् पजतपािा हग रही हा, तग सी भूजम पर पेड़ लगाने की अजतरर् त आव र्कता नह हगगी, लेदकन समर्बद्ध रीजत से वन जवभाग द्वारा वन फसल के सुधार के जलए एक कार्ामण म कार्ााजन्दवत दकर्ा िाएगा:

परंतु र्ह भी दक आपवादिक पररजस्ट्र्जतर् में िब इस खंड के अधीन प्रजतपूरक वनीकरण के जलए अपेजक्षत उपर्ुतिय भूजम उपलब्ध नह हा और, र्र्ाजस्ट्र्जत इस आिर् का प्रमाण पत्र राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र, द्वारा दिर्ा िाता हा,तग अवमण जमतवन भूजम पर प्रजतपूरक वनीकरण हतेु जवचार दकर्ा िा सकता हा िग मामला-िर- मामला के आधार पर केन्द रीर् सरकार की एिेंजसर् र्ा कें रीर् सावािजनक उपमण म के मामले में अपर्गजित दकए िाने वाले प्रस्ट्ताजवत क्षेत्र से िगगुना हगगा:

परंतु र्ह भी दक आपवादिक पररजस्ट्र्जतर् में िब इस खंड के अधीन प्रजतपूरक वनीकरण के जलए अपेजक्षत उपर्ुतिय भूजम उपलब्ध न हग, और र्र्ाजस्ट्र्जत इस आिर् का प्रमाण पत्र राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र्क्षेत्र, द्वारा दिर्ा गर्ा हग, तग अवमण जमतवन भूजम पर प्रजतपरूक वनीकरण पर जवचार दकर्ा िा सकता हा िग मामला-िर- मामला आधार पर का जप्टव कगर्ला ब्लिक के जलए राज्र् सावािजनक के उपमण म के मामले में अपर्गजित दकए िाने के जलए प्रस्ट्ताजवत क्षेत्र से िगगुना हगगा:

परंत ुर्ह और दक र्दि प्रर्गतिया अजभकरण पररर्गिना के जनष्टपािन के जलए कगई गार-वन भूजम अजधग्रहण करता हा, तग केन्द रीर् सरकार के अजभकरण , कें रीर् सावािजनक उपमण म और राज्र् सावािजनक उपमण म मामले में उपरगतिय अपवाि लाग ूनह ह ग।े

(2) इस उप-जनर्म के अधीन प्रजतपूरक वनीकरण कग बढाने के जवजनर्िाष्ट सघनता सी हगगा दक, प्रजतपूरक वनीकरण नपरेिन के िुरू हगन ेके पांचवें वषा में 0.4 र्ा उससे अजधक के न्द र्ूनतम जवतान सघनता का वन जवकजसत हग, और इस क्षेत्र में पर्ााप् त वनस्ट् पजत सामग्री हा िग इसे पररप् व कर न्द र्ूनतम 0.7 जवतान सघनता वाली भूजम बनान ेमें सक्षम बनाता हा;

(3) वनेतर भूजम के उपलब्ध न हगन ेकी ििा में प्रजतपूरक वनीकरण जन्नलजलजखत भूजमर् पर भी दकर्ा िा सकता हा, र्र्ाजस्ट्र्जत िग दक से अपर्गजित भू-क्षेत्र के कम से कम िग गुना र्ा िग वन भूजम अपर्गिन की िा रही हग और उपलब्ध वनतेर भूजम के बीच के अतंर के बराबर, उपलब्ध कराई िाएगी और इनकग भारतीर् वन अजधजनर्म, 1927 र्ा स्ट्र्ानीर् अजधजनर्म के अधीन 'अंजतम' अनुमगिन से पूवा संरजक्षत वन (पीएफ) के रूप में अजधसूजचत दकर्ा गर्ा हा:

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 13 (क) रािस्ट्व वन भूजम अर्ाात िग सरकारी अजभलेख में वन के रूप में ििा भूजम हा लेदकन दकसी भी कानून के तहत वन के रूप में अजधसूजचत नह हा और वन जवभाग द्वारा प्रबंजधत नह हा िासे रािस्ट्व भूजम र्ा िुड़पी िंगल र्ा छगटे र्ा बड़े झाड़ का िंगल र्ािंगल-झाड़ी भूजम र्ाजसजवल-सगर्म र्ाओरेन्द ि वन भूजम और वन भूजम की अन्दर् सभी श्रेजणर्ां, परंतु र्ह हा की इन्दहें राज्र् वन जवभाग के नाम पर हस्ट्तांतररत और िाजखल -खाररि दकर्ा िार्;

(ख) अरुणाचल प्रििे के अवमण जमत अवगीकृत वन का प्रजतपूरक वनीकरण के जलए प्रर्गग दकर्े िाने हतेु जवचार दकर्ा िाएगा परंत ुर्ह दक उन्दहें राज्र् वन जवभाग के नाम पर हस्ट्तांतररत और िाजखल-खाररि दकर्ा िाए;

(ग ) जहमाचल प्रिेि राज् र् की बंिर भूजम, िग संरजक्षत वन की श्रेणी में आती हा, लेदकन न तग सी िमीन पर सीमांकन दकर्ा गर्ा हा और न ही रािस्ट्व अजभलेख में वन जवभाग के नाम पर हस्ट्तांतररत र्ा िाजखल- खाररि दकर्ा गर्ा हा, परंतु उन्दहें राज्र् वन जवभाग के नाम पर हस्ट्तांतररत और िाजखल - खाररि दकर्ा िाए;

(घ) पंिाब, भूजम संरक्षण अजधजनर्म, 1900 की धारा (4) और धारा(5) के अधीन हररर्ाणा, पंिाब और जहमाचल प्रिेि राज्र् में, आन ेवाली भूजम, िग राज् र् वन जवभाग के प्रबंधन और प्रिासजनक जनर्ंत्रण में नह हैं:

परंत ुर्ह दक सी भूजम तब तक राज्र् वन जवभाग के नाम पर अंतररत तर्ा िाजखल खाररि की िाएगी, िब तक दक मामल े िर मामले के आधार पर उसे राज्र् वन जवभाग कग अंतररत दकए जबना, भारतीर् वन अजधजनर्म, 1927 (1927 का 16) के अधीन उन्दहें कें रीर् सरकार द्वारा उन्दहें अजधसूजचत करने क जलए र्र्ाजवजनर्िाष्ट और सहमजत न िी िाए;

(4) जन्नलजलजखत प्रस्ट्ताव के संबंध में अवमण जमत वन भूजम पर न्दर्नूतम िगगुनी सीमा तक प्रजतपरूक वनीकरण बढाने के जलए जविेष ्यकवस्ट्र्ा पर जवचार दकर्ा िा सकेगा, अर्ाात.- (क) जिन राज्र् /संघ राज्र् क्षते्र प्रिासन के पास कुल भौगगजलक क्षेत्र का 33% से अजधक वन क्षेत्र हा और प्रजतपूरक वनीकरण के जलए उपर्ुतिय वनतेर भूजम की अनुपलब्धता का प्रमाण-पत्र राज्र् सरकार/संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन द्वारा (अनसुचूी-III)के अधीन जवजनर्िाष्ट प्रारूप में प्रस्ट्तुत दकर्ा गर्ा हा, इन जनर्म से संलग्न हा। (ख) पारेषण लाइन पररर्गिनाएं, जिसमें वनतेर भूजम का अजधग्रहण नह दकर्ा गर्ा हा। वन भूजम के अपवतान के जलए आवेिन करते समर् उपर्गगकताा एिेंसी द्वारा पारेषण लाइन पररर्गिना में आन ेवाली वनेतर भूजम का कगई अजधग्रहण नह करने का अंडरटेतकंग प्रस्ट्तुत दकर्ा िाएगा;

(ग ) टेलीफगन/नजप्टकल फाइबर लाइनें जबछाना;

(घ) रेिम कीट पालन के जलए िहतूत का वृक्षारगपण दकर्ा िाना ;

(ड़ ) निी के तल से गौण सामग्री का जनष्टकषाण, (च ) संपका मागों, लघ ु िल कार्ों, लघ ु ंसंचाई कार्ों, स्ट्कूल भवन, औषधालर् , अस्ट्पताल, सरकार के छगटे ग्रामीण औद्यगजगक िडे का जनमााण र्ा खनन और अजतमण मण के मामल कग छगड़कर इसी तरह के दकसी अन्दर् कार्ा, िग पहाड़ी जिल में क्षेत्र के लगग कग सीधे लाभाजन्दवत करते हैं और अन्दर् जिल में िहां वन क्षेत्र कुल भौगगजलक क्षेत्र का 50% से अजधक हा, परंत ुवन क्षेत्र का अपर्गिन 5 ह्ेटेर्र से अजधक न हग। (छ) फील्ड फार्ररंग रेंि (एफएफआर) के वास्ट्तजवक प्रभाव क्षेत्र कग अजधजनर्म के अधीन अपर्गिन के जलए जवचार दकर्ा िाता हा र्ा कुल वन क्षेत्र का 10% अपर्गजित दकर्ा िाता हा र्दि फील्ड फार्ररंग रेंि के पूरे क्षेत्र कग अपव्तात करने के जलए प्रस्ट्ताजवत दकर्ा िाता हा। (ि) इस उप-जनर्म के अधीन, राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षते्र प्रिासन द्वारा प्रजतपूरक वनीकरण के प्रर्गिन से चर्जनत दकसी अवमण जमत वन भूजम कग केन्द र सरकार द्वारा स्ट् वीकार दकर्ा िाएगा, िब से अवमण जमत वन का जवतान घनत् व 40 प्रजतित से कम हा और एसे क्षेत्र वन्द र्िीव के प्रबंधन और, संरक्षण के जलए प्रर्गग की िा रही प्राकृजतक र्ा प्रबंजधत घास भूजम नही हा।

(5) जन्नलजलजखत श्रेजणर् के प्रस्ट्ताव के मामल ेमें प्रर्गतिया अजभकरण से काटे िाने वाल ेसंभाजवत पड़े की संख्र्ा के िस गुना अजधक वृक्षारगपण पर आन ेवाले खचा र्ा वनभूजम के अपर्गिन के जलए आए आििे में जवजनर्िाष्ट ट संख् र्ा 14 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] (न्दर्ूनतम 100 पौध की संख्र्ा के अधीन) के रगपण पर आने वाले खचा कग प्रजतपूरक वनरगपण के िुल्क के रूप में प्रर्गतिया अजभकरण से वसूला िाएगा:

(क) पुनवानरगपण के जलए उपर्गग करन ेके उदे्दर् से वन भूजम र्ा उसके जहस्ट्से में प्राकृजतक रूप से उग ेपेड़ कग साफ़ करना;

(ख) एक ह्ेटेर्र तक वन भूजम का अपर्गिन;

(ग) भू-तल पर अजधकार के जबना वन भूजम में भूजमगत खनन;

(6) वन क्षेत्र के जलए खनन पटे्ट के नवीकरण के संबंध में कगई प्रजतपूरक वनीकरण िुल्क नह जलर्ा िाएगा, जिसके जलए प्रजतपरूक वनीकरण के जलए भूजम और वृक्षारगपण की लागत का संिार् पहले ही दकर्ा िा चुका हा;

(7) खान की आंतररक सीमा के सार् सुरक्षा क्षेत्र के अनुरक्षण के जलए जनर्तवन भूजम के अपर्गिन के संबंध में, प्रजतपूरक वनीकरण बढाने के उपबंध, िासा दक अपर्गिन के जलए प्रस्ट्ताजवत संपणूा वन क्षेत्र में लागू हा, सुरक्षा क्षेत्र में जस्ट्र्त वन भूजम के बिले में भी लाग ूह गे।

(8) इन जनर्म से संलग्न अनुसूची-II में उपबंजधत उपबंधग के अनुसार वन्द र्िीव गजलर्ार और संरजक्षत क्षेत्र में अवजस्ट्र्त वन भूजम के समीप प्रजतपूरक वनीकरण हतेु अजभज्ञात वनेतर भूजम कग प्रगत् साहन दिर्ा िाएगा।

14. प्रजतपरूक वनीकरण का प्रबधंन—

(1) जनर्म 13 के उप-जनर्म 1 के के अधीन जवजनर्िाष्ट ट की गई भूजम कग उपर्ु् त आकार के कंमण ीट के खंभ द्वारा सीमांदकत दकर्ा िाएगा और सभी जवल्लंगम से मु् त करके, राज् र्वन जवभाग र्ा संघ राज् र् क्षेत्र वन जवभाग कग सौंप दिर्ा िाएगा, और संबंजधत वन भूजम कग अजधजनर्म के अधीन अंजतम अनुमगिन से पहले भारतीर् वन अजधजनर्म, 1927 (1927 की अजधजनर्म संख् र्ा 16) की धारा 29 के अधीनर्ा तत् समर् प्रवृत् त दकसी अन्द र् जवजध के अधीन, संरजक्षत वन के रूप में अजधसूजचत दकर्ा िाएगा;

(2) उ् त वन अपर्गिन प्रस्ट् ताव के भाग के रूप में अनुमगदित प्रजतपूरक वनीकरण र्गिना के अनसुार राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र्क्षेत्र प्रिासन र्ा प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा प्रजतपूरक वनीकरण के जलए जचजन्दतत और जनजचातत की गई भूजम का रखरखाव और वनीकरण दकर्ा िाएगा और तत् स्ट् र्ानी वन भूजम के अपर्गिन का आिेि िारी हगने के 1 वषा के भीतर प्रजतपूरकवनीकरण का कार्ा प्रारंभ हग िाएगा और केन्द रीर् सरकार प्रजतपरूकवनीकरण के तौर तरीक पर मागििाक जसद्धांत िारी कर सकती हा, जिसमें वे अजभकरण भी सजम्मजलत ह गे िग प्रजतपूरकवनीकरण कर सकते हैं;

(3) र्दि वन भूजम, जिसका अपर्गिन दकर्ा िाना हा, से दकसी पहाड़ी र्ा पवातीर् राज् र्/संघ राज् र् क्षेत्र में हा जिसके भौगगजलक क्षेत्र का िग जतहाई से अजधक वन क्षेत्र हार्ा वह से दकसी िसूरे राज् र्/संघ राज् र् क्षेत्र में जस्ट्र्त हा जिसका भौगगजलक क्षेत्र का एक जतहाई से अजधक वन क्षेत्र हा तग संबंजधत राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षेत्र की सरकार की सहमजत के अधीन रहत ेुए उस िसूरे राज् र् र्ा संघ राज् र् क्षते्र में प्रजतपूरक वनीकरण, मान्द र्ता प्राप् त प्रजतपूरक वनीकरण और भूजम बाक का सृिन दकर्ा िा सकता हा। परंत,ु से मामल में प्रजतपूरकवनीकरण के जलए धनराजि उस राज् र्/संघ राज् र्क्षेत्र के राज् र्प्रजतपूरकवनीकरणजनजध में स्ट् र्ानांतररत की िाएगी जिसमें प्रजतपूरकवनीकरण हतेु भूजम की पहचान की गई हा, और प्रजतपूरक उिग्रहण की गई बची ुई धनराजि उस राज् र् सरकार र्ासंघ राज् र्क्षेत्र के प्रजतपूरकवनीकरण जनजध प्रबंधन और र्गिना प्राजधकरण में िमा की िाएंगी जिनमें वन भूजम कग अपर्गजितकरन ेका प्रस्ट् ताव रखा गर्ा हा। परन्दत ुर्ह और दक से मामल में, िहां उप-जनर्म में जवजनर्िाष्ट ितों िासे दक भौगगजलक क्षेत्र की वन भूजम की प्रजति्ा कग परूा न दकए िाने के कारण उसी राज्र्/संघ राज्र् क्षेत्र में प्रजतपूरक वनीकरण करना संभव नह हा, िहां वन भूजम का अपर्गिन प्रस्ट्ताजवत हा र्ा अन्दर् राज्र्/संघ राज्र् क्षेत्र में, कें रीर् सरकार िनजहत में मामला- िर-मामला आधार पर अन्दर् राज्र् /संघ राज्र् क्षेत्र में प्रजतपूरक वनीकरण की अनुमजत ि ेसकता हा;

(4) (क) कगई राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र्क्षेत्र प्रिासनर्र्ाजस्ट्र्जत,प्रजतपूरक वनीकरण के प्रर्गिन के जलए वन जवभाग के प्रिासजनक जनर्ंत्रण के अधीन एक भूजम बैंक बना सकता हा;

(ख) भूजम बैंक का न्द र्ूनतम आकार 25 ह्े टेर्र का एकल ब् लिक हगगा:

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 15 परंत,ु भारतीर् वन अजधजनर्म, 1927 (1927 का 16) र्ा तत् समर् प्रवृत् तदकसी अन्द र् जवजध के अधीनवन के रूप में घगजषत र्ा अजधसूजचत भूजम में जनरंतर भूजम बैंक हगने की ििा में,संरजक्षत क्षेत्र, टाइगर ररिवा र्ा अजभजहत र्ा अजभज्ञात बाघ र्ा वन्दर्िीव किररडगर के भीतर िमीन के आकार पर कगई प्रजतबंध नह हगगा। (ग) उप जनर्म (5) के अधीन अ्िात प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण के अधीन आने वाली भूजम कग भूजम बैंक में सजम्मजलत दकर्ा िा सकता हा।

(5) (क) कें रीर् सरकार, धारा 2 के उप-धारा(1) अधीन पूवा अनुमगिन अजभप्राप् त करन ेके जलए उपर्गग दकए िान ेवाल े एक प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण तंत्र का जनमााण कर सकती हा;

(ख) दकसी र्जतिय द्वारा प्रत् र्ाजर्तप्रजतपूरक वनीकरण अ्िात दकर्ा िा सकता हा र्दि उसने सी भूजम पर वनीकरण दकर्ा हग जिसपर अजधजनर्म लागू नह हगता हा और वह भूजम सभी जवल्लगंम से म्ु त हग;

(ग) कगई वनीकरण प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण में जगना िाएगा र्दि सी भूजम में मुख् र् रूप से 0.4 र्ा उससे अजधक के जवतान सघनता वाले पेड़ से बना वनस्ट् पजत क्षेत्र हैं और पड़े कम से कम पांच वषा परुाने हैं;

(घ) एक प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण 0.4 र्ा अजधक जवतान सघनता के सार् एक ह्े टेर्र क्षेत्र के वनीकरण कग जव कजसत करके अ्िात दकर्ा िाएगा। 0.4 जवतान सघनता से कम र्ा एक ह्े टेर्र भूजम से कम के क्षेत्र के जवकास के जलए कगई प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण नह हगगा;

(ड.) उप-जनर्म (13) के अधीन प्रजतपरूक वनीकरण की प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण से अिला-बिली की िा सकती हा, परंतु प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण न्द र्नूतम िस ह्े टेर्र के ब् लिक कग कवर करे और उस क्षते्र में प्रजतपूरक वनीकरण के जलए जवजनर्िाष्ट सजन्नर्म के अनुसार बाड़ लगाई गई हग। परंतु र्ह और दक दकसी जवजध के अधीन वन के रूप में घगजषत र्ा अजधसूजचत भूजम में जस्ट्र्त दकसी भी आकार के प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण, संरजक्षत क्षेत्र, बाघ ररिवा र्ा अजभजहत अजभज्ञात बाघ र्ा वन्द र्िीव किररडगर के सार् प्रजतपरूक वनीकरण के जलए बिला िा सकता हा। (च) राष्ट रीर् उद्यान, वन्द र्िीव अभर्ारण् र् र्ा बाघ ररिवा और अजभजहत र्ा अजभज्ञात बाघ र्ा वन्द र्िीव किररडगर से दकसी गांव कग स्ट् वाजछक रूप से पुन:स्ट् र्ापन करन ेके कारण वने्र भूजम खाली करन ेसे अ्िात प्रत्र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण इन जनर्म से उपाबद्ध अनुसूची-II के अनसुार प्रजतपूरक वनीकरण के जलए अहाता प्राप् त करेगा और प्रर्गतिया द्वारा अजभकरण जनर्म (13) के अधीन प्रजतपूरक वनीकरण के बिले उसका इस्ट् तेमाल भी दकर्ा िा सकता हा;

(छ) इस जनर्म के अधीन जचजन्दहत दकए गए प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण का सीमांकन उपर्ु् त आकार के िगस स्ट् तंभ द्वारा दकर्ा िाएगा और उस भूजम कग सभी जवल्लंगम से मु् त करत ेुए, राज् र् सरकार वन जवभाग र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन के वन जवभाग कग सौंप दिर्ा िाएगा और इसे इस अजधजनर्म के अधीन अंजतम अनुमगिन प्रिान करन ेसे पहल ेभारतीर् वन अजधजनर्म, 1927 (1927 का 16) र्ातत् समर् प्रवृत् त दकसी अन्द र् जवजध के अधीन संरजक्षत वन के रूप में अजधसूजचत दकर्ा िाएगा। (ि) केन्द रीर् सरकार समर्-समर् पर प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण के सृिन और प्रजतपूरक वनीकरण भूजम के जलए इसकी अिला-बिली के प्रर्गिन से उसके स्ट् टिक रजिस्ट् री तर्ा प्रबंधन और केन्द रीर् सरकार द्वारा जवजनर्िाष्ट अवजध तक उसके रखरखाव की लागत के बारे में एक जवस्ट् तृत मागाििाक ंसंद्धांत िारी कर सकती हा। (झ) प्रत्र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण हतेु पंिीकृत सभी अजस्ट्तत्व ग्रीन मेण जडट नीजत कार्ाान्दवर्न जनर्म, 2023 के अधीन ग्रीन मेण जडट रजिस्ट्री का रजिस्ट्रीकरण करेंगे और वन भूजम के अपर्गिन के बिले में प्रजतपूरक वनीकरण की उनकी पात्रता के अजतररतिय ग्रीन मेण जडट नीजत कार्ाान्दवर्न जनर्म, 2023के अधीन प्रत्र्ाजर्त प्रजतपू्ता वनीकरण के जलए भी ग्रीन मेण जडट का आवंटन दकर्ा िा सकेगा।

15. इस अजधजनर्म के अधीन अपराध के िगषी ्यकजतियर् के जवरुद्ध कार्ावाही—

(1) कें रीर् सरकार, अजधसूचना िारी करके संबंजधत राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन के प्रभागीर् वन- अजधकारी उप-वन-संरक्षक के ििे के र्ा उससे पपर के दकसी से अजधकारी कग जिसके अजधकारकाररता में वह 16 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] वन भूजम आती हा जिसके संबंध में इस अजधजनर्म के अंतगात कगई अपराध दकर्ा गर्ा हा र्ा इस अजधजनर्म के दकसी भी उपबंध का उल्लंघन ुआ हा, दकसी से न्दर्ार्ालर् में जिसकी अजधकारकाररता में र्ह मामला आता हग, से दकसी ्यकजतिय र्ा प्रजधकारी र्ा संगिन के जखलाफ जिकार्त ििा करन ेके जलए प्राजधकृत कर सकती हा िग दक प्रर्म िषृ्टर्ा इस अजधजनर्म के अधीन दकसी अपराध कग करने का र्ा इसके अधीन बनाए गए दकसी जनर्म के उल्लघंन करन ेका िगषी पार्ा गर्ा हग।

(2) कें रीर् सरकार, दकए गए अपराध र्ा उल्लघंन के संबंध में र्ा तग राज्र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षेत्र प्रिासन र्ा प्राजधकारण र्ा अन्दर् कगई स्रगत के माध्र्म से र्ा स्ट्वतव िानकारी प्रा्त करन ेके पचातात, इसकी िांच के पचातात् उस संबंजधत राज्र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षेत्र और संबंजधत प्राजधकारण कग, जिसके अजधकारकाररता के अंतगात इस अजधजनर्म के अधीन सा अपराध दकर्ा गर्ा हा र्ा उतिय अजधजनर्म के दकसी उपबंध का उल्लघंन दकर्ा गर्ा हा, अजधकारकाररता रखन े वाल े दकसी न्दर्ार्ालर् के समक्ष से अपराधी के जवरुद्ध जिकार्त ििा करने के जलए िानकारी िेगी, और सा दकर्ा िाना सी जिकार्त कग इस प्रकार की सूचना की प्राज्त से पैंतालीस दिन की अवजध के भीतर िार्र दकए िाने के पहल े से प्राजधकृत अजधकारी के जलए पूवााधार हगगा राज्र् सरकार और संबंजधत प्राजधकरण समर्-समर् पर जिकार्तें ििा करने के संबंध में एक आवजधक ररपगटा क्षते्रीर् कार्ाालर् प्रस्ट्ततु करेंगे।

(3) सहार्क महाजनरीक्षक की श्रेणी र्ा उससे उच्च पि वाले अजधकारी कग कें रीर् सरकार द्वारा, अजधसूचना के द्वारा,इस अजधजनर्म के अधीन दकए गए अपराध के जवरुद्ध धारा कानूनी कार्ावाही िुरू करने और जिकार्त ििा करने के दकए प्राजधकृत दकर्ा िा सकता हा।

(4) उप-जनर्म (1) और उप-जनर्म (3) के अतंगात कें रीर् सरकार द्वारा प्राजधकृत अजधकारी र्र्ाजस्ट्र्जत, राज्र् सरकार र्ा संघ राज्र् क्षेत्र प्रिासन, के दकसी अजधकारी र्ा दकसी ्यकजतिय र्ा दकसी अन्दर् प्राजधकारी कग जवजनर्िाष्ट अवजध के भीतर अजधजनर्जमत तर्ा तिधीन बनाए गए जनर्म के उल्लंघन से संबंजधत सी दकसी ररपगटा, िस्ट्तावेज़ र्ा अन्दर् कगई िानकारी प्रस्ट्तुत करन ेके जलए कह सकता हा, जिसे दकसी अजधकारकाररता वाल ेन्दर्ार्ालर् में जिकार्त ििा करने के जलए आवर्क समझा िाए, और सी राज्र् सरकार र्ा सा ्यकजतिय र्ा प्राजधकारी सा करन ेके जलए बाध्र् हगगा।

16. प्रकीणा:—(1) अजधजनर्म की धारा 1 (क) की उप धारा (1) के अधीन उपबंजधत सरकारी अजभलेख के स्ट्पष्टीकरण के प्रर्गिन के जलए, सभी राज् र् सरकारें और संघ राज् र् क्षेत्र प्रिासन, एक वषा की अवजध के भीतर,एसी वन भूजमर् , जिसके अंतगात प्रर्गिनार्ा गरित जविषेज्ञ सजमजत द्वारा अजभज्ञात वन क्षेत्र, अवगीकृत वनभूजमर् र्ा सामुिाजर्क वन भूजम, सजम्मजलत हग, जिन पर अजधजनर्म के उपबंध लाग ूह गे।

(2) वन भूजमर् पर वृक्ष की कटाई जिसे इन जनर्म के अधीन वने्र प्रर्गिन के उपर्गग के जलए अनुमगदित दकर्ा गर्ा हा वहां वृक्ष की कटाई कग न्द र्नूतम और अपररहार्ा संख् र्ा तक सीजमत रखा िाएगा तर्ा र्ह कार्ा स्ट् र्ानीर् वन जवभाग के पर्ावेक्षण के अधीन दकर्ा िाएगा। उससे प्राप् त वनगपि कग राज् र् सरकार/संघ राज् र्क्षेत्र प्रिासन द्वारा जवजनर्िाष्ट रीजत से जनपटान के जलए स्ट् र्ानीर् वन जवभाग कग सौंप दिर्ा िाएगा। िग स्ट् र्ानीर् ग्राम वाजसर् कग उनकी घरेल ूवास्ट् तजवक आव र्कताओं कग पूरा करन ेके जलए जवतरण करन ेकग प्रार्जमकता िेगा।

(3) इन जनर्म के अधीन प्रर्गतिया अजभकरण की लागत पर समजुचत स्ट् र्ार्ी सीमा जचन्द ह के माध् र्म से िमीन पर सीमांदकत िग वन-भूजम वने्र प्रर्गिन उपर्गग के जलए अपर्गजित की गई हा उसका प्रर्गतिया अजभकरण तर्ा वन जवभाग र्ा भूजम स्ट् वाजमत् व जवभाग द्वारा संर्ु् त रूप से उपर्ु् त सवेक्षण दकर्ा िाएगा तर्ा दकसी गार-वन उपर्गग के प्रारंभ से पूवाउसे वन-जवभाग र्ा भू-स्ट् वाजमत् व जवभाग द्वारा प्रर्गतिया अजभकरण कग सौंप दिर्ा िाएगा।

(4) इन जनर्म के अधीन वन-आवरण के प्रर्गिन के जलए भारत वन सवेक्षण द्वारा प्रकाजित नवीनतम भारतीर् वन जस्ट्र्जत ररपगटा में प्रर््ु त आंकड़ और जववरण कग जनर्िाष्ट दकर्ा िाएगा।

(5) केन्द रीर् सरकार, राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षेत्र प्रिासन के अनुरगध के सार् र्ा इसके जबना दकसी प्रस्ट् ताव के संबंध में दिए गए अनुमगिन कग रद्द कर सकती हा और मामला िर मामला आधार पर, िमा दकए गए प्रजतपरूक उिग्रहण कग वापस करन ेका जनणार् ले सकती हा।

(6) वन भूजम के वने्र उपर्गग के अपर्गिन में केन्द रीर् सरकार द्वारा अजधरगजपत की गई ितों कग अंजतम अनुमगिन की तारीख से िग वषा की अवजध के प चात तब तक पररव्तात र्ा उपांतररत नह दकर्ा िाएगा, िब तक कुछ [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 17 आपवादिक पररजस्ट्र्जतर्ां उत् पन्द न न हग र्ा केन्द रीर् सरकार अनुपालन के दकसी अजतरर् त खंड कग अजधरगजपत करना आव र्क न समझे।

(7) भारतीर् वन अजधजनर्म, 1927 (1927 का 16) स्ट् र्ानीर् वन अजधजनर्म र्ा अजधजनर्म से संबजन्दधत मुदे्द के कारण मुकिमें के अधीन र्ा जवचारधीन वन भूजम के प्रस्ट्तावग पर से मामल में न्द र्ार्ालर् /अजधकरण द्वारा दिए गए आिेि के अनुसार कार्ा दकर्ा िाएगा और सी भूजमर् पर र्ह अजधजनर्म उस जतजर् से लागू हगगा िग न्द र्ार्ालर् र्ा अजधकरण द्वारा पाररत जनिेि, र्दि कगई हग, के अनुसार जनधााररत की गई हग।

(8) से कगई प्रस्ट् ताव िग वन (संरक्षण) जनर्मावली, 2003 र्ा वन (संरक्षण) जनर्मावली, 2022 के उपबंध के अधीन पहले से ही प्रस्ट् तुत कर दिए गए हैं और वतामान में सा्द्धांजतक र्ा अंजतम अनुमगिन प्रिान दकए िाने के जलए राज् र् सरकार र्ा संघ राज् र् क्षेत्र प्रिासन र्ा कें रीर् सरकार के जव जभन्द न प्राजधकरण में जवचाराधीन हैं, पर जनम् न प्रकार से कार्ा दकर्ा िाएगा, अर्ाात:

(i) साद्धांजतक अनुमगिन प्रिान दकए गए दकन्दह प्रस्ट् ताव कग मौिूिा जनर्म के उपबंध के तहत जलर्ा िाएगा और उन पर कार्ावाही की िाएगी तर्ा उनकग साद्धांजतक अनुमगिन में जनधााररत ितो में उपांतरण दकए जबना अंजतम अनुमगिन प्रिान करने र्गग् र् समझा िाएगा।

(ii) वतामान जनर्म का कगई उपबंध उन प्रस्ट् ताव पर प्रर्गज् र् हगगा जिन्द ह े अजधजनर्म के अधीन अभी तक साद्धांजतक अनुमगिन जमलना बाकी हा। अनसुचूी-I कें र सरकार की पवूा मिंरूी हते ुप्रस्ट् तुत प्रस्ट्ताव पर कारावाई के जलए समर् सीमा [जनर्म 8(1), जनर्म 9, जनर्म 10 और जनर्म 11 िेखें] कारावाई करन ेवाल ेप्राजधकरण/प्राजधकारी क्षते्रफल (ह्ेटेर्र)/कार्ा दिवस 5*तक 5 से 40* 40 से 100* 100*से अजधक क.राज्र् स्ट्तर पररर्गिना िांच सजमजत 0 30 30 30 डीसीएफ/जिला कले्टर 10 10 10 20 डीसीएफ/सीएफ/नगडल अजधकारी द्वारा स्ट्र्ल का जनरीक्षण 5 5 20 20 नगडल अजधकारी/पीसीसीएफ द्वारा कारावाई 5 10 15 15 राज्र् सरकार 10 15 15 15 उप-र्गग 30 70 70 100 ख. क्षेत्रीर् कार्ाालर् पूणाता की िांच करन ेके जलए परीक्षण 3 3 3 3 क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा प्रस्ट्ताव का परीक्षण एवं कारावाई 5 5 5 5 क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा स्ट्र्ल जनरीक्षण 0 0 15 15 क्षेत्रीर् अजधकार प्रा्त सजमजत द्वारा परीक्षण एवं अनुमगिन 0 20 20 20 सक्षम प्राजधकारी (सीए) द्वारा कारावाई और अनुमगिन 5 5 5 5 सीए के अनुमगिन की संसूचना 2 2 2 2 कुल 15 35 50 50 कुल (क+ख) 45 105 120 150 ग. पर्ाावरण, वन पूणाता की िांच करन ेके जलए परीक्षण 3 3 4 4 18 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] और िलवार्ु पररवतान मंत्रालर् प्रस्ट्ताव का परीक्षण एवं कारावाई 6 6 5 5 क्षेत्रीर् कार्ाालर् द्वारा स्ट्र्ल जनरीक्षण 10 10 20 20 परामिािात्री सजमजत 20 20 20 20 सक्षम प्राजधकारी (सीए) द्वारा अनुमगिन 10 10 10 10 सीए के अनुमगिन की संसूचना 1 1 1 1 कुल 50 50 60 60 कुल (क+ग) 85 120 160 160 *उन प्रस्ट्ताव के जलए समर्-सीमा जवजहत की गई हा िग राज्र्/संघ राज् र् क्षेत्र र्ा प्रर्गतिया अजभकरण से अजतररतिय जववरण मांगने में लग ेसमर् के अलावा सभी प्रकार से पणूा हैं। **** ‘अजंतम’ अनमुगिन प्रिान करन ेके जलए प्रस्ट् ताजवत समर्-सीमा स्ट्तर गजतजवजध समर् (दिन) राज्र् स्ट्तर प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा प्रजतपरूक िलु्क के संिार् के जलए मांग पत्र िारी करना 2 नगडल अजधकारी द्वारा मांग पत्र का अनुमगिन 3 प्रर्गतिया अजभकरण द्वारा प्रजतपरूक िलु्क का संिार् और िस्ट्तावेज़/प्रमाणपत्र िमा करना 5 डीएफओ द्वारा अनुपालन ररपगटा की िांच दकर्ा िाना और डीएफओ द्वारा सीएफ/सीसीएफ कग सूजचत करते ुए वन संरक्षण अजधजनर्म, 1980 के नगडल कार्ाालर् कग पूणा अनुपालन ररपगटा अग्रेजषत दकर्ा िाना। 5 नगडल अजधकारी द्वारा अनुपालन ररपगटा की िांच दकर्ा िाना और कजमर् , र्दि कगई हग, कग अनुपालन के जलए डीएफओ कग िारी दकर्ा िाना, र्ा पूणा अनुपालन ररपगटा कग एमओईएफसीसी/क्षेत्रीर् कार्ाालर् कग अग्रेजषत करना। 10 उप-र्गग 25 पर्ाावरण, वन और िलवार्ु पररवतान मंत्रालर्, नई दिल् ली/क्षेत्रीर् कार्ाालर् अनुपालन ररपगटा की िांच, प्रर्गतिया अजभकरण से काम् पाखाते में प्रा्त प्रजतपूरक उद्ग्रहण की अिार्गी की पुजष्ट करना और कजमर् का मुद्दा, र्दि कगई हग, र्ा स्ट् तर-II अनुमगिन कग िारी करना 20 उप-र्गग 20 कुल र्गग 45 ***** अनसुचूी- II [जनर्म 13 (1) और जनर्म 14 (4) िेखें] प्रजतपरूक वनीकरण स ेसबंजंधत भूजम आव र्कता के जलए उपबधं मण .स.ं प्रजतपरूक वनीकरण (सीए) भजूम का जववरण वने् र उपर्गग के जलए अपर्गजित की गई वन भूजम की तलुना में प्रजतपरूक वनीकरण भजूम का आकार

(1) (2) (3)

1. भूजम जिस पर इस अजधजनर्म के उपबंध लाग ूनह हा समतुल् र्

2. भूजम िग सरकारी ररकाडा में ‘वन’ के रूप में अजभजलजखत हा िग गणुा [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 19 परंत ुजनम् नजलजखत सभी ित: पणूा नह करती हैं :

(क) तत् समर् प्रवृत् त दकसी जवजध के अधीन वन अजधसूजचत हगना। (ख) वन जवभाग द्वारा वन के रूप में प्रबंजधत करना। (कें रीर् सरकार तर्ा राज् र् सरकार/संघ राज् र्क्षेत्र प्रिासन के प्रस्ट् ताव पर ही र्ह जवधान अनुज्ञात हा)।

3. अवमण जमत अजधसूजचत र्ा अवगीकृत वनभूजम। (र्ह जवतरण मामला-िर-मामला आधार पर का जप्टव कगर्ला ब् लि् स के जलए राज् र् के सावािजनक के उपमण म और मामला- िर-मामला आधार पर केन्द रीर् सरकार के अजभकरण /केन्द रीर् सावािजनक उपमण म के मामले में हा) िग गणुा

4. उपर्ुा् त मण म संख् र्ा (1) के अधीन प्रजतपूरक वनीकरण के जलए र्गग् र् भूजम, एक ब् लिक में प चीस ह्े टेर्र र्ा उससे ज् र्ािा के आकार की भूजम । िस ह्े टेर्र से कम की प्रजतपरूक वनीकरण भूजम कग तब तक स्ट् वीकार नह दकर्ा िाएगा िब तक िस ह्े टेर्र से कम की प्रजतपूरक वनीकरण भूजम की आव र्कता न हग; से मामल में प्रर्गतिया अजभकरण कग वृक्षारगपण की तारीख से बीस वषों की अवजध के जलए इस प्रकार उिाए गए प्रजतपूरक वनीकरण के संरक्षण की अजतरर् त लागत वहन करनी हगगी। अजधकतम प चीस प्रजतित की छूट के अधीन िस ह्े टेर्र के प्रत् र्ेक अजतरर् त ब् लिक र्ा उसके भाग के जलए पांच प्रजतित कम। र्ह प्रजतित केवल प चीस ह्े टेर्र के न्द र्नूतम आकार से अजधक अजधगृहीत अजतरर् त ब् लिक आकार पर प्रर्गज् र् हगगा।

5. उपर्ुा् त मण म संख् र्ा (1) के अधीन प्रजतपूरक वनीकरण के जलए र्गग् र् भूजम, एक ब् लिक में िग भूजम 25 ह्े टेर्र आकार से कम हा परंत ु10 ह्े टेर्र से अजधक हा। र्दि प्रजतपरूक वनीकरण भूजम की आव र्कता प चीस ह्े टेर्र से कम हा लेदकन आकार में िस ह्े टेर्र से अजधक हा, तग प्रजतपूरक वनीकरण के जलए अजतरर् त भूजम के उपबंध लाग ू नह ह गे लेदकन प्रर्गतिया अजभकरण कग वृक्षारगपण की तारीख से बीस वषों की अवजध के जलए इस प्रकार उिाए गए प्रजतपरूक वनीकरण के संरक्षण की अजतरर् त लागत वहन करनी हगगी। प्रत् र्के पांच ह्े टेर्र लघु ब् लिक आकार र्ा उसके भाग के जलए पांच प्रजतित अजधक

6. उपर्ुा् त मण म संख् र्ा (1) के अधीन प्रजतपूरक वनीकरण के जलए र्गग् र् भूजम तर्ा संरजक्षत क्षेत्र की अजधसूजचत सीमा के अधीन अवजस्ट्र्त हा। प चीस प्रजतित कम

7. उपरग् त मण मांक (1) र्ा (2) के अधीन प्रजतपरूक वनीकरण के जलए र्गग् र् भूजम तर्ा एक राष्ट रीर् उद्यान र्ा वन्द र्िीव अभर्ारण् र् र्ा एक संरजक्षत क्षते्र र्ा बाघ ररविा के सार् अन्द र् संरजक्षत क्षेत्र और अजनजहत र्ा अजभज्ञात बाघ र्ा वन्द र्िीव गजलर्ार कग िगड़ने वाला क्षेत्र, की अजधसूजचत सीमा की जनरंतरता में जस्ट्र्त हा। पन्द रह प्रजतित कम

8. उपरग् त मण मांक (1) र्ा (2) के अधीन प्रजतपरूक वनीकरण के जलए र्गग् र् भूजम तर्ा भारतीर् वन अजधजनर्म, 1927 (1927 का 16) र्ा अन्द र् जवजध के अधीन वन के रूप में अजधसूजचत वन भूजम के जनकटवती जस्ट्र्त हा। दकसी भी आकार की प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण भूजम कग स्ट् वीकार दकर्ा िा सकता हा र्दि वह दकसी जवजध के अधीन अजधसूजचत वन भूजम के पास हग। िस प्रजतित कम 20 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

9. प्रजतपूरक वनीकरण भूजम वन्द र्िीव अ् र्ारण् र्, राष्ट रीर् उद्यान र्ा बाघ ररिवा से गांव (वने्र भूजम में जस्ट्र्त), के संपूणा तर्ा स्ट् वाजछक पनु:स्ट् र्ापन/आवास से से अभर्ारण् र् उद्यान र्ा ररिवा, र्ा एक संरजक्षत क्षेत्र र्ा बाघ ररिवा के सार् अन्द र् संरजक्षत क्षेत्र और नामजनर्िाष्ट/जचजन्दहत वन्द र्िीव गजलर्ार कग िगड़ने वाला क्षेत्र, र्र्ाजस्ट्र्जत, के बाहर वने्र पर उपलब् ध कराई गई। (क) राष्ट रीर् उद्यान/ वन्द र्िीव अभर्ारण् र्/ बाघ ररिवा में गांव र्ा आवास स्ट् र्ल कग खाली कराने के माध् र्म से प्रजतपूरक वनीकरण भूजम के बराबर वन भूजम के िुद्ध वतामान मूल् र् के भुगतान से छूट। रटप् पण: ‘’िुद्ध वतामान मूल् र्’’ का प्रजतपूरक वनीकरण जनजध अजधजनर्म, 2016 (2016 का 38) की धारा 2 के खंड (ञ) में समनुिेजित अर्ा वही हगगा। (ख) स्ट् वाजछक पनु:स्ट् र्ापन के माध् र्म से एक गांव द्वारा खाली दकए गए स्ट् र्ान पर (वने्र भूजम: अ्िात प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण) 1:1.25 के अनुपात में प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण (परंत ु इसे वन्द र्िीव अभर्ारण् र्, राष्ट रीर् उद्यान र्ा बाघ ररिवा, के भाग के रूप में तर्ा संरजक्षत क्षेत्र र्ा आरजक्षत क्षेत्र के रूप में भी अजधसूजचत दकर्ा िाए) (ग) अजतरर् त प्रत् र्ाजर्त प्रजतपूरक वनीकरण 0.5 ह्े टेर्र प्रजत पनुस्ट् र्ााजपत पररवार के मलू् र् पर। रटप् पणी 1: प्रर्गतिया अजभकरण र्ा प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण जवकासकताा र्ह सुजनजचातत करेगा दक पनु:स्ट् र्ापन स्ट् वाजछक हा। रटप् पणी 2: केन्द रीर् सरकार र्ा राज् र् सरकार की सुसंगत र्गिनाओं के अधीन भी कगई क्षजतपू्ता पुन:स्ट् र्ापनकताा र्ा प्रर्गतिया अजभकरण र्ा प्रत् र्ाजर्त प्रजतपरूक वनीकरण जवकासकताा कग िेर् नह हगगा। रटप् पणी 3 : राज् र् सरकार भी इस उपबंध का उपर्गग कर सकती हा, र्दि सी र्गिना पर कगई कें रीर् सहार्ता प्राप् त नह की िाती हा। अनसुचूी—III राज्र् सरकार द्वारा िारी दकर्ा िान ेवाला राज्र्/सघं राज्र् क्षते्र में प्रजतपरूक वनरगपण के जलए भजूम की अनपुलब्धता का प्रमाण पत्र । [जनर्म 13 िेखें] सं……… दिनांक……… मैं..................................., पिनाम................... (राज्र्/संघ राज्र् क्षेत्र का नाम) र्ह प्रमाजणत करता ह ंदक:

i. (राज्र्/संघ राज्र् क्षेत्र का नाम) ......... के प्रत्र्ेक जिले में उपलब्ध वने्र भूजम, रािस्ट्व भूजम, िुडपी िंगल, छगटे झाड़ का िंगल, बड़े झाड़ का िंगल, िंगली झाड़ी भूजम, जसजवल-सगर्म भूजम और वन भूजम की अन्दर् सी सभी श्रेजणर् (वन जवभाग के प्रबंधन और प्रिासजनक जनर्ंत्रण के अधीन वन भूजम कग छगड़कर), जिन पर वन (संरक्षण एवं संवद्धान) अजधजनर्म, 1980 के उपबंध लाग ूहगते हैं,से संबंजधत प्रासंजगक ररकिडा की िांच की गई हा; और ii. मैंने इस प्रमाणपत्र कग िारी करने के जलए स्ट्वर्ं की संतुष्टी हतेु आगे की आवर्क िांच भी की हा। इस प्रमाणपत्र कग िारी करने के जलए आवर्क प्रासंजगक अजभलखे की िांच और इस प्रकार की आगे की िांच के आधार पर, मैं प्रमाजणत करता ह ंदक संपूणा (राज्र्/संघ राज्र् क्षेत्र का नाम) मेंवन (संरक्षण एवं संवधान) अजधजनर्म, 1980 के उपबंध लाग ू हगने वाली और कें रीर् सरकार के मौिूिा दििा-जनिेि के अनुसार [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 21 वने्र प्रर्गिन के जलए अपव्तात वन भूजम के बिल ेमें प्रजतपरूक वनीकरण के जलए उपर्गग की िा सकन े वाली वने्र भूजम, रािस्ट्व भूजम, ज़़ुडपी िंगल, छगटे झाड़ का िंगल, बड़े झाड़ का िंगल, िंगली झाड़ी भूजम, जसजवल-सगर्म भूजम और वन भूजम की अन्दर् श्रेजणर् , (वन जवभाग के प्रबंधन और प्रिासजनक जनर्ंत्रण के अधीन वन भूजम के अलावा) में आन ेवाली भूजम उपलब्ध नह हा। मेरे हस्ट्ताक्षर और मुहर से आि...........दिन .............कग िारी दकर्ा गर्ा। हस्ट्ताक्षर और आजधकाररक मुहर [फा.सं. एफसी-11/118/2021-एफसी] रमेि कुमार पाण् डेर्, वन महाजनरीक्षक MINISTRY OF ENVIRONMENT, FOREST AND CLIMATE CHANGE NOTIFICATION New Delhi, the 29th November, 2023 G.S.R. 869(E).—In exercise of the powers conferred by sub-section (1) of section 4 of the Van (Sanrakshan Evam Samvardhan) Adhiniyam, 1980 (69 of 1980) and in supersession of the Forest (Conservation) Rules, 2022, except as respects things done or omitted to be done before such supersession, the Central Government hereby makes the following rules, namely:- -

1. Short title, extent and commencement.—(1) These rules may be called the Van (Sanrakshan Evam Samvardhan) Rules, 2023.

(2) They shall come into force on the 1 st Day of December 2023.

2. Definitions.—(1) In these rules, unless the context otherwise requires, -

(a) “accredited compensatory afforestation” means a system of proactive afforestation to be used for obtaining prior approval under sub-section (1) of section 2 of the Adhiniyam.

(b) "Adhiniyam" means the Van (Sankashan Evam Samvardhan) Adhiniyam, 1980 (69 of 1980);

(c) “Advisory Committee” means the Advisory Committee constituted under section 3 of the Adhiniyam;

(d) “compensatory afforestation” means afforestation done in lieu of the diversion of forest land for nonforest purpose under the Adhiniyam;

(e) “compensatory levies” includes all money and funds specified in clauses (iii) and (iv) of sub-section

(3) of section 4 of the Compensatory Afforestation Fund Act, 2016 (38 of 2016);

(f) “Conservator of Forests” means Conservator of Forests, Chief Conservator of Forests, the Regional Chief Conservator of Forests or an officer equivalent to Conservator of Forests appointed by the State Government or Union territory Administration to hold the charge of a forest circle having jurisdiction over the forest land for which the prior approval of the Central Government is required;

(g) “Deputy Director General of Forests (Central)” means head of the Regional Office appointed by the Central Government;

(h) “dereservation” means an order issued by the State Government or Union territory Administration or any authority thereof, for change in the legal status of a land statutorily or otherwise recognised as forest to any other category of land;

(i) “diversion” means an order issued by the State Government or Union territory Administration or any authority thereof for the use of any forest land for non-forest purpose or assignment of a lease of any forest land for non-forest purpose;

(j) "District Collector" includes Deputy Commissioner, to hold the charge of the Administration of the revenue district having jurisdiction over the forest land for which the prior approval of the Central Government under the Adhiniyam is required;

(k) “Divisional Forest Officer” means Divisional Forest Officer, Deputy Conservator of Forests or an officer equivalent to the Divisional Forest Officer or Deputy Conservator of Forests appointed by the State Government or Union territory Administration to hold the charge of a Forest Division having 22 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] jurisdiction over the forest land for which the prior approval of the Central Government under the Adhiniyam is required;

(l) “land bank” means the lands identified or earmarked, as the case may be, by the State Government and Union territory Administration for raising compensatory afforestation in lieu of forest land proposed for diversion or diverted under the Adhiniyam;

(m) “linear project” means project involving linear diversion of forest land for the purposes such as roads, pipelines, railways, transmission lines, slurry pipeline, conveyor belt etc.;

(n) “National Working Plan Code” means a code prepared by the Central Government for the preparation of Working Plans;

(o) “Nodal Officer” means any officer not below the rank of Chief Conservator of Forests, authorised by the State Government or Union territory Administration, as the case may be, or the senior most officer in the Forest Department of the concerned Union territory, if there is no post of Chief Conservator of Forests or above in the Department, for the purpose of implementation of the Adhiniyam and rules thereof and to deal with and to make correspondence with the Central Government, in the matter of forest conservation;

(p) “Project Screening Committee” means the Project Screening Committee constituted under rule 8;

(q) “Regional Empowered Committee” means the Regional Empowered Committee constituted under subrule (1) of rule 6;

(r) “Regional Office” means a Regional Office established by, and controlled by the Central Government for the purpose of these rules;

(s) “survey” means any activity to be taken up prior to initiating commissioning of a project or any activity undertaken for the purpose of exploring, locating or proving mineral deposits including coal, petroleum and natural gas before carrying out actual mining in the forest land, that includes survey, investigation, prospecting, exploration, including drilling therefor, etc.;

(t) “technological tool” means Geographical Information System based digital tools such as Decision Support System facilitating the decision making process of proposal seeking prior approval under the Adhiniyam;

(u) “user agency” means any person, organisation or legal entity or company or Department of the Central Government or State Government or Union territory Administration submitting a proposal under section 1 of the Adhiniyam;

(v) “working permission” means permission granted to linear projects before final approval to mobilise the resources to commence the preliminary project work other than black topping, concretisation, laying of railway tracks, charging of transmission lines, etc. or as specified in the in-principle approval;

(w) “Working Plan” means the document prepared as per the provisions of the National Working Plan Code published by the Central Government from time to time and having prescriptions for scientific management of the forests of a particular Forest Division for a specified period;

(2) Words and expressions used herein and not defined in these rules but defined in the Adhiniyam shall have the same meaning as respectively assigned to them in the Adhiniyam.

3. Constitution of Advisory Committee. - (1) The Central Government may, by an order, constitute an Advisory Committee to advise the Central Government with regards to the grant of approval under sub-section (1) of section 2 in respect of proposals referred under sub-rule (2) of rule 10; and any matter connected with the conservation of forests referred to the Advisory Committee by the Central Government.

(2) The Advisory Committee shall consist of the following persons, namely: -

(a) Director General of Forests, Ministry of Environment, Forest and Climate Change – Chairperson;

(b) Additional Director General of Forests, dealing with the forest conservation in the Ministry of Environment, Forest and Climate Change – Member;

(c) Additional Director General of Forests, dealing with wildlife in the Ministry of Environment, Forest and Climate Change – Member;

(d) Additional Commissioner (Soil Conservation), Ministry of Agriculture and Farmers’ Welfare – Member;

(e) Three non-official experts to be nominated by the Central Government representing one each from the fields of ecology, engineering and development economics – members;

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 23

(f) Inspector General of Forests dealing with forest conservation and Adhiniyam thereof – Member- Secretary

(3) The Chairperson may co-opt the domain experts as special invitees to a meeting of the Advisory Committee.

(4) The Chairperson shall preside over the meeting of the Advisory Committee and in his absence, the Additional Director General of Forests, dealing with forest conservation, in the Ministry of Environment, Forest and Climate Change shall preside over the meeting.

4. Terms and conditions of non-official Members of Advisory Committee. –

(1) A non-official Member shall hold his office for a period of up to two years from the date of his nomination or as specified by the Central Government.

(2) A non-official Member shall cease to hold office if he becomes of unsound mind, or insolvent or is convicted for an offence which involves moral turpitude.

(3) A non-official Member may be removed from his office if he fails to attend three consecutive meetings of the Advisory Committee without any sufficient cause or reason.

(4) Any vacancy caused by any reason mentioned in clauses (b) and (c) shall be filled by the Central Government for the remaining term of two years.

(5) The non-official Members of the Advisory Committee shall be entitled to a travelling allowance and daily allowance as are admissible to an officer of the Government of India holding Group ‘A’ post.

(6) Provided that where a Member of the Parliament or a Member of a State Legislature has been appointed as a member of the Advisory Committee, he shall be entitled to the travelling allowance and daily allowances in accordance with the Salary, Allowances and Pension of Members of Parliament Act, 1954 (30 of 1954) or the respective provisions of law pertaining to the member of the concerned State Legislature, as the case may be.

5. Conduct of business of the Advisory Committee.—(1) The Chairperson of the Advisory Committee shall call the meeting of the Committee at least once a month, whenever considered necessary;

(2) the meeting of the Advisory Committee shall ordinarily be held at New Delhi except when the Chairperson considers it necessary to inspect the proposed land, then the Chairperson may direct the meeting to be held at a place from where the proposal can be inspected.

(3) the quorum of the meeting of the Advisory Committee shall be five including the Chairperson.

(4) The Member-Secretary shall prepare an agenda of the meeting and present the proposals and matters referred to the Advisory Committee by the Central Government.

(5) The Advisory Committee shall examine in its meeting the proposal or the matter and, in urgent cases, the Chairperson may direct the proposal or the matter to be sent to the members for the their opinion, which shall be furnished to the Committee within the stipulated time.

(6) the user agency may be allowed to attend the meeting of the Advisory Committee for such duration as may be necessary to furnish such information or clarify any issue which may pertain to it.

(7) After the examination of the proposal or the matter, the Advisory Committee shall make its recommendation/advise to the Central Government.

6. Constitution of Regional Empowered Committee.—(1) The Central Government may, by an order, constitute a Regional Empowered Committee at each of the Regional Offices to examine proposals referred to it under sub-rule (3) of rule 10 and grant approval or rejection of proposals under sub-section (1) of section 2.

(2) The Regional Empowered Committee at each of the Regional Offices shall consist of the following persons, namely: -

(a) Deputy Director General of Forests (Central) or an officer nominated by the Central Government – chairperson;

(b) Three non-official members from amongst eminent persons who are experts in the field of forestry and allied disciplines – members;

(c) The senior-most officer amongst officers of the rank of Conservator of Forests and Deputy Conservator of Forests in the Regional Office – member-secretary.

(3) The chairperson of the Regional Empowered Committee may co-opt the domain experts as special invitees to the meeting.

24 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(4) One representative each from the Forest Department and Revenue Department of the State or the Union territory Administration, not below the rank of Director to the Government of India, shall be invited by the Regional Empowered Committee to attend the meeting as a special invitee, in the examination of the proposals.

(5) Terms and conditions of non-official members of Regional Empowered Committee.—

(1) A non-official member shall hold his office for a period of up to two years from the date of his nomination.

(2) A non-official member shall cease to hold office if he becomes of unsound mind, insolvent, or is convicted for an offence involving moral turpitude.

(3) A non-official member may be removed from his office if he fails to attend three consecutive meetings of the Committee without any sufficient cause or reason.

(4) Any vacancy of a member in the Regional Empowered Committee caused by any reason mentioned in sub-rules (2) and (3) shall be filled by the Central Government for the remaining term of the member in whose place vacancy has arisen.

(5) The non-official members of the Regional Empowered Committee shall be entitled to a travelling allowance and daily allowance as are admissible to an officer of the Government of India holding Group ‘A’ post carrying the same scale of pay.

(6) Provided that where a Member of the Parliament or a Member of a State Legislature has been appointed as a member of the Advisory Committee, he shall be entitled to the travelling allowance and daily allowances in accordance with the Salary, Allowances and Pension of Members of Parliament Act, 1954 (30 of 1954) or the respective provisions of law pertaining to the member of the concerned State Legislature, as the case may be.

7. Conduct of business of Regional Empowered Committee. —The Regional Empowered Committee shall conduct its business as follows, namely:—

(1) The chairperson of the Regional Empowered Committee shall hold the meeting whenever considered necessary, but not less than once a month.

(2) The meetings of the Regional Empowered Committee shall be held at the headquarters of the Regional Office:

Provided that where the chairperson of the Regional Empowered Committee is satisfied that inspection of site of forest land proposed to be used for non-forest purposes shall be necessary or expedient in connection with the consideration of the proposal referred, he may direct that the meetings of the Regional Empowered Committee be held at a place other than headquarters of the Regional Office for such inspection of site;

(3) The chairperson of the Regional Empowered Committee shall preside over the meeting of the Regional Empowered Committee and in his absence, Deputy Director General of Forests holding the charge of other Regional Office or Inspector General of Forests dealing with the matter related to the Adhiniyam, as may be authorised by the Central Government, may chair the meeting of the Regional Empowered Committee.

(4) Every proposal referred to the Regional Empowered Committee for advice or decision shall be considered in the meeting of the Regional Empowered Committee:

Provided that in urgent case, the chairperson of the Regional Empowered Committee may direct that documents may be circulated and sent to the members of the Regional Empowered Committee for their opinion within the stipulated time.

(5) The quorum of the meeting of the Regional Empowered Committee shall be three.

(6) The user agency may be allowed to remain present for such duration during a meeting as may be necessary to furnish such information or clarify any issue which may pertain to it.

(7) The member-secretary shall prepare agenda of the meeting and present the proposals and matters connected with the Adhiniyam before the committee for making appropriate recommendations and decisions thereafter.

8. Constitution of Project Screening Committee.—(1) The State Government and Union territory Administration may, by an order, constitute a Project Screening Committee to examine the completeness of the proposal submitted under clauses (i), (ii) or (iii) of sub-section (1) of section 2 of the Adhiniyam.

(2) The Project Screening Committee shall consist of the following persons, namely:- [भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 25 a. Nodal Officer – chairperson;

b. Concerned Chief Conservator of Forests/ Conservator of Forests – member;

c. Concerned Divisional Forest Officer- member;

d. Concerned District Collector or his representative (Not below the rank of Deputy Collector) –member;

e. Divisional Forest Officer in the office of Nodal Officer- member-secretary

(3) The Project Screening Committee shall meet at least twice every month and the quorum of the meeting of the Project Screening Committee shall be three.

(4) The Project Screening Committee shall, after examination of the proposals, make recommendation to the State Government or Union territory Administration, as the case may be.

9. Proposals for prior approval of Central Government.—(1) The approval shall be accorded by the Central Government in two stages, namely, (i) ‘In- Principle’ approval; and (ii) ‘Final’ approval.

(2) The user agency shall submit an application to the State Government or Union territory Administration for approval of the Central Government under sub-section (1) of section 2 of the Adhiniyam for dereservation of forest land, use of forest land for non-forest purposes or for assignment of lease online, through the web portal of the Central Government.

(3) A proposal identity number shall be generated online for the proposal submitted by the user agency and the said identity number shall be used for all future references;

(4) The copy of the proposal shall be simultaneously forwarded to the concerned Divisional Forest Officers, District Collectors, Conservator of Forests, Chief Conservator of Forests and the Nodal Officer of the State Government or Union territory Administration each of whom shall independently undertake preliminary examination of the completeness of documentation of the proposal.

(5) The Project Screening Committee shall examine the proposal received from the State Government or Union territory Administration, except proposals involving forest land of five hectares or less, that the proposal is complete in all respects and the proposed activity is not in any restricted area or category.

(6) The Project Screening Committee, for the purpose of screening, may call the user agency for clarification or additional documents, if any.

(7) The Project Screening Committee shall examine the proposal for its completeness and correctness and ensure that deficiencies in the proposal, if any, are identified and the member-secretary shall inform in this regard to the user agency.

(8) The proposals returned to the user agency shall be re-submitted after addressing the deficiency, as identified under sub-rule (7) above, within a period of ninety days, failing which the proposal shall stand de-listed.

(9) In case the user agency submits the information within the given time the proposal will be re-examined by the Project Screening Committee and in case the proposal is not complete in all respect then the same will be de-listed for the reasons to be recorded in writing:

Provided that the after de-listing of the proposal by the Project Screening Committee, the user agency, after addressing the deficiencies, can re-list the proposal only once using the same proposal identity number, as generated under sub-rule (2) above, which will again be examined by the PSC as per procedure given in sub-rule

(5) to (7) above and in case the proposal is found still incomplete, it will be rejected and deleted permanently from the portal.

(10) The complete proposal with the proposal identity number shall be forwarded to concerned Divisional Forest Officer concerned, District Collectors, Conservator of Forests or Chief Conservator of Forests for field verification.

(11) Where the forest land or part thereof included in the proposal is not under the management control of the Forest Department, the District Collector shall get the land schedule and map of the forest land included in the proposal authenticated online through joint verification by officers of the Revenue Department and Forest Department.

(12) In addition to every proposal verified in the field by the Divisional Forest Officer concerned, field inspection shall be simultaneously undertaken for every proposal that involves more than forty hectares of forest land by the Conservator of Forests concerned and for every proposal that involves more than hundred hectares of forest land by the Nodal Officer.

(13) The proposal, except involving forest land of five hectares or less, shall come up for consideration of the Project Screening Committee within the period specified in Schedule I, annexed to these rules, from 26 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)] submission of the completed proposal under sub-rule (8), or (9), as the case may be, and the Project Screening Committee shall examine the feasibility of the proposal for the purpose of recommending it to the State Government or Union territory Administration along with mitigation measures to be adopted by the user agency:

Provided that the Project Screening Committee may seek from the user agency any clarification, additional detail or modification of the proposal in terms of change in forest land proposed for diversion on account of reasons such as minimising the requirement of forest land or minimising adverse impact on forest and wildlife, change in compensatory afforestation land proposed or change in measures proposed to be adopted by the user agency to mitigate the adverse impact of the project, and for this purpose it may ask the user agency to make a presentation:

Provided further that the proposal shall be reconsidered by the Project Steering Committee in case of timely submission of complete information and clarification and additional detail by the user agency online and in case the user agency modifies the original proposal substantially and makes major changes such as change in the forest land or land use plan, the Project Steering Committee may return the proposal to complete the steps given in sub-rule (7) to (11) and therefore the steps in this sub-rule shall also be repeated in such cases.

(14) Where the user agency fails to submit correct information, additional detail or a modified proposal within the period as specified, the proposal shall stand rejected:

Provided that if the user agency satisfies the Project Screening Committee that the reason for the delay was beyond its control, the Project Screening Committee may reconsider the proposal, after the reasons to be recorded in writing and recommend it to the State Government or Union territory Administration, as the case may be;

(15) The proposal involving forest land of up to five hectares, shall after their examination at the level of Divisional Forest Officer be forwarded by him directly to the Nodal Officer and the Nodal Officer shall forward such proposals to the State Government or Union territory Administration along with his recommendations:

Provided that Division Forest Officer, after receiving the proposals from the user agency, shall assess their completeness and incomplete proposal shall be returned to the user agency for re-submitting it with complete information.

(16) The proposal involving forest land of more than five hectares, shall be forwarded by the Nodal Officer, with the approval of the Principal Chief Conservator of Forests, to the State Government or Union territory Administration, along with the Project Screening Committee’s recommendation and the same shall also be forwarded to the Regional Office.

(17) Where the State Government or Union territory Administration, as the case may be, decides not to dereserve, divert for non-forest purposes or assign on lease the forest land as indicated in the proposal, the same shall be intimated to the user agency by the Nodal Officer.

(18) Where the State Government or Union territory Administration agrees ‘In-Principle’ to dereserve the forest land, divert for non-forest purposes or assign on lease the forest land as indicated in the proposal shall forward its recommendation to the Central Government.

10. In-Principle approval of the proposal.—

(1) Except the proposals referred to in sub-rule (2), all proposals related to.-

(i) linear projects;

(ii) hydro electric power projects of upto 25 MW capacity proposed in the river basin where cumulative impact assessment to assess the carrying capacity of the river basing has been done

(ii) forest land up to forty hectares; and

(iii) use of forest land having canopy density up to 0.7 irrespective of their extent for the purpose of survey which are not covered under the exemptions provided under clause (iii) of sub-section (1) of section 2 of the Adhiniyam and Guidelines issued thereunder;

shall be examined in the Regional Office and disposed off in the manner specified in sub-rule (3).

(2) All proposals, other than those referred to in sub-rule (1) and following proposals, namely:-

(i) dereservation;

(ii) mining;

[भाग II—खण् ड 3(i)] भारत का रािपत्र : असाधारण 27

(iii) hydro electric power projects of more than 25 MW and those falling in a river basin where cumulative impact assessment study to assess the carrying capacity of river basin has not been done or policy decision on allowing the projects in a river basin has not been taken by the Central Government;

(iv) regularisation of encroachment;

(v) ex-post facto approval involving violation of the provisions of the Adhiniyam;

shall be examined and disposed of by the Central Government in the manner specified under these rules.

Provided that, no approval is required for assignment of petroleum exploration licence or petroleum mining lease where the physical possession or breaking of forest land is not involved:

(3) The proposals received under sub-rule (1) shall be examined by the Regional Office in the following manner, namely:-

(i) all proposals involving forest land up to five hectares, shall be examined by the Regional Office for its completeness and after further enquiry or site inspection, as deemed necessary and giving due regard to the aspects listed under clause (ii) of sub-rule (5), ‘In-Principle’ approval or rejection may be granted by the Regional Office by recording the reasons.

(ii) all linear proposals involving forest land of more than five hectares, all proposals for use of forest land having canopy density upto 0.7 for the purpose of survey irrespective of their extent and all other proposals involving the use of more than five hectares and up to forty hectares forest land, shall be referred, after examination of its completeness, by the Regional Office to the Regional Empowered Committee.

(iii) the Regional Empowered Committee shall examine all proposals referred to it under clause (ii) and after further enquiry or site inspection as deemed necessary and giving due regard to the aspects listed under clause (ii) of sub-rule (5), may grant ‘In-Principle’ approval or reject the same by recording reasons.

(iv) The decisions taken by the Regional Empowered Committee or the Deputy Director General of Forests to grant ‘In-principle’ approval or to reject a proposal, in accordance with the power delegated under this rule, as and when necessary or required, may be reviewed by Central Government and decision taken by the Central Government in such matters shall be the final.

(4) Site inspection report shall be prepared for proposals specified in sub-rule (2) by the Regional Office and the same shall be submitted to the Central Government for consideration by the Advisory Committee.

(5) The proposals received by the Central Government shall be examined in the following manner, namely:-

(i) all proposals under sub-rule (2) along with the site inspection report as required under sub-rule (4) or as asked by the Central Government, shall be referred, after examination of its completeness, to the Advisory Committee.

(ii) the Advisory Committee shall examine all proposals referred to it in clause (i), giving due regards, but not limited to, the following, and after further enquiry, as deemed necessary, shall make recommendation to the Central Government for consideration for approval:-

(a) the proposed use of the forest land is not for any non-site specific purpose such as agricultural purpose, office or residential purpose or for the rehabilitation of persons displaced for any reason;

(b) the State Government or the Union territory Administration, as the case may be, has certified that it has considered all alternatives and that no other alternative in the circumstances is feasible and that the required area is the minimum needed;

(c) the State Government or the Union territory Administration, as the case may be, before making his recommendation, has considered all issues having direct and indirect impacts on the diversion of forest land on the forest, wildlife and the environment;

(d) concerned mandates under the National Forest Policy;

(e) whether adequate justification has been given and appropriate mitigation measures have been proposed by the State Government or the Union territory Administration, as the case may be, if the forest land proposed to be used for non-forest purposes forms part of a national park, wildlife sanctuary, tiger reserve, designated or identified tiger or wildlife corridor, or habitat of any endangered or threatened species of flora and fauna or of an area lying in the severely eroded catchment; and 28 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 3(i)]

(f) the State Government or the Union territory Administration, as the case may be, undertakes to provide at its cost or at the cost of the user agency the requisite extent of appropriate land, as per rule 13, for the purpose of carrying out compensatory afforestation.

(6) While making recommendations under sub-rule (5), the Committee may also impose conditions or restrictions and such mitigation measures, which in its opinion would offset the adverse environmental impact of diversion of forest land under the proposal.

(7) The Central Government shall, after considering the recommendation of the Advisory Committee, grant ‘In- Principle’ approval subject to fulfilment of stipulated conditions or reject and communicate the same to the State Government or the Union territory Administration, as the case may be, and to the user agency.

(8) In case the proposal is found incomplete or information provided is found to be incorrect after it

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