(1)करों के अजतठरक्त आय या रािस्ट्व जिसके जलए मांग की गई ि ैऔर जिन्द्िें आय के रूप में मान्द्यता िी गई ि,ै ििच दकया गया ि।ै रािस्ट्व जवभाग के प्रमुख द्वारा की गई मांग और प्रोद्भूत आय का कथन तैयार दकया िाएगा और अनुमोिन के जलए मखु्य कायचपालक अजधकारी को भेिा िाएगा और मुख्य कायचपालक अजधकारी द्वारा उक्त कथन के अनुमोिन के पश्चात उक्त अनुमोिन प्रजतयां रािस्ट्व जवभाग के प्रमुख और लेखा-प्रमुख को भेि िी िाएंगी और लेखा प्रमुख, आय के संबंजधत िीषों में रािस्ट्व को ििच करन ेऔर संबंजधत खात ेमें प्राप्त राजि को ििाचने की पिल करेगा।
(2) रािस्ट्व जवभाग का प्रमुख, उन व्यजक्तयों को अपेजक्षत मांग प्रस्ट्तुत करेगा जिनसे ऐसा रािस्ट्व प्राप्त िो और ऐसे व्यजक्तयों को 30 दिन की अवजध के अिंर उक्त मांग की तामील की व्यवस्ट्था करेगा।
57. करों के अजतठरक्त आय जिनके जलए कोई मागं निीं की गईः- (1) अन्द्य आय जिसे आय के रूप में मान्द्यता िी गई ि ैऔर ििच दकया गया ि ैलेदकन जिसके जलए कोई मांग निीं की गई ि,ै इस संबंध में भुगतान करने के इच्छुक व्यजक्त को रािस्ट्व जवभाग के प्रमुख या प्राजधकृत अजधकारी से स्ट्वीकृजत लेनी िोगी और उक्त अजधकारी बोडच के सामने रखी गई ऐसी राजि को मान्द्य करने के पश्चात रखेगा, वि लेखाकार को अनुमोिन की एक प्रजत भेिेगा, िो ऐसे अनुमोिन के आधार पर लेखा सॉफ्टवेयर प्रणाली में आय को ििच करेगा।
(2) उक्त प्रजवजि की लेखाकार द्वारा सम्पयक रूप से प्राजधकृत एक प्रजत रोकजड़या को भेिी िाएगी। रोकजड़या इसमें उपयुचक्त जवजनर्िचि प्रदक्रया के अनुसार व्यजक्तयों से भुगतान स्ट्वीकार करेगा।