अगल े जवत्तीय वषच के जलए बिट और चाल ू जवत्तीय वषच के जलए पनुरीजक्षत बिट तयैार करन ेके जलए दक्रयाकलाप चाल ूजवत्तीय वषच में जनयत जतजथ लखेा-प्रमुख द्वारा मुख्य कायचपालक अजधकारी को प्रस्ट्तुत करन ेके जलए बिट तैयार करना 30 अप्रलै मुख्य कायचपालक अजधकारी द्वारा बोडच के सामने बिट प्रस्ट्तुत करना 15 मई यदि घाटे का बिट निीं ि ैतो बोडच द्वारा बिट की मंिूरी 15 िून 10 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] बोडच द्वारा प्रधान जनििेक को घाटे का बिट प्रस्ट्ततु करना 15 िून प्रधान जनििेक द्वारा अपनी जसफाठरिों सजित िनरल-ऑदफसर कमान-इन-चीफ को घाटे का बिट अग्रेजषत करना 31 िुलाई िनरल ऑदफसर कमान-इन-चीफ द्वारा घाटे के बिट को मंिूरी तथा सिायता-अनुिान की मंिूरी के जलए मिाजनिेिक के माध्यम से सरकार को अपनी जसफाठरिों सजित भेिना 30 जसतंबर ठट्पणः
1. यदि कोई बोडच 15 िून के भीतर प्रधान जनििेक को बिट प्राक्कलन प्रस्ट्तुत करन े में जवफल रिता ि ै तो वि सिायता अनुिान की मंिूरी के जलए तब तक पात्र निीं िोगा, िब तक प्रधान जनिेिक/ िीओसी-इन-सी, जवलम्पब को रद्द करने के जलए सिमत निीं िो िाते।
2. यदि िीओसी-इन-सी द्वारा बिट को 30 जसतम्पबर तक मंिूरी निीं िी िाती ि ैतो इसे स्ट्वीकृत मान जलया िाएगा और प्रधान जनिेिक द्वारा सिायता अनिुान की मंिूरी के जलए केन्द्रीय सरकार को अग्रेजषत दकया िाएगा।
(2) इस प्रकार तैयार बिट में सभी मिों की प्राजप्तयों और भुगतान का कथन िाजमल िोगा, चाि ेबोडच की पूंिी या रािस्ट्व या आय या व्यय का जनम्नजलजखत मखु्य जसद्धांतों के संबंध में कथन प्राप्त िो- (क) चालू वषच के अप्रलै के पिल ेदिन से िून के 30वें दिन तक की अवजध के वास्ट्तजवक आंकड़ें। (ख) चालू वषच के अजतिेष भाग के जलए प्राजप्तयों और भुगतान का प्राक्कलन। (ग) आगामी वषच के िौरान प्राजप्तयों और भुगतान का प्राक्कलन और चालू वषच के अतं में छावनी जनजध के अतं अजतिेष का प्राक्कलन।
(3) बिट में आगामी वषच के जलए लगाए िाने वाल ेकरों, िुल्क या अन्द्य प्रभारों में पठरवतचन के दकसी प्रस्ट्ताव को स्ट्पि रूप से ििाचया िाएगा और दकस प्रकार बिट तैयार करने में उक्त प्रस्ट्ताव को रखा गया ि।ै
(4) बिट में चालू वषच के िौरान प्रत्येक जवभाग के बकाया और बकाया मांग की वसूली को ििाचया िाएगा।
(5) बिट में चाल ूमांग वसूली योग्य राजि को भी ििाचया िाएगा, लेदकन जिसकी चाल ूवषच के िौरान वसूली निीं िोने की संभावना ि।ै चालू मांग की वसूली निीं िोन ेके कारणों को स्ट्पि करता एक ठट्पण संलग्न करना िोगा, यदि कोई िो।
(6) प्राजप्तयों और भुगतान का प्राक्कलन तैयार करने के जलए बोडच द्वारा िेय प्राजप्तयों और िये राजि को अलग-अलग ििाचते हुए प्ररूप 1एस में जवजनर्िचि अनुसार अलग-अलग कथन प्रस्ट्तुत दकए िाएंग,े ऐसी कुल राजि में से उस राजि का भुगतान दकया िाएगा जिसका जनयम 21 के उप-जनयम (2) में खंड (क), (ख) और (ग) में जवजित दकए अनुसार इस अवजध के िौरान वसूली या भुगतान दकए िाने की संभावना ि ैऔर जनयम 21 के उप-जनयम (2) में खंड (क), (ख) और (ग) में उजल्लजखत अवजध के िौरान प्राप्त या भुगतान की िाने वाली संभाजवत राजि के संबंध में सूचना की िानकारी उक्त प्ररूप में प्रस्ट्तुत की िाएगी।
(7) उप-जनयम (6) के उपबंधों के बाविूि उस वषच के िौरान दकए िाने वाले संभाजवत सभी भुगतान सुजनजश्चत दकए िाएंगे और प्रिान दकए िाएंगे जिनके जलए बिट तैयार दकया िा रिा ि।ै
22. बिट प्राक्कलन तयैार करन ेमें जवभाग प्रमखुों की भजूमकाः- (1) बोडच के जवभाग प्रमुखों द्वारा प्ररूप1एस में बिट तैयार दकया िाएगा, जिसमें उस जवभाग की पूंिी और रािस्ट्व की प्राजप्तयां और भुगतान िाजमल िोंगे।
(2)इस प्रकार तैयार दकए गए बिट प्राक्कलन जवस्ट्तृत िीषच स्ट्तर तक प्राक्कलन िेंगे।
23. भडंार का प्राक्कलनः- बोडच आगामी जवत्तीय वषच के िौरान आवश्यक भंडार के जलए प्ररूप 2 एम में प्रत्येक जवभाग उिािरण के जलए - सावचिजनक कायच, अस्ट्पताल तथा स्ट्वच्छता, साफ-सफाई एवं प्रकाि व्यवस्ट्था आदि के जलए प्राक्कलन तैयार करेगा। इस प्राक्कलन के साथ कथन लगा िोगा जिसमें यि ििाचया िाएगा दक प्राक्कजलत आवश्यकताओं को कैसे प्राप्त दकया गया ि।ै [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 11
24. मखु्य कायचपालक अजधकारी के कायचः- (1) प्ररूप1एस में बोडच के समेदकत बिट को तयैार करन ेके जलए मुख्य कायचपालक अजधकारी द्वारा प्रत्येक जवभाग का बिट समेदकत दकया िाएगा और मुख्य कायचपालक अजधकारी समेदकत ठरपोटच भी तैयार करेगा जिसमें अपसामान्द्य प्राजप्तयों या भुगतान को स्ट्पि रूप से प्रकट दकया िाएगा िो सामान्द्य प्रवृजत्त से जवचजलत िो रि ेिैं और ठरपोटच में ऐसी मिों के संबंध में स्ट्पिीकरण ठट्पण िाजमल िोगा।
(2) मुख्य कायचपालक अजधकारी द्वारा बोडच का ऐसा समेदकत बिट (जवजध द्वारा या कोड के अनुसार ऐसे अन्द्य गौण या आवश्यक अन्द्य कथन सजित) बोडच को प्रस्ट्तुत दकया िाएगा।
(3) ििां चाल ूजवत्तीय वषच के पुनरीजक्षत प्राक्कलनों और अगल ेजवत्तीय वषच के मलू प्राक्कलनों िोनों में बिटीय घाटा न िो, बोडच ऐसे उपांतरणों, िैसा आवश्यक समझे, सजित ऐसे बिट को मंिूरी िगेा।
(4) यदि बिट चाल ूया अगले जवत्तीय वषच में घाटा ििाचता ि ैतो बोडच के अनुमोिन के बाि बिट का प्रस्ट्ताव प्रधान जनिेिक को भेिा िाएगा। प्रधान जनिेिक उन्द्िें प्रस्ट्तुत बिट प्राक्कलन की िांच करेगा और इसके औजचत्य से संतुि िोने के बाि अपनी जसफाठरिों सजित िनरलऑदफसर कमान-इन-चीफ को अनुमोिन के जलए भेिेगा।
(5) समेदकत बिट प्राक्कलन में जनम्नजलजखत पठरजिि संलग्न दकए िाएंगे :- जवजिजिया ँ प्ररूप उपाबंध क : मलू जनमाचण कायों का कथन 3 एम उपाबंध ख : जनवेि का कथन 4 एम उपाबंध ग : नकि और नकि समकक्ष का कथन 5 एस उपाबंध घ :अजतिेष जनजधयों (छावनी जनजध और छावनी जवकास जनजध इसके घटकों सजित) का कथन 6 एम
(6) जनयम 34 में जवजनर्िचि और अध्याय XXIV में बताए गए जवत्तीय कथन के अनुसार और प्ररूप1एस में बिट प्राक्कलन के साथ बिट फेरफार ठरपोटच (बीवीआर) लगायी िाएगी।