(1) ििां करों के संबंध में उजल्लजखत आय प्रोद्भूत िोती ि,ै तो प्रस्ट्तुत की गई मांग या प्रोद्भवन आय का कथन रािस्ट्व जवभाग के प्रमुख द्वारा तैयार दकया िाएगा और मखु्य कायचपालक अजधकारी को प्रस्ट्ततु दकया िाएगा और मुख्य कायचपालक अजधकारी द्वारा मांग के कथन के अनुमोिन पर उक्त अनुमोिन की प्रजतयाँ रािस्ट्व जवभाग के प्रमुख को भेिी िाएंगी और ििां मांग का संबंध संपजत्त कर से िो उसे प्ररूप17एस में रखा िाएगा और उक्त संपजत्त कर की मांग का सारांि प्ररूप18एस में लखेा-प्रमुख को भेि दिया िाएगा।
(2) लेखा प्रमुख, आय के संबंजधत िीषों में रािस्ट्व के बिीखाते की प्रजवि को पाठरत करत ेहुए अजभजलजखत करने के किम उिाएगा और प्ररूप19एस में मांग और समािताच रजिस्ट्टर में प्राप्त राजि को ििाचएगा। उिािरण- संपजत्त के जलए की गई मांग के मामल ेमें, प्रत्येक संपजत्तवार मांग, मांग और समािताच रजिस्ट्टर में की िाएगी और खाता पुजस्ट्तकाओं में आय खाता को प्रत्यय करते हुए अथाचत “संबंजधत संपजत्त कर खाता” और “संपजत्त कर स्ट्वीकायच खाता” का जवकलन करते हुए समेदकत प्रजवजि की िाएगी।
(3) रािस्ट्व जवभाग का प्रमुख मांग जबल तैयार करेगा और संबंजधत कर िाताओं, जिन पर कर िेय ि,ै को 30 दिन के भीतर व्यवस्ट्था करेगा। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 19