ताजलका जवजिजिया ँ कायचप्रणाली प्राजप्तयों का प्राक्कलन प्राक्कलन जपछले तीन वषों की प्राजप्तयों की तुलना के आधार पर दकया िाएगा। ििां प्राजप्तयों में तीन वषों के जलए उतार-चढाव काफी ज्यािा ि,ै औसत को भ्रामक माना िाता ि,ै उतार या चढाव के जलए िैसा भी मामला िो, बिट प्राक्कलन में प्रावधान दकया िाए तथा प्रत्येक मित्वपूणच फेरफार में उपयकु्त स्ट्पिीकरण ठट्पण िोड़ा िाए। जनयत आय का प्राक्कलन प्राक्कलन, िेय बकाया सजित वास्ट्तजवक मांग के आधार पर दकया िाएगा। स्ट्थायी स्ट्थापनाओं और जनयत माजसक आवती प्रभारों पर व्यय का प्राक्कलन स्ट्थायी स्ट्थापनाओं और दकराए, भते्त आदि के कारण जनयत माजसक आवती प्रभारों पर व्यय का प्राक्कलन, बचत का जवचार दकए जबना वास्ट्तजवक मंिूरी पैमाने के आधार पर दकया िाएगा और दकसी भी दकस्ट्म की कटौती दकए जबना प्रिान दकया िाएगा। इस प्राक्कलन में स्ट्थापनाओं में पिले से मंिूर पमैाने में मौिूिा ठरजक्तयों के स्ट्थान पर सेवा िेने में लगे हुए सेवा प्रिाताओं का भुगतान भी िाजमल ि।ै बढे हुए वेतन के मामल ेमें वेतन की िरें िो उस वषच 01 जसतम्पबर को िेय िोंगी, जिससे बिट संबंजधत ि,ै अपनाई िाएगंी। 12 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] आकजस्ट्मक व्यय बिट प्राक्कलन, दकसी जविेष मि पर दकए गए खचच को छोड़कर जपछल े तीन वषों के औसत वास्ट्तजवक व्यय के आधार पर दकया िाएगा तथा बिट वषच में संभाजवत नए मि के व्यय को िाजमल दकया िाएगा।
(2) सभी जवद्यमान िेनिाठरयों, जिन्द्िें उस वषच के आरंभ िोन े से पिले समाप्त निीं दकया िा सकता, जिसके जलए बिट तैयार दकया िा रिा ि,ै को अजभजनजश्चत करके प्रिान दकया िाएगा।
(3) अजतठरक्त करों, िलु्कों आदि के जलए प्रस्ट्ताव ऐसा िोना चाजिए दक जनयम 28 में जनर्िचि न्द्यूनतम अजतिेष को छोड़न ेके जलए परेू प्रत्याजित व्यय को कवर कर सके।
(4) छावनी बोडच की जनवेि जनजधयों का आदि और अन्द्त अजतिेष अलग से दिखाया िाएगा। छावनी बोडच की जनवेि जनजधयों को आदि और अन्द्त अजतिेष में निीं ििाचया िाएगा और तत्संबंधी ब्यौरा अंदकत मूल्यों के अनुसार बिट प्राक्कलन (प्ररूप1एस) के संलग्न प्ररूप 4 एम में दिखाया िाएगा।
(5) छावनी जनजध और छावनी जवकास जनजध इनके घटकों सजित अजतिेष बिट के आदि और अंत अजतिषे में िाजमल निीं दकया िाएगा। उक्त जनजधयों का संबंजधत ब्यौरा प्ररूप 6 एम में प्रस्ट्तुत दकया िाएगा।
26. बिट प्राक्कलन की मिंरूीः- (1) ििां चाल ू जवत्तीय वषच के पुनरीजक्षत प्राक्कलन और अगल े जवत्तीय वषच के मूल प्राक्कलन िोनों में बिटीय घाटा न िो, बोडच यथावश्यक संिोधनों के साथ बिट प्राक्कलन को मंिूरी िगेा।
(2) बोडच स्ट्वीकृत बिट की एक प्रजत प्रधान जनिेिक को प्रस्ट्तुत करेगा।
(3) ििां बिट घाटा ििाचता ि,ै कमान के िनरलऑदफसर कमान-इन-चीफ, प्रधान जनिेिक के परामिच से यथावश्यक संिोधनों के साथ बिट को मंिूरी िे सकत ेिैं। परंतु मंिूर बिट प्राक्कलन में केन्द्रीय सरकार से सिायता-अनिुान का प्रावधान िो तो वि, मिाजनिेिक के माध्यम से अपनी जसफाठरिों सजित इसे केन्द्रीयसरकार को सिायता-अनुिान ठरलीि करने के जलए भेिेगा।
27. बिटीय अनिुान का सपं्रषेणः- (1) ििां बिट िनरलऑदफसरकमान-इन-चीफ द्वारा मंिूर दकया िाता ि,ै इसकी सूचना प्रधान जनिेिक के माध्यम से बोडच को यथािीघ्र ि ेिी िाएगी।
(2) बिट के पाठरत िोन ेके बाि जवभाग द्वारा दकए गए प्रत्येक अनरुोध के संबंध में प्राप्त बिटीय मंिूरी का कथन संबंजधत जवभागों को सूजचत दकया िाएगा।
(3) िब केन्द्रीय सरकार द्वारा बोडच को दकसी सिायता-अनुिान की मंिूरी िी िाती ि ैतब मिाजनिेिक :
(क) कमान के िनरल ऑदफसरकमान-इन-चीफ को तत्काल सिायता-अनुिान की मंिूर की गई राजि की सूचना िेंग;े (ख) बोडच को यथािीघ्र अनुिान आबंठटत करेंगे।
28. न्द्यनूतम िषेः- बिट प्राक्कलन इस प्रकार तैयार दकया िाएगा दक अंजतम अजतिेष प्राक्कजलत व्यय के 10 प्रजतित से कम न िोः परंत ुछावनी जवकास जनजध से दकए िाने वाल ेदकसी व्यय को इस खाते में निीं जलया िाएगा।
29. बिटीय मिंरूी के जबना व्यय का प्रजतषधेः- बोडच उस व्यय को निीं करेगा जिसका बिट प्राक्कलन के दकसी िीषच के अधीन कोई प्रावधान निीं दकया गया ि ै या जनयम 33 में प्रित्त अनुसार कुछ अन्द्य िीषच, जिनके अधीन बचत सुजनजश्चत िोती ि ैया प्रत्याजित िोती ि,ै पनुर्वचजनयोिन द्वारा अजधक का कोई प्रावधान दकए जबना दकसी िीषच के अधीन उपबंजधत राजि से अजधक का प्रावधान िो। परंतु आकजस्ट्मक प्रावधानों के अधीन दकए गए व्यय को इस ितच के अधीन जवजनयजमत दकया िाएगा दक ऐसा जवजनयमन, ऐसे व्यय की तारीख के एक माि की अवजध के भीतर अजनवायच रूप से दकया िाए।
30. प्राक्कलन का प्रजतफल और सामान की खरीिः- (1) बोडच द्वारा बिट के साथ-साथ सामान के जलए वार्षचक प्राक्कलन पर जवचार दकया िाएगा और पाठरत दकया िाएगा। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 13
(2)मिाजनिेिक द्वारा िारी उपांतरणों और दििा-जनिेिों के अधीन सामान्द्य जवत्तीय जनयम, 2017 (समय-समय पर यथासंिोजधत) के अध्याय VI में अजधकजथत की गई प्रदक्रया के अनुसार सामान और सेवाओं की सारी खरीि की िाएगी।
31. अनपुरूक प्राक्कलनः- यदि दकसी सामान की आवश्यकता ि ैजिसे स्ट्वीकृत प्राक्कलन में िाजमल निीं दकया गया ि ै या इसमें प्रजवजि की गई राजि या मात्रा से अजधक की आवश्यकता ि ैया बोडच द्वारा अनुमोदित िरों पर प्राप्त निीं दकया िा सकता ि ैतो बोडच की जविेष स्ट्वीकृजत के जलए अनुपरूक प्राक्कलन प्रस्ट्तुत दकया िाएगा;
परंत ुआकजस्ट्मक मामलों में,अध्यक्ष ऐसे प्राक्कलन को मंिूरी ि ेसकते िैं और बोडच के अनुमोिन के जलए बोडच की अगली बैिक में इसे रख सकते िैं।
32. छावनी जनजध या छावनी जवकास जनजध स ेभगुतानः- छावनी जनजध या छावनी जवकास जनजध से तब तक भुगतान निीं दकया िाएगा िब तक दक व्यय- (क) मलू या पुनरीजक्षत बिट प्राक्कलन में मंिूर के रूप में प्रिान निीं दकया गया िो; या (ख) कमान के िनरल ऑदफसरकमान-इन-चीफ द्वारा मंिूर दकया गया िो या (ग) अजधजनयम की धारा 54 के अधीन पाठरत दकसी आििे का अनपुालन करन ेमें व्यय हुए िो।
33. पनुर्वचजनयोगः- (1) ििां आवश्यक समझा िाए, लेखा-प्रमुख द्वारा प्ररूप7एम में बिटीय आवंटन के पनुर्वचजनयोग का प्रस्ट्ताव तैयार दकया िाएगा और इस तरि के अंतरण के प्रस्ट्ताव में, सभी प्रत्याजित लेन-िेन को जवत्तीय वषच के अंत तक, ििां तक संभव िो सके, लेखा में ले जलया िाए और ऐसे पुनर्वचजनयोग कथन में इस संबंध में एक प्रमाण-पत्र लगाया िाएगा दक संबंजधत राजि को वषच के बिट प्राक्कलन में उपबंजधत निीं दकए गए आवती व्यय को चुकाने के जलए पनुर्वचजनयोग निीं दकया िा रिा ि ैऔर मुख्य कायचपालक अजधकारी को प्रस्ट्ताव प्ररूप7एम में प्रस्ट्तुत भेिा िाएगा।
(2) मखु्य कायचपालक अजधकारी प्ररूप7एम में प्राप्त प्रस्ट्ताव की िांच करेगा और जनम्न कारचवाई करेगा- (क) यदि मूल कायच कोड को प्रभाजवत दकए जबना उसी लघु िीषच कोड में राजि का पुनर्वचजनयोिन िाजमल ि ैतो मुख्य कायचपालक अजधकारी पुनर्वचजनयोग की मंिूरी िे सकता ि।ै (ख) यदि मूल कायच में राजि का जवजनयोग िाजमल ि ैतो मुख्य कायचपालक अजधकारी अपनी जसफाठरिों के साथ इसे बोडच के समक्ष मंिूरी के जलए रखेगा। (ग) यदि इसमें एक मलू कायच से िसूरे मलू कायच की राजि का पुनर्वचजनयोग िाजमल ि ै तो मुख्य कायचपालक अजधकारी ऐसे पनुर्वचजनयोग की जसफाठरि कर सकते िैं और अपनी जसफाठरिों और ठट्पजणयों के साथ बोडच के माध्यम से कमान के िनरल ऑदफसरकमान-इन-चीफ को भेि सकते िैं।
(3) मखु्य कायचपालक अजधकारी, बोडच या िनरल ऑदफसरकमान-इन-चीफ, िैसा भी मामला िो, के बिटीय पुनर्वचजनयोग के उक्त प्रस्ट्ताव को अनुमोिन िेने पर मुख्य कायचपालकअजधकारी, लेखा-प्रमुख को प्ररूप8एस में अनुमोिन या ब्यौरे ििच करन े का जनिेि िेगा और उक्त प्ररूप8एस को तत्पश्चात मुख्य कायचपालक अजधकारी के अनुमोिन के जलए रखा िाएगा और ऐसा अनुमोिन प्राप्त िोने पर, लेखा-प्रमुख द्वारा प्ररूप8एस को लेखापाल को लेखा सॉफ्टवेयर प्रणाली में पुनर्वचजनयोग के अजभलेखन के जलए भेि दिया िाएगा।
34. बिट तलुनाः- जवत्तीय वषच के अतं में बोडच वार्षचक बिट फेरफार ठरपोटच (बीवीआर) तैयार करेगा, प्राजप्तयों और भुगतान के कथन बिट के आंकडे़ और वास्ट्तजवक आय और व्यय के बीच फेरफार को स्ट्पि करते हुए फेरफार कारणों सजित िनरल ऑदफसरकमान-इन-चीफ को भेि दिया िाएगा। बीवीआर का जवश्लेषण दकया िाएगा और जनयम 24 के अनुसार िनरल ऑदफसरकमान-इन-चीफ को भेि दिया िाएगा। परंत ुमाजसक बीवीआर आय और व्यय की ठरपोटच के साथ बोडच की सामान्द्य या जविेष बैिक में बोडच के पटल पर रखा िाएगा, िैसा भी मामला िो।
35. अपठरिायच भगुतानः- बिट प्राक्कलन में प्रावधान के अभाव या दकसी िीषच के अधीन बिट आवंटन का अस्ट्थायी समापन, बोडच द्वारा िेय दकसी राजि की वापसी या भुगतान या खाते के उजचत िीषच के अधीन दकसी वास्ट्तजवक 14 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] भुगतान के अजभलेख को निीं रोकेगा। िालांदक ऐसे िावों को पुनर्वचजनयोग के रूप में या जनयम 31 और 33 के अनुसार बिट प्राक्कलन की री-काशस्ट्टंग द्वारा चुकाया िाएगा। अध्याय V बैंक खात े
36. बोडच के बैंक खातःे- (1) बोडच अपने अजधकार क्षेत्र या जनकटवती क्षेत्र में संचाजलत दकसी “बैंक” में बैंक खाता रखेगा।
(2) बोडच जनम्नजलजखत मामलों में पृथक बैंक खाता रखेगा- (क) िैसादक अजधजनयम या कोड के अधीन प्रत्येक जनजध के जलए रखना अपेजक्षत िो;
(ख) प्रत्येक उदद्दि अनिुान के जलए या ििाँ अनिुाता या केन्द्रीयसरकार द्वारा ऐसा जनिेि दिया गया िो;
37. बैंक खात ेमें प्रत्यक्ष भगुतान या िमाः- (1)छावनी बोडच स्ट्थायी जनििे िारी कर सकता ि ैया अपन ेबैंकरों के साथ व्यवस्ट्था कर सकता ि-ै (क) एक जवजनर्िचि समय में प्राजधकृत संग्रि केन्द्रों स ेिमा का संग्रिण। (ख) कमचचाठरयों के जलए वेतन िमा करना। (ग) बोडच द्वारा समय-समय पर अवधाठरत की गई प्राजप्तयों और भुगतान की ऐसी अन्द्य मिें।
(2) बोडच उप-जनयम (1) में उजल्लजखत मामलों में बैंक खात ेमें प्रत्यक्ष भुगतान या राजि िमा करन ेऔर प्रदक्रया की व्यवस्ट्था तैयार कर सकता ि।ै बोडच संबंजधत बैंक के परामिच से उक्त प्रदक्रया और व्यवस्ट्था का जनणचय ल ेसकता ि।ै
(3) बैंक को स्ट्थायी अनुििे िारी दकए गए िैं दक छावनी जनजध या छावनी जवकास जनजध से दकसी राजि का भुगतान चेक या बैंककंग आदि प्रणाली द्वारा अन्द्य गैर-नकि इलेक्रॉजनक जक्लयररंग प्रणाली (ईसीएस) के माध्यम से दकया िाएगा, िालांदक ििां नकिी में भुगतान करना अपठरिायच िो, ऐसा भुगतान अजधकतम बीस िज़ार रूपए िोगा और केवल कमचचाठरयों को स्ट्थायी अजग्रम के भुगतान के प्रयोिन या बोडच द्वारा जवजनर्िचि अन्द्य प्रयोिनों के जलए दकया िा सकता ि।ै
38. बैंक खात ेमें िस्ट्ताक्षरकत्ताचः- (1) मुख्य कायचपालक अजधकारी चेकों पर िस्ट्ताक्षर करने या बैंक को अनुिेि िारी करने सजित बोडच के बैंक खाते या दकसी जनजध के संचालन के जलए प्राजधकृत िस्ट्ताक्षरकत्ताच िोगा;
परंतुमुख्य कायचपालक अजधकारी अपन ेजववेकाजधकार से लेखा-प्रमुख को भुगतान के प्रत्येक मामले में पच्चीस ििार रूपए तक की राजि के चैक पर िस्ट्ताक्षर करने के जलए जलजखत में प्राजधकार प्रत्यायोजित कर सकता िै;
परंतु उन सभी मामलों में जिनमें दकसी चेक के भुगतान का मलू्य िस लाख रूपए से अजधक िोता ि।ै ऐसे प्रत्येक चैक पर लेखा-प्रमुख के साथ-साथ मुख्य कायचपालक अजधकारी द्वारा िस्ट्ताक्षर दकए िाएंगे।
(2) मुख्य कायचपालक अजधकारी की अनुपजस्ट्थजत में मखु्य कायचपालक अजधकारी के स्ट्थान पर अध्यक्ष चेकों पर िस्ट्ताक्षर कर सकत ेिैं।
(3) जनयम 37 के उप-जनयम (2) के अधीन भुगतान या जनकासी में लेखा-प्रमुख या मुख्य कायचपालक अजधकारी या अध्यक्ष, यथाजस्ट्थजत, इस बात की पुजि करेंगे दक इस जनयम के अधीन प्राजधकार का प्रयोग यि सत्यापन करने के बाि दकया िा रिा ि ैदक संजिता की सभी आवश्यकताओं का पालन दकया गया ि।ै अध्याय VI लखेा बजिया ंऔर अजभलखे
39. लखेा बजियों का रख-रखावः- (1) बोडच प्रत्येक जवत्तीय वषच के लेन-िेन के सिी अजभलेख को इसमें जवजनर्िचिखात े की बजियों में रखेगा। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 15
(2) खात ेकी बजियों को सामान्द्यत:लेखासॉफ्टवेयर प्रणाली में रखा िाएगा और कुछ अन्द्य बजियों और अजभलेख का अनुरक्षण अनुसूची- III के स्ट्तंभ(4) में जवजनर्िचि अनुसार मैनअुल रखा िाएगा ।
(3) ििाँ लेखा सॉफ्टवेयर प्रणाली को बाि में अपग्रेड करा जलया िाता ि ैया उपयुक्त तरीके से पूरा दकया िाता ि,ै विाँ मिाजनिेिक अनुसूची-III में उजल्लजखत बजियों और अजभलेखों को लेखा सॉफ्टवेयर प्रणाली में भी रखन ेका जनिेि ि ेसकते िैं।
40. बजियों में प्रजवजि के जलए साधारण अनिुेिः- (1) अनुसूची- III में जवजनर्िचि खात ेकी बजियों को प्रत्येक जवत्तीय वषच या स्ट्तंभ(7) में जवजनर्िचि अवजध के जलए और स्ट्तंभ(4) में जवजनर्िचि तरीके से पृथक रूप में रखा िाएगा और इन्द्िें स्ट्तंभ(5) में जनर्िचि समयसीमा के अनुसार रखा िाएगा तथा मान्द्य दकया िाएगा और स्ट्तंभ(8) में जवजनर्िचि प्राजधकाठरयों द्वारा सत्याजपत दकया िाएगा।
(2) साधारण रोकड़ बिी, बैंक पुजस्ट्तका और रोिनामचे में सभी प्रजवजियां प्रजतदिन कालानुक्रम रखी िाएंगी।
41. साधारण रोकड़ बिीः- (1) साधारण रोकड़ बिी का अनुरक्षणप्ररूप9एस में दकया िाएगा और रोकड़ की प्राजप्त के अजभलेखन के जलए प्रजवजियां स्ट्तंभ 7 में ििच की िाएंगी और प्ररूप9एस के स्ट्तंभ 8 में भुगतान के अजभलेखन की प्रजवजियां की िाएंगी।
(2) रोकड़ बिी में रोकजड़या द्वारा बैंक से नकि की जनकासी और बैंक में िमा सजित की प्राजप्तयों या नकि की प्राजप्तयों और भुगतान के प्रत्येक लने-िेन का अजभलेख रखा िाएगा।
(3) दिन के अतं में अजतिेष को स्ट्पि रूप में ििाचते हुए और रोकजड़या के िस्ट्ताक्षर के अधीन प्रत्येक रोकड़ बिी को बंि दकया िाएगा और िैजनक अजतिेष जलखा िाएगा।
(4) मुख्य कायचकारी अजधकारी प्रत्येक माि में कम से कम िो दिन का औचक जनरीक्षण करेंगे और व्यजक्तगत रूप से सामान्द्य रोकड़ बिी में ििाचए गए िेष के साथ वास्ट्तजवक नकि िेष का सत्यापन करेंगे और सामान्द्य रोकड़ बिी के संबंजधत पृष्ठ का शप्रंट लेन े के पश्चात अंजतम प्रजवजि के नीचे िस्ट्ताक्षठरत और दिनांदकत सत्यापन प्रमाण-पत्र प्रजवि करेंगे। नकिी के औचक जनरीक्षण को प्रमाजणत करन ेवाल ेप्रत्यके ऐसे िस्ट्ताक्षठरत पषृ्ठ को एक रजिस्ट्टर में चस्ट्पा दकया िाएगा, जिसे’औचक नकिी जनरीक्षण रजिस्ट्टर’किा िाता ि,ै िो क्रजमक रूप से जगन ेहुए पृष्ठों के साथ रोकजड़या की अजभरक्षा में रखा िाता ि।ै
42. साधारण बैंक पजुस्ट्तकाः- (1) बैंक पुजस्ट्तका प्ररूप10 एस में रखी िाएगी और प्रत्येक बैंक खाते के जलए अलग बैंक पुस्ट्तक रखी िाएगी। प्रत्येक बैंक पुजस्ट्तका रोकजड़या के िस्ट्ताक्षर के अधीन बंि की िाएगी और िैजनक अजतिषे दकया िाएगा।
(2) बैंक पुजस्ट्तका में चैक, ड्राफ्ट, प-ेआडचर, जनििेों, इलेक्रॉजनक जक्लयाररंग जसस्ट्टम (ईसीएस) या बैंककंग प्रणाली के माध्यम से दकसी अन्द्य जवजध द्वारा प्राजप्त या भुगतान के प्रत्येक लेन-िेन का अजभलेख रखा िाएगा।
(3) प्रत्येक माि के अंत में बैंक कथन की प्रजवजियों तथा बैंक समाधान-कथन के साथ बैंक पुजस्ट्तका की प्रजवजियों का जमलान दकया िाएगा और जनयम 193 में जवजनर्िचि प्रदक्रया के अनुसार प्ररूप48एस तैयार दकया िाएगा।
43. रोिनामचाः- (1) रोिनामचे में नकि या बैंक के जसवाय सभी लेन-िेन का अजभलेख रखा िाएगा और इसका अनुरक्षणप्ररूप11एस में दकया िाएगा।
(2) रोिनामचे में आय के प्रोद्भवन या व्यय या िेनिारी की प्रजवजियों का अजभलेख रखा िाएगा और लेखा-प्रमुख सिायक िस्ट्तावेिों की िांच करेगा और ििां आवश्यक िो प्ररूप12एस में रोिनामचा वाउचर तैयार करेगा और ऐसे लेन-िेन के अजभलेखन को प्राजधकृत करत ेहुए रोिनामचा प्रजवजि प्राप्त करेगा। उिािरण - संपजत्त और अन्द्य करों के संबंध में प्रस्ट्तुत जबलों की प्रोद्भूत आय का अजभलेखन, आपूर्तचकत्ताच के जबलों की प्राजप्त पर िनेिारी का अजभलेखन, रोिनामचे में ििच की िाएगी।
(3) संबंजधत साधारण रोकड़ बिी और बैंक पुजस्ट्तका में लेखा सॉफ्टवेयर प्रणाली में प्रित्त बिीखाता वाउचर के समान वाउचर फामेट के माध्यम से कॉन्द्रा प्रजवजियों (अथाचत केवल नकि और बैंक खातों वाली प्रजवजियां और अन्द्य खातों से िुड़ी प्रजवजियां निीं) को ििच दकया िाएगा। 16 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4]
44. साधारण बिीखाताः- (1) एक साधारण बिीखाते का अनरुक्षण दकया िाएगा जिसमें कोई सीधी प्रजवजि निीं की िाएगी और उपयुचक्त उजल्लजखत पुजस्ट्तका से केवल प्रजवजियां या अंतरण सामान्द्य बिी-खाते में करन ेकी अनुमजत िी िाती ि ैऔर इसे प्ररूप13एस में रखा िाएगा और जवत्त वषच के िौरान लेखा-प्रमुख सभी लेन-िेन का ब्यौरा सामान्द्य बिीखाते में रखेगा।
(2) खाता के प्रत्येक जवस्ट्तृत िीषच के जलए अलग पृष्ठ या फोजलयो बनाया िाएगा जिसमें संबंजधत अवजध के िौरान आदि अजतिेष और/या लेनिेन की प्रजवजि की िाती ि।ै
(3) ििां सिायक खाता कोड का प्रयोग दकया िाता ि,ै प्रत्येक सिायक लेवल ऑब्िेट कोड खाते के जलए अलग फोजलयो प्रयोग दकया िाएगा जिसमें संबंजधत अवजध के िौरान आदि अजतिषे और/या लेनिेन िोगा।
(4) साधारण रोकड़ बिी, बैंक पुजस्ट्तका और रोिनामचे में ििच लेनिेन को सामान्द्य बिी खाते के उपयुक्त बिी खाते में या तो वास्ट्तजवक समय के आधार पर या दकसी मामले में प्रत्येक दिन के अंत में लखेा-प्रमुख द्वारा जवजधवत प्रमाणीकरण के आधार पर अजभजलजखत दकया िाएगा और साधारण बिी-खाते के रायल अजतिेष कम से कम माजसक रूप में प्ररूप14एस में तैयार दकया िाएगा और लेखांकन-प्रमुख द्वारा उक्त रायल अजतिेष का जमलान और सत्यापन दकया िाएगा।
45. अन्द्य लखेा बजियों और अजभलखेों को तयैार करनाः- संबंजधत पठरसंपजत्तयों या का अजभलेख या सिायक अजभलेख और रजिस्ट्टर या िोनों रखने वाला बोडच अनुसूची-।।। के स्ट्तंभ (7) में जवजनर्िचि संबंजधत संपजत्तयों, स्ट्थापना और अन्द्य का भी जनयजमत रूप से अनरुक्षण करेगा।
46. खात ेकी पजुस्ट्तकाओं को रखन ेकी रीजतः- (1) खात ेकी पुजस्ट्तकाओं और रजिस्ट्टरों को क्रमानुसार संख्या डाल ेगए पृष्ठों के साथ मिबूती से बांधा िाएगा और लेखा-प्रमुख द्वारा वास्ट्तजवक सत्यापन के बाि प्रत्येक पुजस्ट्तका या रजिस्ट्टर के पृष्ठों की संख्या जलजखत रूप में प्रमाजणत की िाएगी और अंजतम पषृ्ठ पर िी िाएगी।
(2) अनुसूची-III के स्ट्तंभ(6) में जवजनर्िचि अवजध के अतं में पुजस्ट्तकाओं और रजिस्ट्टरों का शप्रटं आउट जलया िाएगा और शप्रंट आउट को मिबूती स ेबांधा िाएगा और पषृ्ठों पर क्रमानुसार संख्या डाली िाएगी।
(3) लेखा-प्रमुख द्वारा शप्रंट आउट के प्रत्येक सेट में से वास्ट्तजवक सत्यापन के बाि पषृ्ठों की संख्या, जलजखत में प्रमाजणत की िाएगी और अंजतम पृष्ठ पर िी िाएगी। भाग ‘ख’ पजुस्ट्तकाओं और प्ररूपों की सरुक्षा
47. मदुरत रसीिी पजुस्ट्तकाओं की अजभरक्षाः- (1) ििां मुदरत रसीिी पुजस्ट्तका प्ररूप15एम में प्राप्त की िाती िैं, प्राप्त रसीिी पुजस्ट्तकाओं की कुल संख्या, प्रत्येक पुजस्ट्तका की प्राजप्तयों की संख्या और क्या उन पर क्रमानुसार संख्या डाली गई ि,ै इसकी लेखा-प्रमुख द्वारा िांच की िाएगी और प्रमाजणत दकया िाएगा और रसीिी बजियों की अजभरक्षा लेखा- प्रमुख द्वारा की िाएगी और रोकजड़या द्वारा रसीिी पुजस्ट्तकाओं के स्ट्टॉक का अजभलेख रखा िाएगा।
(2) रोकजड़या कर संग्रािक को रसीिी पुजस्ट्तका िारी करने और उसके द्वारा प्रयोग की गई रसीिी पुजस्ट्तकाओं की वापसी के समय प्रत्येक पुजस्ट्तका में प्राजप्तयों की संख्या सजित िारी की गई प्राजप्त पुजस्ट्तकाओं का कथन ििच करेगा और प्रयोग के बाि वापस करते समय भी प्राजप्त पुजस्ट्तकाओं को ििच दकया िाएगा और ऐसे समय रद्द (और इसजलए अप्रयुक्त) प्राजप्तयों की संख्या रोकजड़या द्वारा सत्याजपत की िाएगी और रजिस्ट्टर में नोट की िाएगी और लेखा-प्रमुख द्वारा अप्रयुक्त प्राजप्तयों के अजतिेष, िारी रसीिी पुजस्ट्तका आदि को वषच में कम से कम िो बार सत्याजपत और साक्षयांदकत दकया िाएगा।
(3) रािस्ट्व जवभाग के स्ट्टाफ को तब तक प्राजप्त पुजस्ट्तकाएं िारी निीं की िाएगंी िबतक दक इसके जलए तत्काल प्रयोग की आवश्यकता न िो और पुस्ट्तकें क्रमानुसार िारी की िाएंगी और दकसी व्यजक्त जविषे को तब तक नई पुस्ट्तकें िारी निीं की िाएंगी िब तक दक वि पिल ेिारी की गई पुस्ट्तकों को पूरा करके वापस न कर िे।
(4) प्राजप्त वाउचरों का प्रत्येक सेट क्रमानुसार व्यवजस्ट्थत दकया िाएगा, मिबूती से बांधा िाएगा और रोकजड़या की सुरजक्षत अजभरक्षा में रखा िाएगा।
48. चके बकुों पर जनयतं्रणः- (1) चेक बुक िमेिा ताल-ेचाबी में लेखा-प्रमुख की अजभरक्षा में रखी िाएंगी। वि िब कायचभार मुक्त िोगा, चेकों की सिी संख्या के जलए कायचभार ग्रािी अजधकारी से जलजखत में पावती लगेा। [भाग II—खण् ड 4] भारत का रािपत्र : असाधारण 17
(2) लेखा-प्रमुख द्वारा प्रत्येक चेक बुक में दिए गए चेकों की संख्या सजित चेक बुकों का स्ट्टॉक रखा िाएगा और लेखा- प्रमुख द्वारा प्रत्येक िारी की गई चेक बुक का कथन चेक नम्पबर, िारी करने की तारीख आदि सजित ििच और प्रमाजणत दकया िाएगा।
49. चके िारी करनाः- (1) उपयोग की िा रिी चेक बुक रोकजड़या को चेक जलखने के जलए िी िा सकती ि।ै
(2) दकसी चेक पर सामान्द्यत: तब तक िस्ट्ताक्षर निीं दकए िाएंगे िब तक भुगतान पान ेवाल ेव्यजक्त को तत्काल िेन े की आवश्यकता न िो और असाधारण पठरजस्ट्थजतयों को छोड़कर कायाचलय में िस्ट्ताक्षठरत चेक निीं रखे िाएंगे, प्रत्येक मामले में इसे ििच दकया िाएगा।
(3) प्रत्येक चेक जिन्द्िी या अंग्रिेी में आिठरत दकया िाएगा और उस व्यजक्त के पक्ष में िोगा जिसे राजि का भुगतान दकया िाना ि ैऔर बीस ििार रूपए से अजधक की रकम के सभी चेकों पर जनरपवाि रूप से “पा/खाता” की मुिर लगा िी िाएगी;
परंतु वेतन चेकों के संबंध में एक ििार रूपए से अजधक की राजि वाले सभी चेकों पर “पा/खाता” की मुिर लगा िी िाएगी और यि सुजनजश्चत दकया िाएगा दक कोई भी आिाता अपने पक्ष में क्रास दकए जबना चेक प्राप्त करन े के जलए इस ेव्यविार न बना लें।
(4) लेखा-प्रमुख या मुख्य कायचपालक अजधकारी, यथाजस्ट्थजत, द्वारा जबल को जवजधवत प्राजधकृत, पाठरत और भुगतान वाउचर तैयार दकए जबना कोई चेक िारी निीं दकया िाएगा।
50. प्राजप्तयों और वाउचरों की िसूरी प्रजत िारी करनाः- (1) ििां रसीिें प्ररूप15एम में मनै्द्यअुली िारी की िाती िैं, मुख्य कायचपालक अजधकारी या कोई अन्द्य अजधकारी इस तकच पर प्राजप्तयों की िसूरी प्रजत या प्रजतयां िारी निीं करेगा दक मूल प्राजप्तयों खो गई िैं और यदि ऐसे दकसी िस्ट्तावेि की आवश्यकता िजृिगोचर िोती ि ैतो एक प्रमाण-प्रत्र दिया िा सकता ि ैदक जवजनर्िचि दिन, जनजश्चत खाते में जनजश्चत राजि दकसी जनजश्चत व्यजक्त से प्राप्त की गई थी।
(2) ििां कम्प्यूटर द्वारा तैयार रसीिें िारी की िाती िैं, भुगतानकताच द्वारा जलजखत आवेिन पर यि िावा करने पर दक मूल खो गया ि ैऔर प्राजधकृत अजधकारी कम्प्यूटर प्रणाली के माध्यम से प्राजप्त की िसूरी प्रजत िारी कर सकता ि ै और इस पर विी संख्या िोगी िो मलू पर थी। कम्प्यूटर द्वारा बनाई गई इस प्रकार की प्राजप्त की िसूरी प्रजत पर “िसूरी प्रजत” िब्ि जलखा िाएगा।
(3) यदि चेक जबल या िमा भुगतान वाउचर या दकसी अन्द्य भुगतान के जलए स्ट्वीकृत अन्द्य वाउचर के जलए िारी दकया िाता ि ैऔर यदि उक्त चेक के खो िाने, नि िो िान ेकी सूचना प्राप्त िोती ि ैतो प्राजधकृत अजधकारी को अपन े िस्ट्ताक्षर से तरंुत बैंक को जलजखत में चेक का भुगतान रोकन ेकी सूचना िनेी िोगी जिससे उक्त चेक आिठरत दकया गया था। मुख्य कायचपालकअजधकारी को भी ऐसे ‘भुगतानरोकने की सूचना’ की एक प्रजत िल्ि से िल्ि (सूचनाथच) सौंप िी िाएगी।
(4) केवल जनम्नजलजखत जस्ट्थजतयों के पूरा िोने पर िी ऐसे भुगतान के जलए नया चेक िारी दकया िाना चाजिए, अथाचतः- (क) पानेवाले न ेबोडच के पक्ष में क्षजतपूर्तच बांड िारी दकया ि,ै जिसमें वि स्ट्वीकार करता ि ैदक ‘यदि यि चेक भुनाया िाता ि ैतो वि चेक राजि के जलए व्यजक्तगत रूप से उत्तरिायी िोगा।‘ (ख) लेखा-प्रमुख ने पुजि की ि ैदक चेक बोडच की ओर से िारी दकया गया था। (ग) ‘भुगतान रोकन’े की सूचना सुपिुचगी के जलए बैंक से पावती की प्राजप्त की तारीख से कम से कम 7 दिन बीत गए िों। (घ) बैंक ने पावती िारी की ि ैदक उक्त चेक का भुगतान आि तक निीं दकया गया ि।ै
51. चके को रद्द करनाः- (1) िब दकसी िस्ट्ताक्षठरत चेक के खो िाने, नि िो िाने, कालातीत िोने की सूचना प्राप्त िोती ि ैया अन्द्य दकसी कारण से रद्द कर दिया िाता ि ैऔर इसके भुगतान की प्रजवजि पिले िी ििच कर िी गई ि ैतो भुगतान की ऐसी प्रजवजि को लखेा-प्रमुख के िस्ट्ताक्षर से बिला िा सकता ि ैऔर मलू चेक िारी करने के जलए िारी 18 THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY [PART II—SEC. 4] भुगतान वाउचर के सामने वाल ेभाग पर मलू चेक का नम्पबर, चेक रद्द करने की तारीख और यदि कोई नया चेक िारी दकया गया िो तो उसका नम्पबर और तारीख िी िाएगी।
(2) िब कोई िस्ट्ताक्षठरत चेक रद्द दकया िाता ि ैतो आिरण अजधकारी द्वारा इसे जवरूजपत कर दिया िाएगा, “रद्द” की मुिर लगा िी िाएगी और चेक पर आिरण अजधकारी के आद्याक्षर के अधीन लाल स्ट्यािी से रद्द दकए िाने का कारण जलख दिया िाएगा और जबल या वाउचर पर भुगतान आिेि को आर-पार काट दिया िाएगा।
(3) संबंजधत जवभाग को चेक रद्द दकए िाने के कारणों की सूचना िी िाएगी िो इसके द्वारा रखे गए अजभलेख में इसे नोट करेगा।
52. रद्द चकेों का जनपटानः- (1) िब तक लेखांकन परीक्षा न िो िाए रद्द चेक, खाता प्रमुख की अजभरक्षा में ताल-े चाबी में सुरजक्षत रखे िाएंगे और दफर लेखा-प्रमुख द्वारा मुख्य कायचपालक अजधकारी की उपजस्ट्थजत में इन्द्िें नि कर दिया िाएगा और वि संबंजधत चेक को नि करने को प्रमाजणत करेगा।
(2) तत्पश्चात नि दकए गए चेक का कथन तैयार दकया िाएगा, जिसमें आिठरत की िाने वाली बैंक िाखा, चेक का नम्पबर, रद्द करन ेके कारण आदि ब्यौरे दिए िाएंगे।
53. स्ट्टाम्पप खाता और प्रषेण रजिस्ट्टरः- स्ट्टाम्पप को खरीिन ेऔर िारी करन ेको ििाचत ेस्ट्टाम्पप खाता को प्ररूप16एम में रखा िाएगा और प्रत्येक सप्ताि के अंत में, प्रत्येक वगच के िाथ में अजतिेष बची स्ट्टाम्पपों का कथन, अभ्युजक्त वाल े स्ट्तंभ में ििाचया िाएगा।
(2) प्राजधकृत अजधकारी द्वारा माि में एक बार अजतिेष बची स्ट्टाम्पपों का सत्यापन दकया िाएगा और प्राजधकृत अजधकारी अपने िस्ट्ताक्षर के तित रजिस्ट्टर में उक्त सत्यापन का ठट्पण तैयार करेगा। अध्याय VII आय का लखेा
54. प्रोद्भवन आधार पर बोडच की आय का लखेाकंनः- रािस्ट्व की सभी मिों को प्रोद्भवन आधार पर आय के रूप में मान्द्यता िी िाएगी और ििच दकया िाएगा िब, (क) राजि प्राप्त िो चुकी ि,ै या (ख) सक्षम प्राजधकारी द्वारा राजि प्रा्य और अनुमोदित ि,ै और (ग) इसकी वसूली के बारे में कोई मित्वपूणच अजनजश्चतता जवद्यमाननिीं ि।ै इनमें से िो भी पिल ेिो।